NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
2 सीटों पर NOTA ने पाया दूसरा पायदान: लोगों का गुस्सा, विकल्पहीनता या राजनीति
भारतीय राजनीति के इतिहास में पहली बार मतदाताओं ने नोटा को दूसरा पायदान दिया। लातूर और पालूस खाडेगांव सीट पर नोटा को दूसरे नंबर पर सबसे ज्यादा वोट मिले। इसके चलते चर्चाओं का बाज़ार गर्म है।
अमेय तिरोदकर
26 Oct 2019
nota
image courtesy: CNBC

लातूर ग्रामीण में कांग्रेस के धीरज देशमुख ने 1,35,000 वोट हासिल किए। उन्होंने 27,500 वोट पाकर दूसरे नंबर पर रहे NOTA को ''हराया''। पश्चिमी महाराष्ट्र के सांगली जिले की पालूस खाडेगांव सीट पर भी यही हाल रहा। यहां कांग्रेस के विश्वजीत देशमुख को 1,71,497 वोट मिले। वहीं दूसरे नंबर पर सबसे ज्यादा 20,631 वोट NOTA में पड़े। यह भारतीय चुनावों के इतिहास मे पहली बार है जब नोटा दूसरे नंबर पर आया। लोग इस बारे में चर्चा का माहौल गर्म है। क्या मतदाताओं के पास बेहतर विकल्प नहीं था या कुछ और बात है? या इसके पीछे भी कोई राजनीति है?

लातूर ग्रामीण में जीते धीरज देशमुख पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के बड़े नेता रहे विलासराव देशमुख के बेटे हैं। धीरज 2017 में जिला परिषद के सदस्य बने थे। यह उनका राजनीति में आगमन था। उनके भाई अमित 2009 में पहली बार विधायक बने और 2014 और 2019 में भी वे विधानसभा चुनाव जीते। इस बार उन्होंने लातूर शहर से चुनाव लड़ा था।

इससे पहले लातूर ग्रामीण बीजेपी के साथ रही है। यहां पैसे और संपर्क के मामले में बीजेपी के पास मजबूत रमेश कराड जैसा मजबूत नेता था। लेकिन इस बार बीजेपी ने सीट शिवसेना के लिए खाली छोड़ दी। दरअसल पार्टी ने शिवसेना के साथ लातूर जिले की ही औसा सीट की अदला-बदली की थी। औसा में शिवसेना का मजूबत आधार है। लेकिन शिवसेना ने बीजेपी की बात मानकर लातूर ग्रामीण सीट पर चुनाव लड़ा, जहां पार्टी का कोई आधार नहीं है। सवाल उठता है कि बीजेपी-शिवसेना ने क्यों अपने गढ़ छोड़कर एक दूसरे की सीट पर चुनाव लड़ा।

लातूर ग्रामीण में नोटा के अच्छे प्रदर्शन से संबंधित एक कहानी कुछ इस तरह है।

औसा में कांग्रेस प्रदेश कार्यकारिणी अध्यक्ष बासवराज पाटिल बीजेपी के अभिमन्यु पवार से चुनाव लड़ रहे थे। अभिमन्यु मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस के साथ 5 साल बतौर ओएसडी तैनात थे। तो फड़णवीस चाहते थे कि उनका ओएसडी विधायक बने। अभिमन्यु पहले लातूर ग्रामीण की तरफ नजर गढ़ाए हुए थे, जहां बीजेपी का मजबूत आधार है। लेकिन जब साफ हो गया कि लातूर ग्रामीण से धीरज चुनाव लड़ेगे, तो फड़णवीस ने अभिमन्यु को औसा भेज दिया।

अब औसा भी बीजेपी के लिए कठिन सीट थी, लेकिन लातूर ग्रामीण उससे ज्यादा। क्योंकि धीरज विलासराव के ''पसंदीदा'' बेटे के तौर पर जाने जाते हैं। चूंकि अब विलासराव नहीं हैं, इसलिए धीरज के साथ सहानुभूति की लहर भी थी। लेकिन इससे भी नोटा के दूसरा नंबर पर आने की बात समझ नहीं आती। अब यहां कहानी का दूसरा हिस्सा आता है।

विलासराव देशमुख और गोपीनाथ मुंडे पक्के दोस्त थे। 2009 में विधानसभा पुनर्सीमन से पहले मुंडे रेनापुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ते थे। अब रेनापुर विधानसभा का एक बड़ा हिस्सा लातूर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में आता है। दोनों की दोस्ती इतनी खुली थी कि वे एक दूसरे की विधानसभा में मदद किया करते थे। दोनों की यह दोस्ती अगली पीढ़ी में अमित देशमुख और पंकजा मुंडे के बीच भी कायम है।

तो इसलिए पंकजा, लातूर ग्रामीण में बीजेपी प्रत्याशी का चुनाव लड़ना पसंद नहीं कर रही थीं। इसलिए मैदान पर समीकरण बदल गए। सेना ने धीरज के खिलाफ कमजोर प्रत्याशी खड़ा किया, जिसे केवल 13,000 वोट मिले।तो नोटा को लोगों ने आदर्श विकल्प के तौर पर नहीं चुना, बल्कि उनके पास कोई दूसरा विकल्प ही नहीं था। इसलिए बीजेपी मतदाताओं की एक बड़ी संख्या जो शिवसेना के उम्मीदवार के लिए वोट नहीं करना चाहती थी, उसने नोटा चुना। इसलिए नोटा के वोट बीजेपी मतदाताओं की देवेंद्र फड़णवीस से नाराजगी दिखाते हैं, जो इस खेल को खेल रहे थे।

