NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
लखनऊ: दुष्कर्म पीड़ित मासूम अस्पतालों के चक्कर काटती रही, आख़िर गाज़ियाबाद के बाद क्या बदला?
पिछले महीने ही ग़ाज़ियाबाद में 13 घंटे अस्पतालों के चक्कर लगाने के बाद भी इलाज़ न मिलने से एक तीस वर्षीय गर्भवती महिला ने एंबुलेंस में ही दम तोड़ दिया था। अब लखनऊ में दुष्कर्म पीड़ित तीन साल की मासूम बच्ची के साथ भी अस्पतालों का कुछ ऐसा ही बर्ताव सामने आया है।
सोनिया यादव
30 Jul 2020
लखनऊ
फाइल फोटो

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार भले ही बेहतर कानून व्यवस्था और स्वास्थ्य सुविधाओं का दावा कर रही हो लेकिन आम आदमी इसकी हक़ीक़त से रोज़ दो-चार हो रहा है। ताज़ा मामला हरदोई से लखनऊ इलाज के लिए भेजी गई दुष्कर्म पीड़ित तीन साल की मासूम बच्ची का है। जिसे एंबुलेंस में लिए उसके माता-पिता रात भर कई सरकारी अस्पतालों के चक्कर लगाते रहे। लेकिन अस्पतालों ने कोरोना का हवाला देते हुए उसे भर्ती करने से मना कर दिया।

आखिरकार पुलिस के हस्ताक्षेप के बाद सुबह जैसे- तैसे खून से लथपथ बच्ची को एक अस्पताल में इलाज़ नसीब हुआ। फिलहाल बच्ची की स्थिति बेहद नाजुक है और इस हालत का जिम्मेदार बलात्कार आरोपी के साथ-साथ सरकारी दावों से दूर खस्ताहाल सिस्टम भी है।

क्या है पूरा मामला?

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, दुष्कर्म की ये घटना हरदोई के सांडी थाना क्षेत्र के एक गांव की है। इस मामले में आरोपी तीन साल की पीड़ित बच्ची का अपना ताऊ ही है। खबरों के मुताबिक आरोपी ताऊ पहले बच्ची को टॉफी खिलाने के बहाने से घर के बाहर ले गया, जहां उसने बलात्कार की घटना को अंजाम दिया और फिर बाद में बच्ची को रोते हुए हाल में घर पर वापस छोड़कर फरार हो गया।

रोने की अवाज सुनकर मौके पर पहुंचे परिजनों ने जब बच्ची को खून से लथपथ देखा तो मामले की सूचना सांडी थाना पुलिस को दी। जिसके बाद पीड़ित बच्ची को जिला अस्पताल में भर्ती करवाया गया। लेकिन अस्पताल में बिगड़ती हालात के बाद डॉक्टरों ने पीड़िता को लखनऊ रेफर कर दिया।

पुलिस का क्या कहना है?

इस संबंध में एसपी अमित कुमार ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि परिजनों की तहरीर पर सांडी थाने में आरोपित ईश्वर लाल के खिलाफ रेप, पॉस्को एक्ट समेत अन्य कई धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली गई है और गिरफ्तारी के प्रयास शुरू कर दिए गए है। वहीं बच्ची की हालत नाजुक होने के कारण इलाज के लिए जिला महिला अस्पताल भेजा गया जहां से उसे लखनऊ रेफर किया गया है। एसपी ने बताया कि बच्ची का मेडिकल भी कराया गया है।

बता दें कि दुष्कर्म पीड़ित बच्ची को लखनऊ में अस्पतालों के घंटों चक्कर काटने पड़े। मासूम के मां-बाप उसे एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल एंबुलेंस में लिए रात भर घूमते रहे। लेकिन बगैर कोविड जांच और कोरोना को लेकर अस्पतालों के हालात का हवाला देकर उसे हर जगह से टरकाया जाता रहा।

लखनऊ में अस्पतालों में क्या हुआ?

अमर ऊजाला की खबर के अनुसार मंगलवार, 28 जुलाई की रात बच्ची के माता-पिता एंबुलेंस से उसे लेकर सबसे पहले केजीएमयू पहुंचे जहां बगैर कोविड जांच के भर्ती नहीं करने की बात कही गई। यही नहीं वहां कोरोना के भर्ती मरीजों का हवाला देकर भर्ती करने से टरका दिया गया। इसके बाद सिविल हॉस्पिटल, झलकारी बाई हॉस्पिटल से भी कोरोना का हवाला देकर लौटा दिया गया। थक-हारकर परिवार बच्ची को लेकर लोहिया संस्थान पहुंचे लेकिन वहा भी भर्ती करने से मना कर दिया गया।

इतना सब होने के बाद तड़के चार बजे बच्ची को एंबुलेंस में देख कर लोहिया चौकी के पुलिसकर्मियों ने पूरे मामले को संज्ञान में लिया, अस्पताल प्रशासन से बात की। जिसके बाद आखिरकार तड़के 4:30 बजे उसे लोहिया संस्थान में भर्ती कराया जा सका। यहां बच्ची की सर्जरी की गई।

लोहिया संस्थान के मीडिया प्रभारी डॉ. श्रीकेष सिंह ने बताया कि बच्ची की हालत स्थिर है। उसकी सर्जरी कर दी गई है। अगले 24 घंटे बेहद अहम हैं। बच्ची को महिला रोग विभाग में भर्ती किया गया था। पीडियाट्रिक सर्जरी, पीडियाट्रिक और गायनी विभाग की टीम संयुक्त रूप से निगरानी कर रही है।

