NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
गोदावरी बाढ़ पीड़ितों के प्रति आंध्र सरकार की बेरुखी के ख़िलाफ़ वाम पार्टियों का प्रतिरोध
पोलावरम परियोजना के कारण विस्थापित हुए एक लाख परिवारों में से कुल 3,922 को अब तक पुनर्वासित किया गया है, जबकि बाक़ी सभी लोग बाढ़ के प्रकोप को झेल रहे हैं।
पृथ्वीराज रूपावत
03 Sep 2020
Translated by महेश कुमार
गोदावरी बाढ़ पीड़ितों के प्रति आंध्र सरकार की बेरुखी के ख़िलाफ़ वाम पार्टियों का प्रतिरोध

हैदराबाद: अगस्त माह में गोदावरी नदी में आई बाढ़ से प्रभावित हुए हजारों परिवारों के लिए मुआवजे और पोलावरम परियोजना से प्रभावित परिवारों के लिए पुनर्वास की मांग को लेकर भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), [सीपीआई (एम)] और इससे संबंधित संगठनों ने आंध्र प्रदेश के पश्चिम और पूर्वी गोदावरी जिलों में बुधवार, 2 सितंबर को कई मंडल स्तर पर धरना और प्रदर्शन किए। 

जैसा कि रिपोर्ट किया गया है, गोदावरी में अगस्त के तीसरे सप्ताह में प्रतिदिन लगभग 22 लाख क्यूसेक बाढ़ का प्रवाह देखा गया। हाल ही में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने वाले वाम दल के नेताओं ने न्यूज़क्लिक को बताया कि बाढ़ के कारण गोदावरी जिलों के 100 गाँवों से लगभग 17,000 परिवारों को सुरक्षा के लिए निकाला गया है।

आंध्र प्रदेश व्यवासया वृथुडारला यूनियन (APVVU), राज्य में कृषि श्रमिकों, सीमांत किसानों और मछुआरों की ट्रेड यूनियन के राज्य सचिव जे॰ बाबजी ने बताया कि, "बाढ़ वाले क्षेत्र में पर्याप्त बचाव और पुनर्वास व्यवस्था न कर पाने के कारण राज्य सरकार की घोर लापरवाही नज़र आती है, इस वजह से परिवारों को सामान्य क्षेत्रों से पहाड़ी की चोटी की तरफ शिफ्ट होने पर मजबूर कर दिया है"।

 उन्होंने बताया कि, "बाढ़ में सैकड़ों घर डूब गए हैं, कई मंडलों के सड़क संपर्क क्षतिग्रस्त हो गए या टूट गए हैं, बिजली की आपूर्ति प्रभावित हुई है, कृषि फसलों को भारी नुकसान हुआ है और यहां तक कि कई गांवों में सरकार की तरफ से रसद पानी/राशन की आपूर्ति नहीं हुई है, जिसके कारण कई परिवार गंभीर स्थिति में हैं। लेकिन सरकार ने मुआवजे के रूप में प्रति परिवार सिर्फ 2,000 रुपये देने की घोषणा की है, जिससे उनकी लापरवाही का पता चलता है। 

1_30.jpg

सीपीआई (एम) के राज्य सचिव पी॰ मधु ने बुधवार को प्रभावित गांवों का दौरा किया और 5 सितंबर को दोनों जिलों में राजस्व कार्यालयों में मुआवजे और पुनर्वास की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन किया।

पश्चिम गोदावरी जिले के ए॰ रवि ने कहा, "ज्यादातर परिवारों के पास अधिकारियों द्वारा सप्लाई किए गया चावल, पकाने का समान, जीएचआर का समान, ईंधन आदि खत्म हो गया है, जो खुद विरोध प्रदर्शन में भाग ले रहे थे।

पोलावरम परियोजना से प्रभावित परिवार जो अपने पुनर्वास के इंतज़ार में हैं, वे हाल की बाढ़ में भी गंभीर रूप से प्रभावित हुए हैं। पी॰ मधु ने बताया कि, "जाहिर है, सरकारें परियोजना को पूरा करने की रुचि रखती हैं, लेकिन प्रभावित परिवारों का उचित पुनर्वास सुनिश्चित किए बिना।"

पोलावाताम से प्रभावित लोग 

पोलावरम परियोजना से प्रभावित परिवार वर्षों से भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 के प्रावधानों के अनुसार उचित मुआवजे की मांग कर रहे हैं।

परियोजना को यूपीए-II सरकार द्वारा एपी पुनर्गठन अधिनियम, 2014 के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर की (केंद्र सरकार द्वारा वहन की जाने वाली पूर्ण लागत) परियोजना घोषित की थी। वाईएसआरसीपी के नेतृत्व में मुख्यमंत्री वाईएस जगनमोहन रेड्डी के नेतृत्व में सरकार के सत्ता में आने के बाद, अधिकारियों ने नई परियोजना के लिए निविदाएं रिवर्स टेंडरिंग प्रक्रिया के तहत मंगाई, और बाद में मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (MEIL) ने इस परियोजना को हासिल कर लिया था।

2_17.jpg

फरवरी, 2019 में, केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय की तकनीकी सलाहकार समिति ने परियोजना के लिए 55,548 करोड़ रुपए की संशोधित लागत के अनुमानों को मंजूरी दी थी।

सरकार के रिकॉर्ड के अनुसार, अब तक, पुनर्वास कार्यों का काम केवल 3.7 प्रतिशत ही पूरा हुआ है।

