NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
भारत
दोगुनी पीड़ा: एम्स के बाहर फंसे हैं सैकड़ों लोग, न इलाज हो रहा, न घर लौट पा रहे हैं
कैंसर, किडनी तथा हृदय संबंधी रोगों एवं ऐसी अन्य गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए देश के कोने-कोने से एम्स आए सैकड़ों लोग असहाय स्थिति में फंसे हुए हैं।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
10 Apr 2020
एम्स
एम्स अंडरपास का दृश्य। अमन कुमार के फेसबुक वॉल से साभार

दिल्ली: ‘मैं 15 मार्च से यहां हूं। एम्स के डॉक्टरों ने कुछ दवाएं लिखीं लेकिन वो बहुत महंगी हैं। कुछ लोगों ने मुझे बताया कि मेरे पास बीपीएल कार्ड है तो मुझे दवाएं खरीदनी नहीं होंगी। मुझे अब अपना बीपीएल कार्ड चाहिए, लेकिन मुझे कैसे मिलेगा?’ सातवीं कक्षा में पढ़ने वाले अपने बेटे को निहारते हुए असहाय से दिख रहे विजय सहाय ने यह बात बताई।

मध्य प्रदेश के पन्ना जिले से किसान विजय सहाय अपने 13 साल के बेटे का इलाज कराने एम्स आये हैं जिसे ब्लड कैंसर बताया गया है। हालांकि इलाज के लिए उनका इंतजार बढ़ता ही जा रहा है।

देशभर में 24 मार्च के बाद से लागू 21 दिन के बंद (लॉकडाउन) में फंस गये सहाय की प्राथमिकता अपने गांव से बीपीएल कार्ड मंगाने की है जिससे उन्हें दवाएं मिल सकती हैं। लेकिन वह घर भी नहीं जा सकते और इलाज तो हो ही नहीं पा रहा है। पन्ना में सहाय जब खेती नहीं कर रहे होते हैं तो मजदूरी करके परिवार का पेट भरते हैं।

दिल्ली के सफ़दरजंग अस्पताल और एम्स के बाहर देश के कोने-कोने से आए ऐसे सैकड़ों लोग ऐसी ही असहाय स्थिति में फंसे हुए हैं और कोरोना वायरस महामारी के प्रकोप के कम होने का इंतजार कर रहे हैं जो कैंसर, किडनी तथा हृदय संबंधी रोगों एवं ऐसी अन्य गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए आए थे।

राजधानी के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों के बीच से निकलने वाली सड़क आमतौर पर बहुत व्यस्त रहती है लेकिन कोरोना वायरस के कारण यहां सन्नाटा पसरा है जिसमें उन गरीब मरीजों की पीड़ा गूंज रही है जो निजी अस्पतालों में इलाज का खर्च नहीं उठा सकते और घरों से कोसों दूर यहां अटके हुए हैं।

इनमें से अधिकतर अनेक राज्यों से उपचार की विशेष सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए यहां पहुंचे थे और अब लॉकडाउन के दौरान सड़कों तथा दोनों अस्पतालों को जोड़ने वाले सब-वे (भूमिगत रास्ते) में बनाये गये आश्रयगृहों और रैनबसेरों में वक्त गुजारने को मजबूर हैं।

इसी बसेरे में रहते हैं जम्मू से आए 22 साल के अमनजीत सिंह। पिछले साल अक्टूबर में सड़क दुर्घटना का शिकार हुए सिंह को इलाज के लिए एम्स भेजा गया था। उनका दायां हाथ हिल भी नहीं पा रहा है और डॉक्टर भी उनकी देखभाल नहीं कर पा रहे हैं।

अपने पिता के साथ यहां आए अमनजीत सिंह ने कहा, ‘यहां न तो जांच हो रही है और ना ही इलाज हो रहा है। हमारे पास पैसा भी नहीं बचा है। सबसे अच्छा होगा कि हम अपने घर लौट सकें, लेकिन ऐसा भी नहीं कर सकते।’

दूर-दूर से राष्ट्रीय राजधानी में इलाज कराने के लिए आए सैकड़ों लोगों के पास कोई विकल्प नहीं बचा है क्योंकि वे घर वापसी की स्थिति में भी नहीं हैं।

एम्स अस्पताल में जहां ओपीडी बंद है, वहीं सफ़दरजंग में केवल एक ओपीडी सीमित तरीके से चल रही है।

इन अस्पतालों में रोगी डायलासिस, कीमोथैरेपी और अन्य आपातकालीन चिकित्साओं के लिए कई दिनों, हफ्तों और अब तो कई महीनों से इंतजार कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश के पीलीभीत की रहने वाली 34 वर्षीय रेखा देवी को कैंसर है। वह होली से पहले ही अपने पति सुरजीत श्रीवास्तव के साथ इलाज कराने के लिए यहां आई थीं।

एक महीने बाद भी रेखा जस की तस स्थिति में हैं। इलाज के मामले में अभी कोई शुरुआत नहीं हुई है और घर जाने के सारे रास्ते बंद हैं। ऐसे अनेक लोग दोगुनी पीड़ा झेल रहे हैं। अब हालात सामान्य हों तो उनके इलाज की आस बढ़े।

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ )

Coronavirus
COVID-19
Corona Crisis
Epidemic corona Virus
Lockdown
aiims
Trapped outside AIIMS

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा


बाकी खबरें

  • veto
    एपी/भाषा
    रूस ने हमले रोकने की मांग करने वाले संरा के प्रस्ताव पर वीटो किया
    26 Feb 2022
    संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में शुक्रवार को इस प्रस्ताव के पक्ष में 11 और विपक्ष में एक मत पड़ा। चीन, भारत और संयुक्त अरब अमीरात मतदान से दूर रहे।
  • Gujarat
    राजेंद्र शर्मा
    बैठे-ठाले: गोबर-धन को आने दो!
    26 Feb 2022
    छुट्टा जानवरों की आपदा का शोर मचाने वाले यह नहीं भूलें कि इसी आपदा में से गोबर-धन का अवसर निकला है।
  • Leander Paes and Rhea Pillai
    सोनिया यादव
    लिएंडर पेस और रिया पिल्लई मामले में अदालत का फ़ैसला ज़रूरी क्यों है?
    26 Feb 2022
    लिव-इन रिलेशनशिप में घरेलू हिंसा को मान्यता देने वाला ये फ़ैसला अपने आप में उन तमाम पीड़ित महिलाओं के लिए एक उम्मीद है, जो समाज में अपने रिश्ते के अस्तित्व तो लेकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करती…
  • up elections
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी चुनाव 2022: किस तरफ होगा पूर्वांचल में जनादेश ?
    26 Feb 2022
    इस ख़ास बातचीत में परंजॉय गुहा ठाकुरता और शिव कुमार बात कर रहे हैं यूपी चुनाव में पूर्वांचाल की. आखिर किस तरफ है जनता का रुख? किसको मिलेगी बहुमत? क्या भाजपा अपना गढ़ बचा पायेगी? जवाब ढूंढ रहे हैं…
  • manipur
    शशि शेखर
    मणिपुर चुनाव: भाजपा के 5 साल और पानी को तरसती जनता
    26 Feb 2022
    ड्रग्स, अफस्पा, पहचान और पानी का संकट। नतीजतन, 5 साल की डबल इंजन सरकार को अब फिर से ‘फ्री स्कूटी’ का ही भरोसा रह गया है। अब जनता को तय करना है कि उसे ‘फ्री स्कूटी’ चाहिए या पीने का पानी?    
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License