NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
कृषि
भारत
राजनीति
महाराष्ट्र: किसानों की एक और जीत, किसान विरोधी बिल वापस लेने को एमवीए सरकार मजबूर
मोदी सरकार के तीनों कृषि क़ानूनों को निरस्त करने के लिए मजबूर होने के बाद अब महाराष्ट्र विकास अघाड़ी सरकार ने वर्तमान में जारी विधानसभा सत्र के दौरान विधायी कामकाज के लिए सूचीबद्ध प्रस्तवित विधेयकों को वापस लेने का फैसला लिया है।
अमेय तिरोदकर
24 Dec 2021
kisan

मुंबई: महाराष्ट्र के किसानों ने एक बार फिर अपनी ताकत को दिखाया है। उनकी एकजुटता और दृढ़ संकल्प ने महाराष्ट्र विकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार को कृषि उत्पादों की खेती और विपणन से संबंधित तीन प्रस्तावित विधेयकों को वापस लेने के लिए मजबूर कर दिया है।

वर्तमान में राज्य का विधायी सत्र मुंबई में चल रहा है जहां कार्य सूची में तीन प्रस्तावित कानूनों को वापस लेने का मामला सूचीबद्ध है। ये तीन विधेयक नरेंद्र मोदी सरकार की बेहद विवादग्रस्त एवं अत्यधिक आलोचना वाले कृषि कानूनों पर आधारित थे, जिसके कारण एक साल तक चले आंदोलन की वजह से उन्हें आखिरकार रद्द करना पड़ा। लेकिन नवंबर में इस ऐतिहासिक जीत के बाद अब जब देशव्यापी किसानों का आंदोलन स्थगित हो गया है, तो ऐसे में महाराष्ट्र विकास अघाड़ी सरकार के पास इन विधेयकों को रद्द करने के सिवाय अब कोई विकल्प नहीं रह गया है।

महाराष्ट्र सरकार ने खेती में तथाकथित सुधार और कृषि उपज के विपणन के संबंध में विधानसभा में तीन बिलों को पेश किया था। न्यूज़क्लिक ने उस दौरान इन बिलों की खामियों को उजागर किया था, जिसकी मुखालफत सभी किसान यूनियनों के द्वारा भी की गई थी।

महाराष्ट्र में इन विधेयकों को राज्य के राजस्व मंत्री बालासाहेब थोराट, विपणन मंत्री बालासाहेब पाटिल और खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल द्वारा पेश किया गया था। किसान यूनियनों ने इन विधेयकों की आलोचना की थी और इन्हें अब वापस लिए जा चुके केंद्रीय कानूनों का ‘लघु संस्करण’ बताया था।

राज्य सरकार ने सभी हितधारकों को अपनी आपत्तियां और सुझावों को दर्ज करने के लिए तीन महीने का समय दिया था। इन विधेयकों को इस वर्ष विधायी सदनों के मानसून सत्र के दौरान पेश किया गया था। महाराष्ट्र में मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कहा था कि ये विधेयक मोदी सरकार के कृषि कानूनों में महज ‘मामूली हेरफेर’ हैं।

किसान बिलों में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को शामिल करने की मांग कर रहे हैं। लेकिन एमवीए सरकार ने यहां पर चतुराई दिखाने की कोशिश की है। खरीद विधेयक की पहली पंक्ति में कहा गया है कि किसानों और व्यापारियों के बीच होने वाला समझौता एमएसपी के बराबर और ऊपर होना चाहिए। लेकिन दूसरी पंक्ति कहती है कि यदि समझौता दो वर्षों से कम समय के लिए है, तो कीमतों को एमएसपी से नीचे तय किया जा सकता है। किसान संगठनों ने इस पर कड़ा एतराज जताया था।

