NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
लखनऊ: बेरोज़गारी को लेकर सीएम आवास पर प्रदर्शन से पहले ही महिला कार्यकर्ता घर में नज़रबंद!
7-8 सितंबर की आधी रात से अपने आवास पर नज़रबंद इन दोनों महिलाओं का कहना है, कि सरकार धारा 144 का दुरुपयोग कर नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का हनन कर रही है।
असद रिज़वी
08 Sep 2020
लखनऊ: बेरोज़गारी को लेकर सीएम आवास पर प्रदर्शन से पहले ही महिला कार्यकर्ता घर में नज़रबंद!
अपने घर की छत पर महिला कार्यकर्ता सुमैया राना और घर के बाहर तैनात पुलिस

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री आवास के बाहर, बढ़ती बेरोज़गारी को लेकर प्रदर्शन करने जा रही महिला सामाजिक कार्यकर्ता उज़्मा परवीन और सुमैया राना को उत्तर प्रदेश पुलिस ने नज़रबंद कर दिया है।

7-8 सितंबर की आधी रात से अपने आवास पर नज़रबंद इन दोनों महिलाओं का कहना है, कि सरकार धारा 144 का दुरुपयोग कर नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का हनन कर रही है।

दरअसल जिस तरह अभी 5 सितंबर को देश के कई हिस्सों में बड़ी संख्या में बेरोज़गारों ने ताली-थाली बजाकर सरकार को उसी के तरीके से चेताने की कोशिश की थी ऐसे ही आज, मंगलवार, 8 सितंबर को प्रदेश की महिलाओं ने राजधानी लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ में आवास, 05 कालिदास मार्ग, के बाहर बढ़ती बेरोज़गारी, महिलाओं के विरुद्ध हिंसा आदि के ख़िलाफ़ ताली-थाली बजाकर प्रदर्शन करने की घोषणा की थी। इस प्रदर्शन का नेतृत्व नागरिकता संशोधन क़ानून (सीएए) की मुखर विरोधी उज़्मा परवीन और सुमैया राना को करना था।

लेकिन सोमवार, 7 सितंबर की देर रात इन दोनों के आवास पर पुलिस पहुँची और इनको घर से बाहर न निकलने की हिदायत दी। पुलिसकर्मी जिनमें महिला पुलिस भी थी, हिदायत देने के बाद इसके अपार्टमेंट की पार्किंग में बैठ गए। क़ैसरबाग़ में सुमैया राना और बाज़ारख़ाला में उज़्मा परवीन के आवास के बाहर बैठी पुलिस न इनको घर से बाहर निकलने दे रही है और न इनसे मिलने किसी को जाने दे रही है।

ऐसे में उज़्मा परवीन से फ़ोन पर सम्पर्क किया तो उन्होंने बताया की उनसे पुलिस ने कहा है कि वह नज़रबंद हैं। उज़्मा परवीन के अनुसार पुलिस का कहना है कोविड-19 की वजह से शहर में धारा 144 लगी है, इसलिए धरना-प्रदर्शन नहीं किया जा सकता है। पुलिस ने कहा की अदालत के यह आदेश हैं कि हज़रतगंज और गौतमपल्ली (कालीदास मार्ग के सामने की मुख्य सड़क) पर प्रदर्शन नहीं किया जा सकता है।

उज़्मा परवीन के अनुसार बेरोज़गारी से परेशान बहुत अधिक महिलाओं का फ़ोन उनके पास आये थे। किसी की नौकरी चली गई तो किसी का कारोबार बंद हो गया है। लेकिन सरकार द्वारा किसी की कोई मदद नहीं की गई। इसके अलवा प्रदेश में महिला हिंसा का ग्राफ़ भी ऊपर जा रहा और सरकार कोरोना की रोकथाम में विफ़ल है। इन्ही समस्याओं की तरफ़ सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए मंगलवार को ताली-थाली बजाकर प्रदर्शन होना था।

सामाजिक कार्यकर्ता उज़्मा परवीन जिनपर सीएए के विरुद्ध प्रदर्शन में कई मुक़दमे लिखे गए कहती है, कि धारा 144 का सहारा लेकर उत्तर प्रदेश सरकार संवैधानिक तरीक़े से होने वाले प्रदर्शनों पर भी रोक लगा देती है। वे कहती हैं की किसी महिला को घर में बंद करने से इंक़लाब को नहीं दबाया जा सकता है। बेरोज़गारी, ग़रीबी, बढ़ते अपराध से प्रदेश की जनता त्रस्त हो चुकी है और अब विरोध की आवाज़ों को ज़्यादा दिन तक सत्ता के बल पर ख़ामोश नहीं किया जा सकता है।

मशहूर उर्दू शायर मुन्नवर राना की बेटी सुमैया राना ने भी बताया की उनको सोमवार-मंगलवार की रात से नज़रबंद कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि जिस तरह चारदीवारी में एक महिला को क़ैद किया गया उस से लगता है कि “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ” सिर्फ़ चुनाव प्रचार का एक नारा मात्र है। उन्होंने कहा कि लोग बेरोज़गारी की वजह से बच्चों की फ़ीस नहीं दे पा रहे हैं। लोगों के क़र्ज़ों की किस्तें अदा नहीं हो रही हैं। जिसकी वजह से क़र्ज़े बढ़ते जा रहे हैं। लेकिन ऐसी हालत से निपटने के लिए सरकार में पास कोई ठोस नीति नहीं है।

सुमैया राना ने कहा “जिस थाली को बजवाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 दिनों में कोरोनो ख़त्म कारने का वादा किया था, वह थाली अब ख़ाली हैं”। लगातार देश आर्थिक तंगी का शिकार होता जा रहा है। लेकिन सरकार को इसकी कोई फ़िक्र नहीं है और जब कोई आवाज़ उठता है तो बलपूर्वक उसको ख़ामोश करने का हर संभव कोसिश की जाती है।

