NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
लखनऊ होर्डिंग्स मामला: सपा के बाद कांग्रेस का पलटवार, पोस्टर के जरिए पूछा- इन दंगाइयों से वसूली कब?
तमाम फ़ज़ीहत के बाद भी यूपी सरकार अपने होर्डिंग्स/पोस्टर को हटाने को तैयार नहीं है और किसी न किसी तरह अपनी कार्रवाई को जायज ठहराने की कोशिश कर रही है। इसी कोशिश के तहत योगी सरकार अब एक अध्यादेश लेकर आई है।
सोनिया यादव
14 Mar 2020
UP hoarding

उत्तर प्रदेश सरकार लखनऊ में लगी होर्डिंग्स को लेकर पिछले कई दिनों से चर्चा में है। इलाहाबाद हाईकोर्ट से मिले सख्त अदेश के बावजूद यूपी प्रशासन ने अभी तक सड़कों से पोस्‍टर-बैनर नहीं हटाए हैं। प्रदेश सरकार के पोस्टर पर पलटवार करते हुए पहले समाजवादी पार्टी और अब कांग्रेस ने भी मोर्चा खोल दिया है।

हालांकि तमाम फ़ज़ीहत के बाद भी यूपी सरकार इन होर्डिंग्स/पोस्टर को हटाने को तैयार नहीं है और किसी न किसी तरह अपनी कार्रवाई को जायज ठहराने की कोशिश कर रही है। इसी कोशिश के तहत योगी सरकार अब एक अध्यादेश लेकर आई है।

अध्यादेश पर बात से पहले बात करते हैं वार-पलटवार यानी पोस्टर वार की।

poster.jpg

शनिवार, 14 मार्च को लखनऊ की सड़कों पर और भाजपा कार्यालय के बाहर एक पोस्टर लगा दिखाई दिया। पोस्टर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या के साथ कई केंद्रीय मंत्रियों की फोटो हैं, साथ ही चुनावी हलफनामे के दौरान मुकदमों की जानकारी के साथ लिखा है इन दंगाइयों से वसूली कब? पोस्टर के नीचे निवेदक सुधांशु वाजपेयी लालू कन्नौजिया भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस भी लिखा है।

इससे पहले समाजवादी पार्टी के एक नेता ने सत्तारूढ़ दल के दो विवादास्पद नेताओं की तस्वीर वाले पोस्टर शहर में लगवा दिए, जिन पर लिखा था ‘‘बेटियां रहें सावधान, सुरक्षित रहे हिन्दुस्तान’’। इस पोस्टर में बलात्कार का दोषी और भाजपा से निष्कासित विधायक कुलदीप सिंह सेंगर और बलात्कार के आरोपी पूर्व केंद्रीय मंत्री चिन्मयानंद की तस्वीर है। इसे ठीक उसी जगह लगाया गया था जहां योगी सरकार ने संशोधित नागरिकता कानून के विरोध में दिसम्बर में हुई हिंसा में कथित तौर पर शामिल लोगों कें संबंध में पोस्टर लगाए थे। पोस्टर के नीचे सपा नेता आई.पी सिंह का नाम लिखा है। हालांकि पुलिस ने इन पोस्टर्स को अब उतरवा दिया है लेकिन सोशल मीडिया पर अभी भी ये खूब वायरल हैं।

IMG-20200314-WA0006_0.jpg

सपा नेता आई.पी सिंह ने शुक्रवार को 'भाषा' से कहा '' मैंने गुरुवार रात करीब 11 बजे शहर में करीब 50 जगह ऐसे पोस्टर लगवाये थे लेकिन देर रात करीब एक बजे आला अधिकारियों ने पुलिस की मदद से इन पोस्टरों को हटवा दिया। ये पोस्टर काले रंग के थे और इनमें कुलदीप सिंह सेंगर और चिन्मयानंद की तस्वीर थी।''

सपा नेता आई.पी सिंह ने ऐसे एक पोस्टर की तस्वीर के साथ ट्वीट भी किया।

जब प्रदर्शनकारियों की कोई निजता नहीं है और उच्चन्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी योगी सरकार होर्डिंग नहीं हटा रही है तो ये लीजिए फिर। लोहिया चौराहे पर मैंने भी कुछ कोर्ट द्वारा नामित अपराधियों का पोस्टर जनहित में जारी कर दिया है, इनसे बेटियाँ सावधान रहें। pic.twitter.com/9AqGBxMoJR

— I.P. Singh (@IPSinghSp) March 12, 2020

उन्होंने कहा, '' जब प्रदर्शनकारियों की कोई निजता नहीं है और उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी योगी सरकार होर्डिंग नहीं हटा रही है तो ये लीजिए फिर। लोहिया चौराहे पर मैंने भी अदालत द्वारा नामित कुछ अपराधियों के पोस्टर जनहित में जारी कर दिए हैं, इनसे बेटियां सावधान रहें।''

सिंह ने एक अन्य ट्वीट में कहा '' पूरे देश से मिले समर्थन के लिए मैं आप सभी का धन्यवाद देता हूं। मेरा इरादा सिर्फ सस्ती लोकप्रियता के लालच में अंधी हो चुकी सरकार को जगाने का था। हमारी प्राथमिकता किसान की समस्या होनी चाहिए, महिला सुरक्षा होनी चाहिए, युवाओं का रोजगार होना चाहिए, देश को स्टेट्समैन की जरूरत है।'’

यह है पूरा मामला?

