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महाराष्ट्र: कोरोना रक्षकों पर कहर जारी, अब तक 22 हज़ार से अधिक पुलिसकर्मी संक्रमित, 40 डॉक्टरों की मौत
महाराष्ट्र में बीती 23 मार्च से अब तक करीब 14 लाख व्यक्ति कोरोना संक्रमित हुए हैं। इनमें 35 हजार से अधिक मरीज दम तोड़ चुके हैं। मरने वाले कुल मरीजों में आठ हजार से अधिक अकेले राजधानी मुंबई के हैं। इसके बाद पुणे और ठाणे सर्वाधिक प्रभावित हैं।
शिरीष खरे
30 Sep 2020
महाराष्ट्र
प्रतीकात्मक तस्वीर। साभार : सोशल मीडिया

पुणे: महाराष्ट्र में कोरोना रक्षकों पर संक्रमण का कहर इस हद तक टूटा है कि यहां अब तक बाइस हजार से अधिक पुलिसकर्मी बीमार हुए हैं और करीब चालीस डॉक्टरों की मौत हो चुकी है। वहीं, राज्य में कोरोना से मरने वाले पुलिसकर्मियों की संख्या ढाई सौ के करीब पहुंच चुकी है। यह खुलासा राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आंकड़ों में हुआ है।

इसके साथ ही यह आशंका भी जाहिर की जा रही है कि वर्ष 2020 के अंत तक राज्य में कोरोना से होने वाली मौतों की तादाद एक लाख के पार हो जाएगी। बता दें कि महाराष्ट्र में बीती 23 मार्च से अब तक करीब 14 लाख व्यक्ति कोरोना संक्रमित हुए हैं। इनमें 35 हजार से अधिक मरीज दम तोड़ चुके हैं। मरने वाले कुल मरीजों में आठ हजार से अधिक अकेले राजधानी मुंबई के हैं। इसके बाद पांच हजार से अधिक मरीजों की मौत के साथ पुणे दूसरे और चार हजार से अधिक मरीजों की मौत के साथ ठाणे तीसरे स्थान पर है।

दूसरी तरफ, एक चिंताजनक तथ्य यह है कि राज्य के पुलिसकर्मियों में कोरोना संक्रमण की दर बहुत तीव्र होती जा रही है। राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों की मानें तो यहां 23 मार्च के बाद से अब तक पुलिस बल की बड़ी संख्या कोरोना-ग्रस्त हो चुकी है और यही सिलसिला चलता रहा तो आने वाले एक से दो महीनों में पुलिस बल की कुल संख्या का दस से पंद्रह प्रतिशत हिस्सा कोरोना से संक्रमित हो सकता है।

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गौर करने वाली बात यह भी है कि अब तक कुल 25 प्रतिशत से अधिक पुलिसकर्मी अकेले सितंबर महीने में संक्रमित हुए हैं। बता दें कि इस एक महीने में साढ़े पांच हजार से अधिक पुलिसकर्मी कोरोना की चपेट में आ गए हैं। यह आंकड़ा पिछले छह महीनों के औसत से बहुत अधिक है।

वहीं, पुलिसकर्मियों में कोरोना के प्रसार के पीछे मुख्य वजह नागरिकों के साथ अधिकतम संपर्क में रहना बताई जा रही है। यह भी कहा जा रहा है कि पुलिसकर्मियों की एक बड़ी संख्या प्रवासी मजदूरों को उनके घर पहुंचाने में मदद के दौरान संक्रमित हुई है। यही वजह है कि जिन शहरों में आबादी की सघनता अधिक है उन शहरों में पुलिसकर्मी कोरोना से सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। राज्य सरकार द्वारा जारी आंकड़े भी इस बात की पुष्टि कर रहे हैं।

महाराष्ट्र में कुल कोरोना संक्रमित पुलिसकर्मियों में करीब बारह हजार यानी आधे से अधिक मुंबई से हैं। इसी तरह, मुंबई सहित ठाणे, पुणे, नवी मुंबई और नागपुर में पुलिसकर्मियों की बड़ी संख्या कोरोना की गिरफ्त में आती जा रही है।

