NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
केरल स्थानीय निकाय चुनावों में वाम मोर्चे को बड़ी कामयाबी मिली
पिछले 20 वर्षों में पहली बार सत्तारूढ़ मोर्चा ने राज्य में स्थानीय निकाय चुनावों में भारी जीत हासिल की है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
17 Dec 2020
केरल

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के नेतृत्व वाले लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) ने केरल में हाल ही में संपन्न स्थानीय निकाय चुनावों में प्रचंड जीत दर्ज की है। अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सेमीफाइनल के रूप में माने जाने वाले इस स्थानीय चुनावों में एलडीएफ और कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) के बीच कांटे का मुकाबला देखा गया।

सत्तारूढ़ एलडीएफ का राज्य निर्वाचन आयोग के नवीनतम अपडेट के अनुसार कुल 941 में से 514 ग्राम पंचायतों में मजबूत स्थिति में है। यूडीएफ 376 ग्राम पंचायतों में आगे है। भाजपा के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) पूरे राज्य में केवल 22 ग्राम पंचायतों में आगे है।

इसी तरह, ब्लॉक पंचायतों, जिला पंचायतों और निगमों में एलडीएफ को स्पष्ट बढ़त है, जबकि, यूडीएफ को राज्य भर की नगरपालिकाओं में बढ़त मिली है। छह निगमों, 941 ग्राम पंचायतों, 14 जिला पंचायतों और 87 नगर पालिकाओं सहित 1,200 स्थानीय स्व-शासन निकायों में कुल 21,893 वार्ड हैं जहां 8, 10 और 14 दिसंबर को तीन चरणों में चुनावों में हुए थे।

2020 और 2015 के चुनाव परिणामों की तुलना से पता चलता है कि एलडीएफ अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखने में सफल रहा है। केरल में हर वैकल्पिक चुनावों में यूडीएफ और एलडीएफ का चयन करने का इतिहास है, चाहे वह स्थानीय निकाय चुनाव हों या विधानसभा चुनाव। एलडीएफ सत्तारूढ़ पार्टी होने के साथ यूडीएफ 2020 के चुनावों में सत्ता-विरोधी कारणों के साथ स्पष्ट बढ़त की उम्मीद कर रहा था। हालांकि, पिछले 20 वर्षों में पहली बार सत्तारूढ़ मोर्चे ने राज्य में स्थानीय निकाय चुनावों में भारी जीत हासिल की है।

स्थानीय निकाय चुनाव परिणाम 2020 और 2015 की तुलना, स्रोत: राज्य चुनाव आयोग

परिणामों के वार्ड-वार आंकड़ों से पता चलता है कि एलडीएफ ने कुल 15,962 में से 7,258 ग्राम पंचायत वार्ड जीते हैं। यूडीएफ ने 5,848 वार्ड सुरक्षित किए, एनडीए ने 1,175 वार्ड जीते और अन्य को 1,603 मिले।


वार्ड / डिविजन के अनुसार परिणाम

एनडीए और यूडीएफ के चुनाव अभियानों ने इस बार तिरुवनंतपुरम गोल्ड स्मगलिंग मामले पर ध्यान केंद्रित किया। हालांकि, एलडीएफ ने राज्य में अपने विकास कार्यों पर ध्यान दिया था। यूडीएफ और एनडीए ने राज्य सरकार की कई विकासात्मक परियोजनाओं को पटरी से उतारने का प्रयास किया, जिसमें बहुत महत्वाकांक्षी हाउसिंग प्रोजेक्ट लाइफ मिशन भी शामिल है, जिसका उद्देश्य सभी के लिए सुरक्षित आवास प्रदान करना है।

तिरुवनंतपुरम गोल्ड तस्करी मामले के बाद केंद्रीय जांच एजेंसियां राज्य सरकार को परेशान करने की कोशिश करती रही हैं। यूडीएफ और बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए दोनों ने इसे पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाली राज्य सरकार को नुकसान पहुंचाने के लिए एक सुनहरा अवसर के रूप में लिया है। हालांकि, चुनाव परिणाम बताते हैं कि भाजपा राज्य में आगे नहीं बढ़ सकी।

तिरुवनंतपुरम निगम में जहां मतदान से पहले एलडीएफ, यूडीएफ और एनडीए के बीच एक करीबी त्रिकोणीय लड़ाई सामने आई थी वहां वाम मोर्चा ने स्पष्ट जीत दर्ज हासिल की है। तिरुवनंतपुरम निगम में 100 डिवीजनों में से एलडीएफ ने 51 सीटें हासिल की हैं, एनडीए ने 34 डिवीजन, यूडीएफ ने 10 और अन्य ने 5 सीटें हासिल की हैं। 2015 में, एलडीएफ ने तिरुवनंतपुरम निगम में 42 वार्ड जीते थे। बीजेपी गठबंधन ने तब भी 34 सीटें जीती थीं।

