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भारत
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लॉकडाउन: एसएफआई ने छात्रों के लिए वित्तीय सहायता की मांग की
छात्र संगठन एसएफआई का कहना है कि देश के विश्वविद्यालयों में बड़ी संख्या में गरीब छात्र पढ़ाई करते हैं। लॉकडाउन के चलते उनके सामने आर्थिक संकट आ गया है। ऐसे में छात्रों की मदद नहीं की गई तो बड़ी संख्या में छात्र शिक्षा से बाहर हो जाएंगे।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
18 Apr 2020
sfi
Image courtesy: Maktoob Media English

दिल्ली: कोरोना महामारी के कारण देश में जो लॉकडाउन हुआ है, उससे दिहाड़ी मजदूर और असंगठित क्षेत्र के श्रमिक अधिक कठिनाइयों सामना कर रहे हैं लेकिन लॉकडाउन का खामियाजा सिर्फ उन्ही को नहीं उठाना पड़ रहा है इसका असर आबादी के बाकि हिस्सों और सभी उद्योगों पर भी पड़ा है। छात्र भी इससे बचे नहीं है, वो भी परेशान है और कही जगहों पर फंसे हुए हैं। ऐसे में छात्र संगठन स्टूडेंट फेडरशन ऑफ़ इण्डिया की दिल्ली इकाई ने सरकार से इन छात्रों की मदद करने की अपील की है।

एसएफआई के राज्य अध्यक्ष सुमित कटरिया और सचिव प्रीतिश मेनन ने सँयुक्त रूप से प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा जहां भारतीय आबादी का एक बड़ा हिस्सा आजीविका के मसलों का सामना कर रहा है, वहीं बेरोजगारी दर आसमान को छू रही है। ऐसे में विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की आर्थिक मदद परिवार कर पाएंगे यह उम्मीद करना निरर्थक है। यदि इसे अनियंत्रित छोड़ दिया जाता है, तो इससे अवरोधन (ड्रॉप-आउट) दरों में काफी वृद्धि हो सकती है।

उन्होंने आगे कहा कि "कोरोनावायरस (कोविड-19) महामारी के कारण वैश्विक लॉकडाउन मानव इतिहास में अभूतपूर्व है, और दुनिया भर में सरकारें स्थिति से निपटने की कोशिश कर रही हैं। स्थिति की तैयारी के बिना और बिना किसी पूर्व सूचना के टेलीविजन पर घोषणा भी की गई, जैसा कि यह भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार की संस्कृति है। हालांकि भारत के पास पूर्ण लॉकडाउन की तैयारी के लिए पर्याप्त समय था, घोषणा एक बम के रूप में आई और 25 मार्च से प्रत्येक को एक ठहराव में ले आया। अब इसे 3 मई तक बढ़ा दिया गया है, लेकिन इसके और आगे बढ़ने की संभावना है।"

एसएफआई  ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि देश भर के विभिन्न शहरों के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में कई छात्र छात्रावासों में फंसे हुए हैं। वे न केवल फंसे हुए हैं, बल्कि सभी को कहा गया था कि हम जहां है वहीं रहे और यात्रा न करें, लेकिन यह भी क्योंकि लॉकडाउन की घोषणा ने छात्रों (या किसी) को तैयारी के फैसले लेने के लिए समय नहीं दिया। जिस प्रकार छात्रों से मांग की थी कि वे वैसे ही रहें, वैसे ही हम सरकार से इन छात्रों को वित्तीय सहायता प्रदान करने की मांग करते हैं। क्योंकि भारत में आसमान आर्थिक पृष्ठभूमि से छात्र पढ़ने आते हैं और मौजदा आर्थिक स्थिति में छात्रों से यह उम्मीद करना कि परिवार छात्रों को आर्थिक रूप से समर्थन करें, यह गैर जिम्मेदाराना है। इसलिए सरकार से अपील है कि वो तुरंत छात्रों की आर्थिक रूप से मदद करे।

 SFI ने सरकार से जो मांग की वो इस प्रकार है कि:-

I. सरकार द्वारा छात्रों को न्यूनतम राशि सीधे बैंक खातों में प्रदान करनी चाहिए
2. छात्रों को फैलोशिप / छात्रवृत्ति और अनुदान वितरित करें (स्नातक - पीएचडी)
3. सरकार दो महीने का शुल्क अवश्य माफ करे
4. लॉकडाउन के दौरान छात्रावास का शुल्क न लिया जाए।
5. सरकार को उन छात्रों की ओर से किराए का भुगतान करना चाहिए जो किराए पर रह रहे हैं
6. साथ ही छात्रों की बुनियादी जरूरतों को सुनिश्चित करने के लिए सरकार को आवश्यक कदम उठाने चाहिए

 सुमित कटारिया ने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कहा कि "छात्रों की मदद नहीं की गई तो बड़ी संख्या में छात्र शिक्षा से बाहर हो जाएंगे,क्योंकि उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट आ खड़ा हुआ है। बड़ी संख्या में छात्र दिल्ली के कई इलाकों में किराये के मकानों में रहते हैं। इसके साथ ही छात्र पीजी में रहते है, जहाँ उनसे पैसे मांगे जा रहे है। इसके साथ ही छात्रों का एक बड़ा हिस्सा खुद काम करके अपनी जरूरतों को पूरा करता था लेकिन इस लॉकडाउन  में उसकी आमदनी ख़त्म हो गई है और उनंके परिवारों की भी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि उनकी मदद वो कर पाए, ऐसे मे जरूरी हो गया है की सरकार छात्रों की समस्याओं पर गौर करे और उनकी तुरंत सहायता करे"

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SFI
financial help for students
Epidemic corona Virus

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