महाराष्ट्र में 40 से अधिक किसान संगठनों के समूह, संयुक्त किसान सभा (एसकेएम) सहित इसके अखिल भारतीय निकाय ने इन विधेयकों पर लिखित आपत्तियां दी थीं। उनके द्वारा इस वर्ष अगस्त से लेकर दिसंबर तक अनेकों विरोध प्रदर्शन भी किये गए। 28 नवंबर को मुंबई में हुई किसान महापंचायत के दौरान, इन कानूनों को वापस लेने के लिए महाराष्ट्र सरकार को चेतावनी दी गई थी। यदि इन विधेयकों पर आगे भी जोर दिया जाता तो राज्य में इससे भी बड़े आंदोलन होने की संभावना थी।

लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने के लिए मजबूर हो जाने के बाद, महाराष्ट्र विकास अघाड़ी कोई जोखिम लेना नहीं चाहती और उसने तीनों प्रस्तावित विधेयकों को वापस लेने का फैसला ले लिया है।

संसदीय मामलों के मंत्री अनिल परब ने कहा, “हमने इस सत्र में तीनों प्रस्तावित विधेयकों को निरस्त करने के लिए निर्धारित कर रखा है। ये विधेयक केंद्र सरकार के कानूनों पर आधारित थे। लेकिन चूंकि मोदी सरकार ने इन कानूनों को वापस ले लिया है, ऐसे में हम भी इन विधेयकों को वापस ले रहे हैं।”

किसान यूनियनों ने महाराष्ट्र विकास अघाड़ी सरकार के फैसले का स्वागत किया है। अखिल भारतीय किसान सभा (एआईकेएस) के अध्यक्ष, अशोक धवले ने कहा, “राज्य सरकार को इस पर कड़ा रुख अपनाना चाहिए था और विधेयकों को खारिज कर सकती थी। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ है। इससे एमवीए सरकार के बारे में काफी कुछ पता चलता है। खेती के इस नए कॉर्पोरेट मॉडल को भारत के किसानों ने सिरे से ख़ारिज कर दिया है और महाराष्ट्र विकास अघाड़ी को अब जाकर वास्तविकता का अहसास हो रहा है।”

उन्होंने कहा, “ये विधेयक कुछ और नहीं बल्कि कॉर्पोरेट को पिछले दरवाजे से प्रवेश कराने के लिए लाये गए थे। इन विधेयकों के जरिये सरकारी खरीद नीति पर सारा नियंत्रण कॉर्पोरेट के हाथों सुपुर्द किया जाना था। लेकिन चूंकि भारत के किसान मोदी सरकार के खिलाफ डट कर खड़े रहे, ऐसे में एमवीए को इसके लिए कोई भविष्य नहीं दिख रहा है। यह तो अच्छा है कि राज्य सरकार ने प्रस्तावित बिलों को वापस लेने का फैसला लिया है, वरना इसके खिलाफ अब तक का सबसे मजबूत और सबसे बड़ा आंदोलन खड़ा होना था।”

महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री बालासाहेब थोराट ने बुधवार को मुंबई में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि तीनों विधेयकों को वापस लेने का फैसला राज्य मंत्रिमंडल में सर्वसम्मति से हुआ। थोराट ने कहा, “हमने तो सिर्फ विधेयकों पर बहस की शुरुआत की थी। सभी तीनों विधेयक सुझावों और इनमें आवश्यक संसोधनों के लिए खुले थे। अच्छी बात है कि मोदी सरकार ने कानूनों को निरस्त कर दिया है। एमवीए लगातार मोदी सरकार के विधेयकों का विरोध कर रही थी। कृषि कानूनों के इस निरस्तीकरण (संसद में) ने किसानों की ताकत को दिखा दिया है।”

महाराष्ट्र विधासभा का सत्र वर्तमान में चल रहा है और विधायी कार्यवाही में प्रस्तावित कानूनों को रद्द करने का प्रस्ताव निर्धारित है। इस शीतकालीन सत्र में इस बात की उम्मीद की जा रही थी कि बगैर किसी चर्चा के इन विधेयकों को पारित करा लिया जायेगा, लेकिन दिल्ली में मोदी सरकार के खिलाफ किसानों की बड़ी लड़ाई जीत लेने के बाद, इसे रद्द किये जाने के फैसले को किसानों की एकजुट ताकत के लिए एक बड़ी जीत के तौर पर देखा जा रहा है।

