NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कानून
भारत
राजनीति
"लव जिहाद" क़ानून : भारत लड़ रहा है संविधान को बचाने की लड़ाई
इन क़ानूनों को "लव जिहाद" की समस्या  को हल करने के लिए लाया गया था। लव जिहाद एक षड्यंत्र अवधारणा है, जिसमें बीजेपी और दक्षिणपंथी विश्वास करते हैं।
समीना दलवई
05 Oct 2021
Love jihad

उत्तर प्रदेश और अन्य बीजेपी शासित राज्यों में लागू किया गया लव जिहाद क़ानून मनुस्मृति में उल्लेखित मूल्यों का प्रतिनिधित्व करता है। समीना दलवई लिखती हैं कि यह क़ानून हमारे संविधान में स्वीकृत की गए मूल्यों के विरोधाभास में भी है।

22 साल की मुस्कान जहां को सरकारी रैन बसेरे में गर्भपात हुआ है, जहां उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार के नए लव जिहाद क़ानून के तहत रखा गया है। यह क़ानून पहले नवम्बर, 2020 में एक अध्यादेश के तौर पर लाया गया था। बाद में फरवरी में प्रदेश विधानसभा ने इसे पास किया। इसी क़ानून के तहत उनके पति को एक अज्ञात जेल में 2 हफ्ते तक रखा गया था।

 क़ानून, किसी व्यक्ति द्वारा अपना धर्म परिवर्तन कर दूसरे के साथ शादी करने को प्रतिबंधित करता है। दूल्हा और दुल्हन दोनों को ही नए क़ानून में अपराधिक धाराओं का सामना करना पड़ता है।

उत्तर प्रदेश बीजेपी शासित राज्यों में पहला प्रदेश था, जहां लव  जिहाद क़ानून से ख्यात इस अधिनियम को लाया गया था। बाद में दूसरे प्रदेशों ने भी उत्तर प्रदेश की राह पकड़ी।

क्या कहता है क़ानून?

10 महीने से लागू क़ानून कहता है कि जो भी व्यक्ति अपना धर्म परिवर्तन करना चाहता है, उसे जिला प्रशासन को 60 दिनों का नोटिस देना होगा। ताकि जिला प्रशासन जांच कर सके कि क्या धर्म परिवर्तन गलत प्रभाव, दबाव, लालच या गलत प्रतिनिधित्व के ज़रिए तो नहीं किया जा रहा है। अगर बिना सरकारी जांच के किसी व्यक्ति या महिला ने धर्म परिवर्तन कर शादी की है, तो वह वैध नहीं होगी।

अगर कोई महिला अपना धर्म परिवर्तन करती है और शादी करती है, तो उसके परिवार का कोई भी सदस्य महिला के पति के ख़िलाफ़ मुकदमा दायर कर सकता है। फिर यह साबित करने की ज़िम्मेदारी कि शादी के दौरान किसी तरह के गलत प्रभाव, बल, गलत प्रतिनिधित्व, दबाव, लालच या किसी दूसरे फर्जी तरीके का इस्तेमाल नहीं किया गया, यह पति की जिम्मेदारी हो जाती है। जबकि पति को मुकदमा दायर होने के तुरंत बाद ही गिरफ्तार कर लिया जाता है।पति को इसके लिए 2 से 10 साल तक की सजा हो सकती है।

 लव जिहाद क़ानून और इसकी जड़ें तथाकथित लव जिहाद की समस्या को हल करने के लिए बनाए गए है। लव जिहाद बीजेपी नेताओं और दूसरे दक्षिण पंथियों के बीच लोकप्रिय षड्यंत्र सिद्धांत है। इस धारणा के मुताबिक, मुस्लिम धर्मगुरु एक षड्यंत्र के तहत कुछ मुस्लिम युवाओं को दूसरे धर्मों की युवतियों को शादी करने के लिए प्रेरित, प्रायोजित और प्रशिक्षित करते हैं। ताकि उनके बच्चे मुस्लिम हों। इस तरह से दुनिया में मुस्लिमों की आबादी बढ़ जाएगी।

 अब तक इस अवधारणा के पक्ष में कोई जनसांख्यकीय, राजनीतिक या क़ानूनी सबूत नहीं मिला है। ऊपर से यह यह सिद्धांत महिलाओं के लिए अपमानजनक है। जिनके बारे में यह मानता है कि वे अपने तर्किक फ़ैसले लेने में सक्षम नहीं हैं और सिर्फ़ बच्चे पैदा करने का जरिया हैं, जिनसे एक धर्म फैलेगा।

