NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
चलने से लेकर कुचलने तक : किस्सा गाड़ी का
ये क़िस्सा सिर्फ गाड़ी का नहीं हैं, बल्कि इन्हीं गाड़ियों में ‘चलने’ वाली इस देश की सरकार और न्याय व्यवस्था का भी किस्सा है, ये वही गाड़ियों हैं जो अपने पीछे धूल की जगह सवाल छोड़ गईं हैं।
वसीम अकरम त्यागी
10 Oct 2021
Lakhimpur massacre

भारत में गाड़ियों के बड़े किस्से हैं, सिने जगत में गाड़ियों पर कई गीत भी फिल्माए गए हैं। 1958 में “चलती का नाम गाड़ी” मूवी आई थी। किसी का कारोबार सही चलने लगे तो लोग कहते हैं कि फलां की गाड़ी ठीक चल रही है, किसी का कारोबार बिगड़ जाए तब लोग कहते हैं कि फलां की गाड़ी से पटरी से उतर गई। हिंदी भाषी भारत में अक्सर गाड़ियों पर एक ‘शेर’ लिखा रहता है-

चलती है गाड़ी उड़ती है धूल,

जलते हैं दुश्मन खिलते हैं फूल।

इन दिनों एक गाड़ी भारत में चर्चा का केंद्र बनी हुई है। गाड़ी का नाम ‘थार’ है, गाड़ी इस देश के गृह राज्यमंत्री के पुत्र की है। यह वही गाड़ी है जिससे यूपी के लखीमपुर के तिकुनिया में तीन अक्टूबर को किसानों को कुचला गया है, इसमें कई लोगों की जान गई। चूंकि यह गाड़ी गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के ‘लाडले’ की है इसलिये इस गाड़ी को यह हक़ है कि वह अपनी मर्ज़ी से चल सकती है, किसी पर भी चढ़ाई जा सकती है, किसी को भी कुचल सकती है, किसी की भी जान ले सकती है। क्या होगा? हद से हद थानेदार एक रिपोर्ट लिखेगा, जरूरत पड़ी तो ‘पूछ-ताछ’ के नाम पर मंत्री के बेटे को ‘निमंत्रण’ भेजकर कहेगा कि हुजूर आइए! आपके साथ कप चाय पीनी है। इस पर मंत्री महोदय के बेटे की मर्ज़ी है कि वह आए या न आए, तब एक और निमंत्रण भेजा जाएगा।

बहरहाल! जैसा कि ऊपर बताया गया कि भारत में गाड़ियों के बहुत किस्से हैं। इसी कड़ी में एक किस्सा भाजपा सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर की गाड़ी का भी है। लेकिन यह ‘थार’ नहीं बाइक है। दरअस्ल महाराष्ट्र के मालेगांव में 2008 में बम धमाके हुए इन धमाकों में पहली बार ‘लीक’ से हटकर हिंदुवादी संगठनों के लोगों का नाम सामने आया। मालेगांव ब्लास्ट में नमाज़ पढ़कर लौट रहे कई नमाज़ी मारे गए थे और कई घायल हुए थे। इन धमाकों के बाद, हमेशा की तरह, सुरक्षा एजेंसियों ने मुसलमान युवकों को गिरफ्तार किया। महाराष्ट्र के आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) के तत्कालीन प्रमुख हेमंत करकरे ने जब इस घटना की बारीकी से जांच की तो यह सामने आया कि धमाकों के लिए इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर की थी। आगे की जांच में इन धमाकों में स्वामी दयानंद पांडे, सेवानिवृत्त मेजर उपाध्याय, रामजी कालसांगरा और स्वामी असीमानंद की संलिप्तता भी प्रकट हुई। ये सभी अतिवादी हिंदू दक्षिणपंथी थे।

