NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
करनाल हिंसा के ख़िलाफ़ वकीलों का सुप्रीम कोर्ट से लेकर हरियाणा भवन तक रोष मार्च
वकील यूनियन ने मांग की है कि एसडीएम करनाल और पुलिस के ज़िम्मेदार अधिकारियों को अवैध व अन्यायपूर्ण लाठीचार्ज के लिए आगे की सेवा से निलंबित किया जाए और उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।
न्यूजक्लिक रिपोर्ट
02 Sep 2021
करनाल हिंसा के ख़िलाफ़ वकीलों का सुप्रीम कोर्ट से लेकर हरियाणा भवन तक रोष मार्च

हरियाणा सरकार के किसान विरोधी और बर्बर व्यवहार की हर तरफ से कड़ी निंदा हो रही है। आज यानी गुरुवार को देश की राजधानी में वकीलों ने किसानों के साथ एकजुटता दिखाते हुए और हरियाणा सरकार के ख़िलाफ़ एक विरोध  मार्च  किया।  इसका आह्वान ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन (ए आई एल यू) ने किया था। ये मार्च  सुप्रीम कोर्ट से हरियाणा भवन तक  निकाला गया।   इस दौरान वहां भारी पुलिस बल मौजूद था। उसने वकीलों की पूरी घेराबंदी कर रखी थी और इसे घेरे में ये पूरा मार्च सम्पन्न हुआ। 

वकीलों  ने 28 अगस्त को हरियाणा के करनाल में शांतिपूर्ण ढंग से किसानों के प्रदर्शन पर क्रूर पुलिस लाठीचार्ज और बर्बर हिंसा की  निंदा और विरोध प्रदर्शन किया है। इसके बाद इनका एक प्रतिनिधि मंडल हरियाणा भवन के अधिकारियों से मिला और एक मांग पत्र सौंपा। 

यूनियन के नेता सुनील ने न्यूज़क्लिक से कहा कि सरकार के आदेश पर जिस तरह से किसानों पर हमला किया गया, वो पूरी तरह से गलत है। इसलिए हमने ये विरोध प्रदर्शन किया है। 

करनाल के पूरे घटनाक्रम में वहां के ड्यूटी मजिस्ट्रेट और करनाल के एसडीएम आयुश सिन्हा का एक वीडियो प्रत्यक्षदर्शियों ने बना लिया और बाद में उसे सोशल मीडिया पर डाला जिसके बाद से ही हरियाणा सरकार और प्रशासन पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। उस वीडियो में  आयुष वहां मौजूद पुलिस को कह रहे हैं कि “उठा-उठाकर मारना पीछे सबको। हम उन्हें सुरक्षा घेरे को लांघने नहीं देंगे। हमारे पास पर्याप्त सुरक्षाबल है। हम दो दिनों से सोए नहीं हैं। पर आप लोग यहां थोड़ी नींद लेकर आए हैं, मेरे पास एक भी बंदा निकलकर नहीं आना चाहिए। अगर कोई आए, तो सर फूटा हुआ होना चाहिए उसका। क्लियर है न आपको?” 

इसी को लेकर वकीलों ने कहा की ये पूरी तरह गैरकानूनी और आपरधिक कृत्य है।  

उनके मुताबिक़ पुलिस के लाठियां खाने  से किसान सुशील काजल के सिर पर गंभीर चोटें आईं हैं। पुलिस द्वारा उन्हें पर्याप्त चिकित्सा सहायता भी नहीं दी गई । पुलिस की क्रूर लाठीचार्ज में भारी संख्या में किसान घायल सूचना मिली है।  पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारी किसानों को बिना किसी चेतावनी और बिना किसी उकसावे के लाठीचार्ज  किया गया। यह अत्यधिक गैरकानूनी और अन्यायपूर्ण है; मानवाधिकारों के उल्लंघन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार पर एक हमला है।  

एआईएलयू  ने कहा कि आरएसएस के विचारधारा वाली सरकार देश में आंदोलन और विरोध की आवाज़ दबाने के लिए अपने विरोधियों को खालिस्तानी, अतिवादी, आतंकवादी, राष्ट्र विरोधी आदि का टैग लगाती है।  इस संबंध में कई व्यक्तियों, कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों और छात्रों को अवैध रूप से देशद्रोह के आरोपों और ड्रैकोनियन कानूनों जैसे अन्य प्रावधानों के साथ जेलों में बंद किया है। क्योंकि उन्होंने सरकार के खिलाफ असंतोष और किसानों के साथ एकजुटता व्यक्त की थी। अब ऐसा लगता है कि शासन इस परियोजना में विफल रहा है, वे किसानों के शांतिपूर्ण आंदोलन को दबाने के लिए नए तरीकों का सहारा ले रहे हैं।

वकील यूनियन ने कहा हम मांग करते हैं कि एसडीएम करनाल और पुलिस के जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों को अवैध व अन्यायपूर्ण लाठीचार्ज के लिए आगे की सेवा से निलंबित किया जाए और उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।

मृत पीड़ित किसान सुशील काजल के परिवार को पर्याप्त रूप से मुआवजा दिया जाएगा। पुलिस लाठीचार्ज से घायल सभी किसानों को भी मुआवजा दिया जाना चाहिए।

एआईएलयू  ने किसानों के आंदोलन के कारण के साथ अपनी एकजुटता को पुनर्स्थापित किया और तीन फार्म कानूनों को रद्द करने की मांग की ।

