NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
AUKUS के विश्वासघात के ख़िलाफ़ मैक्रोन का बदला
फ़्रांस के राष्ट्रपति ने नवीनतम रफ़ाल सौदा कर पश्चिम एशिया में एंग्लो-सैक्सन गठजोड़ पर बड़ा हमला किया है जहां यह सबसे अधिक चोट पहुंचाता है - संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब।
एम. के. भद्रकुमार
08 Dec 2021
Translated by महेश कुमार
AUKUS के विश्वासघात के ख़िलाफ़ मैक्रोन का बदला
सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (दाएं) फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन का जेद्दा में स्वागत करते हुए, 4 दिसंबर, 2021

फ्रांस जैसी महान शक्तियों में खुद के इतिहास और ऐतिहासिक अनुभव की अस्थायीता की गहन समझ है - या, उनका, अतीत, वर्तमान और भविष्य उनकी अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में कैसे जोड़ा जाता है उसकी काफी समझ है।

इसीलिए यह माना जा सकता है कि अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के बीच AUKUS समझौता एक भयावह गलती थी। ऑस्ट्रेलिया को एक महत्वहीन तृतीय-स्तरीय राष्ट्र होने के लिए एक बार माफ़ किया जा सकता है, लेकिन अमेरिका और ब्रिटेन को यह पता होना चाहिए कि समय आने पर फ्रांस विधिवत बदला लेगा। 

और यह सबसे अप्रत्याशित तरीके से हुआ है क्योंकि फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रोन ने पश्चिम एशिया में एंग्लो-सैक्सन गठजोड़ पर हमला बोल दिया है, जहां यह सबसे अधिक चोट पहुंचाता है – वह है संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब। 

मैक्रोन ने 3 दिसंबर को संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा के दौरान 80 फ्रांसीसी निर्मित रफ़ाल लड़ाकू जेट विमानों के लिए 19 अरब डॉलर का अनुबंध हासिल कर बड़े पैमाने पर राजनयिक तख्तापलट किया है, जो युद्धक विमानों के लिए अब तक का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय सौदा है।

हथियारों के सौदे में 80 रफ़ाल लड़ाकू जेट और 12 सैन्य हेलीकॉप्टर शामिल हैं। एक फ्रांसीसी अधिकारी ने पत्रकारों को बताया कि यह सौदा सीधे फ्रांस में 7,000 नौकरियों के पैदा होने में मदद करेगा और 2031 के अंत तक डसॉल्ट एविएशन ने आपूर्ति करने की गारंटी दी है। रफ़ाल बनाने वाली कंपनी डसॉल्ट एविएशन एसए के शेयरों में 9 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी आई है।

फिर भी, यह एक "स्टैंड-अलोन" व्यापार सौदे से कहीं अधिक है। देश में हुआवेई 5जी तकनीक की व्यापकता सहित चीन के साथ अबू धाबी के संबंधों के बारे में चिंताओं के बीच एफ-35 सौदे को मंजूरी देने में राष्ट्रपति बाइडेन की हिचकिचाहट पर मैक्रोन ने अमीराती दिमाग में मौजूद बेसब्री का दोहन किया है।

बाइडेन प्रशासन संयुक्त अरब अमीरात के एफ-35 स्टील्थ फाइटर सौदे को दबाए बैठा है, जो  तेल अवीव और अबू धाबी के बीच राजनयिक संबंधों को लेकर तथाकथित अब्राहम समझौते के सहायक होने का परिणाम था, और जिसने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की विदेश नीति को उनके कार्यकाल के अंतिम दिनों में पश्चिम एशिया में जीत हासिल कराई थी। 

