NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
भारत
अंतरराष्ट्रीय
टिड्डी कीट संकट : मौसम परिवर्तन हो सकती है वज़ह
टिड्डियों का एक दल अफ्रीका से ईरान और फिर पाकिस्तान होता हुआ भारत आ चुका है। पश्चिमी भारत में किसान इन कीटों से लड़ने में मुश्किलों का सामना कर रहे हैं।
सिद्धार्थ मिश्रा
15 Feb 2020
Locust Infestation Crisis
प्रतीकात्मक तस्वीर, साभार : दिप्रिंट

पिछले साल जुलाई में भारत पहुंचे टिड्डियों के दल का ख़तरा अभी तक बना हुआ है। विश्लेषक, मौसम परिवर्तन को  टिड्डियों की बढ़ती तादाद के पीछे की वजह बता रहे हैं।मई 2019 में ''मरू-टिड्डी'' की राजस्थान में पहली बाढ़ आई थी। माना जा रहा था कि टिड्डी मानसून और अक्टूबर के बाद नहीं बचेंगे। लेकिन उनका कहर अब तक जारी है। जनवरी में टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित हुई एक रिपोर्ट के मुताबिक़, मरू-टिड्डियों के कहर से राजस्थान के दस जिलों में 3.6 लाख हेक्टेयर ज़मीन की फसल बर्बाद हुई है। 24 जनवरी को बीजेपी विधायक बिहारी लाल विधानसभा में विरोध करने के लिए टिड्डियों से भरी एक टोकरी लेकर पहुंच गए। उन्होंने प्रभावित किसानों को मुआवज़े की मांग की। बिहारी लाल बीकानेर के नोखा से विधायक हैं।

सात फरवरी को कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने राज्यसभा में बताया कि गुजरात में 18,727 हेक्टेयर और राजस्थान में 1,49,821 हेक्टेयर ज़मीन की फसल टिड्डियों ने खत्म कर दी। दोनों राज्य सरकारों ने मुआवज़े का ऐलान किया है। गुजरात सरकार, 11,230 किसानों के लिए 32.76 करोड़ रुपये और राजस्थान सरकार, 54,150 किसानों के लिए 86.21 करोड़ रुपये के राहत कोष के प्रावधान की बात कही है।

मरू टिड्डी (स्कीस्टोसेरका ग्रेगारिया) का वज़न तकरीबन दो ग्राम होता है। ''यूएन फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइज़ेशन'' के सीनियर ऑफिसर कीथ क्रेसमैन के मुताबिक, मरू टिड्डी को सबसे खतरनाक प्रवासी कीट माना जाता है। यह टिड्डी इतनी बड़ी संख्या में आते हैं कि उन्हें देखकर लगता है जैसे बादल तैर रहे हों। उनकी गति 150 किलोमीटर प्रतिदिन तक हो सकती है। यह एक दिन में अपने वजन के बराबर फसल को चट कर सकते हैं। अगर स्थितियां सहीं हों, तो कुछ ही महीनों में इनकी संख्या 16 से 20 गुना तक बढ़ जाती है।

पिछले साल जुलाई में तोमर ने बताया था कि भारत और पाकिस्तान टिड्डियों के मसले पर सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने लोकसभा में एक सवाल के जवाब यह तथ्य दिए थे। टिड्डी दल थार मरुस्थल में पाकिस्तानी हिस्से से प्रवेश करता है। टिड्डियों का प्रजनन काल जून/जुलाई से अक्टूबर/नवंबर तक जारी रहता है। जब बरसात ज़्यादा होती है, तब टिड्डियों की तादाद तेजी से बढ़ती है। इस दौरान नया वनस्पति आवरण प्रजनन में उनकी मदद करता है।चार फरवरी को टाइम्स ऑफ इंडिया ने बताया कि तीन किलोमीटर चौड़ा और एक किलोमीटर लंबा टिड्डियों का एक नया झुंड भारत-पाकिस्तान सीमा पर फजिल्का के रास्ते पंजाब में घुस रहा है। करीब 13 घंटे की मुठभेड़ और 400 से 500 टन कीटनाशक इस्तेमाल करने के बाद इस पर काबू पाया गया था।