कुछ इसी तरह पालूस खाडेगांव में हुआ। कांग्रेस के विश्वजीत कदम, पतंगराव कदम के बेटे हैं। पतंगराव की मौत 2018 में हुई थी। 2018 उपचुनावों में विश्वजीत निर्विरोध चुने गए थे। उस वक्त बीजेपी के संग्राम देशमुख, जो कदम परिवार के विरोधी रहे हैं, उन्होंने पर्चा भरा था। लेकिन उन्होंने यह कहकर अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली कि वो विधानसभा चुनावों में लड़ेंगे। इस बार उन्होंने सारी तैयारियां कर ली थीं। पर बीजेपी को लग रहा था कि विश्वजीत कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल होंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

इस बीच एक मजबूत बीजेपी प्रत्याशी के होते हुए भी फड़णवीस ने यह सीट शिवसेना को दे दी। सेना ने कदम परिवार के पारंपरिक विरोधी संग्राम देशमुख के भाई पृथ्वीराज देशमुख को टिकट दिया। चूंकि शिवसेना के पास जमीन पर कोई आधार नहीं था, इसलिए उसने कमजोर प्रत्याशी खड़ा किया, जिसे सिर्फ 8,937 वोट मिले। विश्वजीत ने यह सीट 1,62,000 वोटों से जीत ली। यह राज्य में जीत का दूसरा सबसे बड़ा अंतर है। उनसे ज्यादा वोटों से केवल अजित पवार ही 1,65,000 वोटों से जीते हैं।

यहां भी मतदाताओं ने इसलिए नोटा चुना क्योंकि वे देशमुख परिवार के समर्थक थे और एक कड़ी लड़ाई के बिलकुल आसान बन जाने से नाराज थे।

सवाल उठता है कि देवेंद्र फड़णवीस ने दो मजबूत बीजेपी सीटों को कांग्रेस प्रत्याशियों के लिए क्यों खाली छोड़ा? सीधी बात है कि इन दोनों सीटों पर मजबूत कांग्रेस नेताओं की संतानें चुनाव लड़ रही थीं। ऊपर से दोनों मराठा थे। इस चुनाव में फड़णवीस अपने खिलाफ मराठा भावनाओं को शांत करने की कोशिश कर रहे थे। लोगों का कहना है कि उनकी रणनीति थी कि कांग्रेस के मजबूत मराठा परिवारों के खिलाफ कड़ी लड़ाई न लड़ी जाए। ताकि राज्य में मराठा गर्व, एकता का कारण न बन जाए।

यह रणनीति फड़णवीस के लिए मराठवाड़ा और उत्तरी महाराष्ट्र के हिस्सों में कारगर रही। लेकिन इससे दो विधानसभा सीटों पर नोटा दूसरे नंबर पर रहा और देश की राजनीति में एक तरह का इतिहास बन गया

Maharashtra Elections
NOTA Comes Second
Latur Rural
Palus Kadegaon
Devendra Fadnavis
Shiv sena
BJP
Congress
Marathas

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • श्याम मीरा सिंह
    यूक्रेन में फंसे बच्चों के नाम पर PM कर रहे चुनावी प्रचार, वरुण गांधी बोले- हर आपदा में ‘अवसर’ नहीं खोजना चाहिए
    28 Feb 2022
    एक तरफ़ प्रधानमंत्री चुनावी रैलियों में यूक्रेन में फंसे कुछ सौ बच्चों को रेस्क्यू करने के नाम पर वोट मांग रहे हैं। दूसरी तरफ़ यूक्रेन में अभी हज़ारों बच्चे फंसे हैं और सरकार से मदद की गुहार लगा रहे…
  • karnataka
    शुभम शर्मा
    हिजाब को गलत क्यों मानते हैं हिंदुत्व और पितृसत्ता? 
    28 Feb 2022
    यह विडम्बना ही है कि हिजाब का विरोध हिंदुत्ववादी ताकतों की ओर से होता है, जो खुद हर तरह की सामाजिक रूढ़ियों और संकीर्णता से चिपकी रहती हैं।
  • Chiraigaon
    विजय विनीत
    बनारस की जंग—चिरईगांव का रंज : चुनाव में कहां गुम हो गया किसानों-बाग़बानों की आय दोगुना करने का भाजपाई एजेंडा!
    28 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश के बनारस में चिरईगांव के बाग़बानों का जो रंज पांच दशक पहले था, वही आज भी है। सिर्फ चुनाव के समय ही इनका हाल-चाल लेने नेता आते हैं या फिर आम-अमरूद से लकदक बगीचों में फल खाने। आमदनी दोगुना…
  • pop and putin
    एम. के. भद्रकुमार
    पोप, पुतिन और संकटग्रस्त यूक्रेन
    28 Feb 2022
    भू-राजनीति को लेकर फ़्रांसिस की दिलचस्पी, रूसी विदेश नीति के प्रति उनकी सहानुभूति और पश्चिम की उनकी आलोचना को देखते हुए रूसी दूतावास का उनका यह दौरा एक ग़ैरमामूली प्रतीक बन जाता है।
  • MANIPUR
    शशि शेखर
    मुद्दा: महिला सशक्तिकरण मॉडल की पोल खोलता मणिपुर विधानसभा चुनाव
    28 Feb 2022
    मणिपुर की महिलाएं अपने परिवार के सामाजिक-आर्थिक शक्ति की धुरी रही हैं। खेती-किसानी से ले कर अन्य आर्थिक गतिविधियों तक में वे अपने परिवार के पुरुष सदस्य से कहीं आगे नज़र आती हैं, लेकिन राजनीति में…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License