अप्रैल में, अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता ने 23 बिलियन डॉलर के सौदे के बारे में कहा था कि, "हम पुष्टि करना चाहते हैं कि अमरीकी प्रशासन यूएई को प्रस्तावित रक्षा बिक्री सौदे के साथ आगे बढ़ने का इरादा रखता है, भले ही हम विवरण की समीक्षा करना जारी रखेंगे ताकि  यह सुनिश्चित किया जा सके कि डिलीवरी से पहले अमीरात के अधिकारियों से इस बारे में परामर्श लिया गया है और इस दौरान और बाद में अमीराती दायित्वों के संबंध में आपसी समझ विकसित की गई है ... हम यूएई के साथ एक मजबूत और निरंतर बातचीत की उम्मीद करते हैं (यह सुनिश्चित करने के लिए) कि कोई भी रक्षा हस्तांतरण एक मजबूत, अंतर-संचालन योग्य और अधिक सक्षम सुरक्षा साझेदारी बनाने के लिए हमारे पारस्परिक रणनीतिक उद्देश्यों को पूरा करता है।"

बाइडेन प्रशासन ने चेतावनी देते हुए कहा कि यूएई को चीन के साथ अपने मजबूत संबंधों को वापस लेना चाहिए और एफ-35 का इस्तेमाल कहां और किन परिस्थितियों में किया जा सकता है वह प्रतिबंधित होना चाहिए।

सीधे शब्दों में कहें तो, संयुक्त अरब अमीरात एफ-35 खरीदने के मामले में बड़े धन का भुगतान तो करेगा लेकिन इसका इस्तेमाल नियंत्रण अमरीका के पास होगा और दूसरी बात, यह नव-विकसित लड़ाकू विमान (जिसे इज़राइल ने विकसित किया है) का सबसे उन्नत संस्करण भी नहीं हो सकता है।

यदि इस बात से यूएई नेतृत्व अपमानित महसूस करता है, तो उसने अभी तक अपनी भावनाओं को ज़ाहिर नहीं किया है। लेकिन संयुक्त अरब अमीरात की क्षेत्रीय नीतियों में नई सोच हाल ही में खुद के लिए बोलना है। पैट्रियट मिसाइलों में अंकारा की रुचि और अमेरिका के पूर्वाग्रह को देखते हुए रफ़ाल सौदे की तुलना तुर्की के साथ रूस द्वारा किए गए एस-400 मिसाइलों के सौदे से की जा सकती है। संयुक्त अरब अमीरात ने भी बिना किसी हिचक के अन्य स्रोतों से उन्नत हथियारों की खरीद के लिए अमेरिका से मुह मोड लिया है।

फ्रांस ने अमेरिका की दबाव रणनीति को कमजोर किया है। खाड़ी क्षेत्र पर अमेरिका के हटते ध्यान के बारे में खाड़ी अरब देशों की बढ़ती अनिश्चितता के बीच, एलिसी पैलेस ने एक बयान में कहा कि, "यह अनुबंध एक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करता है जो पहले से कहीं ज्यादा मजबूत है और सीधे क्षेत्रीय स्थिरता में योगदान देता है।"

विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने रविवार को यूएई के क्राउन प्रिंस शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ फोन पर बात की। विदेश विभाग ने कहा कि उन्होंने "महत्वपूर्ण क्षेत्रीय मामलों पर चर्चा की है, और दोनों देशों की मजबूत साझेदारी की पुष्टि की है और अपने व्यापक सहयोग को और गहरा करने के तरीकों पर चर्चा की है।"

सचमुच, ब्लिंकन के चेहरे पर अंडा पड़ा है। इज़राइल, संयुक्त अरब अमीरात और भारत के साथ एक विशेष पश्चिम एशियाई समूह (जिसे "क्वाड॰2" कहा गया है) बनाने की खुद की पहल के एक पखवाड़े के भीतर ही, अबू धाबी, सीरिया, तुर्की और ईरान के साथ सामान्यीकरण की दिशा में एक विपरीत दिशा में आगे बढ़ गया है। (जिनमें से किसी का भी अमेरिका और/या इज़राइल के साथ कोई संवाद नहीं है)

