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राजनीति
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लीबिया के लोगों ने बदतर स्थिति और अपर्याप्त सरकारी सेवाओं को लेकर विरोध प्रदर्शन किया
प्रदर्शनकारियों ने देश में गंभीर आर्थिक स्थिति के लिए संयुक्त राष्ट्र द्वारा मान्यता प्राप्त गवर्नमेंट ऑफ नेशनल आर्मी के भ्रष्टाचार और आर्थिक कुप्रबंधन का आरोप लगाया।
पीपल्स डिस्पैच
25 Aug 2020
लीबिया

प्रधानमंत्री फ़ैज़ अल-सराज के नेतृत्व में गवर्नमेंट ऑफ नेशनल अकॉर्ड (जीएनए) ख़िलाफ़ प्रदर्शनकारी संघर्षरत लीबिया के दो प्रमुख शहरों राजधानी त्रिपोली और देश के तीसरे सबसे बड़े शहर मिसराता में सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की कि वह लीबिया के आम लोगों के रहन सहन की स्थिति और आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए क़दम उठाए। ये प्रदर्शनकारी लगातार गिरती रहन सहन की स्थितियों, पानी और पेट्रोल की भारी कमी, देश भर में लंबे समय से बिजली कटौती और अन्य बुनियादी सार्वजनिक सेवाओं की कमी के लिए अपना गुस्सा और निराशा ज़ाहिर कर रहे हैं।

रविवार 23 अगस्त को त्रिपोली में एक बड़ा विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया था जिसमें हज़ारों आम लीबिया के नागरिकों ने शहर की सड़कों पर मार्च किया और शहर के केंद्रीय स्थल की ओर बढ़े। जीएनए मुख्यालय जाने के रास्ते में प्रदर्शनकारियों के सामने हथियार बंद लोग आ गए जिन्होंने प्रदर्शनकारियों को डराने और विरोध को समाप्त करने के लिए हवा में गोलियां चलाई। त्रिपोली में सेंट्रल शहीद चौक की ओर मार्च करते हुए इन प्रदर्शनकारियों ने "भ्रष्टाचार ख़त्म करो" जैसे नारे लगाए और साथ ही अपने हाथों में अरबी में लिखे बैनर और पोस्टर लिए हुए थे जिसमें विभिन्न मुद्दों को उजागर किया गया था और मांग की कि वे इस पर सरकार का ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं।

देश के नागरिकों के जीवन को प्रभावित करने वाले इन प्रमुख मुद्दों से निपटने में सरकार की विफलताओं के ख़िलाफ़ रैली के लिए मिसराता में प्रदर्शन हो रहे हैं और सोमवार 24 अगस्त को लगातार दूसरे दिन सैकड़ों प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे। कई लोगों ने आरोप लगाया है कि इस सरकार ने कोरोनोवायरस महामारी के मद्देनज़र रखे गए उस धन को निकाल लिया है जिसे देश में पहले से ही बेहद ख़राब हेल्थ केयर सिस्टम पर ख़र्च करने के लिए रखा गया था। इस देश में अब तक COVID-19 के 11,000 मामले सामने आए हैं वहीं यहां इससे 199 लोगों की मौत की ख़बर है।

प्रदर्शनकारियों ने देश में व्यापक पैमाने पर मौजूद समस्याओं के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त जीएनए को दोषी ठहराया। वे देश की वर्तमान आर्थिक स्थिति के लिए भ्रष्टाचार और आर्थिक कुप्रबंधन का आरोप लगाते हैं।

2011 के नाटो आक्रमण के बाद देश में चल रहे युद्ध ने देश के विभिन्न हिस्सों में प्रशासन को पूरी तरह से नष्ट कर दिया। उत्पादन में ठहराव के कारण तेल की कमी हो गई है जिसके परिणामस्वरूप निरंतर कमी हो रही है। तेल उत्पादन और इसके निर्यात में रुकावट ने लीबिया के लोगों के आर्थिक जीवन और रोज़गार के अवसरों पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है।

दो युद्धरत पक्षों जनरल खलीफा हफ़्तार के नेतृत्व में लीबिया नेशनल आर्मी (एलएनए) और जीएनए के बीच आपसी युद्धविराम की रविवार की घोषणा ने संघर्ष समाप्त होने और एक अंतिम समाधान की उम्मीद जगा दी। हालांकि, इस घोषणा के तुरंत बाद हफ़्तार ने युद्धविराम को अस्वीकार कर दिया। उसने इसे 'मार्केटिंग स्टंट' क़रार दिया और जीएनए और इसके सहयोगियों जैसे कि तुर्की पर निर्णय में देरी कर एलएनए को चौंकाने का आरोप लगाया।

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