NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
लॉकडाउन : जो लोग कभी दूसरों की हिम्मत थे, आज खुद सहारा तलाश रहे हैं!
रूढ़ीवादी सोच पर अपनी मेहनत से ब्रेक लगाती रेखा और दूसरों के दुखहर्ता रहे हरजिंदर सिंह की कहानियां कई अखबारों, न्यूज़चैनलों और वेबसाइट्स पर प्रेरणा स्रोत के रूप में दिखाई और छापी गई हैं, लेकिन आज लॉकडाउन के दौर में सरकारी वादों और दावों के बीच मुफ्त राशन की सुविधा अभी भी इन जरूरतमंद लोगों की पहुंच से काफी दूर है।
सोनिया यादव
24 Apr 2020
lockdown

‘हमारे यहां सिर्फ राशन कार्ड वालों को ही राशन मिला है, बाकि सभी लोग बहुत परेशान हैं। लॉकडाउन में अब न मेरी टैक्सी चल रही है और नाही सरकार से मुझे कोई मदद ही मिल पा रही है।’

ये दुख दिल्ली के पटपड़गंज में रहने वाली 32 वर्षीय रेखा का है। रेखा एक टैक्सी ड्राइवर हैं और अपने दो बच्चों के साथ एक किराये के मकान में रहती हैं। रेखा के पति ने उन्हें उनके हाल पर बच्चों के साथ अकेला छोड़ दिया है। फिलहाल लॉकडाउन के चलते उनकी टैक्सी बंद है, जिसके चलते उनकी आमदनी भी बंद है। रेखा के पास कमाई का कोई दूसरा जरिया नहीं है और नाही गुजर-बसर के लिए कोई परिवार को सहारा देने वाला ही है। ऐसे में रेखा को दिल्ली सरकार से मदद की उम्मीद थी, लेकिन अब उनकी ये आस भी धीरे-धीरे टूटती जा रही है।

IMG-20200424-WA0031.jpg

न्यूज़क्लिक से बातचीत में रेखा ने बताया, “मैंने सुना था कि सरकार जिनके पास राशन कार्ड नहीं है उन्हें भी राशन दे रही है, लेकिन हमारे यहां ऐसा नहीं हुआ है। लॉकडाउन को एक महीना होने को है, लेकिन हमें अभी तक कोई मदद नहीं मिली।”

रेखा पूर्वी दिल्ली के मधुविहार इलाके की झुग्गीयों में रहती हैं और इस बंदी के समय में आर्थिक तंगी से गुजर रही हैं। वो एक कमरे का किराया लगभग 3 हजार रुपये देती हैं, इसके साथ ही उन पर टैक्सी का लोन भी है जिसकी 15 हजार रुपये किस्त जाती है। इसके अलावा परिवार के राशन-पानी का खर्चा अलग से उन्ही पर है, जिसके चलते रेखा इन दिनों बहुत परेशान हैं और इस हालात में खुद को असहाय महसूस कर रही हैं। हालात ये हैं कि टैक्सी तो नहीं चल रही लेकिन बाकी सारे खर्चे पहले की तरह ही चालू हैं।

रेखा कहती हैं, “मुझे तो सरकार के वो पांच हजार रुपये भी नहीं मिल रहे, जो दिल्ली में ऑटो-टैक्सी ड्राइवरों को दिए जा रहे हैं क्योंकि मेरे पास लाइसेंस तो है लेकिन बैज नंबर नहीं है। मैं अपना फॉर्म जमा करने सूरजमल अथॉरिटी गई थी, लेकिन वहां मुझे पहले दो दिन तो इस काउंटर से उस काउंटर लंबी-लंबी लाइनों में भगाते रहे और फिर बाद में मना ही कर दिया।”

