NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
मध्यप्रदेश:  लाठीचार्ज से कोरोना वॉरियर्स का अपमान, कहां गया ताली-थाली का सम्मान!
नियमित नौकरी की मांग को लेकर राजधानी भोपाल में धरने पर बैठे कोरोना वॉरियर्स पर भोपाल पुलिस ने जमकर डंडे बरसाए हैं।
सोनिया यादव
04 Dec 2020
लाठीचार्ज से कोरोना वॉरियर्स का अपमान
फोटो साभार : सोशल मीडिया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले जहां कोरोना योद्धाओं के सम्मान में ताली और थाली बजवाई थी अब उन्हीं योद्धाओं पर मध्यप्रदेश की बीजेपी सरकार लाठीचार्ज करवा रही है। मीडिया में आई खबरों की मानें तो आंदोलन कर रहे कई हेल्थ वर्कर्स को लाठीचार्ज में गंभीर चोटें आई हैं तो वहीं कई प्रदर्शकारियों को पुलिस ने गिरफ्तार भी किया है। इस घटना के बाद विपक्ष सरकार पर हमलावर है तो वहीं सरकार मामले में उचित कदम उठाने की बात कर रही है।

क्या है पूरा मामला?

नियमित नौकरी की मांग को लेकर करीब 500 हेल्थ वर्कर्स मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के नीलम पार्क में बीते तीन दिनों से धरने पर बैठे थे। पुलिस ने इन प्रदर्शनकारी चिकित्साकर्मियों पर गुरुवार, 3 दिसंबर को जमकर लाठीचार्ज किया और प्रदर्शन स्थल से खदेड़ दिया।

हेल्थ वर्कर्स के मुताबिक कोरोना संकट के दौरान एमपी सरकार ने अप्रैल 2020 में छह हज़ार से ज्यादा स्वास्थ्यकर्मियों को तीन महीने के लिए कॉन्ट्रैक्ट पर रखा था। लेकिन कोरोना के बढ़ते संक्रमण का खतरा देख दो बार और इनके कॉन्ट्रैक्ट को रिन्यू कर दिया गया। यानी कुल मिलाकर नौ महीने का कॉन्ट्रैक्ट हो गया। अब 31 दिसंबर को इन स्वास्थ्य कर्मियों का कॉन्ट्रैक्ट खत्म हो रहा है, जिसे लेकर हेल्थ वर्कर्स राज्य सरकार से सेवा बहाली और नौकरियों के नियमितीकरण की मांग कर रहे हैं।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक प्रदर्शनकारी कई दिनों से शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे लेकिन मामले ने तब तूल पकड़ा जब 3 दिसंबर को पुलिस नीलम पार्क पहुंची और उनसे जगह खाली करने को कहने लगी। हेल्थ वर्कर्स जब अपनी बात पर डटे रहे, तो पुलिस ने लाठीचार्ज किया। इस दौरान करीब 15 हेल्थ वर्कर्स को चोट भी लगी। 47 को हिरासत में लिया गया, जिनमें से 15 को बाद में गिरफ्तार कर लिया गया। घटना के कई सारे वीडियो भी इस वक्त वायरल हो रहे हैं।

प्रदर्शनकारी हेल्थ वर्कर्स का क्या कहना है?

मीडिया मे छपी खबरों के मुताबिक प्रदर्शनकारी हेल्थ वर्कर्स का आरोप है कि प्रदेश में अभी कोरोना खत्म नहीं हुआ है फिर भी मिशन डायरेक्टर छवि भारद्वाज बेवजह लगातार स्वास्थ्य कर्मचारियों को हटा रही हैं। जबकि पिछले दिनों राजधानी में खुद स्वास्थ्य मंत्री प्रभु राम चौधरी ने उन्हें भरोसा दिया था कि उनकी सेवा समाप्त नहीं की जाएगी।

उनका कहना है कि प्रदेश में कोरोना की रोकथाम के लिए उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर दिन-रात काम किया। भूखे-प्यासे रह कर तमाम कठिनाईयों को झेलते हुए मरीजों की देखभाल की बावजूद इसके राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन द्वारा अकारण सेवा से निकाल दिया गया है।

इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे डॉ. जितेंद्र कुशवाहा ने स्थानीय मीडिया को बताया कि कोरोना मरीजों को अस्पताल में समय से उपचार देने के लिए 6200 स्वास्थ्य कर्मियों की नियुक्ति की गई थी। इनमें डॉक्टर सहित एएनएम एवं अन्य कर्मचारी शामिल थे। अब मिशन द्वारा 3000 कर्मचारियों को हटा दिया गया है।

डॉ. जितेंद्र कुशवाहा के अनुसार जब तक सेवा बहाली नहीं हो जाती तब तक स्वास्थ्यकर्मी राजधानी में ही डेरा डाले रहेंगे और अपने हक़ की आवाज़ उठाते रहेंगे।

