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आमलोगों को ‘न’ और विधायक जी को स्पेशल ‘कोटा’,  बिहार में उठ रहे हैं सरकार पर सवाल
हर कोई पूछ रहा है कि आखिर राज्य में पावरफुल लोगों के लिए अलग नियम और आम लोगों के लिए अलग नियम क्यों?
पुष्यमित्र
20 Apr 2020
bihar
Image courtesy: Jagran

कोटा में रहकर प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों की लॉकडाउन की अवधि में घर वापसी का मसला बिहार में बड़े विवाद का विषय बन गया है। पिछले दिनों जब उत्तरप्रदेश की सरकार ने वहां के छात्रों को लाने के लिये स्पेशल बस चलाने की घोषणा की थी तो बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस ओर सख्त आपत्ति जताते हुए केंद्र सरकार को पत्र लिखा था। मगर कल रविवार के दिन राज्य के एक भाजपा विधायक स्पेशल पास बनवाकर अपनी बेटी को कोटा से लेकर आ गए।

अब बिहार के विपक्षी दल सरकार पर दोहरी नीति अपनाने का आरोप लगा रहे हैं। बिहार विधानसभा में विपक्षी दल के तेजस्वी यादव ने इस घटना पर सख्त आपत्ति जताई है, वहीं कांग्रेस के बिहार प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल ने आरोप लगाया हैं कि जिस गाड़ी से विधायक अपनी बेटी को लेकर आये वह राज्य सरकार के अंडर सेक्रटरी की गाड़ी है और उसका इंश्योरेंस पेपर भी अपडेट नहीं है। सोशल मीडिया में हर कोई पूछ रहा है कि आखिर राज्य में पावरफुल लोगों के लिए अलग नियम और आम लोगों के लिए अलग नियम क्यों?

पिछले कुछ सालों से राजस्थान का कोटा शहर इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन की ख्वाहिश रखने वाले छात्रों का पसंदीदा स्थान बना हुआ है। वहां बिहार के छात्र बड़ी संख्या में रहकर इन परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। इस लॉकडाउन की अवधि में भी अमूमन 6500 छात्रों के वहां होने की बात कही जा रही है। पहले जब सिर्फ 21 दिन का लॉकडाउन लगा था तो छात्रों और उनके अभिभावकों ने सोचा था, ये लोग वहीं रहकर समय काट लेंगे। मगर जब केंद्र सरकार ने दूसरी दफा 19 दिन का और लॉकडाउन लगाया तो इन छात्रों का धैर्य चुकने लगा। इसी बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने राज्य के 7500 छात्रों की वापसी के लिए 252 स्पेशल बसें कोटा भिजवा दीं। शुक्रवार, 17 अप्रैल की रात ये बसें वहां से छात्रों को लेकर वापस उत्तर प्रदेश की ओर चल पड़ी।

इसके बाद बिहार सरकार पर भी अपने छात्रों की वापसी का दबाव बनने लगा। ऐसे में राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार यूपी सरकार के इस फैसले पर सख्त आपत्ति जताई और मुख्य सचिव दीपक कुमार ने केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला को पत्र लिखकर विरोध जताया। मगर रविवार को जब नालंदा जिले के हिसुआ के भाजपा विधायक अनिल कुमार सिंह स्पेशल पास बनवाकर अपनी बेटी को कोटा से वापस ले आये तब से इसे लेकर सोशल मीडिया में बवाल मचा है और विपक्षी पार्टियां सरकार पर हमलावर हैं। नालंदा सदर के अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा जारी किया गया यह पास रविवार दोपहर से ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। सोशल मीडिया पर राज्य के लोग पूछ रहे हैं कि आमलोगों को अपने बच्चों को लाने पर रोक है और पावरफुल लोग स्पेशल पास बना कर अपने बच्चों को ला रहे हैं। यह दोहरी नीति क्यों।