मार्च में, केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने संसद में कहा था कि पोलावरम परियोजना से प्रभावित 1,05,601 विस्थापित परिवारों में से केवल 3922 परिवारों को ही पुनर्वासित और पुनर्वास किया जा चुका है।

पर्यवेक्षकों का तर्क है कि प्रभावित लोगों में से 50 प्रतिशत आदिवासी हैं जो कोया और कोंडारेड्डी समुदायों से संबंधित हैं। और शेष लगभग 30 प्रतिशत अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ी जातियों से हैं।

बाबजी के अनुसार, "परियोजना प्रभावित परिवारों के लिए बनाई जा रही पुनर्वास कॉलोनियों में बुनियादी सुविधाओं और उन सुविधाओं का अभाव है जिन्हे भूमि अधिग्रहण अधिनियम के अनुसार प्रदान किया जाना था,"। उन्होंने कहा कि सैकड़ों आदिवासियों जो वन अधिकार अधिनियम के तहत सामुदायिक भूमि के टाइटल का अधिकार रखते थे, को भी मुआवजा नहीं दिया गया है।

इस लेख को मूल अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।

Left Protests Against Andhra Govt’s Gross Negligence of People Affected in Godavari Floods

Polavaram
Godavari Districts
Polavaram Project
Rehabilitation
Godavari Floods 2020
CPI(M)
Land Acquisition Act
2013
Forest Rights Act

Related Stories

झारखंड-बिहार : महंगाई के ख़िलाफ़ सभी वाम दलों ने शुरू किया अभियान

केरल उप-चुनाव: एलडीएफ़ की नज़र 100वीं सीट पर, यूडीएफ़ के लिए चुनौती 

वाम दलों का महंगाई और बेरोज़गारी के ख़िलाफ़ कल से 31 मई तक देशव्यापी आंदोलन का आह्वान

सिवनी : 2 आदिवासियों के हत्या में 9 गिरफ़्तार, विपक्ष ने कहा—राजनीतिक दबाव में मुख्य आरोपी अभी तक हैं बाहर

जोधपुर की घटना पर माकपा ने जताई चिंता, गहलोत सरकार से सख़्त कार्रवाई की मांग

तमिलनाडु: ग्राम सभाओं को अब साल में 6 बार करनी होंगी बैठकें, कार्यकर्ताओं ने की जागरूकता की मांग 

अपनी ज़मीन बचाने के लिए संघर्ष करते ईरुला वनवासी, कहा- मरते दम तक लड़ेंगे

हिंदुत्व एजेंडे से उत्पन्न चुनौती का मुकाबला करने को तैयार है वाम: येचुरी

फरीदाबाद : आवास के मामले में सैकड़ों मजदूर परिवारों को हाईकोर्ट से मिली राहत

देशव्यापी हड़ताल को मिला कलाकारों का समर्थन, इप्टा ने दिखाया सरकारी 'मकड़जाल'


बाकी खबरें

  • किसान आंदोलन
    लाल बहादुर सिंह
    किसान आंदोलन को सम्पूर्ण क्रांति आंदोलन की स्पिरिट से प्रेरणा, परन्तु उसके नकारात्मक अनुभवों से सीख लेनी होगी
    05 Jun 2021
    तानाशाही और भ्रष्टाचार के विरुद्ध सम्पूर्ण क्रांति आंदोलन की स्पिरिट और उसके तूफानी आवेग से प्रेरणा लेना एक बात है, परन्तु उसकी विचारधारा और राजनीति आज के आंदोलन के लिए आदर्श और मॉडल नहीं हो सकती। आज…
  • बहरामपुर में सैनिटाइजेशन करते रेड वालंटियर्स। फ़ोटो: साभार: अनिर्बन
    संदीप चक्रवर्ती
    पश्चिम बंगाल: रेड वॉलंटियर्स को राज्य सरकार का नहीं, बल्कि सिविल सोसाइटी की तरफ़ से भारी समर्थन
    05 Jun 2021
    राज्य में कोविड प्रभावित लोगों की मदद को लेकर कई सामाजिक संगठनों ने राज्य में रेड वॉलंटियर्स का समर्थन करना शुरू कर दिया है, ताकि ज़रूरतमंद लोगों तक ज़्यादा असरदार तरीक़े से पहुंचा जा सके।
  • वैक्सीन रणनीति को तबाह करता भारत का 'पश्चिमीवाद'
    एम. के. भद्रकुमार
    वैक्सीन रणनीति को तबाह करता भारत का 'पश्चिमीवाद'
    05 Jun 2021
    पश्चिमी दवा कंपनियों के खून चूसने और शिकारियों की तरह मानव रोग से अंधा मुनाफा कमाने की भयंकर प्रवृत्ति के बावजूद, हमारी सरकार ने अपने सारे अंडे एंग्लो-अमेरिकन टोकरी में डाल दिए हैं।
  • कोरोना
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में फिर 3 हज़ार से ज़्यादा मरीज़ों की मौत
    05 Jun 2021
    देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 1,20,529 नए मामले दर्ज किए गए हैं। देश में अब तक 3 लाख 44 हज़ार 82 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।
  • एक बूढ़े पेड़ की प्रार्थना  
    न्यूज़क्लिक डेस्क
    एक बूढ़े पेड़ की प्रार्थना  
    05 Jun 2021
    “सुनो...बाढ़ की चेतावनी जारी हो चुकी है”। आज 5 जून, पर्यावरण दिवस पर विशेष
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License