NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
कच्चे माल की कीमतों में भारी वृद्धि से एमएसएमई क्षेत्र प्रभावित, विरोध में उद्यमियों ने बंद किये शटर
विमुद्रीकरण, जीएसटी के हड़बड़ी में क्रियान्वयन, और बिना सोचे-विचारे कोविड-19 लॉकडाउन को लागू करने के कारण गंभीर झटके झेलने के बाद अब कच्चे माल की कीमतों में भारी वृद्धि के चलते एमएसएमई उद्योग का साँस ले पाना दूभर हो रखा है।
नीलाबंरन ए
21 Dec 2021
Tamil Nadu
कोयंबटूर में हुए विरोध प्रदर्शन में भारी संख्या में उद्यमियों ने हिस्सा लिया (चित्र साभार: थीक्कथिर)

पहली दफा, सूक्ष्म मध्यम एवं लघु उद्यमों (एमएसएमई) के उद्यमियों ने सोमवार को देशभर में एक दिन की हड़ताल की है। केंद्र सरकार की नीतियों से गंभीर रूप से प्रभावित, मार्च 2020 में अनियोजित लॉकडाउन की घोषणा और अब कच्चे माल में भारी वृद्धि के चलते एमएसएमई क्षेत्र में मौजूद तकरीबन 170 संगठनों के साथ अखिल भारतीय एमएसएमई परिषद (एआईसीए) ने विरोध स्वरुप आज कामकाज पूरी तरह से ठप रखा।

एमएसएमई क्षेत्र में मौजूद विभिन्न संगठनों के द्वारा लंबे वक्त से बढ़ते लागत मूल्यों और वित्तीय सहायता जैसे दबावकारी मुद्दों का समाधान तलाशने के लिए केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित किया जा रहा था, लेकिन इस सबसे कोई फायदा नहीं हो रहा था।

उत्पादन में करीब 25,000 करोड़ रूपये के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है, जबकि तमिलनाडु में इससे 4,000 करोड़ रूपये के नुकसान का अनुमान है। हड़ताल की वजह से तमिलनाडु में एमएसएमई के दो महत्वपूर्ण केन्द्रों– चेन्नई और इसके उपनगरीय क्षेत्रों सहित कोयंबटूर में उत्पादन को अच्छा-ख़ासा प्रभावित किया है।

‘कच्चे माल की कीमतें लगभग दुगुनी हो चुकी हैं’

दावा किया जा रहा है कि आज की हड़ताल अपनी तरह की पहली हड़ताल है, जिसमें खुद उद्यमियों ने ही काम बंद करने का फैसला लिया है।

कंसोर्टियम ऑफ़ इंडियन एसोसिएशन (सीआईए) के संयोजक के ई रघुनाथन ने कहा है, “एक उद्यमी के तौर पर मेरे चार दशकों के अनुभव में, यह पहला अवसर है जब नियोक्ताओं के द्वारा हड़ताल की जा रही है। क्या सरकार उद्यमियों के मुद्दों के प्रति इतनी अनभिज्ञ हो चुकी है? इस हद तक स्थिति पहुँच चुकी है कि उन्हें सरकार का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने के लिए कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ रहा है।” 

कोयंबटूर में एआईसीए से संबद्ध संगठनों द्वारा प्रदर्शन (चित्र साभार: थीक्कथिर)

कच्चे माल के दामों में भारी वृद्धि के खिलाफ इस क्षेत्र की करीब 20 लाख कंपनियां हड़ताल में हिस्सा ले रही हैं। 

उनका कहना था, “हाल के महीनों में एल्युमीनियम, तांबा, स्टील और इंजीनियरिंग प्लास्टिक जैसे कच्चे मालों के दामों में तकरीबन 70-100% तक की बढ़ोत्तरी हो चुकी है। पहले से ही संकटग्रस्त एमएसएमई क्षेत्र के लिए यह अब असहनीय हो गया है।

चेन्नई और इसके आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों के उद्यमियों का एक वर्ग इस हड़ताल से अलग-थलग रहा, लेकिन विरोध प्रदर्शनों में उन्होंने भाग लिया।

उद्यमियों की राष्ट्रीय हड़ताल के हिस्से के तौर पर एक एमएसएमई उद्योग बंदी की तस्वीर (चित्र साभार: थीक्काथिर)

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (सीपीआई[एम]) ने कोयंबटूर सहित कई स्थानों पर एमएसएमई संगठनों के साथ एकजुटता दिखाते हुए विरोध प्रदर्शनों में हिस्सेदारी की, जहाँ इसके पोलितब्यूरो सदस्य जी रामकृष्णन ने भी भाग लिया।

‘सांसद ने स्थगन प्रस्ताव पेश किया’

एमएसएमइ की गंभीर स्थिति और नौकरियों में भारी क्षति सहित इसके निहितार्थों को देखते हुए मदुरै के सांसद, सु वेंकटेशन ने लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव पेश किया।

सांसद ने कहा, “पिछले एक साल के दौरान कच्चे माल के दामों में असामान्य बढोत्तरी ने एमएसएमई उद्योगों को अनिश्चय की स्थिति में ला खड़ा कर दिया है। मदुरै में भी एमएसएमई इससे प्रभावित हैं और एमएसएमई का एक संगठन मेडीतिस्सिया भी इस हड़ताल में हिस्सा ले रहा है।”

कोयंबटूर सहित राज्य के अन्य हिस्सों में भी एमएसएमई उद्योग बढ़ती कीमतों से बुरी तरह से प्रभावित हैं। वेंकटेशन ने एक बयान में कहा है, “धागे की कीमतों में वृद्धि के कारण कपड़ा उद्योग बुरी तरह से प्रभावित हुआ है, जिसके चलते तिरुपुर, इरोड और कोयंबटूर में काम करने वाले लाखों श्रमिकों की आजीविका पर व्यापक असर पड़ा है।”

