NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
म.प्र. उपचुनाव: बीजेपी समर्थक किसान भी अब कृषि और मॉडल मंडी कानूनों का विरोध कर रहे हैं !
कांग्रेस ने वादा किया है कि केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में पारित तीन कृषि कानूनों को वह लागू नहीं करेगी और इसके साथ ही वह राज्य में बीजेपी सरकार द्वारा पेश किये गए मॉडल मंडी अधिनियम 2020 को रद्द कर देगी।
काशिफ़ काकवी
29 Oct 2020
Mp

भोपाल: 3 नवम्बर को मध्य प्रदेश में होने जा रहे उपचुनावों में किसानों के बीच में कृषि ऋण माफ़ी और केंद्र के तीन कृषि कानूनों को लेकर जारी असंतोष की वजह से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और कांग्रेस का चुनावी गणित की पूरी तरह से उलट पुलट हो जाने की संभावना बनी हुई है।

ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के कई किसान कांग्रेस के “आधे-अधूरे” कृषि ऋण माफ़ी योजना से नाराज चल रहे हैं। कांग्रेस पार्टी ने दावा किया है कि 15 महीनों के अपने शासनकाल में इसकी सरकार को मिले कुल 55 लाख आवेदनों में से 26 लाख किसानों के कृषि ऋणों को माफ़ कर दिया गया था।

भिण्ड जिले के 50 वर्षीय राज सिंह भदौरिया जिन्होंने 32,000 रुपयों का कर्ज लिया था और जिनके पास 35 एकड़ खेती योग्य जमीन है का कहना है कि “उन्होंने इस बात का वादा किया था कि सरकार गठन के 10 दिनों के भीतर ही वे कृषि ऋणों को माफ़ कर देंगे, लेकिन 15 महीनों तक सत्ता में बने रहने के बावजूद कांग्रेस ऐसा कर पाने में विफल रही।”

वहीँ कुछ किसान जिन्होंने पिछली दफा बीजेपी के पक्ष में वोट किया था, ने संसद द्वारा लाये गए तीन कृषि कानूनों का विरोध किया। इन तीन बिलों के पारित होने से ठेके पर खेती का काम, कृषि मंडी से बाहर फसलों की बिक्री और खरीद एवं फसलों के असीमित भंडारण का रास्ता खुल गया है।

संजय शर्मा जो कि भिण्ड के महाराजपुर गाँव के रहने वाले हैं और उनके पास खेती लायक 30 एकड़ जमीन है, ने कहा “हालाँकि मैं बीजेपी का पक्का समर्थक हूँ लेकिन हाल ही में पारित कानून हमारे लिए किसी काले कानून से कम नहीं हैं।” वे आगे कहते हैं “यदि इस बिल से हमारी आय पर आँच आती है तो हम इसका पुरजोर विरोध करेंगे।”

महाराजपुर के कई अन्य निवासियों एवं आसपास के गाँवों के लोग भी नए कृषि कानूनों के विरोध में हैं। किसान नेता शिवकुमार शर्मा के नेतृत्व में राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ (आरकेएमएम) ने हाल ही में राज्य के उन जिलों में जहाँ पर चुनाव संपन्न होने जा रहे हैं, में नए कृषि कानूनों को लेकर किसानों के बीच में जागरूकता पैदा करने के लिए पूरे सप्ताह भर विरोध प्रदर्शन आयोजित किया था। 

इसके साथ ही साथ आरकेएमएम ने किसानों के लिए हिंदी में 24 पेज की एक पुस्तिका जिसका शीर्षक ‘3 कृषि कानून-किसानों के मौत का फरमान ’ है को भी प्रकाशित किया है। शर्मा कहते हैं “भिंड, मुरैना और ग्वालियर इलाकों में हम लोग सप्ताह भर से इस अभियान को चला रहे हैं और जन-जागरूकता पैदा करने के लिए इस क्षेत्र की सभी प्रमुख मण्डियों का दौरा कर चुके हैं। इस अभियान को हमने लाउडस्पीकर और पैदल चलकर पूरा किया है।”

 “चूँकि राज्य के किसान हरियाणा और पंजाब के किसानों की तरह पढ़े लिखे नहीं हैं इसलिए हम उन्हें सिर्फ उन कानूनों के बारे में बता रहे हैं जो संसद में पारित किये गए हैं। सामान्य समझ रखने वाले हर किसान ने इसका विरोध किया है” वे कहते हैं।

बीजेपी, कांग्रेस के वायदे 

28 सीटों पर होने वाले उप-चुनावों में किसानों के वोटों को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस एक बार फिर से कृषि ऋण माफ़ी स्कीम को लाने का वायदा कर रही है। इसके तहत वह दो लाख रूपये के कम के कृषि ऋणों को माफ़ करने का वादा कर रही है।

पार्टी ने इस बात का भी वायदा किया है कि हाल ही में केंद्र सरकार ने जिन तीन कृषि कानूनों को पारित किया है वह उसे राज्य में नहीं लागू करेगी और इसके साथ ही वह राज्य में बीजेपी सरकार द्वारा पेश किये गए मॉडल मंडी अधिनियम, 2020 को भी रद्द करने का काम करेगी।

इसके साथ ही कांग्रेस ने इस बात का भी वादा किया है कि पंजाब की तरह यहाँ पर भी कृषि उपज की खरीद पर न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम मूल्य पर खरीद के खिलाफ वह सख्त कानून बनाएगी।