लव जिहाद का सिद्धांत पितृसत्ता द्वारा अपनी बेटियों के ऊपर से शक्ति खोने के डर से उपजा है। पितृसत्तात्मक परंपरा के मुताबिक पिता फैसले लेने वाली सबसे ताकतवर संस्था है। पिता का फर्ज़ है कि वो शादी की परंपरा में अपनी बेटी का कन्यादान  करे।

लेकिन बदलते वक़्त में शिक्षित महिलाओं की संख्या बढ़ती जा रही है। बाहरी दुनिया से उनका संपर्क और आर्थिक स्वतंत्रता में वृद्धि हुई है। वे अपने फैसले लेने लगी हैं। जिसमें शादी करने का फैसला भी शामिल है। इससे जातीय पितृसत्ता में खलबली मच गई। खासकर तब जब महिलाएं खुद से अलग जाति या धर्म का साथी चुन लें।

कैसे दूसरे वैधानिक प्रावधान अंतरधार्मिक शादियों को प्रभावित करते हैं?

यहां तक कि प्रगतिशील नज़र आने वाले क़ानूनों में भी इस समस्या को जगह देने संबंधी कमजोरियां नज़र आती हैं।

पहले बात करते हैं विशेष विवाह अधिनियम, 1954 की। यह अधिनियम धार्मिक भिन्नता से परे दो भारतीयों को शादी करने की सुविधा देता है। बशर्ते संबंधित लोगों को अपने स्थानीय रजिस्ट्री को 30 दिन का वक़्त देना होगा । नोटिस देने के कम से कम 30 दिन पहले संबंधित लोगों को उस इलाके में रहना जरूरी है, जहां वे नोटिस दे रहे हैं। साथ ही शादी करने का उद्देश्य रजिस्ट्री ऑफिस में प्रकाशित होना चाहिए।

इसका नतीजा स्वाभाविक है। घर से भागे हुए किसी जोड़े को आसानी से पकड़ा जा सकता है और घर लाया जा सकता है। कुछ मामलों में इन जोड़ों को मर दिया जाता है, जिससे ऑनर किलिंग के मामलों में बढ़ोत्तरी हो रही है।

दूसरी समस्या रेप के अपराधिक क़ानून को लागू करने को लेकर है। 18 साल से कम उम्र की किसी भी तरह का यौन सम्बंध आईपीसी के हिसाब से रेप माना जाता है। इस प्रावधान का उपयोग बच्चों को यौन शोषण से बचाने के लिए किया गया था।

लेकिन यह प्रावधान अवयस्क युवा महिला की सहमति को भी खारिज करता है, जो अपने प्रेमी के साथ संबंध बनाती है। लड़की का परिवार, लड़के पर रेप का मुकदमा लगा सकता है और लड़के को जेल में जाना पड़ सकता है। जबकि लड़की को उसकी सहमति के बगैर परिवार के पास वापस भेजा जा सकता है। इस मामले में तब प्यार को रेप मान लिया जाता है।

कैसे क़ानून जिंदगियों और संवैधानिक मूल्यों का उल्लघंन करता है?

उत्तर प्रदेश में बनाए गए क़ानून का भयावह नतीजे सामने आ रहे हैं। इस क़ानून के तहत पहला मुकदमा 21 साल के मुस्लिम  युवक पर किया गया, जिसका अतीत में एक हिन्दू महिला के साथ संबंध था। युवा महिला ने लड़के की तरफ से किसी भी तरह के गलत काम से इंकार किया। इसलिए लड़के को छोड़ दिया गया।

बाद में महिला की शादी एक हिन्दू से हो गई। यहां कहानी का दुखद  खात्मा हो जाना चाहिए था।  लेकिन मामला एक कदम आगे बढ़ा। नए क़ानून से लैस होने के बाद लड़की के पिता ने लड़की के प्रेमी के खिलाफ एक मामला दर्ज कराया कि वह लड़की पर धर्म परिवर्तन के दबाव बना रहा है।

इस साल जुलाई तक उत्तर प्रदेश पुलिस ने नए क़ानून के तहत 63 मामले दर्ज किए हैं, 80  लोगों को गिरफ़्तार किया है, वहीं 162 लोगों को मुकदमों में नामजद किया है। जबकि 21 लोग फिलहाल फरार हैं। इसी तरह के क़ानूनों में मध्य प्रदेश और गुजरात में भी गिरफ्तारियां हुई हैं।

यहां देखा जा सकता है की एक क़ानून कितना विध्वंसक हो सकता है। क़ानून बनाने वालों को अपने चुनने वालों के लिए जवाबदेह होना चाहिए। एक तानाशाह सरकार अपने नागरिकों, खासकर महिलाओं को नियंत्रित करना चाहती है। लेकिन क्या लोकतंत्र के दिल में रहने वाला एक सजग समाज इसकी अनुमति दे सकता है? 

