NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
शिक्षा
भारत
राजनीति
लखनऊ यूनिवर्सिटी: क्या नागरिकता संशोधन कानून पाठ्यक्रम में शामिल हो रहा है?
लखनऊ यूनिवर्सिटी के राजनीति शास्त्र विभाग की एचओडी शशि शुक्ला ने मीडिया को बताया, ‘सीएए भारतीय राजनीति का एक समसामयिक मुद्दा है तो हम लोग चाहते हैं कि इसको हमारे छात्र-छात्राओं को हम पढाएं। ये अभी प्रस्ताव के चरण में है अभी यह पूरी एकेडेमिक प्रोसेस से होकर गुजरेगा। उसके बाद पाठयक्रम का हिस्सा बनेगा।’
सोनिया यादव
27 Jan 2020
Lucknow University

नई दिल्ली: नागरिकता संशोधन कानून यानी सीएए को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन जारी है। केंद्र सरकार इसे 10 जनवरी 2020 से लागू कर चुकी है, लेकिन अलग-अलग राज्यों में इस कानून का भारी विरोध देखने को मिल रहा है। इस विरोध में छात्र अहम भूमिका निभा रहे हैं, विश्वविद्यालयों से लेकर सड़क तक इस कानून के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी बीच उत्तर प्रदेश के लखनऊ विश्वविद्यालय में सीएए को पाठ्यक्रम में शामिल करने की बात सामने आई है, जिसने छात्रों के साथ-साथ राजनीति के गलियारों में भी हलचल पैदा कर दी है।

आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश में सीएए का जोरदार विरोध हो रहा है। प्रदेश के लगभग सभी प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के छात्र इस कानून के खिलाफ प्रदर्शनों में हिस्सा ले रहे हैं, कई छात्र जेल भी जा चुके हैं और कई फिलहाल जेलों में ही बंद हैं। ऐसे में राजधानी के लखनऊ विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक प्रस्ताव तैयार किया है, जिसमें अगले सत्र से पाठ्यक्रम में सीएए को जोड़ने की बात कही जा रही है।

इस संबंध में विश्वविद्यालय के राजनीति शास्त्र विभाग की एचओडी शशि शुक्ला ने मीडिया को बताया, ‘हम लोग अपने विभाग में संविधान और नागरिकता पढ़ाते हैं। सीएए भारतीय राजनीति का एक समसामयिक मुद्दा है तो हम लोग चाहते हैं कि इसको हमारे छात्र-छात्राओं को हम पढाएं। ये अभी प्रस्ताव के चरण में है अभी यह पूरी एकेडेमिक प्रोसेस से होकर गुजरेगा। उसके बाद पाठयक्रम का हिस्सा बनेगा।’

हालांकि छात्र प्रशासन के इस फैसले से खुश नहीं हैं। छात्र संगठन समाजवादी छात्रसभा के प्रदेश अध्यक्ष दिग्विजय सिंह देव ने न्यूज़क्लिक से बातचीत में कहा, ‘फिलहाल ऐसा कोई कोर्स अभी आया नहीं है लेकिन भविष्य में जब भी आएगा तो हम इसका विरोध करेंगे। हम शुरुआत से ही सीएए के खिलाफ ये लड़ाई लड़ रहे हैं। मुझे सीएए विरोध के चलते पांच बार हिरासत में भी लिया गया है। ये सरकार शिक्षण संस्थानों को जानबुझ कर टारगेट कर रही है क्योंकि ये लोग देश के युवाओं से डरते हैं, उनके सवालों से डरते हैं।

दिग्विजय सिंह ने आगे कहा कि जब से योगी सरकार सत्ता में आई है, लखनऊ यूनिवर्सिटी भष्ट्राचार का अड्डा बन गई है। छात्रों के फंड का दुरुपयोग हो रहा है। सीएए का विरोध कर रहे छात्रों को टारगेट कर कार्यवाई की जा रही है। छात्रों को मारा-पीटा जा रहा है, जेलों में बंद किया जा रहा है। ऐसा लगता है जैसे प्रदेश में कानून व्यवस्था है ही नहीं, सिर्फ सरकार राज है।

