NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
किसान आंदोलन के समर्थन में वाम दलों का देशव्यापी प्रदर्शन
देशभर में किसानों के समर्थन में वाम दलों ने प्रदर्शन किया और तीन नए कृषि कानूनों को साफतौर पर किसान विरोधी बताते हुए हर लड़ाई में किसानों का साथ देना का ऐलान किया। इन संगठनों ने केंद्र व हरियाणा सरकार द्वारा किये जा रहे किसानों के बर्बर दमन की भी कड़ी निंदा की है।
मुकुंद झा
02 Dec 2020
PROTEST

देशभर में किसानों के समर्थन में वाम दलों ने प्रदर्शन किया। उनके इस प्रदर्शन में उनके सहयोगी जनसंगठन भी सड़क पर उतरे। दो दिन पहले ही सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी ने अपने कार्यकर्ताओ से सड़क पर उतरकर किसानों का साथ देने को कहा था। जिसके बाद से ही लगातर बंगाल, हिमाचल, बिहार, पांडुचेरी, तमिलनाडु, केरल, असम सहित देश के तमाम राज्यों में वाम दलों और उनके सहयोगी जनसंगठनों के लोगों ने किसानो के समर्थन में प्रदर्शन किया।

आपको बता दें कि पिछले कई दिनों से पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, राजस्थान और उत्तराखंड के किसान दिल्ली बॉर्डर पर तीन कृषि कानूनों के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे हैं। सरकार ने इनके प्रदर्शन को रोकने के लिए बल प्रयोग भी किया और इनके रस्ते भी रोके लेकिन किसान डटे रहे। अब इन किसानों के समर्थन में पूरे देश में प्रदर्शन हो रहे हैं। सरकार भी बैकफुट पर है और किसानों से वार्ता शुरू की है।  

प्रदर्शनकारियों ने साफतौर पर तीन किसान विरोधी कानूनों को लेकर संघर्षरत किसानों के आंदोलन का पुरजोर समर्थन किया है। इन संगठनों ने केंद्र व हरियाणा सरकार द्वारा किये जा रहे किसानों के बर्बर दमन की कड़ी निंदा की है। इन्होंने ऐलान किया है कि किसानों के आंदोलन के समर्थन में वो देश भर के मजदूरों, किसानों, महिलाओं, युवाओं, छात्रों व सामाजिक तथा आर्थिक रूप से पिछड़े तबकों द्वारा देशव्यापी प्रदर्शन करके किसानों के साथ एकजुटता प्रकट कर रहे हैं।

दिल्ली के संसद मार्ग में किसानों के समर्थन में प्रदर्शन
 

इसी कड़ी में आज बुधवार को दिल्ली के संसद मार्ग पर सभी वाम दलों से संयुक्त रूप से प्रदर्शन किया। इसमें सीपीएम पोलित ब्यूरो सदस्य और पूर्व सांसद वृंदा करात, अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव हन्नान मौल्ला और सीपीआई के महासचिव डी राजा के साथ ही कई अन्य राष्ट्रीय और दिल्ली राज्य के नेता शामिल हुए।

वृंदा करात ने प्रदर्शन कर रहे किसानों का अभिवादन किया और कहा कि उन्होंने इस सरकार की कॉरपोरेट परस्त नीतियों की पोल खोल दी है। उन्होंने कहा ये सरकार द्वारा मेहनतक़श अवाम, किसान, मज़दूर, दलित और आदिवासियों पर हमला है। हम सभी वाम दल एक साथ आकर यहां यह कहने आये हैं कि इसे हम बर्दाश्त नहीं करेंगे।
 

आगे उन्होंने प्रधानमंत्री और सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि एक तरफ वो कहते हैं कि ये किसानों के फ़ायदे का क़ानून है, दूसरी तरफ वो अपने मन की बात में अंबानी अडानी की बात करते हैं। आपने संसद की धज्जियाँ उड़ाई ,कानूनों की धज्जियां उड़ाई लाखों किसानों पर वाटर कैनन और आँसू जैसे के गोले चलवाया और किसान नेताओं पर फर्जी मुक़दमे लगवाए है। इसको बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। 
 

उन्होंने कहा यह आर पार की लड़ाई है। हम सभी दलों से अपील करते है कि वो इस मोदी सरकार के ख़िलाफ़ सड़क पर उतरें। हमारा संघर्ष तबतक जारी रहेगा जबतक ये तीन काले क़ानून वापस नहीं हो जाते हैं।