ग़ाज़ियाबाद में 13 घंटे अस्पतालों के चक्कर लगाती रही गर्भवती महिला

गौरतलब है कि पिछले महीने ही ग़ाज़ियाबाद में 13 घंटे अस्पतालों के चक्कर लगाने के बाद एक तीस वर्षीय गर्भवती महिला की मौत हो गई थी। गर्भवती महिला के परिजन करीब 13 घंटे नोएडा और ग़ाज़ियाबाद के कई अस्पतालों में उसे लेकर घूमते रहे, डॉक्टरों से मिन्नतें कीं लेकिन किसी अस्पताल ने महिला को भर्ती नहीं किया। आख़िरकार महिला ने देर शाम एंबुलेंस में ही दम तोड़ दिया था। इस मामले के संज्ञान में आने के बाद प्रशासन के द्वारा सख्त कार्यवाई की बात कही गई थी, जिससे ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो लेकिन मासूम बच्ची के साथ लखनऊ में दोहराई गई इस घटना ने सरकारी दावों की पोल खोल दी है।

इसे भी पढ़ें: यूपी: आख़िर क्यों 13 घंटे अस्पतालों के चक्कर लगाती गर्भवती को किसी ने भर्ती नहीं किया?

कानून व्यवस्था को लेकर विपक्ष का सरकार पर निशाना

विपक्ष पहले से ही योगी सरकार को प्रदेश में बिगड़ती कानून व्यवस्था के नाम पर घेर रहा है। बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती ने तो दिल्ली में एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते योगी सरकार को उनके शासनकाल से सीख लेने तक की नसीहत दे दी।

मयावती ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आज प्रदेश में बदमाशों और अपराधियों का राज है। आज कोई भी सुरक्षित नहीं है। यहां तक कि मुख्यमंत्री के अपने शहर गोरखपुर में क़ानून व्यवस्था ध्वस्त हो गई है। मायावती ने कहा कि वे चार बार यूपी की मुख्यमंत्री रही हैं। प्रदेश की मौजूदा सरकार को उनके शासन काल से सीख लेनी चाहिए।

उधर, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी एक बयान जारी कर उत्तर प्रदेश में बदहाल कानून व्यवस्था के मद्देनज़र राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की है।

उन्होंने कहा "भाजपा सरकार के कारण ही कानून-व्यवस्था का संकट उत्पन्न हुआ है। सरकारें अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी से हटकर जब दूसरे कामों में उलझती रहती हैं तो इस तरह के संकट तो पैदा होते ही रहेंगे। ऐसे में प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगा देना चाहिए।"

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने भी योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर यूपी की कानून व्यवस्था ठीक करने की बात कही है। इस पत्र में प्रियंका गांधी ने कानपुर, गोंडा, गोरखपुर की तमाम घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा है कि प्रदेश की कानून व्यवस्था ठीक करें, जनता परेशान हैं।

UttarPradesh
Ghaziabad
women safety
crimes against women
UP hospitals
UP Health Care Facilities
yogi sarkar
Yogi Adityanath
BJP
priyanka gandhi

Related Stories

बदायूं : मुस्लिम युवक के टॉर्चर को लेकर यूपी पुलिस पर फिर उठे सवाल

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !


बाकी खबरें

  • NAND KISHOR GURJER
    रवि शंकर दुबे
    चुनाव आते ही बीजेपी वालों को लोगों के खाने से क्या दिक्कत हो जाती है?
    28 Dec 2021
    ग़ाज़ियाबाद के लोनी से विधायक नंदकिशोर गुर्जर का तानाशाही रवैया एक बार फिर देखने को मिला, जब उन्होंने अपने इलाके की सभी मीट की दुकानें बंद करवा दीं।
  • Azadi Ka Amrit Mahotsav
    डॉ. अमिताभ शुक्ल
    विकास की वर्तमान स्थिति, स्वतंत्रता का अमृत महोत्सव और आम आदमी की पीड़ा
    28 Dec 2021
    आय की असमानता, भ्रष्टाचार, भीषण ग़रीबी, भुखमरी, कुपोषण के मामले में निरंतर वृद्धि हो रही है ऐसे में दुर्दशा की स्थिति में पहुंचे करोड़ों बदक़िस्मत लोगों के लिए स्वतंत्रता और आज़ादी के अमृत महोत्सव के…
  • jharkhand
    अनिल अंशुमन
    झारखंड : नागरिक समाज ने उठाई  ‘मॉबलिंचिंग विरोधी क़ानून’ की नियमावली जल्द बनाने की मांग
    28 Dec 2021
    26 दिसंबर को रांची के डोरंडा के रिसालदार बाबा सभागार में सर्वधर्म संगठनों, नागरिक समाज, एआईपीएफ़ और अवामी इंसाफ़ मंच समेत कई सामाजिक संगठनों ने ‘मॉबलिंचिंग क़ानून और हमारा नज़रिया’ विषय पर नागरिक विमर्श-…
  • west up
    असद शेख़
    विधानसभा चुनाव 2022: पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जनता के अहम मुद्दे
    28 Dec 2021
    7 करोड़ की आबादी के आंकड़े को पार कर चुका उत्तर प्रदेश का ये पश्चिमी क्षेत्र देश, राज्य की राजनीति से हट कर अपने अलग मुद्दों और समस्याओं को समझता और जानता है जिसमें महंगाई, बेरोजगारी और सरकारी नौकरियों…
  • Doctors’ Protest
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    दिल्ली: प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों पर पुलिस का बल प्रयोग, नाराज़ डॉक्टरों ने काम बंद का किया ऐलान
    28 Dec 2021
    फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (FORDA) की ओर से जारी आधिकारिक बयान में बर्बरता का दावा करते हुए इसे चिकित्सा बिरादरी के इतिहास में काला दिन कहा है। उन्होंने पुलिस कार्रवाई की निंदा करते हुए…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License