रेखा उबर कैब सर्विसेज़ के लिए गाड़ी चलाती हैं। उबर कंपनी ने लॉकडाउन पीरियड में अपने ड्राइवरों के लिए सहायता राशि का ऐलान भी किया था, लेकिन रेखा के अनुसार उन्हें अभी तक ऐसा कोई पैसा नहीं मिला और नाही कंपनी ने उनसे कोई संपर्क ही किया है।

दरअसल रेखा ने अपने रिश्तेदारों से कर्जा लेकर अपने पति के लिए गाड़ी खरीदी थी, ताकि वो ड्राइवर की नौकरी कर सके लेकिन रेखा का पति गाड़ी और घर दोनों छोड़कर चला गया। पति के चले जाने के बाद रेखा ने लोगों के पैसे चुकाने और घर खर्च के लिए एक संस्थान की मदद से खुद गाड़ी चलाना सीखा। जिसके चलते उन्हें पहले लाइसेंस बनवाने में भी कई दिक्कतें हुईं और फिर बाद में घर की कई समस्याओं के चलते बैज नबंर नहीं हासिल कर पाईं। अब इस महामारी काल में रेखा अपने हालात से जूझते हुए खुद राशन-पानी के लिए संघर्ष कर रही हैं। 

रेखा का संघर्ष

रूढ़ीवादी सोच को चुनौती देने वाली रेखा पिछले दो सालों से दिल्ली में टैक्सी चला रही हैं और अपने बच्चों की जिम्मेदारी भी संभाल रही हैं। उनके दोनों बेटे सरकारी स्कूल में जाते हैं। बड़ा आठवीं में पढ़ता है और छोटा पांचवी में। रेखा न सिर्फ अपने बच्चों को पाल रही हैं बल्कि उनके लिए एक बेहतर कल की उम्मीद भी करती हैं।

रेखा कहती हैं, “पहले दूसरों के घरों में खाने और साफ-सफाई का काम करती थी, उसमें कोई इज्जत नहीं देता था, लेकिन इस काम को लोग बहुत अच्छा कहते हैं। वो कहते है कि आपको देखकर हिम्मत और हौसला मिलता है। हालांकि कुछ लोग अभी भी कहते हैं कि औरत है तो औरत की तरह रहे, समाज में मर्दों की बराबरी न करे। लेकिन मैं अब किसी से नहीं डरती। मैं सबको बताना चाहती हूं कि हम औरतें कमज़ोर नहीं है, वक्त आने पर हम टफ़ जॉब भी कर सकती हैं।”

फ्री ऑटो ऐम्बुलेंस सेवा

रेखा की तरह ही दिल्ली में ‘फ्री ऑटो ऐम्बुलेंस’ सेवा देने वाले हरजिंदर सिंह भी इन दिनों खाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। हरजिंदर उत्तर-पूर्वी दिल्ली के भजनपुरा इलाके में एक किराये के मकान में अपने बेटे और उसके परिवार के साथ रहते हैं। लॉकडाउन में उनके साथ ही उनके बेटे का ऑटो भी बंद है, जिससे घर में खर्चे-पानी को लेकर खाफी दिक्कतें आ रही हैं।  

न्यूज़क्लिक से बातचीत में हरजिंदर सिंह कहते हैं, “हमारा काम बंद है, इसलिए इस समय हमें कई समस्याएं हो रही हैं। ऑटो के अलावा हमारे पास कोई और पैसे कमाने का साधन नहीं है। हमें राशन दुकान से सामान उधार लेना पड़ रहा है,  ऊपर से मकान का 6,500 रुपये किराया भी देना है। फिलहाल कमाई बिल्कुल नहीं हो रही, जिसके चलते अब उधार देने वाला दुकानदार भी अपना पैसा मांग रहा है। राशन कार्ड होने के बावजूद हमें सरकार की ओर से कोई फ्री राशन नहीं मिल पा रहा है।”