आंदोलनकारी हेल्थ वर्कर्स का कहना है कि वे नीलम पार्क में शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे लेकिन पुलिस ने मौके पर उनकी पिटाई की जिसमें आधा दर्जन महिला डॉक्टर और नर्स घायल हुए हैं। यहां तक की एक गर्भवती महिला को भी मारा गया। इसके बाद पुलिस कई प्रदर्शनकारियों को वाहन में भरकर ले गई । जिसमें से कुछ को बाद में छोड़ दिया गया तो वहीं कुछ को गिरफ्तार किया गया है।

image

अस्पतालों में इन कर्मचारियों की ज़रूरत

मध्यप्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉक्टर एसबी सिंह का कहना है कि मध्यप्रदेश में अभी कोरोना का प्रकोप कम नहीं हुआ है। ऐसे में फिलहाल अस्पतालों में इन कर्मचारियों की जरूरत है।

डॉक्टर एसबी सिंह के अनुसार राजधानी भोपाल सहित प्रदेश के प्रत्येक जिले में हर दिन कोरोना मामलों में बढ़ोतरी हो रही है। ऐसे में मौजूदा सप्ताह के दौरान ही इस संबंध में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपेंगे। ऐसे समय में कर्मचारियों को सेवा से निकालना कहीं से भी उचित नहीं है।

पुलिस क्या कह रही है?

इस घटना के संबंध में भोपाल पुलिस का कहना है कि प्रदर्शकारियों ने पहले पुलिस पर हमला किया। जिसके बाद हालात को काबू में करने के लिए पुलिस द्वारा कम से कम फोर्स का इस्तेमाल किया गया।

भोपाल के एएसपी रजत सकलेचा ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “वो पिछले चार दिनों से प्रदर्शन कर रहे थे और हेल्थ मिनिस्टर और सांसद से भी मुलाकात की थी। उनकी मांगें सीएम तक पहुंचा दी गई थीं। फिर भी वो बिना परमिशन के प्रोटेस्ट कर रहे थे। उनसे जगह खाली करने के लिए कहा गया, इसके बाद कुछ ने पुलिस पर हमला करने की कोशिश की। एक पुलिसकर्मी को चोट भी लगी। इस दौरान हमने कम से कम फोर्स का इस्तेमाल किया।”

They were protesting for last 4 days & had met Health Minister & MP. Their demands were forwarded to CM. Still they were protesting without permission. They were asked for arrest, some of them tried to attack Police & a cop was injured. Minimum force used for arrest: Bhopal ASP https://t.co/if0T4SpCEY pic.twitter.com/PwUwP9OROC

— ANI (@ANI) December 3, 2020

सरकार क्या कह रही है?

डॉक्टरों के आंदोलन के संबंध में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी ने मीडिया को बताया कि अभी यह मामला उनके संज्ञान में नहीं आया है। अधिकारियों से चर्चा कर पूरी स्थिति का पता लगाया जाएगा। निष्कासित डॉक्टर नर्स सहित अन्य स्टाफ के हित में क्या अच्छे से अच्छा किया जाए, इस दिशा में तत्काल काम प्रारंभ किया जाएगा।

प्रभु राम चौधरी के अनुसार यह लोग क्यों आंदोलन कर रहे हैं इस संबंध में अधिकारियों से चर्चा की जाएगी। अस्पतालों से कितने लोगों को हटाया गया है। इसकी अधिकारियों के माध्यम से रिपोर्ट मांगी जा रही है।

विपक्ष ने सरकार पर साधा निशाना

मध्यप्रदेश के पूर्व सीएम और कांग्रेस नेता कमलनाथ ने कोरोना वॉरियर्स पर हुए लाठीचार्ज की निंदा करते हुए दोषियों पर तुरंत कड़ी कार्रवाई की मांग की।

जहाँ एक तरफ़ विश्व भर में कोरोना योद्धाओं का सम्मान किया जा रहा है , उन्हें प्रोत्साहित किया जा रहा है वही दूसरी तरफ़ मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार उन पर बर्बर तरीक़े से लाठियाँ बरसा रही है , यह घटना बेहद निंदनीय व मानवीयता व इंसानियत को शर्मसार करने वाली। pic.twitter.com/Besp56S9Kc

— Office Of Kamal Nath (@OfficeOfKNath) December 3, 2020

कमलनाथ ने ट्वीट किया, “जहां एक तरफ़ विश्व भर में कोरोना योद्धाओं का सम्मान किया जा रहा है, उन्हें प्रोत्साहित किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ़ मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार उन पर बर्बर तरीके से लाठियां बरसा रही हैं। ये घटना बेहद निंदनीय और मानवीयता व इंसानियत को शर्मसार करने वाली है।”

कमलनाथ ने मांग की कि लाठीचार्ज के दोषियों पर तुरंत कड़ी कार्रवाई हो और हेल्थ वर्कर्स की मांगों पर तुरंत सहानुभूति के साथ फैसला लिया जाए।