बिहार में वाम दलों का संयुक्त हल्ला बोल

इसी तरह बिहार में भी वाम दलों ने सयुंक्त रूप से प्रदर्शन किया। वहां सीपीएम राज्य सचिव अवधेश सिंह ने कहा कि मोदी जी के मन की बात सुनकर अब जनता ऊब चुकी है लेकिन मोदी सरकार किसानों की मन की बात सुनने को तैयार नहीं है। आज किसान सड़क पर इसलिए हैं क्योंकि लॉकडाउन में उन्होंने केवल पूंजीपतियों के हक़ में क़ानून बनाने का काम किया।  

 

उन्होंने बताया की कैसे 2006 में नीतीश कुमार ने भी बिहार में ऐसा ही कानून बनाकर मंडियों को खत्म किया। आज बिहार का किसान अपने फसल के दाम के लिए तरस रहा है। आज जब धान का सरकारी दाम 1900 सौ रुपये है तो बिहार का किसान 900 रुपये में अपना धान बेचने को मज़बूर है। ऐसे हालात में बिहार सरकार बेशर्मी के साथ केंद्र के कानूनों के साथ है।
 

माले महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि वार्ता के नाम पर मोदी ने किसानों को अपमानित किया है। एक तरह का पैटर्न बन गया है कि सरकार पहले ऐसे आंदोलनों को दबाती है, गलत प्रचार करती है, दमन अभियान चलाती है, लेकिन फिर भी जब आंदोलन नहीं रुकता, तब कहती है कि यह सबकुछ विपक्ष के उकसावे पर हो रहा है। कृषि कानूनों के बारे में सरकार कह रही है कि किसान इसे समझ नहीं पा रहे हैं, तो क्या पंजाब जैसे विकसित प्रदेश के किसानों को अब खेती-बाड़ी सीखने के लिए आरएसएस की शाखाओं में जाना होगा़।


वाम नेताओं ने कहा कि बिहार में वाम व जनवादी दलों के नेतृत्व में किसानों का आंदोलन संगठित होने लगा है, यदि समय रहते सरकार ने तीनों काले कानूनों को वापस नहीं लिया, तो पूरे बिहार में आंदेालन चलाया जाएगा।

हिमाचल प्रदेश में भी सीपीएम ने किया प्रदर्शन

हिमाचल में भी वाम दल सीपीएम के जनसंगठन सीटू, किसान सभा, जनवादी महिला समिति, डीवाईएफआई,एसएफआई, दलित शोषण मुक्ति मंच ने अपनी मांगों व तीन किसान विरोधी कानूनों को लेकर हिमाचल में प्रदर्शन किया।

 

प्रदर्शन कर रहे नेताओं ने कहा है कि मोदी सरकार द्वारा लाए गए तीनों नए कृषि कानून पूर्णतः किसान विरोधी हैं। इसके कारण किसानों की फसलों को कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के जरिए विदेशी और देशी कंपनियों और बड़ी पूंजीपतियों के हवाले करने की साज़िश रची जा रही है। इन कानूनों से फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य की अवधारणा को समाप्त कर दिया जाएगा। आवश्यक वस्तु अधिनियम के कानून को खत्म करने से जमाखोरी,कालाबाजारी व मुनाफाखोरी को बढ़ावा मिलेगा। इससे बाजार में खाद्य पदार्थों की बनावटी कमी पैदा होगी व खाद्य पदार्थ महंगे हो जाएंगे। कृषि कानूनों के बदलाव से बड़े पूंजीपतियों और देशी-विदेशी कंपनियों का कृषि पर कब्जा हो जाएगा और किसानों की हालत दयनीय हो जाएगी।

आगे उन्होंने कहा है कि केंद्र सरकार के नए कानूनों से एपीएमसी जैसी कृषि संस्थाएं बर्बाद हो जाएंगी, न्यूनतम समर्थन मूल्य की अवधारणा खत्म हो जाएगी, कृषि उत्पादों की कालाबाज़ारी, जमाखोरी व मुनाफाखोरी होगी जिससे न केवल किसानों को नुकसान होगा अपितु आम जनता को भी इसकी मार झेलनी पड़ेगी। यह सब कॉरपोरेट्स को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से किया जा रहा है।

 