हालांकि, महाराष्ट्र सरकार ने राजधानी मुंबई सहित राज्य के सभी प्रमुख शहरों में कोरोना से संक्रमित होने पर पुलिसकर्मियों के लिए चिकित्सा की विशेष व्यवस्था तैयार की है। इसके अंतर्गत पुलिस बल के लिए अलग से कोविड उपचार केंद्र और एम्बुलेंस इत्यादि की व्यवस्था की गई है। इसी तरह, कोरोना के इलाज के लिए निजी अस्पतालों तक में पुलिसकर्मियों के लिए बेड आरक्षित किए गए हैं। हालांकि, इस तरह के कई प्रयासों के कारण राज्य सरकार को संक्रमित पुलिसकर्मियों में कोरोना से होने वाले हृदय रोग प्रकरण नियंत्रित करने में कुछ हद तक सफलता मिली है। लेकिन, इस सितंबर साढ़े पांच हजार से अधिक पुलिसकर्मी जिस संख्या में कोरोना संक्रमित हुए हैं उससे स्वास्थ्य के साथ-साथ अब राज्य की कानून व्यवस्था के सामने चुनौती खड़ी हो गई है।

दरअसल, यदि मुंबई की ही बात करें तो पुलिस बल में संयुक्त आयुक्त, अतिरिक्त आयुक्त, उपायुक्त और वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक जैसे प्रमुख पदों पर आसीन कई अधिकारी भी कोरोना संक्रमण से बच नहीं सके हैं। इस तरह, कहा जा सकता है कि ऊपर से लेकर नीचे तक महाराष्ट्र का पूरा पुलिस महकमा कोरोना से जूझ रहा है।

देश भर में 382 डॉक्टरों की मृत्यु

वहीं, कोरोना के मरीजों का इलाज करते हुए संक्रमण के कारण अब तक महाराष्ट्र में 40 डॉक्टरों की मौत हो चुकी है। इनमें से 33 डॉक्टर मुंबई के हैं।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के मुताबिक मुंबई में राज्य में कोरोना से मरने वाले डॉक्टरों में 85 प्रतिशत की उम्र पचास वर्ष से अधिक हैं। बता दें कि कोरोना संक्रमण के कारण देश भर में अब तक 382 डॉक्टर दम तोड़ चुके हैं। इनमें तमिलनाडु में सबसे ज्यादा 63 डॉक्टरों की मौत को चुकी है। इसके बाद, आंध्र प्रदेश में 43, उत्तर प्रदेश 42 और गुजरात 39 डॉक्टर कोरोना संक्रमण के कारण मारे जा चुके हैं।

देश भर में कोरोना संक्रमण के विरुद्ध लड़ाई लड़ रहे एक लाख से ज्यादा स्वास्थ्यकर्मी भी इसकी चपेट में आ चुके हैं। इनमें से लगभग सात सौ स्वास्थ्यकर्मी मारे जा चुके हैं। इनमें करीब साढ़े तीन सौ स्वास्थ्यकर्मी महाराष्ट्र से हैं। इसके बाद तमिलनाडु और कर्नाटक में 50-50 स्वास्थ्यकर्मियों की मृत्यु हो चुकी है।

इस बारे में कई चिकित्सकों ने चिंता जाहिर करते हुए बताया है कि इससे कोरोना के विरुद्ध लड़ाई कमजोर हो सकती है। वहीं, इस संख्या में स्वास्थ्यकर्मियों का संक्रमित होना यह बताता है कि अस्पतालों में विशेषकर स्वास्थ्यकर्मियों के लिए भी कोरोना वायरस से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। दूसरी तरफ, सरकार द्वारा स्वास्थ्यकर्मियों के लिए पचास रुपए बीमा योजना के अंतर्गत अब तक देश भर से डेढ़ सौ से अधिक आवेदन आ चुके हैं।

लेखक महाराष्ट्र में स्वतंत्र पत्रकार हैं।

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