यूनिवर्सिटी के राजनीति विज्ञान विभाग की छात्रा मधु मिश्रा ने बताया, ‘जो भी नया कोर्स होगा वो नए सत्र में ही शुरू होगा, इसलिए इस वक्त इस कोर्स की बात गैरजरूरी है। प्रदेश सरकार प्रशासन पर दबाव बना रही है ताकि ऐसी बातों पर छात्रों के बीच एक माहौल बनाया जा सके। सीएए का सबसे ज्यादा विरोध यूपी में ही हो रहा है इसलिए सरकार एक नया मुद्दा बना रही है। वैसे भी योगी सरकार के आने के बाद सभी यूनिवर्सिटी कैंपस का हाल बेहाल ही है।'

इस पूरे मुद्दे पर सिहासत भी गरम है। यूनिवर्सिटी में सीएए को पाठ्यक्रम में शामिल करने के मामले में विपक्ष ने सरकार पर शिक्षण संस्थाओं को विद्वेष की राजनीति का अड्डा बना देने का आरोप लगाया है। बहुजन समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल ने सरकार के इस कदम की आलोचना की है।

अखिलेश यादव ने ट्वीट कर लिखा है, "सुनने में आया है कि लखनऊ विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में CAA को रखा जा रहा है। अगर यही हाल रहा तो शीघ्र मुखिया जी की जीवनी भी विश्वविद्यालय में पढ़ाई जाएगी व लेक्चर की जगह उनके प्रवचन होंगे और बच्चों की शिक्षा में उनकी चित्र-कथा भी शामिल की जाएगी।"

सुनने में आया है कि लखनऊ विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में CAA को रखा जा रहा है. अगर यही हाल रहा तो शीघ्र मुखिया जी की जीवनी भी विश्वविद्यालय में पढ़ाई जाएगी व लेक्चर की जगह उनके प्रवचन होंगे और बच्चों की शिक्षा में उनकी चित्र-कथा भी शामिल की जाएगी. pic.twitter.com/6UABUeM1du

— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) January 24, 2020

अखिलेश यादव से पहले बसपा सुप्रीमो मायावती ने लखनऊ विश्वविद्यालय की इस कवायद का विरोध किया है। अपने ट्वीट में मायावती ने लिखा है, "सीएए पर बहस आदि तो ठीक है लेकिन कोर्ट में इसपर सुनवाई जारी रहने के बावजूद लखनऊ विश्वविद्यालय द्वारा इस अतिविवादित व विभाजनकारी नागरिकता कानून को पाठ्यक्रम में शामिल करना पूरी तरह से गलत व अनुचित है। बीएसपी इसका सख्त विरोध करती है तथा यूपी में सत्ता में आने पर इसे अवश्य वापस ले लेगी।"

राष्ट्रीय लोकदल के प्रवक्ता अनिल दुबे ने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून पर अभी कोर्ट में सुनवाई जारी है। ऐसे में इसे पाठ्यक्रम में शामिल करने की कोशिश एक साजिश का हिस्सा है जिसका हर स्तर पर विरोध किया जाएगा।

गौरतलब है कि इससे पहले प्रदेश के राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय (यूपीआरटीओयू) ने सीएए पर सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किया है। इसके तहत इस कानून से जुड़े सभी पहलू बताए जाएंगे। यूनिवर्सिटी के कोर्डिनेटर प्रोफेसर सीके सिंह ने पिछले दिनों वाराणसी में प्रेस काॅन्फ्रेंस कर इसकी पुष्टि भी की थी। उनके मुताबिक इस कोर्स में भारतीय नागरिकता कानून (सीएए) के प्रावधान और उसके समाधान को पढ़ाया जाएगा।

 

UttarPradesh
Lucknow
Lucknow University
AKHILESH YADAV
MAYAWATI
Rastriya Lok dal
CAA
NRC

Related Stories

यूपी में  पुरानी पेंशन बहाली व अन्य मांगों को लेकर राज्य कर्मचारियों का प्रदर्शन

मनरेगा मज़दूरों के मेहनताने पर आख़िर कौन डाल रहा है डाका?