नेताओं ने एक बात पर जोर देकर कहा कि आज कृषि भारी संकट में है। उसे मदद देने के बजाय केंद्र सरकार किसानों को तबाह करने पर तुली हुई है। न तो कृषि बजट में बढ़ोतरी हो रही है, न ही किसानों की सब्सिडी में बढ़ोतरी हो रही है, न ही किसानी के उपकरण किसानों को सरकार की ओर से मुहैया करवाए जा रहे हैं, न ही किसानों के कर्ज़े माफ किये जा रहे हैं और न ही उन्हें लाभकारी मूल्य दिया जा रहा है। स्वामीनाथन कमीशन की सिफारिशें पिछले दो दशकों से केंद्र सरकार के मेजों पर धूल फांक रही हैं, लेकिन उन्हें लागू नहीं किया जा रहा है। इसलिए बेहद जरूरी हो गया है कि देश के मजदूर, किसान, महिला, युवा, छात्र, सामाजिक व आर्थिक रूप से पिछड़े हुए तबके पूर्ण एकता बनाकर इस सरकार की चूलें हिलाएं व इसकी पूंजीपति व कॉरपोरेट परस्त नीतियों पर रोक लगाएं।

left parties
Nationwide Protest
farmer movement
kisan sabha
CPM
CPI
CPI(ML)
Delhi
Himachal Pradesh
Bihar
Brinda Karat
d Raja
dipankar bhattacharya

Related Stories

बिहार : जीएनएम छात्राएं हॉस्टल और पढ़ाई की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

झारखंड-बिहार : महंगाई के ख़िलाफ़ सभी वाम दलों ने शुरू किया अभियान

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

वाम दलों का महंगाई और बेरोज़गारी के ख़िलाफ़ कल से 31 मई तक देशव्यापी आंदोलन का आह्वान

दिल्ली : फ़िलिस्तीनी पत्रकार शिरीन की हत्या के ख़िलाफ़ ऑल इंडिया पीस एंड सॉलिडेरिटी ऑर्गेनाइज़ेशन का प्रदर्शन

कविता का प्रतिरोध: ...ग़ौर से देखिये हिंदुत्व फ़ासीवादी बुलडोज़र

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

जेएनयू: अर्जित वेतन के लिए कर्मचारियों की हड़ताल जारी, आंदोलन का साथ देने पर छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष की एंट्री बैन!


बाकी खबरें

  • Internet Shutdowns
    इशिता चिगिल्ली पल्ली
    क्यों भारतीय राज्य इंटरनेट शटडाउन पर अपनी निर्भरता बढ़ाता जा रहा है?
    21 Sep 2021
    एक बार फिर भारतीय राज्य ने इंटरनेट शटडाउन का विकल्प अपनाया है, इस बार हरियाणा में यह प्रतिबंध लागू किए गए हैं, ताकि क़ानून-व्यवस्था पर नियंत्रण किया जा सके। 
  • daily
    न्यूज़क्लिक टीम
    चरणजीत सिंह चन्नी बने पंजाब के पहले दलित मुख्यमंत्री, यूपी में जानलेवा बुखार और अन्य खबरें
    20 Sep 2021
    न्यूज़क्लिक के डेली राउंडअप में आज हमारी नज़र होगी पंजाब के पहले मुख्यमंत्री के रूप में चरणजीत सिंह चन्नी के शपथग्रहण समारोह, कर्नाटक के मुख्यमंत्री को जानलेवा धमकी देने वाला हिन्दू महासभा नेता की…
  • kashmir
    अनीस ज़रगर
    जम्मू के व्यापारियों ने लगाया भेदभाव का आरोप, 22 सितंबर को बंद का ऐलान
    20 Sep 2021
    सरकार द्वारा लिए गए रिलायंस के 100 रिटेल स्टोर खोलने के फ़ैसले का विरोध करते हुए व्यापारी संगठनों ने विरोध प्रदर्शन की भी चेतावनी दी है।
  • Yogi
    सोनिया यादव
    यूपी: ज़मीनी हक़ीक़त से बहुत दूर है योगी सरकार का  साढ़े 4 साल का रिपोर्ट कार्ड!
    20 Sep 2021
    कोरोना संकट की दूसरी लहर के दौरान अस्पतालों के बाहर बेड के इंतजार में तड़पते लोगों की तस्वीरें हों या युवाओं का सड़क पर रोज़गार को लेकर धरना, अखबारों में हाथरस, उन्नाव जैसे आए दिन छपते मामले हों, या…
  • crime
    एम.ओबैद
    बच्चों के ख़िलाफ़ अपराध के मामले में एमपी पहले और यूपी दूसरे स्थान परः एनसीआरबी
    20 Sep 2021
    बच्चों के ख़िलाफ़ अपराध के मामले में बीजेपी शासित मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश क्रमशः पहले और दूसरे स्थान पर हैं। वहीं भ्रूण हत्या के मामले में गुजरात पहले स्थान पर है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License