नहीं मिल रहा मुफ़्त राशन

हरजिंदर के मुताबिक उनके इलाके में सभी राशन की सरकारी दुकाने बंद हैं और सरकार की ओर से उन लोगों को अभी तक कोई मुफ्त राशन नहीं मिल सका है। हालांकि हरजिंदर को दिल्ली सरकार की ओर से ऑटो ड्राइवरों को मिलने वाली 5,000 की मदद तो मिल गई है, लेकिन उनके बेटे को ऐसा कोई पैसा नहीं मिला। वो ऑनलाइन रेजिस्ट्रेशन में दिक्कतों को बताते हुए कहते हैं, “वेबसाइट पर बहुत लोड है, कई बार कोशिश के बावजूद भी रेजिस्ट्रेशन नहीं हो पा रहा है।”

IMG-20200424-WA0030.jpg

कभी दूसरों के दुखहर्ता रहे 76 साल के हरजिंदर सिंह लॉकडाउन से पहले रोजाना 8 बजे अपने ऑटो के साथ काम पर निकल जाते थे और सड़क पर जिसे भी मदद की जरूरत होती थी, उसकी तरफ अपना हाथ बढ़ा देते थे। वो अपने ऑटो में तरह-तरह की दवाइयां भी लेकर चलते हैं। इसमें ज्यादातर वे होती हैं जो सामन्य तौर पर काम आएं।

हरजिंदर बताते हैं कि फ्री सेवा और दवाइयों के लिए वह कुछ घंटे ज्यादा काम भी करते थे। इसके साथ ही उन्होंने ऑटो में डोनेशन बॉक्स भी रखा है, जिसमें लोग अपनी इच्छा से दान दे जाते थे, हरजिंदर उसी पैसों से दवाइयां खरीद लेते थे।

बता दें कि हरजिंदर सिंह पहले ट्रैफिक वॉर्डन थे, लेकिन बाद में उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ कर ऑटो चलाना शुरू किया। उनके अनुसार उनका ऑटो शायद शहर में इकलौता ऐसा ऑटो ऐम्बुलेंस है, जो मुफ्त में सड़क हादसों में घायल लोगों को हॉस्पिटल तक पहुंचाता है।

रेखा और हरजिंदर सिंह की कहानियां कई अखबारों, न्यूज़चैनलों और वेबसाइट्स पर प्रेरणा के स्रोत के रूप में दिखाई और छीपी गई हैं, लेकिन आज लॉकडाउन के कभी दूसरों की हिमम्त बने ये लोग खुद अपने लिए सहारा तलाश रहे हैं।

बीजेपी हेल्पलाइन पर नहीं उठाता कोई फोन

मालूम हो कि दिल्ली बीजेपी द्वारा भी #Feedtheneedy कार्यक्रम के तहत एक हैल्पलाइन नंबर 9625799844 जारी किया गया है। लेकिन कई बार कॉल करने के बाद भी लोगों की शिकायत है कि इस नंबर पर कोई फोन नहीं उठाता।

गौरतलब है कि दिल्ली सरकार मे सभी गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए फ्री राशन बांटने की ‘फूड सिक्योरिटी’ योजना बनाई है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने खुद कहा था कि जब तक लोग अपनी रोजी-रोटी फिर से कमाना शुरू नहीं कर देते, तब तक उनका ख्याल रखना दिल्ली सरकार की जिम्मेदारी है। हम दिल्ली की एक करोड़ जनता यानी आधी आबादी को मुफ्त राशन दे रहे हैं। लेकिन सरकार के वादों और दावों के बीच रेखा और हरजिंदर जैसे लोग भी हैं, जिनका इस संकट की घड़ी में गुजर-बसर करना मुश्किल हो रहा है, उन तक कोई मदद ही नहीं पहुंच पा रही है और वो अभी भी सरकार की ओर मदद की आस लगाए उम्मीद भरी नज़रों टकटकी लगाए हुए हैं। 