पिछली बार 1993 में भारत पर गंभीर टिड्डी हमला हुआ था। विशेषज्ञों ने उस हमले और ताजा संकट के बीच अंतर भी बताया है। राजस्थान के बाड़मेर में कृषि विज्ञान केंद्र के प्रमुख डॉ प्रदीप पगारिया ने बताया, ''उस वक्त टिड्डी दो महीने के लिए रुके थे और खरीफ़ की फ़सल को खराब किया था। इस बार वे 6 महीने से रुके हैं और उन्होंने रबी की फ़सल को नुकसान पहुंचाया है। लंबे वक्त के हिसाब से देखें, तो यह मौसम परिवर्तन का मामला लगता है।'' पगारिया का कहना है कि टिड्डियों के प्रजनन के लायक स्थितियां बनी हुई हैं। इसलिए वे नवंबर से जनवरी के बीच प्रजनन कर, आवागमन भी कर रहे हैं।

डॉउन टू अर्थ मैगज़ीन को दिए इंटरव्यू में कीथ क्रेसमैन ने विस्तार से मौसम परिवर्तन के प्रभावों को बताया है। कीथ के मुताबिक़, 1950 के बाद यह पहली बार है, जब टिड्डी दल अक्टूबर/नवंबर के बाद भी बने हुए हैं। क्रेसमैन के मुताबिक़ इस साल अच्छे मानसून की वजह से टिड्डी रुके हुए हैं।क्रेसमैन कहते हैं, ''2019 में पश्चिम भारत में मानसून 6 हफ्ते पहले (जुलाई के शुरूआती हफ्ते में) शुरू हो गया था। खासकर टिड्डियों से प्रभावित इलाकों में। मानसून नवंबर तक, मतलब एक महीने ज़्यादा ठहरा। आमतौर पर यह सितंबर या अक्टूबर में खत्म हो जाता है। इस तरह लंबे समय तक हुई बारिश ने टिड्डियों के लिए बेहतर प्रजनन की स्थितियां पैदा कीं। मानसून से उपजी प्राकृतिक वनस्पति का इस्तेमाल इन कीटों ने लंबे समय तक भोजन के रूप में किया।''

क्रेसमैन ने यह भी समझाया है कि भारत और पाकिस्तान के ऊपर ''हवा बहने'' के तरीके बदल रहे हैं। अब यहां मौसम परिवर्तन के चलते ज्याद़ा चक्रवात आते हैं। क्रेसमैन के मुताबिक़, ''चक्रवात, तटीय गुजरात, पाकिस्तान, अरब प्रायद्वीप, सोमालिया और उत्तरपूर्वी अफ्रीका में बारिश लेकर आते हैं। इससे अच्छी प्रजनन स्थितियां बनती हैं। इतिहास हमें बताता है कि इस तरह के प्लेग चक्रवाती हवाओं के चलते फैलते हैं।''

पगारिया ने बताया कि टिड्डियों का प्रजनन ठंड आते ही रुक जाता है। लंबे वक्त तक इनका बना रहना या तो मौसम परिवर्तन के चलते संभव हुआ या फिर टिड्डियों ने खुद में प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर ली।पगारिया के मुताबिक़, ''इस बार उन्हें जरूरी तापमान मिला और उन्होंने प्रजनन जारी रखा, यहां तक कि ठंड के मौसम में भी यह प्रक्रिया चालू रही। हमने आशा की थी कि ऐसा नहीं होगा, लेकिन लगता है जैसे उन्हें बेहतर स्थितियां मिल गईं हों। हो सकता है उन्होंने खुद में प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर ली हो। इसलिए वह चार महीनों तक टिके रह रहे हैं।''

पगारिया बताते हैं कि बाड़मेर में करीब 38,000 हेक्टेयर ज़मीन और पूरे राजस्थान में करीब तीन लाख हेक्टेयर ज़मीन टिड्डियों के हमले से प्रभावित हुई है। इन इलाकों में नगदी फसल जैसे इस्बगोल और जीरे का उत्पादन किया जाता है। पगारिया आगे बताते हैं ''बाड़मेर में तापमान, गर्मियों में 40 से 50 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है, इस स्थिति में प्रजनन जारी रहना मुश्किल है। मार्च के बाद फ़सलें भी कट जाती हैं। अप्रैल-मई में किसान आमतौर पर बुवाई भी नहीं करते। इसलिए टिड्डियों के पास निशाना बनाने के लिए कम क्षेत्र बचता है। अगर बारिश जल्दी हो जाती है, तब लोगों के लिए जून-अगस्त मुश्किल भरे हो जाते हैं।'' पगारिया अगले 5-6 दिनों में बारिश की संभावना की बात करते हैं, इससे समस्या के और ज़्यादा बढ़ने के आसार हैं।