सांसद ने एमएसएमई क्षेत्र की कई मांगों पर भी रौशनी डाली, जिसमें कच्चे माल की कीमतों को काबू में रखने में केंद्र सरकार के हस्तक्षेप और मूल्य स्तरों की निगरानी और आयात के अवमूल्यन पर लगाम लगाने के लिए एक यथोचित तंत्र को लागू करने जैसे मुद्दे शामिल हैं।

‘वित्तीय सहायता और समर्थन की आवश्यकता’

उद्योग को केंद्र सरकार से वित्तीय सहायता और समर्थन की सख्त जरूरत है, जो कि पिछले कई वर्षों से छलावा बनी हुई है। केंद्रीय वित्त मंत्रालय के द्वारा जिस प्रोत्साहन की घोषणा की गई थी, उससे शायद ही कोई राहत मिली हो।

रघुनाथन का प्रश्न था, “18 महीने बीत जाने के बाद भी, उपयोगकर्ताओं की पात्रता में विस्तार के बावजूद, 3 लाख करोड़ रूपये का 80% भी अभी तक वितरित नहीं किया जा सका है। लेकिन हम अभी भी इसे प्रोत्साहन पैकेज 2 कहने के लिए 1.5 लाख करोड़ बढ़ा रहे हैं। आखिर हम किसे बेवकूफ बना रहे हैं?”

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के द्वारा लोकसभा में उठाये गए एक सवाल के जवाब में एमएसएमई मंत्री नारायण राणे ने जवाब में बताया है कि 9% एमएसएमई ने अपना कारोबार बंद कर दिया है।

जवाब में कहा गया है कि, “राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम लिमिटेड ने कोविड-19 महामारी के प्रभाव का आकलन करने के लिए अगस्त 2020 में 32 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में करीब 5,774 एमएसएमई उद्योगों को कवर करते हुए एक ऑनलाइन सर्वेक्षण किया था। इसमें पाया गया है कि 91% एमएसएमई चालू हालत में हैं जबकि 9% एमएसएमई कोविड-19 के प्रभाव के चलते बंद हो चुके हैं।”

जवाब में इस बात को भी स्वीकारा गया कि 2019 और 2020 में क्रमशः 9,052 और 11,716 स्व-रोजगार से जुड़े व्यक्तियों ने आत्महत्याएं की, और यह कि सरकार के पास एमएसएमई क्षेत्र के लिए अलग से मौतों का कोई आंकड़ा मौजूद नहीं है।

अंग्रेजी में मूल रूप से प्रकाशित लेख को पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें

MSMEs hit by Raw Materials’ Price Rise, Entrepreneurs Down Shutters in Protest

MSME Strike
Raw Material Price Rise
BJP government policies
GST
Consortium of Indian Associations
All India Council of Association of MSMEs
Closure of MSMEs

Related Stories

किसान आंदोलन का सबक़ : लहरें नहीं मानतीं शाही हुक्मनामों को


बाकी खबरें

  • Bundelkhand
    न्यूज़क्लिक टीम
    उप्र चुनाव: 'कैराना पलायन' के उलट बुंदेलखंड से पलायन चुनावी मुद्दा क्यों नहीं बनता
    04 Feb 2022
    बुंदेलखंड में कई गांव वीरान दिखाई देते हैं। बांस, मिट्टी, फूस, पुआल और कच्ची ईंटों से बने मकानों पर ताले लटके हुए हैं। कथित 'कैराना पलायन' के इसके विपरीत यह क्षेत्र बड़े पैमाने पर हो रहे विस्थापन के…
  • UttarPradesh
    लाल बहादुर सिंह
    यूपी चुनाव: नहीं चल पा रहा ध्रुवीकरण का कार्ड
    04 Feb 2022
    तमाम कोशिशों के बाद भी यूपी में बीजेपी का हिंदू-मुस्लिम का कार्ड नहीं चल पा रहा है। पश्चिम UP से आने वाली ग्राउंड रिपोर्ट्स बता रही हैं कि ध्रुवीकरण तो नहीं ही हुआ, उल्टे जाट समुदाय में, किसानों में…
  • CPIM
    भाषा
    नोएडा : रालोद- सपा गठबंधन के प्रत्याशियों को समर्थन देगी माकपा
    04 Feb 2022
    ग्रेटर नोएडा के स्वर्ण नगरी में स्थित प्रेस क्लब में बृहस्पतिवार को पत्रकार वार्ता के दौरान माकपा के जिला प्रभारी गंगेश्वर दत्त शर्मा ने मौजूदा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘भारतीय जनता पार्टी (…
  • tomar
    भाषा
    सरकार विधानसभा चुनावों के बाद एमएसपी समिति गठित करने के लिए प्रतिबद्ध : तोमर
    04 Feb 2022
    तोमर ने कहा कि एमएसपी पर समिति बनाने का मामला मंत्रालय के विचाराधीन है और विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद इसका गठन किया जाएगा।
  • RRb
    भाषा
    रेलवे ने आरआरबी परीक्षा प्रदर्शन को लेकर दो लाख अभ्यर्थियों से संपर्क साधा
    04 Feb 2022
    रेलवे ने एनटीपीसी और ‘लेवल-1’ की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में प्रदर्शन करने सड़कों पर उतरे अभ्यर्थियों से संपर्क साधना शुरू किया है और बृहस्पतिवार को उसने करीब दो लाख विद्यार्थियों से…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License