लखनऊ प्रशासन ने शहर के प्रमुख और भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर विवादित नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले करीब 60 लोगों के नाम और पते के साथ होर्डिंग्स लगा रखा है। इन पर आरोप लगाया गया है कि पिछले साल 19 दिसंबर को हुए प्रदर्शन के दौरान इन्होंने हिंसा की और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया है।

होर्डिंग्स में कहा गया है कि अगर आरोपी मुआवजा भरने में नाकाम रहते हैं तो उनकी संपत्तियां जब्त कर ली जाएंगी। सूत्रों के अनुसार शुक्रवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में होर्डिंग्स लगाने को न्यायोचित ठहराने वाला दो पेज का बिना हस्ताक्षर वाला एक नोट भेजा गया था। ये होर्डिंग जनहित को ध्यान में रखकर सभी नियमों का पालन करते हुए लगाए गए हैं। इसमें जानी-मानी कार्यकर्ता और नेता सदफ जाफर, मानवाधिकार वकील मोहम्मद शोएब, पूर्व आईपीएस अधिकारी एसआर दारापुरी जैसे लोगों का भी नाम शामिल हैं।

गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने 7 मार्च को इस मामले में स्वतः संज्ञान लिया था, जिसके बाद रविवार, 8 मार्च को मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान हाईकोर्ट ने लखनऊ के जिलाधिकारी और मंडल आयुक्त से पूछा था कि किस कानून के तहत ये होर्डिंग लगाए गए। मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर और रमेश सिन्हा की पीठ ने इसे बेहद अन्यायपूर्ण और लोगों की निजता का हनन बताया। जिसके बाद सोमवार, 9 मार्च के लिए फैसले को सुरक्षित रख लिया गया था।

क्या था इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला ?

जस्टिस गोविंद माथुर और जस्टिस रमेश सिन्हा की विशेष खंडपीठ ने 14 पेज के अपने फैसले में राज्य सरकार की कार्रवाई को संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत निजता के अधिकार (मौलिक अधिकार) के विपरीत करार दिया था। अदालत ने कहा था कि मौलिक अधिकारों को छीना नहीं जा सकता है। ऐसा कोई भी कानून नहीं है जो उन आरोपियों की निजी सूचनाओं को पोस्टर-बैनर लगाकर सार्वजनिक करने की अनुमति देता है, जिनसे क्षतिपूर्ति ली जानी है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि सामान्यतया न्यायपालिका में आने पर ही अदालत को हस्तक्षेप का अधिकार होता है। लेकिन जहां अधिकारियों की लापरवाही से मूल अधिकारों का उल्लंघन किया गया हो, अदालत किसी के आने का इंतजार नहीं कर सकती। निजता के अधिकार के हनन पर अदालत का हस्तक्षेप करने का अधिकार है। साथ ही प्रदेश सरकार से 16 मार्च तक पोस्टर हटाने के संबंध में की गई कार्रवाई पर रिपोर्ट देने के आदेश दिए थे।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस गोविंद माथुर और जस्टिस रमेश सिन्हा की बेंच ने अपने आदेश में कहा कि लखनऊ के जिलाधिकारी और पुलिस कमिश्नर 16 मार्च तक होर्डिंस हटवाएं। साथ ही इसकी जानकारी रजिस्ट्रार को दें। हाईकोर्ट ने दोनों अधिकारियों को हलफनामा भी दाखिल करने का आदेश दिया है।

सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?