अंग्रेजी में लिखा मूल आलेख आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं।

Locust Infestation Crisis: Climate Change May Be a Factor

Locust Outbreak
Locust Infestation India
climate change
Pakistan
Rajasthan
Gujarat

Related Stories

गर्म लहर से भारत में जच्चा-बच्चा की सेहत पर खतरा

विश्व जल दिवस : ग्राउंड वाटर की अनदेखी करती दुनिया और भारत

धरती का बढ़ता ताप और धनी देशों का पाखंड

1400 वैज्ञानिकों की चेतावनी : जलवायु परिवर्तन पर क़दम नहीं उठाए तो मानवता झेलेगी 'अनकही पीड़ा'

विकसित देशों के रास्ते पर चलना भारत के लिए बुद्धिमानी भरा नहीं है : प्रो. विक्रम सोनी

कोरोना संकट: कम मामलों वाले राज्यों में संक्रमण की तेज़ उछाल, हरियाणा-राजस्थान ने बढ़ाई चिंता

देश के कई राज्यों में ऑक्सीजन की कमी, केंद्र से तत्काल क़दम उठाने की मांग

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट: लॉकडाउन से कार्बन उत्सर्जन को कम करने में कोई ख़ास मदद नहीं मिली

चीन का ‘स्वास्थ्य रेशम मार्ग’ दक्षिण एशिया में दिखायी पड़ने लगा है

कोविड-19 के बाद के दौर पर चीन के बीआरआई की नज़र 


बाकी खबरें

  • Uttarakhand
    सत्यम कुमार
    उत्तराखंड: NIOS से डीएलएड करने वाले छात्रों को प्राथमिक शिक्षक भर्ती के लिए अनुमति नहीं
    23 Oct 2021
    उत्तराखंड सरकार द्वारा नवंबर 2020 में प्राथमिक शिक्षक के 2287 पदों पर भर्ती के लिए सूचना जारी की गई थी, इसमें राज्य सरकार द्वारा इंदिरा गांधी ओपन यूनिवर्सिटी से होने वाले डीएलएड को मान्य किया गया…
  • Supreme Court
    न्यूजक्लिक रिपोर्ट
    खोरी पुनर्वास संकट: कोर्ट ने कहा- प्रोविजनल एलॉटमेंट के समय कोई पैसा नहीं लिया जाएगा, फ़ाइनल एलॉटमेंट पर तय होगी किस्त 
    23 Oct 2021
    मजदूर आवास संघर्ष समिति ने कहा कि अस्वीकृत आवेदन की प्रकिया में अपारदर्शिता है एवं प्रार्थी को अपील का मौका न देना सरासर अत्याचार एवं धोखा है।
  • inflation
    अजय कुमार
    सरकारी आंकड़ों में महंगाई हो गई कम, ग़रीब जनता को एहसास भी नहीं हुआ! 
    23 Oct 2021
    आख़िर क्या वजह है कि कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स के आंकड़ों में कमी आने के बाद भी आम आदमी इस पर भरोसा नहीं कर पाता।
  • 100 crore vaccines
    राज कुमार
    फ़ैक्ट चेक: क्या भारत सचमुच 100 करोड़ टीके लगाने वाला दुनिया का पहला देश है?
    23 Oct 2021
    भारत न तो पहला देश है जिसने 100 करोड़ डोज़ लगाई है और न ही भारत का टीकाकरण विश्व का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान है।
  • shareel
    द लीफलेट
    सीएए विरोधी भाषण: भीड़ उकसाने के ख़िलाफ़ ‘अपर्याप्त और आधे-अधूरे सुबूत’, फिर भी शरजील इमाम को ज़मानत से इनकार
    23 Oct 2021
    दिल्ली की एक अदालत ने दिसंबर 2019 में राष्ट्रीय राजधानी में नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (CAA)-राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को लेकर अपने कथित भड़काऊ भाषण के सिलसिले में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License