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भारत
राजनीति
मध्य प्रदेश पुलिस भर्ती: माकपा ने कहा भ्रष्टाचार की हवस में युवाओं का भविष्य ही बर्बाद करने पर तुली है भाजपा
"यह पहली बार हुआ है कि 6000 आरक्षकों की भर्ती में सरकार की ओर से अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग, महिलाओं, आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग आदि के लिए न तो आवंटित सीटों की घोषणा की गई है और न ही अंकों की कट ऑफ़ घोषित की गई है, और इनके बिना ही परीक्षा परिणाम घोषित कर दिए गए हैं।"
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
31 Mar 2022
mp
'प्रतीकात्मक फ़ोटो' फोटो साभार: भोपाल समाचार

मध्य प्रदेश में शिक्षक वर्ग तीन की परीक्षा के पेपर लीक होने की घटना की अभी स्याही भी नहीं सूखी है कि पुलिस आरक्षकों की भर्ती का घोटाला सामने आ गया है। जिसको लेकर सवाल उठ रहे हैं। वाम दल भारत की  कम्युनिस्ट पार्टी(मार्क्सवादी) यानी माकपा ने कहा कि  घोटालों में पारंगत हो चुकी भाजपा सरकार अब प्रदेश के युवाओं का भविष्य ही अंधकार में डुबोने में लगी हुई है।

आपको बता दें मध्य प्रदेश प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड (MPPEB) ने  6000 पुलिस कांस्टेबल (पुलिस आरक्षकों) की भर्ती परीक्षा का रिजल्ट गुरुवार, 17 मार्च 2022 को जारी किया। लेकिन इस रिजल्ट को लेकर अभ्यर्थी कई गड़बडियों का आरोप लगा रहे हैं।  हिंदुस्तान अख़बार की खबर के मुताबिक़ रिजल्ट में गड़बड़ियों को लेकर प्रदर्शन कर रहे उम्मीदवारों का कहना है कि छत्तरपुर जिले से सामान्य वर्ग की एक भी महिला अभ्यर्थी का चयन नहीं हुआ। जबकि आंसर की के हिसाब से उनका स्कोर काफी अच्छा था। वहीं एक अभ्यर्थी ने बताया कि परीक्षा में यदि दो भाइयों ने भाग लिया जिनमें एक का स्कोर 62 और दूसरे का स्कोर 72 है, तो 62 स्कोर वाले को क्वॉलीफाई किया गया है , जबकि 72 स्कोर वाले को डिस्क्वॉलीफाई किया गया है।  

इस पर माकपा  के राज्य सचिव जसविंदर सिंह ने उक्त बयान जारी करते हुए कहा है कि यह पहली बार हुआ है कि 6000 आरक्षकों की भर्ती में सरकार की ओर से अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग, महिलाओं, आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग आदि के लिए न तो आवंटित सीटों की घोषणा की गई है और न ही अंकों की कट ऑफ़ घोषित की गई है, और इनके बिना ही परीक्षा परिणाम घोषित कर दिए गए हैं।

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने कहा है कि इसका परिणाम यह हुआ है कि ज्यादा अंकों वाले परीक्षार्थी सिलेक्ट नहीं हुए और कम अंकों वाले परीक्षार्थी सिलेक्ट कर दिए गए हैं।

माकपा नेता जसविंदर सिंह ने कहा है कि यह सिर्फ भ्रष्टाचार कर  न केवल योग्य युवाओं के भविष्य क़ो चौपट करने की साजिश है, बल्कि दलितों, आदिवासियों और पिछड़ों का आरक्षण खत्म कर भाजपा और संघ परिवार के मनुवादी एजेंडे को भी आगे बढ़ाने की साजिश है।

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने कहा है कि इस घटना से साफ है कि नाम बदलने से आचरण नहीं बदलता। भाजपा की शिवराज सरकार ने भी भ्र्ष्टाचार और युवाओं के भविष्य क़ो चौपट करने वाले व्यापम का नाम बदल कर पीईबी कर दिया था मगर अब यह भ्र्ष्टाचार व्यापम तीन के नाम से जाना जा रहा है।

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने शिक्षक वर्ग 3 की परीक्षा फिर से करवाने और पुलिस के आरक्षकों की भर्ती में विभिन्न समुदायों के आरक्षण कोटे और कट ऑफ तुरंत घोषित करने की मांग की है।

Madhya Pradesh
Madhya Pradesh Police Recruitment
CPIM
BJP
Shivraj Singh Chouhan

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