वहीँ बीजेपी ने जो कि कांग्रेस के 26 लाख लोगों के कृषि ऋणों को माफ़ किये जाने के दावे को लेकर विधानसभा में सरकार द्वारा इस तथ्य की पुष्टि किये जाने के बाद से बैक फुट पर आ गई थी, के द्वारा राज्य के 77 लाख किसानों को प्रतिवर्ष 4,000 रूपये देने का वादा कर रही है, जिन्हें प्रधान मंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना के तहत नामांकित किया गया है।

बीजेपी इस योजना को मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि (एमकेएसएन) का नाम दे रही है।

इस बारे में एन.के. उपाध्याय ने, जो कि राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ से भी जुड़े हुए हैं, ने कहा “हमें जबर्दस्त प्रतिक्रिया मिल रही है, जो उपचुनावों को प्रभावित कर सकता है।”

हालाँकि आरएसएस के किसान मोर्चे, भारतीय किसान संघ का दावा है कि कृषि कानूनों का किसानों पर कोई असर नहीं पड़ने जा रहा है। संगठन का कहना है कि उसे इन कानूनों में चिंता करने लायक कुछ भी नहीं देखने को मिला है। 

बीकेएस के राज्य प्रमुख रामभरोस बसोटिया कहते हैं “नए कानूनों से किसानों को कोई ख़ास फर्क नहीं पड़ने जा रहा है। लेकिन यदि उन्हें ऐसी कोई भी गंभीर बात नजर आती है तो भले ही किसी की भी सरकार सत्ता में हो, वे इसके खिलाफ आन्दोलन खड़ा करने से नहीं चूकेंगे।”

Madhya Pradesh
MP Bypolls
Gwalior Chambal
MKSN
pm kisan
BJP Congress
farm loan waiver

Related Stories

परिक्रमा वासियों की नज़र से नर्मदा

कड़ी मेहनत से तेंदूपत्ता तोड़ने के बावजूद नहीं मिलता वाजिब दाम!  

मनासा में "जागे हिन्दू" ने एक जैन हमेशा के लिए सुलाया

‘’तेरा नाम मोहम्मद है’’?... फिर पीट-पीटकर मार डाला!

कॉर्पोरेटी मुनाफ़े के यज्ञ कुंड में आहुति देते 'मनु' के हाथों स्वाहा होते आदिवासी

एमपी ग़ज़ब है: अब दहेज ग़ैर क़ानूनी और वर्जित शब्द नहीं रह गया

मध्यप्रदेशः सागर की एग्रो प्रोडक्ट कंपनी से कई गांव प्रभावित, बीमारी और ज़मीन बंजर होने की शिकायत

सिवनी मॉब लिंचिंग के खिलाफ सड़कों पर उतरे आदिवासी, गरमाई राजनीति, दाहोद में गरजे राहुल

मध्यप्रदेश: गौकशी के नाम पर आदिवासियों की हत्या का विरोध, पूरी तरह बंद रहा सिवनी

राम सेना और बजरंग दल को आतंकी संगठन घोषित करने की किसान संगठनों की मांग


बाकी खबरें

  • न्यूजक्लिक रिपोर्ट
    संतूर के शहंशाह पंडित शिवकुमार शर्मा का मुंबई में निधन
    10 May 2022
    पंडित शिवकुमार शर्मा 13 वर्ष की उम्र में ही संतूर बजाना शुरू कर दिया था। इन्होंने अपना पहला कार्यक्रम बंबई में 1955 में किया था। शिवकुमार शर्मा की माता जी श्रीमती उमा दत्त शर्मा स्वयं एक शास्त्रीय…
  • न्यूजक्लिक रिपोर्ट
    ग़ाज़ीपुर के ज़हूराबाद में सुभासपा के मुखिया ओमप्रकाश राजभर पर हमला!, शोक संतप्त परिवार से गए थे मिलने
    10 May 2022
    ओमप्रकाश राजभर ने तत्काल एडीजी लॉ एंड ऑर्डर के अलावा पुलिस कंट्रोल रूम, गाजीपुर के एसपी, एसओ को इस घटना की जानकारी दी है। हमले संबंध में उन्होंने एक वीडियो भी जारी किया। उन्होंने कहा है कि भाजपा के…
  • कामरान यूसुफ़, सुहैल भट्ट
    जम्मू में आप ने मचाई हलचल, लेकिन कश्मीर उसके लिए अब भी चुनौती
    10 May 2022
    आम आदमी पार्टी ने भगवा पार्टी के निराश समर्थकों तक अपनी पहुँच बनाने के लिए जम्मू में भाजपा की शासन संबंधी विफलताओं का इस्तेमाल किया है।
  • संदीप चक्रवर्ती
    मछली पालन करने वालों के सामने पश्चिम बंगाल में आजीविका छिनने का डर - AIFFWF
    10 May 2022
    AIFFWF ने अपनी संगठनात्मक रिपोर्ट में छोटे स्तर पर मछली आखेटन करने वाले 2250 परिवारों के 10,187 एकड़ की झील से विस्थापित होने की घटना का जिक्र भी किया है।
  • राज कुमार
    जनवादी साहित्य-संस्कृति सम्मेलन: वंचित तबकों की मुक्ति के लिए एक सांस्कृतिक हस्तक्षेप
    10 May 2022
    सम्मेलन में वक्ताओं ने उन तबकों की आज़ादी का दावा रखा जिन्हें इंसान तक नहीं माना जाता और जिन्हें बिल्कुल अनदेखा करके आज़ादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है। उन तबकों की स्थिति सामने रखी जिन तक आज़ादी…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License