NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
8 दिसंबर के किसानों के भारत बंद को वाम दलों का समर्थन
वाम दलों की मांग- वार्ता का दिखावा न करे सरकार, तीनों काले कृषि कानून वापस ले।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
05 Dec 2020
वाम

पटना: तीनों नए कृषि कानूनों की वापसी सहित सात सूत्री मांगों पर अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के आह्वान पर आगामी 8 दिसंबर के भारत बंद को वाम दलों ने सक्रिय समर्थन देने का निर्णय किया है। सीपीआई, सीपीआई (एम), भाकपा-माले, फारवर्ड ब्लॉक व आरएसपी की राष्ट्रीय स्तर पर हुई बैठक की रौशनी में आज इन पार्टियों के राज्य स्तर के नेताओं ने संयुक्त बयान जारी करके यह जानकारी दी।

भाकपा-माले के राज्य सचिव कुणाल, सीपीआई के राज्य सचिव रामनरेश पांडेय, सीपीआई (एम) के राज्य सचिव अवधेश कुमार व फारवर्ड ब्लॉक के अमीरक महतो व आरएसपी वीरेन्द्र ठाकुर ने बयान जारी करके कहा है कि पहले तो मोदी सरकार ने दमन अभियान चलाकर किसानों को डराना चाहा, फिर तरह-तरह का दुष्प्रचार अभियान चलाया गया और अब वार्ता का दिखावा किया जा रहा है। सरकार के दमननात्क व नकारात्मक रूख के कारण अब तक तीन किसानों की मौत हो चुकी है। 

दो दौर (सरकार के अनुसार चार दौर) की वार्ता असफल हो चुकी है क्योंकि सरकार कानूनों को वापस लेने की मांग पर तैयार नहीं है। ये कानून पूरी तरह से खेती-किसानी को चौपट कर देने वाले तथा खेती को कॉरपोरेट घरानों के हवाले कर देने वाले हैं। देश के किसान इन कानूनों को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे। पंजाब से आरंभ हुआ आंदोलन अब देश के दूसरे हिस्सों में भी फैल रहा है। सरकार को यह असंवैधानिक कानून रद्द करना ही होगा।

वाम नेताओं ने कहा कि भारत बंद में तीनों काले कृषि कानूनों को रद्द करने के साथ-साथ प्रस्तावित बिजली बिल की वापसी, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सरकारी दर पर फसल खरीद की गारंटी, स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने की भी मांग प्रमुखता से उठाई जाएगी। बिहार में नीतीश कुमार की सरकार ने 2006 से ही मंडियों को खत्म कर दिया और राज्य की खेती को बर्बादी के रास्ते धकेल दिया। आज बिहार में कहीं भी धान खरीद नहीं हो रही है। किसानों की फसलें बर्बाद हो रही हैं, लेकिन नीतीश कुमार ने विगत 15 वर्षों में कभी भी इसकी चिंता नहीं की। हमारी मांग है कि सरकार तत्काल न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सभी किसानों के धान खरीद की गारंटी करे।

वाम नेताओं ने बिहार की जनता से अपील की है कि कृषि प्रधान देश में यदि किसान ही नहीं बचेंगे, तो देश कैसे बचेगा? इसलिए समाज के सभी लोग इस आंदोलन का समर्थन करें और इसका विस्तार दूर-दराज के गांवों तक करें।

farmers protest
Farm bills 2020
left parties
Left parties support Bharat Bandh
Bharat Bandh
CPI
CPM
CPI-ML

Related Stories

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

वाम दलों का महंगाई और बेरोज़गारी के ख़िलाफ़ कल से 31 मई तक देशव्यापी आंदोलन का आह्वान

राम सेना और बजरंग दल को आतंकी संगठन घोषित करने की किसान संगठनों की मांग

जहाँगीरपुरी हिंसा : "हिंदुस्तान के भाईचारे पर बुलडोज़र" के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

दिल्ली: सांप्रदायिक और बुलडोजर राजनीति के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

बिहार: 6 दलित बच्चियों के ज़हर खाने का मुद्दा ऐपवा ने उठाया, अंबेडकर जयंती पर राज्यव्यापी विरोध दिवस मनाया

बिहार: विधानसभा स्पीकर और नीतीश सरकार की मनमानी के ख़िलाफ़ भाकपा माले का राज्यव्यापी विरोध

देशव्यापी हड़ताल: दिल्ली में भी देखने को मिला व्यापक असर

देशव्यापी हड़ताल को मिला कलाकारों का समर्थन, इप्टा ने दिखाया सरकारी 'मकड़जाल'

दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल को मिला व्यापक जनसमर्थन, मज़दूरों के साथ किसान-छात्र-महिलाओं ने भी किया प्रदर्शन


बाकी खबरें

  • भाषा
    दलित किशोर की पिटाई व पैर चटवाने का वीडियो आया सामने, आठ आरोपी गिरफ्तार
    19 Apr 2022
    पुलिस के अनुसार मामले में अनुसूचित जाति जनजाति अत्यातार निवारण अधिनियम (एससी-एसटी एक्ट), 147 (उपद्रव के दोष में दो वर्ष कारावास) 149 (विधिविरुद्ध जनसमूह के किसी सदस्य द्वारा किये गये अपराध में जनसमूह…
  • एम. के. भद्रकुमार
    मारियुपोल की जंग आख़िरी पड़ाव पर
    19 Apr 2022
    शनिवार को दोनेतस्क प्रशासन के प्रमुख डेनिस पुशिलिन ने खुले तौर पर अज़ोवस्तल में छिपे हुए नव-नाज़ी उग्रवादियों के "ख़ात्मे" का आह्वान किया।
  • भाषा
    अदालत ने ईसाई महिला, डीवाईएफआई के मुस्लिम नेता के अंतरधार्मिक विवाह में हस्तक्षेप से किया इनकार
    19 Apr 2022
    न्यायमूर्ति वी जी अरुण और न्यायमूर्ति सी एस सुधा की पीठ ने महिला, ज्योत्सना मैरी जोसेफ से बातचीत करने के बाद कहा, ‘‘उसने साफ-साफ कहा कि उसने (डीवाईएफआई नेता) शेजिन से अपनी मर्जी से विवाह करने का…
  • सत्यम् तिवारी
    रुड़की से ग्राउंड रिपोर्ट : डाडा जलालपुर में अभी भी तनाव, कई मुस्लिम परिवारों ने किया पलायन
    19 Apr 2022
    न्यूज़क्लिक ने डाडा जलालपुर गांव का दौरा किया, दोनों पक्षों से बात की और उनसे जानने की कोशिश की कि हनुमान जयंती की उस रात क्या हुआ था? और अब क्या हालात हैं?
  • मुकुंद झा, तारिक अनवर
    प्रत्यक्षदर्शियों की ज़ुबानी कैसे जहांगीरपुरी हनुमान जयंती जुलूस ने सांप्रदायिक रंग लिया
    19 Apr 2022
    प्राथमिकी में तलवार, बेसबॉल बैट और रिवॉल्‍वर, भड़काऊ गाने बजाने और नारे लगाने का ज़िक्र नहीं है। सूत्रों के अनुसार यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि तय मार्ग का पालन क्यों नहीं किया गया। और अब जब पुलिस…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License