लखनऊ विश्वविद्यालय: दलित प्रोफ़ेसर के ख़िलाफ़ मुक़दमा, हमलावरों पर कोई कार्रवाई नहीं!

CAA आंदोलनकारियों को फिर निशाना बनाती यूपी सरकार, प्रदर्शनकारी बोले- बिना दोषी साबित हुए अपराधियों सा सुलूक किया जा रहा

लखनऊ: देशभर में मुस्लिमों पर बढ़ती हिंसा के ख़िलाफ़ नागरिक समाज का प्रदर्शन

महानगरों में बढ़ती ईंधन की क़ीमतों के ख़िलाफ़ ऑटो और कैब चालक दूसरे दिन भी हड़ताल पर

बलिया: पत्रकारों की रिहाई के लिए आंदोलन तेज़, कलेक्ट्रेट घेरने आज़मगढ़-बनारस तक से पहुंचे पत्रकार व समाजसेवी

पत्रकारों के समर्थन में बलिया में ऐतिहासिक बंद, पूरे ज़िले में जुलूस-प्रदर्शन

यूपी: खुलेआम बलात्कार की धमकी देने वाला महंत, आख़िर अब तक गिरफ़्तार क्यों नहीं

पेपर लीक प्रकरणः ख़बर लिखने पर जेल भेजे गए पत्रकारों की रिहाई के लिए बलिया में जुलूस-प्रदर्शन, कलेक्ट्रेट का घेराव


बाकी खबरें

  • election
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव दूसरा चरण:  वोट अपील के बहाने सियासी बयानबाज़ी के बीच मतदान
    14 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव कितने अहम हैं, ये दिग्गज राजनेताओं की सक्रियता से ही भांपा जा सकता है, मतदान के पहले तक राजनीतिक दलों और राजनेताओं की ओर से वोट के लिए अपील की जा रही है, वो भी बेहद तीखे…
  • unemployment
    तारिक़ अनवर
    उत्तर प्रदेश: क्या बेरोज़गारी ने बीजेपी का युवा वोट छीन लिया है?
    14 Feb 2022
    21 साल की एक अंग्रेज़ी ग्रेजुएट शिकायत करते हुए कहती हैं कि उनकी शिक्षा के बावजूद, उन्हें राज्य में बेरोज़गारी के चलते उपले बनाने पर मजबूर होना पड़ रहा है।
  • delhi high court
    भाषा
    अदालत ने ईडब्ल्यूएस श्रेणी के 44 हजार बच्चों के दाख़िले पर दिल्ली सरकार से जवाब मांगा
    14 Feb 2022
    पीठ ने कहा, ‘‘शिक्षा का अधिकार अधिनियम और पिछले वर्ष सीटों की संख्या, प्राप्त आवेदनों और दाखिलों की संख्या को लेकर एक संक्षिप्त और स्पष्ट जवाब दाखिल करें।’’ अगली सुनवाई 26 अप्रैल को होगी।
  • ashok gehlot
    भाषा
    रीट पर गतिरोध कायम, सरकार ने कहा ‘एसओजी पर विश्वास रखे विपक्ष’
    14 Feb 2022
    इस मुद्दे पर विधानसभा में हुई विशेष चर्चा पर सरकार के जवाब से असंतुष्ट मुख्य विपक्षी दल के विधायकों ने सदन में नारेबाजी व प्रदर्शन जारी रखा। ये विधायक तीन कार्यदिवसों से इसको लेकर सदन में प्रदर्शन कर…
  • ISRO
    भाषा
    इसरो का 2022 का पहला प्रक्षेपण: धरती पर नज़र रखने वाला उपग्रह सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में स्थापित
    14 Feb 2022
    पीएसएलवी-सी 52 के जरिए धरती पर नजर रखने वाले उपग्रह ईओएस-04 और दो छोटे उपग्रहों को सोमवार को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित कर दिया। इसरो ने इसे ‘‘अद्भुत उपलब्धि’’ बताया है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License