भारत फिलहाल अपने संविधान की लड़ाई लड़ रहा है: एक तरफ बाबा साहेब अंबेडकर द्वारा तैयार किया गया संविधान है, जो समता, भाईचारे और न्याय पर आधारित है। दूसरी तरफ मनु स्मृति है, जो प्राचीन हिंदू धर्म ग्रंथ है, जो जाति, लिंग और धर्म जैसी पैदाइश के आधार पर बनाई गई पहचानें की सामाजिक श्रेष्ठता का उपबंध करता है।

आज भारतीय जो भी चुनेंगे, उसका उपमहाद्वीप के भविष्य पर लंबा प्रभाव होगा 

(समीना दलवई जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी में प्रोफ़ेसर हैं। यह उनके निजी विचार हैं।)

इस लेख को मूल अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें।

“Love Jihad” Laws: India is Facing a Battle of Constitutions

Fundamental Rights
Right to Life
Right to privacy
women's rights
love jihad
BJP

Related Stories

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक आदेश : सेक्स वर्कर्स भी सम्मान की हकदार, सेक्स वर्क भी एक पेशा

तमिलनाडु: छोटे बागानों के श्रमिकों को न्यूनतम मज़दूरी और कल्याणकारी योजनाओं से वंचित रखा जा रहा है

जहांगीरपुरी— बुलडोज़र ने तो ज़िंदगी की पटरी ही ध्वस्त कर दी

उत्तराखंड: एआरटीओ और पुलिस पर चुनाव के लिए गाड़ी न देने पर पत्रकारों से बदसलूकी और प्रताड़ना का आरोप

उत्तराखंड चुनाव: राज्य में बढ़ते दमन-शोषण के बीच मज़दूरों ने भाजपा को हराने के लिए संघर्ष तेज़ किया

कौन हैं ओवैसी पर गोली चलाने वाले दोनों युवक?, भाजपा के कई नेताओं संग तस्वीर वायरल

क्या पेगासस जासूसी सॉफ्टवेयर के लिए भारत की संप्रभुता को गिरवी रख दिया गया है?

तमिलनाडु : किशोरी की मौत के बाद फिर उठी धर्मांतरण विरोधी क़ानून की आवाज़

हरदोई: क़ब्रिस्तान को भगवान ट्रस्ट की जमीन बता नहीं दफ़नाने दिया शव, 26 घंटे बाद दूसरी जगह सुपुर्द-ए-खाक़!

भाजपा ने फिर उठायी उपासना स्थल क़ानून को रद्द करने की मांग


बाकी खबरें

  • Red Volunteers
    संदीप चक्रवर्ती
    बंगाल ट्रेन दुर्घटना के पीड़ितों की मदद करने के लिए आगे आये ‘रेड वालंटियर्स’
    15 Jan 2022
    जलपाईगुड़ी जिला अस्पताल में दुर्घटना में घायल यात्रियों को यथासंभव मदद पहुंचाने के लिए आपातकालीन स्थिति में रक्तदान करने के लिए करीब चालीस रेड वालंटियर्स फौरन पहुंचे।  
  • yogi
    एम.ओबैद
    दलितों के ख़िलाफ़ हमले रोकने में नाकाम रही योगी सरकार
    15 Jan 2022
    पिछले साल जारी एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक देश भर में उत्तर प्रदेश में साल 2020 में दलितों के खिलाफ सबसे अधिक आपराधिक मामले दर्ज किए गए। यहां 12,714 मामले (25.2 प्रतिशत) दर्ज किए गए थे।
  • tubnisia
    काथरिन स्काएर, तारक गुईज़ानी
    ट्यूनीशिया: पहली डिजिटल राजनीतिक सुझाव प्रक्रिया पर लोगों में मत-विभाजन
    15 Jan 2022
    नए संविधान पर लोगों से डिजिटल तरीके से राजनीतिक सुझाव बुलवाए गए हैं। यह ट्यूनीशिया के राष्ट्रपति काएस सईद का राजनीतिक संकट से निकलने का रास्ता हो सकता है। लेकिन सईद की मंशा की तरह, इस ऑनलाइन सुझाव…
  • Turkey
    एम. के. भद्रकुमार
    क्या अमेरिका और यूरोप के करीब आ रहा है तुर्की?
    15 Jan 2022
    लेकिन, हक़ीक़त यह है कि पश्चिम तुर्की को तो स्वीकार कर सकता है, लेकिन क्या वे एर्दोगन को स्वीकार करेगा?
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,68,833 नए मामले, 402 मरीज़ों की मौत
    15 Jan 2022
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या बढ़कर 3.85 फ़ीसदी यानी 14 लाख 17 हज़ार 820 हो गयी है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License