इलाहाबाद हाईकोर्ट से मिले सख्त अदेश के बावजूद यूपी प्रशासन ने अभी तक सड़कों से पोस्‍टर-बैनर नहीं हटाए हैं। हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ बुधवार 11 मार्च को उत्‍तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की थी। जिस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की पीठ ने CAA हिंसा के कथित आरोपियों के पोस्टर लगाने के यूपी सरकार के फैसले पर हैरानी व्यक्त की। कोर्ट ने कहा कि यह सवाल उठता है कि कथित आरोपियों के पोस्टर लगाने का फैसला आखिर यूपी सरकार ने कैसे ले लिया। कोर्ट ने कहा, 'हम राज्य सरकार की चिंताओं को समझते हैं, लेकिन इस तरह का कोई कानून नहीं है जिससे कि आपके इस कदम को जायज ठहराया जा सके।'

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अभी तक ऐसा कोई कानून नहीं है, जिसके तहत उपद्रव के कथित आरोपियों की तस्‍वीरें होर्डिंग में लगाई जाएं। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के बाद इस मामले को बड़ी बेंच के हवाले कर दिया है। अब इस मामले की सुनवाई अगले हफ्ते 3 जजों की पीठ करेगी। हालांकि कोर्ट ने इस मामले में हाईकोर्ट के आदेश पर स्टे नहीं लगाया है।

यूपी सरकार अध्यादेश लाई

लेकिन कोर्ट से लेकर विपक्षी दलों से घिरी यूपी सरकार ने अब इसको लेकर एक अध्यादेश को मंजूरी दी है। लखनऊ में पोस्टर लगाने के फैसले पर हाईकोर्ट से रोक लगने और इसपर सुप्रीम कोर्ट से स्टे न मिलने पर योगी सरकार ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश रिकवरी ऑफ डैमेज टू पब्लिक एण्ड प्राइवेट प्रॉपर्टी अध्यादेश-2020 को मंजूरी दी है।

राज्य के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने संवाददाताओं को बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई बैठक में मंत्रिमंडल ने इस अध्यादेश को पारित किया। खन्ना ने अध्यादेश के बारे में विस्तार से कुछ नहीं बताया। उन्होंने इतना कहा कि जल्द ही नियमावली बनेगी जिसमें सारी चीजें स्पष्ट की जाएंगी।

UP hoardings
UttarPradesh
Yogi Adityanath
BJP
Congress
SP
Lucknow Hoardings
Allahabad High Court
Supreme Court

Related Stories

बदायूं : मुस्लिम युवक के टॉर्चर को लेकर यूपी पुलिस पर फिर उठे सवाल

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

ज्ञानवापी मस्जिद के ख़िलाफ़ दाख़िल सभी याचिकाएं एक दूसरे की कॉपी-पेस्ट!

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

आर्य समाज द्वारा जारी विवाह प्रमाणपत्र क़ानूनी मान्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट


बाकी खबरें

  • working women
    सोनिया यादव
    ग़रीब कामगार महिलाएं जलवायु परिवर्तन के चलते और हो रही हैं ग़रीब
    03 Feb 2022
    सीमित संसाधनों में रहने वाली गरीब महिलाओं का जीवन जलवायु परिवर्तन से हर तरीके से प्रभावित हुआ है। उनके स्वास्थ्य पर बुरा होने के साथ ही उनकी सामाजिक सुरक्षा भी खतरे में पड़ गई है, इससे भविष्य में…
  • RTI
    अनुषा आर॰
    गुजरात में भय-त्रास और अवैधता से त्रस्त सूचना का अधिकार
    03 Feb 2022
    हाल ही में प्रदेश में एक आरटीआई आवेदक पर अवैध रूप से जुर्माना लगाया गया था। यह मामला आरटीआई अधिनियम से जुड़ी प्रक्रियात्मक बाधाओं को परिलक्षित करता है। यह भी दिखाता है कि इस कानून को नागरिकों के…
  • cartoon
    आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक: ये दुःख ख़त्म काहे नहीं होता बे?
    03 Feb 2022
    तीन-तीन साल बीत जाने पर भी पेपर देने की तारीख़ नहीं आती। तारीख़ आ जाए तो रिज़ल्ट नहीं आता, रिज़ल्ट आ जाए तो नियुक्ति नहीं होती। कभी पेपर लीक हो जाता है तो कभी कोर्ट में चला जाता है। ऐसे लगता है जैसे…
  • Akhilesh Yadav
    भाषा
    लोकतंत्र को बचाने के लिए समाजवादियों के साथ आएं अंबेडकरवादी : अखिलेश
    03 Feb 2022
    सपा प्रमुख अखिलेश ने कहा कि, "मैं फिर अपील करता हूं कि हम सब बहुरंगी लोग हैं। लाल रंग हमारे साथ है। हरा, सफेद, नीला… हम चाहते हैं कि अंबेडकरवादी भी साथ आएं और इस लड़ाई को मजबूत करें।"
  • Rahul Gandhi
    भाषा
    मोदी सरकार ने अपनी नीतियों से देश को बड़े ख़तरे में डाला: राहुल गांधी
    03 Feb 2022
    कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘ऐसा लगता है कि एक किंग हैं, शहंशाह हैं, शासकों के शासक हैं। राहुल गांधी ने दो उद्योगपतियों का उल्लेख करते हुए सदन में कहा कि कोरोना के समय कई…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License