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मध्यप्रदेश ओबीसी सीट मामला: सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला अप्रत्याशित; पुनर्विचार की मांग करेगी माकपा
मध्य प्रदेश पंचायत चुनावों में ओबीसी आरक्षण समाप्त करने, अन्य पिछड़े समुदायों के लिए निर्धारित और आरक्षित पदों पर चुनाव रोकने, उनकी बहुसंख्या को सामान्य सीटों में परिवर्तित करने का निर्देश देने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले को मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी अप्रत्याशित और अयाचित मानती है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
20 Dec 2021
Supreme Court

मध्य प्रदेश में स्थानीय निकाय में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षित सीटों पर चुनाव प्रक्रिया रोक दिये जाने और उन सीटों को सामान्य वर्ग के लिए फिर से अधिसूचित करने का राज्य निर्वाचन आयोग (एसईसी) को उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्देश दिये जाने के बाद से ही प्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी कांग्रेस के बीच जुबानी जंग छिड़ गई है और वे एक दूसरे पर निशाना साध रहे हैं। इस बrच वाम दल माकपा ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को अप्रत्याशित बताया और कहा वो इस पर पुनर्विचार की मांग करेगी।

पुनर्विचार की मांग करेगी माकपा

मध्य प्रदेश पंचायत चुनावों में ओबीसी आरक्षण समाप्त करने, अन्य पिछड़े समुदायों के लिए निर्धारित और आरक्षित पदों पर चुनाव रोकने, उनकी बहुसंख्या को सामान्य सीटों में परिवर्तित करने का निर्देश देने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले को मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी अप्रत्याशित और अयाचित मानती है। सुप्रीम कोर्ट ने जिस याचिका पर यह निर्णय सुनाया है उसमे इस तरह की न तो मांग ही की गयी थी ना ही यह वाद का विषय था। यह हैरानी की बात है कि सर्वोच्च अदालत ने इसके बावजूद यह आदेश जारी कर दिया।

माकपा राज्य सचिव जसविंदर सिंह के अनुसार मनुवादी सोच पर चलने वाली मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार की तरफ से भी जानबूझकर इस मामले में अदालत के समक्ष सही तरीके से पक्ष नहीं रखा गया। इसके नतीजे के दूरगामी असर हो सकते हैं। जनता के वंचित और पिछड़े हिस्से की बड़ी आबादी अपने जायज, संविधानसम्मत, लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित हो जाएगी।

माकपा 23 दिसंबर को प्रदेश भर में ओबीसी आरक्षण समाप्ति का विरोध करेगी और जिला प्रशासन के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय को आवेदन भेजकर इसे तुरंत स्थगित करने का आग्रह करेगी।

बीजेपी और कांग्रेस में जुबानी जंग

भाजपा ने जहां कांग्रेस को 'ओबीसी विरोधी' करार दिया, वहीं कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि भाजपा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के आरक्षण खत्म करने के मंसूबे को कारगर करने का काम कर रही है।

मध्य प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री भूपेन्द्र सिंह ने सागर में शनिवार को संवाददाताओं को बताया, ‘‘कांग्रेस हमेशा से ही ओबीसी वर्ग की विरोधी रही है। पहले भी जब भाजपा की सरकार ने सरकारी नौकरियों में ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय लिया, तब भी कांग्रेस ने इस काम में बाधा डालने की कोशिश की थी।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ओबीसी आरक्षण पर रोक लगाने का षड़यंत्र मध्य प्रदेश कांग्रेस का है। उच्चतम न्यायालय ने 17 दिसंबर को पंचायत चुनाव में ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देने पर रोक लगाई है। यह सब कांग्रेस के षड़यंत्र के कारण हुआ है।’’

सिंह ने कहा कि कांग्रेस ने उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की। अदालत में कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ वकील विवेक तन्खा ने भाजपा सरकार द्वारा ओबीसी वर्ग को पंचायत चुनाव में दिए गए 27 प्रतिशत आरक्षण का विरोध किया। इसके बाद अदालत ने इस आरक्षण पर रोक लगाई है।

भाजपा-आरएसएस की साज़िश!

कांग्रेस विधायक एवं प्रदेश के पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल ने ट्विटर पर वीडियो जारी कर भाजपा एवं आरएसएस पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘मध्य प्रदेश चुनाव को लेकर उच्चतम न्यायालय ने पिछड़ा वर्ग का आरक्षण खत्म करने का जो निर्णय लिया है, वह कहीं न कहीं आरएसएस और भारतीय जनता पार्टी के मंसूबे का परिणाम है।’’

उन्होंने आगे कहा, ‘‘राज्य सरकार द्वारा सही तरह से पैरवी न करने के कारण न्यायालय द्वारा यह निर्णय लिया गया है। इसके लिए पूरी तरह से राज्य की शिवराज सरकार, भाजपा और आरएसएस के नेता जिम्मेदार हैं, जो आरक्षण व्यवस्था खत्म करना चाहते हैं। आरएसएस सरसंघचालक मोहन भागवत जी ने बहुत पहले इसका उल्लेख किया था कि इसकी समीक्षा होनी चाहिए और कहीं न कहीं वे अपने मंसूबे में कारगर साबित हो रहे हैं।’’

याचिकाकर्ता मनमोहन नागर ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘हम वकील से परामर्श के बाद इस फैसले के खिलाफ फिर से उच्चतम न्यायालय में अपील दायर करेंगे।’’

इसी बीच, राज्य निर्वाचन आयुक्त बसंत प्रताप सिंह ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के पालन में राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा त्रि-स्तरीय पंचायतों के आम निर्वाचन वर्ष 2021-22 के लिए जारी कार्यक्रम के अंतर्गत अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित पंच, सरपंच, जनपद पंचायत एवं जिला पंचायत सदस्य के पदों की निर्वाचन प्रक्रिया स्थगित कर दी गई है।

उल्लेखनीय है कि प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए जिला पंचायत सदस्य के 155, जनपद पंचायत सदस्य के 1273, सरपंच के 4058 और पंच के 64 हजार 353 पद आरक्षित हैं।

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ )

Supreme Court
MP OBC seat case
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