Bad scenes

Female covid warrior was brutally attacked by MP(Bhopal) Police. @ChouhanShivraj please do something as she was firstly COVID WARRIOR and secondly FEMALE COVID WARRIOR.
PLEASE TAKE ACTION IMMEDIATELY ON THOSE, WHO ARE INVOLVED IN THE ACT. https://t.co/hpu92yKi3U pic.twitter.com/ePeASGEWvK

— Dr Amarinder Singh Malhi AP/DM/SR AIIMS, New Delhi (@drasmalhi) December 3, 2020

गौरतलब है कि अभी कुछ दिनों पहले ही देश ने किसानों के आंदोलन पर पुलिस की बर्बता देखी थी। इससे पहले सीएए और एनआरसी के विरोध में छात्रों और प्रदर्शकारी लोगों पर लाठीचार्ज की आलोचना हुई थी। अब कोरोना योद्धाओं पर बरसी पुलिस की लाठियों का सोशल मीडिया पर लोग जमकर विरोध कर रहे हैं। कोरोना के मुश्किल समय में उनके योगदान को याद करते हुए बीजेपी की शिवराज सरकार पर जमकर हल्ला बोल रहे हैं। तो वहीं अभी पूरे मामले पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने चुप्पी साध रखी है।

Madhya Pradesh
MP police
Lathicharge on Health workers
Corona warriors
Shivraj Singh Chauhan
kamalnath
BJP

Related Stories

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

सिवनी मॉब लिंचिंग के खिलाफ सड़कों पर उतरे आदिवासी, गरमाई राजनीति, दाहोद में गरजे राहुल

दिल्लीः एलएचएमसी अस्पताल पहुंचे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मंडाविया का ‘कोविड योद्धाओं’ ने किया विरोध

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

मध्यप्रदेश: गौकशी के नाम पर आदिवासियों की हत्या का विरोध, पूरी तरह बंद रहा सिवनी

राम सेना और बजरंग दल को आतंकी संगठन घोषित करने की किसान संगठनों की मांग

आईपीओ लॉन्च के विरोध में एलआईसी कर्मचारियों ने की हड़ताल

जहाँगीरपुरी हिंसा : "हिंदुस्तान के भाईचारे पर बुलडोज़र" के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन


बाकी खबरें

  • farmers
    चमन लाल
    पंजाब में राजनीतिक दलदल में जाने से पहले किसानों को सावधानी बरतनी चाहिए
    10 Jan 2022
    तथ्य यह है कि मौजूदा चुनावी तंत्र, कृषि क़ानून आंदोलन में तमाम दुख-दर्दों के बाद किसानों को जो ताक़त हासिल हुई है, उसे सोख लेगा। संयुक्त समाज मोर्चा को अगर चुनावी राजनीति में जाना ही है, तो उसे विशेष…
  • Dalit Panther
    अमेय तिरोदकर
    दलित पैंथर के 50 साल: भारत का पहला आक्रामक दलित युवा आंदोलन
    10 Jan 2022
    दलित पैंथर महाराष्ट्र में दलितों पर हो रहे अत्याचारों की एक स्वाभाविक और आक्रामक प्रतिक्रिया थी। इसने राज्य के राजनीतिक परिदृश्य को बदल दिया था और भारत की दलित राजनीति पर भी इसका निर्विवाद प्रभाव…
  • Muslim Dharm Sansad
    रवि शंकर दुबे
    हिन्दू धर्म संसद बनाम मुस्लिम धर्म संसद : नफ़रत के ख़िलाफ़ एकता का संदेश
    10 Jan 2022
    पिछले कुछ वक्त से धर्म संसदों का दौर चल रहा है, पहले हरिद्वार और छत्तीसगढ़ में और अब बरेली के इस्लामिया मैदान में... इन धर्म संसदों का आखिर मकसद क्या है?, क्या ये आने वाले चुनावों की तैयारी है, या…
  • bjp punjab
    डॉ. राजू पाण्डेय
    ‘सुरक्षा संकट’: चुनावों से पहले फिर एक बार…
    10 Jan 2022
    अपने ही देश की जनता को षड्यंत्रकारी शत्रु के रूप में देखने की प्रवृत्ति अलोकप्रिय तानाशाहों का सहज गुण होती है किसी निर्वाचित प्रधानमंत्री का नहीं।
  • up vidhan sabha
    लाल बहादुर सिंह
    यूपी: कई मायनों में अलग है यह विधानसभा चुनाव, नतीजे तय करेंगे हमारे लोकतंत्र का भविष्य
    10 Jan 2022
    माना जा रहा है कि इन चुनावों के नतीजे राष्ट्रीय स्तर पर नए political alignments को trigger करेंगे। यह चुनाव इस मायने में भी ऐतिहासिक है कि यह देश-दुनिया का पहला चुनाव है जो महामारी के साये में डिजिटल…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License