Coronavirus
Lockdown
Narendra modi
BJP
poverty
Hunger Crisis
auto driver
Taxi driver
Daily Wage Workers
Ration Shortage
Food Shortage

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में आज फिर कोरोना के मामलों में क़रीब 27 फीसदी की बढ़ोतरी

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के घटते मामलों के बीच बढ़ रहा ओमिक्रॉन के सब स्ट्रेन BA.4, BA.5 का ख़तरा 

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

कोरोना अपडेट: देश में ओमिक्रॉन वैरिएंट के सब स्ट्रेन BA.4 और BA.5 का एक-एक मामला सामने आया

कोरोना अपडेट: देश में फिर से हो रही कोरोना के मामले बढ़ोतरी 

कोविड-19 महामारी स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में दुनिया का नज़रिया नहीं बदल पाई

कोरोना अपडेट: अभी नहीं चौथी लहर की संभावना, फिर भी सावधानी बरतने की ज़रूरत

कोरोना अपडेट: दुनियाभर के कई देशों में अब भी क़हर बरपा रहा कोरोना 

कोरोना अपडेट: देश में एक्टिव मामलों की संख्या 20 हज़ार के क़रीब पहुंची 


बाकी खबरें

  • किताबः ‘यह मिट्टी दस्तावेज़ हमारा’ के बारे में
    अजय सिंह
    किताबः ‘यह मिट्टी दस्तावेज़ हमारा’ के बारे में
    10 Sep 2021
    ‘यह मिट्टी दस्तावेज़ हमारा’ की कविताएं राजनीतिक परिपक्वता, गहन संवेदनशीलता, सघन बिंबात्मकता और प्रकृति के साथ लयात्मक व दोस्ताना रिश्ते की वजह से हमारा ध्यान खींचती हैं।
  • Rakesh Tikait
    बादल सरोज
    अल्ला हू अकबर और हर-हर महादेव के युग्म से इतना क्यों डर गए हुक्मरान ?
    10 Sep 2021
    हिन्दू-मुस्लिम-सिख-ईसाई समुदायों की यह साझेदारी तो दिल्ली के सभी तरफ से लगी किसानो की मोर्चेबन्दियों में दिखती है फिर ऐसी क्या ख़ास बात थी कि इसे विशेष रूप से दर्ज किया जाए ?
  • नौ साल पहले तालिबान द्वारा एक नौजवान का किया गया अपहरण बना अंतहीन आघात
    विक्रम शर्मा
    नौ साल पहले तालिबान द्वारा एक नौजवान का किया गया अपहरण बना अंतहीन आघात
    10 Sep 2021
    वर्ष 2000 में तालिबान लड़ाकों ने एक किशोर का अपहरण किया था। जब यूनाइटेड किंगडम में डॉक्टरों की एक टीम ने उसका मानसिक मूल्यांकन किया, तो तालिबान शासन के तहत जीवन की एक परेशान करने वाली तस्वीर उभर कर…
  • कोरोना
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 34,973 नए मामले, 260 मरीज़ों की मौत
    10 Sep 2021
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 3 लाख 90 हज़ार 646 हो गयी है।
  • हड़ताल पर रोक लगने के बाद रक्षा कर्मचारी संघ ओएफबी के निगमीकरण के ख़िलाफ़ लड़ेंगे क़ानूनी लड़ाई
    रौनक छाबड़ा
    हड़ताल पर रोक लगने के बाद रक्षा कर्मचारी संघ ओएफबी के निगमीकरण के ख़िलाफ़ लड़ेंगे क़ानूनी लड़ाई
    10 Sep 2021
    एक अन्य कदम के बतौर 13 से 18 सितंबर के बीच एक जनमत-संग्रह आयोजित किया जाना है, जिसमें देश भर के आयुध कारखानों में मौजूद 76,000 रक्षा कर्मचारियों से केंद्र के कदम के बारे में अपना फैसला व्यक्त करने के…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License