जब हेमंत करकरे इस मामले की जांच कर रहे थे और आए दिन इसमें हिंदुओं के शामिल होने की बात सामने आ रही थी तब बाल ठाकरे ने ‘‘सामना’’ में लिखा, अपने लेख में उन्होंने करकरे पर भड़ास निकालते हुए लिखा कि ‘‘हम करकरे के मुंह पर थूकते हैं’’। उस वक्त हमारे “प्रधानसेवक” गुजरात के मुख्यमंत्री हुआ करते थे, उन्होंने करकरे को ‘‘देशद्रोही’’ बताया था। लालकृष्ण आडवाणी ने भी करकके को फटकारा। इसी दौरान मुंबई पर 26/11 हमाल हुआ, इस हमले में हेमंत करकरे शहीद हो गए। नरेंद्र मोदी, जिन्होंने करकरे को देशद्रोही बताया था, तत्काल मुंबई पहुंचे और उनकी पत्नी को एक करोड़ रूपए का चेक भेंट करने की पेशकश की। करकरे की पत्नी ने इस राशि को स्वीकार करने से इंकार कर दिया। करकरे की शहादत की बाद आतंकवाद के आरोप में ‘हिंदुवादियों’ की गिरफ्तारी, खुलासे का मामला भी लगभग शांत हो गया।

एनआईए ने 13 मई, 2016 को अदालत में एक नया आरोप-पत्र दाखिल कर प्रज्ञा सिंह ठाकुर को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया और कर्नल पुरोहित व अन्यों पर लगे गंभीर आरोप हटा लिए। इसके बाद क्या हुआ! वह सबके सामने है, 2019 के आम चुनाव में भाजपा ने साध्वी को प्रत्याशी बनाया, साध्वी ने दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह को भारी मतों से चुनाव हराया और भारतीय संसद की सदस्य बन गईं। माननीय बनने के बाद साध्वी ने गोडसे का महिमामंडन किया, करकरे की शहादत को अपना “श्राप” देना बताया, और इन दिनों देशभक्ति के सर्टिफिकेट बांटती है। ध्यान रहे मालेगांव ब्लास्ट में जो बाइक इस्तेमाल की गई थी, वह साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर की थी।

अब एक और गाड़ी का किस्सा सुनिए। यह किस्सा बाइक का नहीं बल्कि कार का है। रूबीना की कार! रूबीना महाराष्ट्र के पुणे की यरवदा सेंट्रल जेल (लेडीज विंग) में उम्र क़ैद की सज़ा काट रही हैं। रूबीना का गुनाह यह है कि वे उस कार की मालकिन थीं जिसका इस्तेमाल मुंबई में 1993 में हुए सीरियल ब्लास्ट के लिए विस्फोटकों को ढोने के लिए किया गया था। यहां यह भी बताना जरूरी है कि रूबीना उस कार को चला नहीं रही थीं। ये क़िस्सा सिर्फ गाड़ी का नहीं हैं, बल्कि इन्हीं गाड़ियों में ‘चलने’ वाली इस देश की सरकार और न्याय व्यवस्था का भी किस्सा है, ये वही गाड़ियों हैं जो अपने पीछे धूल की जगह सवाल छोड़ गईं हैं। रूबीना की गाड़ी का इस्तेमाल मुंबई ब्लास्ट में हुआ, रूबीना उम्रक़ैद की सज़ा काट रही है, साध्वी की मोटरसाइकिल का इस्तेमाल मालेगांव ब्लास्ट में हुआ साध्वी संसद में बैठी है। अपनी-अपनी क़िस्मत है! अपना-अपना नाम है, नाम से याद आया, नाम का ही तो सारा खेल है। इस लेख में आपको दो गाड़ियों पर आए अदालत के ‘फैसले’ बताए गए हैं, तीसरी गाड़ी का किस्सा अदालत तक पहुंचेगा भी या नहीं, इसका जवाब भविष्य के गर्भ में छिपा है। फिलहाल गाड़ियों पर लिखी एक ‘तुकबंदी’ याद आ रही है ‘दम तो पास कर, वरना बर्दाश्त कर’।

