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राजनीति
विपक्ष के विरोध के बीच प्रश्नकाल के निलंबन का प्रस्ताव लोकसभा में मंज़ूर
विपक्षी दलों ने प्रश्नकाल के निलंबन का विरोध किया और सरकार पर सवालों से बचने का आरोप लगाया जिस पर सरकार ने कहा कि यह असाधारण परिस्थिति है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट/भाषा
14 Sep 2020
विपक्ष के विरोध के बीच प्रश्नकाल के निलंबन का प्रस्ताव लोकसभा में मंज़ूर

नयी दिल्ली: आज अंतत: तय हो गया कि संसद के इस सत्र में प्रश्नकाल नहीं होगा। कांग्रेस और कई अन्य विपक्षी दलों के विरोध के बीच सरकार ने संसद के मानसून सत्र के दौरान प्रश्नकाल एवं गैर सरकारी कामकाज के निलंबन से जुड़े प्रस्ताव सोमवार को लोकसभा में रखा जिसे मंजूरी प्रदान कर दी गई।

विपक्षी दलों ने प्रश्नकाल के निलंबन का विरोध किया और सरकार पर सवालों से बचने का आरोप लगाया जिस पर सरकार ने कहा कि यह असाधारण परिस्थिति है जिसमें राजनीतिक दलों को सहयोग करना चाहिए।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि इस सत्र के दौरान प्रश्नकाल और गैर सरकारी कामकाज नहीं रखने पर अधिकतर दलों के नेताओं ने सहमति दी थी और प्रश्नकाल नहीं होने पर भी सदस्य सरकार से सवाल कर सकते हैं।

संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि सरकार सवालों से भाग नहीं रही है और वह सभी सवालों का जवाब देने के लिए तैयार है।

सदन ने प्रश्नकाल और गैर सरकारी कामकाज के निलंबन से जुड़े प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की।

संसदीय कार्य मंत्री ने जब यह प्रस्ताव रखा तो सदन में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि प्रश्नकाल ‘स्वर्णकाल’ होता है और इसे सदन की आत्मा भी कहा जा सकता है। यह सरकार की जवाबदेही के लिए होता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि आजादी के 73 साल के बाद सरकार प्रश्नकाल हटाकर लोकतंत्र का गला घोंटने का काम कर रही है।

एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी, कांग्रेस के मनीष तिवारी और तृणमूल कांग्रेस के कल्याण बनर्जी ने भी इस प्रस्ताव का विरोध किया।

इससे पहले कोरोना वायरस महामारी से जुड़े दिशानिर्देशों का पालन करते हुए सोमवार को संसद के मानसून सत्र का आगाज हुआ। लोकसभा की बैठक में शामिल हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मंत्री और सदस्य मास्क पहनकर पहुंचे और एक-दूसरे से दूरी बनाने की कोशिश की।

सदन में सदस्यों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर सीट के आगे प्लास्टिक शील्ड कवर लगाया गया था। सदन में बैठने की बदली हुई व्यवस्था के बीच कई सदस्यों को उनके स्थान तक पहुंचने में सहायक मदद करते भी दिखे।

लोकसभा चैम्बर में करीब 200 सदस्य मौजूद थे तो लगभग 30 सदस्य गैलेरी में थे।

लोकसभा चैम्बर में ही एक बड़ा टीवी स्क्रीन लगाया गया है जिसके माध्यम से राज्यसभा चैम्बर में बैठे लोकसभा के सदस्य भी नजर आ रहे थे।

गौरतलब है कि कोरोना वायरस महामारी के बीच सामाजिक दूरी सुनिश्चित करने के लिए सदस्यों के लोकसभा चैम्बर, गैलरी के साथ राज्यसभा में भी बैठाया गया है।

मानसून सत्र के पहले दिन लोकसभा की कार्यवाही परंपरा के मुताबिक राष्ट्रगान के साथ आरंभ हुई।

सदन में प्रधानमंत्री मोदी के पहुंचने पर सत्तापक्षा के सदस्यों ने तालियां बजाकर उनका अभिवादन किया और ‘भारत माता की जय’ के नारे भी लगाए।

सत्तापक्ष की तरफ पहली पंक्ति में प्रधानमंत्री मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर मौजूद थे। इसके साथ ही संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और सरकार के कई अन्य मंत्री भी उपस्थित थे।

विपक्ष की तरफ सदन में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी और कई अन्य दलों नेता मौजूद रहे।

हिरासत से रिहा होने के बाद फारूक अब्दुल्ला पहली बार लोकसभा पहुंचे। अधीर रंजन चौधरी, सुप्रिया सुले, दयानिधि मारन और कुछ अन्य सदस्य उनसे गर्मजोशी के साथ मिलते नजर आए। कई अन्य सदस्यों ने भी एक दूसरे का अभिवादन किया।

सदन की कार्यवाही आरंभ होते ही पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, प्रख्यात शास्त्रीय गायक पंडित जसराज, वर्तमान लोकसभा सदस्य वसंत कुमार और 13 पूर्व सदस्यों को श्रद्धांजलि दी गई। इसके बाद कार्यवाही एक घंटे के लिए स्थगित की गई।

संसद का मानसून सत्र शुरू होने से पहले मीडिया को दिये एक बयान में मोदी ने लद्दाख में चीन के साथ चल रहे सीमा गतिरोध के संदर्भ में कहा कि भारतीय सैनिक कठिन पहाड़ी इलाकों में बहादुरी के साथ अपना कर्तव्य निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि संसद में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी, जितनी चर्चा होगी, उतना ही अच्छा है। उन्होंने कहा, ‘‘ मुझे विश्वास है कि सभी सांसद सामूहिक रूप से कई विषयों पर विचार-विमर्श करेंगे।’’

कोविड महामारी का जिक्र करते हुए उन्होंनें कहा कि संसद सत्र विशेष परिस्थितियों में आयोजित किया जा रहा है और सांसदों ने कोविड काल में अपनी ड्यूटी करने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि कोविड-19 से बचाव के लिए सभी उपाय अपनाये जायेंगे। उन्होंने कहा कि वायरस का टीका मिलने तक कोई ‘‘ढिलाई’’ नहीं बरती जा सकती है।

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