NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
पत्रकारों की रिहाई के लिए 74 मीडिया और अधिकार समूहों की 7 एशियाई देशों के प्रमुखों को चिट्ठी
पत्र में कहा गया है कि कोविड-19 का यह दौर जेलों में बंद पत्रकारों के लिए आज़ादी, जीवन और मौत के बीच चुनाव का सवाल बन गया है। इनमें से कई पत्रकारों को बिना किसी जाँच के लम्बे समय से हिरासत में रखा गया है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
30 Apr 2020
Media

द कमिटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट (CPJ) समेत 74 मीडिया, प्रेस स्वतंत्रता और मानवाधिकार संगठनों ने सात एशियाई देशों के प्रमुखों को पत्र लिखा है। इस पत्र में  COVID-19 महामारी से पैदा हुए वैश्विक स्वास्थ्य इमरजेंसी के बीच इन सात एशियाई देशों की जेलों में बंद पत्रकारों की रिहाई की अपील की गई है। यह पत्र 27 अप्रैल को लिखा गया। यह पत्र भी CPJ द्वारा इस वर्ष की शुरुआत में 30 मार्च को शुरू किए गए #FreeThePress अभियान का हिस्सा है।

पत्र के अनुसार चौंका देने वाली संख्या में पत्रकारिता से जुड़े लोग एशियाई महाद्वीप के जेलों में कैद हैं। इनके लिए आज़ाद होना जीवन और मृत्यु से जुड़ा मसला बन चुका है। इस तथ्य पर रोशनी डालते हुए इस पत्र में कहा गया है कि ''लोगों से उनकी आज़ादी छीन ली गयी है, जो लोग जेल में बंद हैं या उनके आसपास काम करे लोगों को बाहर मौजूद आम लोगों की अपेक्षा कोविड -19 से संक्रमित होने का खतरा अधिक है।''

सीपीजे की हालिया वार्षिक जेल जनगणना 1 दिसंबर, 2019 को हुई थी। इस जनगणना से मिले आंकड़ों का हवाला देते हुए पत्र में कहा गया है कि "एशिया के जेलों में कम से कम 63 पत्रकार हैं। इनमें से चीन के जेलों में 48, वियतनाम के जेलों में 12, भारत के जेलों में 2 और म्यांमार के जेल में एक पत्रकार कैद है।''

इसके साथ सीपीजे के रिसर्च के हवाले से पत्र में कैदियों को लेकर कुछ और आंकड़ें भी दिए गए हैं। पत्र में कहा गया है कि 31 मार्च तक कम से कम पांच पत्रकारों को रिहा कर दिया गया। इन पांच पत्रकरों में चार चीन के और एक वियतनाम का था। हालांकि पिछले साल के 1 दिसंबर के बाद से कम से कम पांच और पत्रकारों को गिरफ्तार किया गया है। इसमें कंबोडिया में सोवन रिथी, चीन में चेन जियापिंग, भारत में गौतम नवलखा, पाकिस्तान में मीर शकील-उर-रहमान और फिलिपींस में फ्रैंसिफेमा कोम्पियो की गिरफ्तारी शामिल है।"

पत्र में यह भी लिखा गया है - यूनिवर्सल डिक्लेरेशन ऑफ़ ह्यूमन राइट्स के अनुच्छेद 19 के तहत बिना किसी रोक-टोक के अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और किसी भी मीडिया के माध्यम से, भले ही वह मीडिया किसी भी देश की हो, जानकरियों और विचारों को खोजने, हासिल करने और आदान - प्रदान करने के अधिकार की गारंटी दी गयी है। हालांकि इस गारंटी से जुड़े अधिकार के बावजूद कई पत्रकारों को बिना किसी पूछताछ के लंब समय से हिरासत में रखा गया है। कैदियों से भरे जेल में लम्बे समय से रहने की वजह से पत्रकार मलेरिया, ट्यूबरक्लोसिस और दूसरी कई तरह की गंभीर बिमारियों से जूझ रहे हैं।

मीडिया और अधिकार समूह इस तथ्य की ओर भी ध्यान दिलवाते हैं कि कैद किए गए पत्रकारों का अपने आस-पास के माहौल पर कोई नियंत्रण नहीं है और उन्हें अक्सर चिकित्सा संबंधी जरूरी देखभाल से वंचित रखा जाता है।

इस पत्र को कंबोडिया के प्रधानमंत्री, पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के राष्ट्रपति, भारत के प्रधानमंत्री, म्यांमार के राज्य काउंसलर, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री, फिलीपींस के राष्ट्रपति और वियतनाम के राष्ट्रपति को संबोधित कर लिखा गया है। 

इस पत्र को यहां पढ़ा जा सकता है-

Committee to Protect Journalists
Journalists Under Attack
Narendra modi
Xi Jinping
Media freedom
Free the Press
COVID 19 Pandemic
Freedom of Press
overcrowded prisons

Related Stories

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

भाजपा के लिए सिर्फ़ वोट बैंक है मुसलमान?... संसद भेजने से करती है परहेज़

हिमाचल में हाती समूह को आदिवासी समूह घोषित करने की तैयारी, क्या हैं इसके नुक़सान? 


बाकी खबरें

  • cartoon
    आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक: न कान्हा मिले, न राम...योगी जी की घर वापसी!
    15 Jan 2022
    गोदी मीडिया के ज़रिये बहुत ज़ोर से माहौल बनाया गया था कि योगी आदित्यनाथ जी, अयोध्या से चुनाव लड़ने जा रहे हैं। इससे पहले एक सांसद जी के सपने के जरिये कहलवाया गया था कि भगवान कृष्ण चाहते हैं कि योगी…
  • chunav chakra
    न्यूज़क्लिक टीम
    चुनाव चक्र: यूपी में 80 बनाम 20 का असल मतलब है सामाजिक न्याय बनाम हिन्दुत्व की लड़ाई
    15 Jan 2022
    क्या उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग बिखर गई है। क्या उत्तर प्रदेश में एक बार फिर मंडल बनाम कमंडल का दौर लौट आया है। क्या सामाजिक न्याय की राजनीति हिन्दुत्व की राजनीति को एक बार फिर…
  • congress
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    पंजाब विधानसभा चुनाव: कांग्रेस ने जारी की उम्मीदवारों की पहली लिस्ट, सीएम चन्नी को चमकौर साहिब से टिकट
    15 Jan 2022
    पंजाब विधानसभा चुनावों के लिए कांग्रेस ने उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर दी है। देखिए प्रमुख लोगों को कहां से मिला है टिकट
  • bjp
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    यूपी चुनाव:  बीजेपी ने जारी की प्रत्याशियों की पहली सूची, गोरखपुर शहर से चुनाव लड़ेंगे सीएम योगी
    15 Jan 2022
    यूपी विधानसभा चुनावों को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने प्रत्याशियों की पहली लिस्ट जारी कर दी है।
  • covid
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहार: फिर सामने आया कोरोना टीकाकरण फ़र्ज़ीवाड़ा, वैक्सीन लगने से पहले ही आ गया सर्टिफिकेट
    15 Jan 2022
    राजधानी पटना में टीकाकरण के फर्जीवाड़े का एक बार फिर मामला सामने आया है जहां टीका लगने से पहले ही सर्टिफिकेट जारी कर दिया गया। जब पीड़ित पीएचसी गया तो अस्पताल के कर्मचारी उसे ही ग़लत ठहराने लगे।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License