उन्होंने कहा सरकार पहले भी कोशिश कर के देख चुकी है, लेकिन पुलिस बल से अन्याय के ख़िलाफ़ बुलंद होने वाली आवाज़ो को दबाया नहीं जा सकता है। अपनी बात आख़िर में उन्होंने कहा बेरोज़गारी के अलवा प्रदेश में महिलाओं और बच्चियों के विरुद्ध बढ़ते अपराध भी एक प्रमुख मुद्दा था, जिस के लिए आज वह प्रदर्शन करना चाहती थीं।

महिला अधिकारों के लिए सक्रिय रहने वाले संगठन अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति (एडवा) का कहना है कि धारा 144 के नाम पर जनतंत्र की हत्या हो रही है। समिति की वरिष्ठ सदस्य मधु गर्ग कहती हैं कि प्रदेश में अपराध रोकने में नाकाम सरकार धारा 144 के नाम पर नागरिक संगठनों के विरोधी स्वर दबाना चाहती है। मधु गर्ग कहती है सामाजिक कार्यकर्ता उज़्मा परवीन और सुमैया राना को प्रदर्शन से रोकना निंदनीय है। वह कहती हैं कि सत्ता पक्ष की रैलियों और कार्यक्रमों में धारा 144 हट जाती है और विपक्ष के प्रदर्शन में दोबारा लग जाती है। इस से स्पष्ट होता है धारा 144 का नाम लेकर जनता के संवैधानिक अधिकारों का हनन किया जा रहा है।

क़ानून के जानकार भी कहते हैं कि धारा 144 का दुरुपयोग हो रहा है। प्रसिद्ध अधिवक्ता मोहम्मद हैदर रिज़वी कहते हैं कि धारा 144 का उद्देश्य केवल अपराध को रोकना है, लेकिन मौजूदा दौर में इसको सज़ा की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। इस धारा के अंतर्गत किसी को गिरफ़्तार करना, नज़रबंद करना या किसी के घर के बाहर पुलिस बैठाना उचित नहीं है।

UttarPradesh
Lucknow
Yogi Adityanath
unemployment
Female social worker
Uzma Parveen
Sumaiya Rana
Activist House arrest
Munawwar Rana
UP police

Related Stories

बदायूं : मुस्लिम युवक के टॉर्चर को लेकर यूपी पुलिस पर फिर उठे सवाल

डरावना आर्थिक संकट: न तो ख़रीदने की ताक़त, न कोई नौकरी, और उस पर बढ़ती कीमतें

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

मोदी@8: भाजपा की 'कल्याण' और 'सेवा' की बात

ग्राउंड रिपोर्ट: चंदौली पुलिस की बर्बरता की शिकार निशा यादव की मौत का हिसाब मांग रहे जनवादी संगठन

यूपी में  पुरानी पेंशन बहाली व अन्य मांगों को लेकर राज्य कर्मचारियों का प्रदर्शन

UPSI भर्ती: 15-15 लाख में दरोगा बनने की स्कीम का ऐसे हो गया पर्दाफ़ाश

मोदी के आठ साल: सांप्रदायिक नफ़रत और हिंसा पर क्यों नहीं टूटती चुप्पी?

क्या वाकई 'यूपी पुलिस दबिश देने नहीं, बल्कि दबंगई दिखाने जाती है'?


बाकी खबरें

  • डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    'राम का नाम बदनाम ना करो'
    17 Apr 2022
    यह आराधना करने का नया तरीका है जो भक्तों ने, राम भक्तों ने नहीं, सरकार जी के भक्तों ने, योगी जी के भक्तों ने, बीजेपी के भक्तों ने ईजाद किया है।
  • फ़ाइल फ़ोटो- PTI
    अनिल जैन
    ख़बरों के आगे-पीछे: क्या अब दोबारा आ गया है LIC बेचने का वक्त?
    17 Apr 2022
    हर हफ़्ते की कुछ ज़रूरी ख़बरों को लेकर फिर हाज़िर हैं लेखक अनिल जैन..
  • hate
    न्यूज़क्लिक टीम
    नफ़रत देश, संविधान सब ख़त्म कर देगी- बोला नागरिक समाज
    16 Apr 2022
    देश भर में राम नवमी के मौक़े पर हुई सांप्रदायिक हिंसा के बाद जगह जगह प्रदर्शन हुए. इसी कड़ी में दिल्ली में जंतर मंतर पर नागरिक समाज के कई लोग इकट्ठा हुए. प्रदर्शनकारियों की माँग थी कि सरकार हिंसा और…
  • hafte ki baaat
    न्यूज़क्लिक टीम
    अखिलेश भाजपा से क्यों नहीं लड़ सकते और उप-चुनाव के नतीजे
    16 Apr 2022
    भाजपा उत्तर प्रदेश को लेकर क्यों इस कदर आश्वस्त है? क्या अखिलेश यादव भी मायावती जी की तरह अब भाजपा से निकट भविष्य में कभी लड़ नहींं सकते? किस बात से वह भाजपा से खुलकर भिडना नहीं चाहते?
  • EVM
    रवि शंकर दुबे
    लोकसभा और विधानसभा उपचुनावों में औंधे मुंह गिरी भाजपा
    16 Apr 2022
    देश में एक लोकसभा और चार विधानसभा चुनावों के नतीजे नए संकेत दे रहे हैं। चार अलग-अलग राज्यों में हुए उपचुनावों में भाजपा एक भी सीट जीतने में सफल नहीं हुई है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License