चुनावी रणनीतिकार औऱ हाल तक नीतीश कुमार के करीबी रहे प्रशांत किशोर ने ट्विटर पर लिखा है कि नीतीश जी अब आपकी मर्यादा क्या कहती है। राज्य विधानसभा के मुख्य विपक्षी दल के नेता तेजस्वी यादव ने सरकार पर अपने विधायक को गुपचुप तरीके से अपनी संतान को कोटा से लाने का आरोप लगाया है। उन्होंने सोमवार को ट्विटर पर लिखा कि अगर बिहार सरकार इन छात्रों की मदद करने में अक्षम है तो हमें विशेष अनुमति प्रदान करे, हम इन 6,500 बच्चों को वापस लेकर बिहार आयेंगे। कांग्रेस के बिहार प्रभारी ने तो एक कदम आगे बढ़कर राज्य सरकार पर अपने अंडर सेक्रेटरी की गाड़ी भेज कर विधायक के बच्चे को लाने का आरोप लगाया है, उनका कहना है कि जिस गाड़ी का परमिट विधायक के नाम बना है, उसका इंश्योरेंस भी खत्म हो चुका है।

 

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इस प्रसंग में लोगों ने यह आरोप भी लगाये हैं कि नियमानुसार राज्य से बाहर जाने का पास जिलाधिकारी को जारी करने का अधिकार है, ऐसे में विधायक अनिल सिंह ने यह पास अनुमंडल पदाधिकारी से कैसे जारी करा लिया।

रविवार को दिन भर चले इस विवाद के बाद शाम को विधायक ने सफाई दी कि मैंने यह अनुमति विधिवत प्राप्त की है। मेरी बेटी की बिल्डिंग के सभी बच्चे लौट गये थे, इस वजह से वह मानसिक दबाव में थी। ऐसे में उसे वापस लाना जरूरी थी। वे कहते हैं कि ऐसा पास सिर्फ उन्होंने नहीं बनवाया है, नालंदा जिले में इस तरह के 700 और पास बने हैं। हालांकि उन्होंने यह जाहिर नहीं किया कि क्या सभी पास कोटा से छात्रों को लाने के लिए ही बने थे या किसी और वजह से। उन्होंने यह भी नहीं बताया कि अगर वे अपनी बेटी को वापस लाने के लिए गये थे तो पास में पुत्र को वापस लाने का जिक्र क्यों है।

इस बीच राज्य के एक प्रमुख अख़बार में खबर छपी है कि कोटा जाकर अपनी संतान को वापस लाने का पास हासिल करने वाले वे संभवतः राज्य के इकलौते व्यक्ति हैं। क्योंकि इस विषय से संबंधित पटना से आठ, मुजफ्फरपुर से चार और भागलपुर से सात लोगों ने आवेदन किये थे और कोटा जाकर अपने बच्चों को वापस लाने की इजाजत मांगी थी, मगर इनमें से किसी को यह इजाजत नहीं मिली।

इस विवाद के बाद राज्य के सत्ताधारी दल का कोई बड़ा नेता तो प्रतिक्रिया नहीं दे रहा, मगर गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव आमिर सुबहानी ने कहा है कि इस संबंध में जानकारी जुटाई जा रही है कि किन परिस्थितियों में और कैसे यह पास जारी किया गया। इसके बाद ही आगे का निर्णय लिया जायेगा। इस बीच कोटा में रह रहे छात्रों के भी खुद बसें रिजर्व कर बिहार में आने की खबरें हैं। ऐसे 149 छात्रों को बिहार सरकार की तरफ से क्वारंटाइन किया गया है।

छात्रों से अलग मज़दूरों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि मध्यवर्गीय परिवारों के छात्रों को लेकर तो उत्तर प्रदेश हो या बिहार काफी चिंता और संवेदना दिख रही है लेकिन यही चिंता दिल्ली या महाराष्ट्र से पैदल ही चल पड़े मज़दूरों के प्रति नहीं दिखाई पड़ी। बिहार में तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हों या उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी सभी ने मज़दूरों के सवाल पर बार-बार यही कहा कि ये लॉकडाउन की मर्यादा के विपरीत होगा और जो जहां है वहीं रहे।  

(लेखक वरिष्ठ स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

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