2020 के स्थानीय चुनावों में एलडीएफ को यूडीएफ से मजबूत स्थिति में देखा गया है। पाला नगर पालिका, जो अपने गठन के बाद से यूडीएफ का समर्थन करती है, वहां वाम मोर्चे ने 26 वार्डों में से 17 सीटों पर जीत हासिल की है। यूडीएफ आठ सीटें जीतने में कामयाब रहा और एक सीट निर्दलीय उम्मीदवार को मिली। पाला को केरल कांग्रेस (मणि) के गढ़ के रूप में जाना जाता है। हालांकि, चुनावों से पहले, केरल कांग्रेस (मणि) के जोस के मणि गुट ने राजनीतिक विवाद के बाद एलडीएफ के साथ गठबंधन किया था।

इस बीच, केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मुल्लापल्ली रामचंद्रन का गढ़ भी लाल हो गया है। कोझिकोड जिले के उनके ब्लॉक पंचायत डिवीजन कल्लामाला को सीपीआई (एम) के एडवोकेट आशीष ने हासिल किया है। कोट्टायम में पल्पली पंचायत जिसे कांग्रेस के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री ओमन चांडी के गढ़ के रूप में जाना जाता है, उसने भी इस बार एलडीएफ उम्मीदवार का समर्थन किया है।

इस लेख को मूल अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें। 

Left Front Bags Massive Victory in Local Body Polls in Kerala

Local Body Elections 2020
Local Body Polls
Kerala Election Results
Left Front Wins Kerala Local Body Elections
ldf vs udf
LDF Government

Related Stories

बिहार पंचायत चुनाव : सत्ता विरोधी प्रत्याशियों पर चल रहा पुलिस प्रशासन का डंडा!

केरल: गड़बड़ियों को रोकने के लिए सीपीआई (एम) की एलडीएफ़ सरकार के कामकाज़ पर होगी कड़ी नज़र

मध्य प्रदेश में स्थानीय निकायों में जनभागीदारी के बहाने पार्टी कार्यकर्ताओं का सत्ता में सीधा भर्ती अभियान!

केरल की वाम सरकार ने महामारी के दौरान ग़रीबों के हित में सही फ़ैसला लिया

केरल में पूर्ण ग़रीबी उन्मूलन की प्रस्तावित योजना लागू होना तय

जंगलराज कहां है? जंगलराज न कहो इस को

ईएमएस स्मृति 2021 और केरल में वाम विकल्प का मूल्यांकन

केरल चुनाव: कांग्रेस-आईयूएमएल-भाजपा गठबंधन पर उठते सवाल

केरल चुनाव : एलडीएफ़ का चुनाव प्रचार जारी, यूडीएफ़ और बीजेपी अभी उम्मीदवार चुनने की प्रक्रिया में

क्या एलडीएफ अपने 2016 के चुनावी वायदे ‘नव केरल’ को पूरा कर पाने में सफल रही है?


बाकी खबरें

  • Chhattisgarh
    रूबी सरकार
    छत्तीसगढ़: भूपेश सरकार से नाराज़ विस्थापित किसानों का सत्याग्रह, कांग्रेस-भाजपा दोनों से नहीं मिला न्याय
    16 Feb 2022
    ‘अपना हक़ लेके रहेंगे, अभी नहीं तो कभी नहीं’ नारे के साथ अन्नदाताओं का डेढ़ महीने से सत्याग्रह’ जारी है।
  • Bappi Lahiri
    आलोक शुक्ला
    बप्पी दा का जाना जैसे संगीत से सोने की चमक का जाना
    16 Feb 2022
    बप्पी लाहिड़ी भले ही खूब सारा सोना पहनने के कारण चर्चित रहे हैं पर सच ये भी है कि वे अपने हरफनमौला संगीत प्रतिभा के कारण संगीत में सोने की चमक जैसे थे जो आज उनके जाने से खत्म हो गई।
  • hum bharat ke log
    वसीम अकरम त्यागी
    हम भारत के लोग: समृद्धि ने बांटा मगर संकट ने किया एक
    16 Feb 2022
    जनवरी 2020 के बाद के कोरोना काल में मानवीय संवेदना और बंधुत्व की इन 5 मिसालों से आप “हम भारत के लोग” की परिभाषा को समझ पाएंगे, किस तरह सांप्रदायिक भाषणों पर ये मानवीय कहानियां भारी पड़ीं।
  • Hijab
    एजाज़ अशरफ़
    हिजाब के विलुप्त होने और असहमति के प्रतीक के रूप में फिर से उभरने की कहानी
    16 Feb 2022
    इस इस्लामिक स्कार्फ़ का कोई भी मतलब उतना स्थायी नहीं है, जितना कि इस लिहाज़ से कि महिलाओं को जब भी इसे पहनने या उतारने के लिए मजबूर किया जाता है, तब-तब वे भड़क उठती हैं।
  • health Department
    एम.ओबैद
    यूपी चुनाव: बीमार पड़ा है जालौन ज़िले का स्वास्थ्य विभाग
    16 Feb 2022
    "स्वास्थ्य सेवा की बात करें तो उत्तर प्रदेश में पिछले पांच सालों में सुधार के नाम पर कुछ भी नहीं हुआ। प्रदेश के जालौन जिले की बात करें तो यहां के जिला अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सक पिछले चार साल से…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License