वैसे, सीरिया, तुर्की, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब के शासकों के बीच कुछ खास किस्म की समानता है – उपरोक्त सभी को 9-10 दिसंबर को होने वाली अमरीकी "लोकतंत्र  शिखर सम्मेलन" में 110 आमंत्रितों की बाइडेन की अतिथि सूची से बाहर रखा गया है। 

बाइडेन की घुड़की अब दर्द कर रही होगी। अभी जबकि बाइडेन के शिखर सम्मेलन में केवल तीन दिन बचे हैं, संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शेख तहन्नून बिन जायद अल नाहयान, जो क्राउन प्रिंस के भाई भी हैं, ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली शामखानी और सर्वोच्च नेता के सलाहकार के निमंत्रण पर तेहरान के दौरे पर जा रहे हैं। 

तेहरान टाइम्स ने बताया कि "आपसी संबंधों को बढ़ाना और क्षेत्र में नवीनतम घटनाओं पर विचार साझा करना, संयुक्त अरब अमीरात के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी की तेहरान यात्रा के मुख्य उद्देश्यों में से एक है।"

बेशक, AUKUS संधि ने ऑस्ट्रेलिया को 36.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर की 12 डीजल-संचालित फ्रांसीसी पनडुब्बियों की बिक्री से जुड़े एक बहुत बड़े सौदे को मार डाला है। लेकिन मैक्रोन के लिए संयुक्त अरब अमीरात के साथ रफ़ाल सौदा केवल शुरुआत हो सकती है और इसके बाद और भी आश्चर्य हो सकता है। 

अबू धाबी से, मैक्रोन सऊदी क्राउन के प्रमुख मोहम्मद बिन सलमान के साथ बैठक के लिए सऊदी अरब के लिए रवाना हो गए हैं। इस यात्रा का प्रतीकवाद प्रबल था। तीन साल पहले जमाल खशोगी की हत्या में शामिल होने के आरोप के बाद से मैक्रोन सऊदी अरब का दौरा करने और क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से मिलने वाले पहले प्रमुख पश्चिमी नेता बन गए हैं।

"प्रिंस मोहम्मद ने जेद्दा में एक शाही महल में मैक्रोन की अगवानी की, जहां उन्होंने एक लंबे रिश्ते के लिया हाथ मिलाया है। ब्लूमबर्ग ने बताया कि सऊदी मीडिया और प्रभाव रखने वाले लोगों ने मुस्कुराते और साथ-साथ चलते दोनो नेताओं की तस्वीर का प्रसारण किया है।” 

फारस की खाड़ी में फ्रांस की स्थिति को मजबूत करते हुए, मैक्रोन यह भी संकेत दे रहे हैं कि वाशिंगटन पर निर्भरता को कम करने के लिए खाड़ी राज्यों के बीच बढ़ती चर्चा के बीच फ्रांस पश्चिम एशिया में अमेरिका के विकल्प के रूप में काम कर सकता है। उन्होंने प्रिंस मोहम्मद के साथ लेबनान में राजनीतिक संकट को हल करने की पहल पर भी चर्चा की है।

बाइडेन ने मानवाधिकारों के हनन को लेकर सऊदी अरब की एक "नीच" राज्य के रूप में निंदा करते हुए व्हाइट हाउस में प्रवेश किया था और कसम खाई थी कि वे क्राउन प्रिंस के साथ बात नहीं करेंगे। 

लेकिन वाशिंगटन ने हाल ही में पीछे हटना शुरू कर दिया है, यह महसूस करते हुए कि रियाद के साथ उनके कई नीतिगत लक्ष्यों, विशेष रूप से ऊर्जा बाजारों में शामिल होने की अनिवार्य जरूरत है। व्हाइट हाउस के एक प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को ओपेक+ की बैठक की पूर्व संध्या पर रियाद का दौरा किया, जिसमें अमेरिका में बढ़ती मुद्रास्फीति को शांत करने के लिए अधिक तेल आपूर्ति की मांग की गई है।