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

Maharashtra: Another Victory for Peasants as MVA Govt Forced to Take Back Anti-Farmer Bills

Maharashtra Govt
MVA Govt
Maharashtra Farm Bills
SKM
Farmers’ Protest
MVA Bills
Bills Withdrawn
AIKS

Related Stories

क्यों मिला मजदूरों की हड़ताल को संयुक्त किसान मोर्चा का समर्थन

पूर्वांचल में ट्रेड यूनियनों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल के बीच सड़कों पर उतरे मज़दूर

देशव्यापी हड़ताल के पहले दिन दिल्ली-एनसीआर में दिखा व्यापक असर

बिहार में आम हड़ताल का दिखा असर, किसान-मज़दूर-कर्मचारियों ने दिखाई एकजुटता

"जनता और देश को बचाने" के संकल्प के साथ मज़दूर-वर्ग का यह लड़ाकू तेवर हमारे लोकतंत्र के लिए शुभ है

मोदी सरकार की वादाख़िलाफ़ी पर आंदोलन को नए सिरे से धार देने में जुटे पूर्वांचल के किसान

ग़ौरतलब: किसानों को आंदोलन और परिवर्तनकामी राजनीति दोनों को ही साधना होगा

एमएसपी पर फिर से राष्ट्रव्यापी आंदोलन करेगा संयुक्त किसान मोर्चा

बंगाल: बीरभूम के किसानों की ज़मीन हड़पने के ख़िलाफ़ साथ आया SKM, कहा- आजीविका छोड़ने के लिए मजबूर न किया जाए

कृषि बजट में कटौती करके, ‘किसान आंदोलन’ का बदला ले रही है सरकार: संयुक्त किसान मोर्चा


बाकी खबरें

  • tripura
    संदीप चक्रवर्ती, शांतनु सरकार
    त्रिपुरा निकाय चुनाव: विपक्ष का सत्तारूढ़ भाजपा-आईपीएफटी पर बड़े पैमाने पर मतदाताओं को डराने-धमकाने का आरोप
    26 Nov 2021
    सीपीआई (एम), टीएमसी द्वारा कानून-व्यवस्था के उल्लंघन की शिकायत मिलने के पश्चात सर्वोच्च न्यायालय की ओर से गृह मंत्रालय को केंद्रीय बलों की 2 अतिरिक्त कंपनियां भेजने के निर्देश के बावजूद हिंसा की…
  • Uttar Pardesh West
    तारिक अनवर
    उत्तरप्रदेश: मेंथे की खेती में अब पैसे नहीं, किसानों का सरकार पर अनदेखी का आरोप  
    26 Nov 2021
    उत्तर प्रदेश में मेंथा की खेती ने अपना आकर्षण इसलिए खो दिया है, क्योंकि किसान स्थिर मूल्य, एमएसपी और सरकारी समर्थन के बिना ही संघर्ष कर रहे हैं।
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 10,549 नए मामले, 488 मरीज़ों की मौत
    26 Nov 2021
    देश में कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 3 करोड़ 45 लाख 55 हज़ार 431 हो गयी है।
  • women and children are suffering from anemia
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    NFHS-5 : तक़रीबन 50 फ़ीसदी औरतें और बच्चे ख़ून की कमी की बीमारी से जूझ रहे हैं!
    26 Nov 2021
    सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार 78% महिलाओं का बैंक खाता है तो 50% महिलाएं ख़ून की कमी से जूझ रही हैं। साल भर काम और काम का नगद मेहनताना महज़ 23 प्रतिशत महिलाओं को मिल रहा है।
  • kisan andolan
    लाल बहादुर सिंह
    किसान-आंदोलन ने इस देश को बदल दिया
    26 Nov 2021
    किसान-आंदोलन ने हमारे लोकतंत्र को बचा लिया है। इतिहास का यह सबक एक बार फिर सही साबित हुआ कि फासीवाद का नाश मेहनतकश वर्गों के प्रतिरोध से ही होता है। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License