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं। विचार व्यक्तिगत हैं)

Lakhimpur Kheri Update
Lakhimpur Kheri
farmers protest
Attack on Farmers
Union Minister Ashish Mishra
kisan andolan
Indian Farmers Union
Samyukt Kisan Morcha
rakesh tikait
UP police
Yogi Adityanath

Related Stories

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

बेंगलुरु में किसान नेता राकेश टिकैत पर काली स्याही फेंकी गयी

ग्राउंड रिपोर्ट: चंदौली पुलिस की बर्बरता की शिकार निशा यादव की मौत का हिसाब मांग रहे जनवादी संगठन

यूपी में  पुरानी पेंशन बहाली व अन्य मांगों को लेकर राज्य कर्मचारियों का प्रदर्शन

UPSI भर्ती: 15-15 लाख में दरोगा बनने की स्कीम का ऐसे हो गया पर्दाफ़ाश

विशेष: कौन लौटाएगा अब्दुल सुब्हान के आठ साल, कौन लौटाएगा वो पहली सी ज़िंदगी

क्या वाकई 'यूपी पुलिस दबिश देने नहीं, बल्कि दबंगई दिखाने जाती है'?

यूपी: बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था के बीच करोड़ों की दवाएं बेकार, कौन है ज़िम्मेदार?

उत्तर प्रदेश राज्यसभा चुनाव का समीकरण


बाकी खबरें

  • cartoon
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    ख़बर भी-नज़र भी: …लीजिए छापेमारी के साथ यूपी चुनाव बाक़ायदा शुरू!
    18 Dec 2021
    आयकर विभाग की टीम ने आज सपा नेताओं के घर और कैंप कार्यालयों पर छापेमारी की है। इसपर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का कहना है कि “भाजपा का हार का डर जितना बढ़ता जायेगा, विपक्षियों पर छापों का दौर भी उतना…
  • sudan
    पवन कुलकर्णी
    सूडान के दारफुर क्षेत्र में हिंसा के चलते 83,000 से अधिक विस्थापित: ओसीएचए 
    18 Dec 2021
    सूडान की राजधानी खार्तूम, खार्तूम नार्थ, ओम्डुरमैन सहित देशभर के कई राज्यों के कई अन्य शहरों में गुरूवार 16 दिसंबर को विरोध प्रदर्शनों के दौरान “दारफुर का खून बहाना बंद करो” और “सभी शहर दारफुर हैं”…
  • air india
    भाषा
    पायलटों की सेवाएं समाप्त करने का निर्णय खारिज किये जाने के खिलाफ एअर इंडिया की अर्जी अदालत ने ठुकराई
    18 Dec 2021
    अदालत ने कहा, ‘‘सरकार और उसकी इकाई एक आदर्श नियोक्ता के रूप में कार्य करने के लिए बाध्य हैं और इसलिए, उसे पायलटों को ऐसे समय संगठन (एअर इंडिया) की सेवा करने के अधिकार से वंचित करते नहीं देखा जा सकता…
  • Goa Legislative Assembly
    राज कुमार
    गोवा चुनाव 2022: राजनीतिक हलचल पर एक नज़र
    18 Dec 2021
    स्मरण रहे कि भाजपा ने जिन दो पार्टियों के बल पर सरकार बनाई थी वो दोनों ही पार्टियां भाजपा का साथ छोड़ चुकी है। गोवा फॉरवर्ड पार्टी कांग्रेस का समर्थन कर रही है तो महाराष्ट्रवादी गोमंतक पार्टी तृणमूल…
  • Nuh
    सबरंग इंडिया
    नूंह के रोहिंग्या कैंप में लगी भीषण आग का क्या कारण है?
    18 Dec 2021
    हरियाणा के नूंह में लगी आग में रोहिंग्याओं की 32 झुग्गियां जलकर खाक हो गईं। उत्तर भारत के रोहिंग्या शरणार्थी शिविर में इस साल इस तरह की यह तीसरी आग है
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License