मैक्रोन के आगे बढ़ने से, लगता है बाइडेन अपने झूठे गर्व को निगलने और सऊदी क्राउन प्रिंस के साथ बात करने के दबाव में आ रहे हैं जो वास्तविक शासक हैं। AUKUS के माध्यम से फ्रांस के साथ किए गए विश्वासघात की उसे यह अंतिम कीमत चुकानी पड़ सकती है।

एम. के. भद्रकुमार एक पूर्व राजनयिक हैं। वे उज़्बेकिस्तान और तुर्की में भारत के राजदूत रह चुके हैं। व्यक्त विचार व्यक्तिगत हैं।

Courtesy: Indian Punchline
QUAD.2
Saudi Arabia
UAE

Related Stories

खाड़ी में पुरानी रणनीतियों की ओर लौट रहा बाइडन प्रशासन

सऊदी अरब के साथ अमेरिका की ज़ोर-ज़बरदस्ती की कूटनीति

यमन में ईरान समर्थित हूती विजेता

अमेरिका ने ईरान पर फिर लगाम लगाई

यमन के लिए यूएन का सहायता सम्मेलन अकाल और मौतों की चेतावनियों के बीच अपर्याप्त साबित हुआ

ईरान नाभिकीय सौदे में दोबारा प्राण फूंकना मुमकिन तो है पर यह आसान नहीं होगा

यमन में युद्ध अपराध की जांच कर रहे यूएन इंवेस्टिगेटर की जासूसी के लिए सऊदी ने किया पेगासस का इस्तेमाल

तुर्की-यूएई रिश्तों में सुपर ब्लूम के मायने क्या हैं?

ज़ी न्यूज़ के संपादक को UAE ने अपने देश में आने से रोका

दो क्वाडों की कथा


बाकी खबरें

  • CORONA
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 15 हज़ार से ज़्यादा नए मामले, 278 मरीज़ों की मौत
    23 Feb 2022
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 15,102 नए मामले सामने आए हैं। देश में कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 4 करोड़ 28 लाख 67 हज़ार 31 हो गयी है।
  • cattle
    पीयूष शर्मा
    यूपी चुनाव: छुट्टा पशुओं की बड़ी समस्या, किसानों के साथ-साथ अब भाजपा भी हैरान-परेशान
    23 Feb 2022
    20वीं पशुगणना के आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि पूरे प्रदेश में 11.84 लाख छुट्टा गोवंश है, जो सड़कों पर खुला घूम रहा है और यह संख्या पिछली 19वीं पशुगणना से 17.3 प्रतिशत बढ़ी है ।
  • Awadh
    लाल बहादुर सिंह
    अवध: इस बार भाजपा के लिए अच्छे नहीं संकेत
    23 Feb 2022
    दरअसल चौथे-पांचवे चरण का कुरुक्षेत्र अवध अपने विशिष्ट इतिहास और सामाजिक-आर्थिक संरचना के कारण दक्षिणपंथी ताकतों के लिए सबसे उर्वर क्षेत्र रहा है। लेकिन इसकी सामाजिक-राजनीतिक संरचना और समीकरणों में…
  • रश्मि सहगल
    लखनऊ : कौन जीतेगा यूपी का दिल?
    23 Feb 2022
    यूपी चुनाव के चौथे चरण का मतदान जारी है। इस चरण पर सभी की निगाहें हैं क्योंकि इन क्षेत्रों में हर पार्टी की गहरी हिस्सेदारी है।
  • Aasha workers
    वर्षा सिंह
    आशा कार्यकर्ताओं की मानसिक सेहत का सीधा असर देश की सेहत पर!
    23 Feb 2022
    “....क्या इस सबका असर हमारी दिमागी हालत पर नहीं पड़ेगा? हमसे हमारे घरवाले भी ख़ुश नहीं रहते। हमारे बच्चे तक पूछते हैं कि तुमको मिलता क्या है जो तुम इतनी मेहनत करती हो? सर्दी हो या गर्मी, हमें एक दिन…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License