हालाँकि सरकार अपने बचाव में एक तर्क देने की कोशिश कर रही है कि किसानों ने पहले पुलिस बल पर हमला किया। जबकि किसान संगठनों ने कई बार स्पष्ट किया पुलिस ने बिना किसी उकसावे के उन पर बर्बर लाठी चार्च किया था।  वैसे भी जब से किसान आंदोलन शुरू हुआ है तब से किसानों का सबसे अधिक टकराव अगर किसी सरकार से हुआ है बता वो है हरियाणा की खट्टर सरकार से हुआ है। वे पहले दिन से ही किसानों के आंदोलन को रोकने का प्रयास कर रही है।  हालाँकि उसका हर प्रयास विफल रहा है और हरियाणा के साथ ही पूरे देश में किसान आंदोलन का विस्तार हो रहा है।   

गौरतलब है कि शनिवार को करनाल शहर में भाजपा की संगठनात्मक बैठक थी, जिसमें मुख्यमंत्री समेत प्रदेश के कई नेता शामिल होने थे। इसके चलते करनाल पुलिस और प्रशासन ने शहर में एंट्री के सभी प्वॉइंट बंद कर रखे थे। इसलिए किसान मीटिंग और भाजपा नेताओं का विरोध करने के लिए शहर के अंदर नहीं घुस पाए। किसान रेलवे रोड नहीं पहुंच पाए और उन्होंने नेशनल हाईवे 44 पर बसताड़ा टोल प्लाजा पर जाम लगा दिया। इसके बाद दोपहर में  पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया जिसमें कुछ किसान घायल हो गए।

Lawyers March
Supreme Court
Haryana Bhawan
Karnal Police Violence
Karnal
Karnal violence
Lawyers Union

Related Stories

लंबे संघर्ष के बाद आंगनवाड़ी कार्यकर्ता व सहायक को मिला ग्रेच्युटी का हक़, यूनियन ने बताया ऐतिहासिक निर्णय

जानिए: अस्पताल छोड़कर सड़कों पर क्यों उतर आए भारतीय डॉक्टर्स?

सुप्रीम कोर्ट को दिखाने के लिए बैरिकेड हटा रही है सरकार: संयुक्त किसान मोर्चा

बाहरी साज़िशों और अंदरूनी चुनौतियों से जूझता किसान आंदोलन अपनी शोकांतिका (obituary) लिखने वालों को फिर निराश करेगा

लखीमपुर खीरी : किसान-आंदोलन की यात्रा का अहम मोड़

अगर मामला कोर्ट में है, तब क्या उसके विरोध का अधिकार खत्म हो जाता है? 

कार्टून क्लिक: किसानों का गला किसने घोंटा!

करनाल में तीसरे दिन भी किसानों का प्रदर्शन जारी, SDM पर कार्रवाई की मांग

किसानों का करनाल लघु सचिवालय घेराव दूसरे दिन भी जारी

करनाल : बेनतीजा रही बातचीत, किसानों ने सचिवालय घेरा


बाकी खबरें

  • street
    दमयन्ती धर
    गुजरात: नगर निगमों ने मांसाहारी खाद्य पदार्थ बेचने वाले ठेलों को प्रतिबंधित किया, हॉकर्स पहुंचे हाई कोर्ट
    06 Dec 2021
    अकेले अहमदाबाद में ही 6000 से ज्यादा, ठेले पर मांसाहारी खाद्य पदार्थ बेचने वाले विक्रेता हैं। इनमें से ज्यादातर उत्तर प्रदेश, बिहार और ओडिशा से आए लोग हैं, जिनका परिवार इस आय पर निर्भर है।
  • up
    सोनिया यादव
    यूपी: 69 हज़ार शिक्षक भर्ती मामले में युवाओं पर लाठीचार्ज, लेकिन घोटाले की जवाबदेही किसकी?
    06 Dec 2021
    69 हज़ार शिक्षक भर्ती का मामला पिछले तीन सालों से अधर में लटका हुआ है। निराश अभ्यर्थियों ने जब लखनऊ में धांधली और घोटाले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया, तो पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज कर दिया।
  • Bihar
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहारः 204 विद्यालयों के पास नहीं है अपना भवन, ज़मीन पर बैठकर बच्चे करते हैं पढ़ाई
    06 Dec 2021
    बिहार के वैशाली ज़िले में ऐसे 204 विद्यालय हैं जिनके पास अपना भवन नहीं है। कुछ जगहों पर बच्चों को पेड़ के पास पढ़ाया जा रहा है तो कहीं सामुदायिक भवन में कक्षाएँ चल रही हैं।
  • Babri Demolition
    सुमन गुप्ता
    6 दिसंबर महज़ एक तारीख़ रह गई : अयोध्या के चेहरे पर नहीं कोई शिकन
    06 Dec 2021
    याद उन्हें है, जिन्हें लगता है कि इस दिन 16वीं सदी की एक मस्जिद ताक़त के बल पर ढहा दी गई और कोई दंडित नहीं हुआ या फिर उन्हें जिन्हें यह एहसास है कि यह महज़ एक भवन को ढहाना नहीं था...।
  • Babri Masjid
    न्यूज़क्लिक टीम
    बाबरी विध्वंस की पूरी कहानी, क्या हुआ, कब हुआ, क्यों हुआ!
    06 Dec 2021
    6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद को ढहा दिया गया...भारत के लोकतंत्र के इतिहास में इसे एक बुरे दिन के तौर पर याद किया जाता है। जिस दिन सरेआम देश के संविधान की धज्जियां उड़ा दी गईं। हालांकि तब…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License