NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
महाराष्ट्र-हरियाणा विधानसभा चुनाव: कम वोटिंग के मायने और एग्जिट पोल की माया
लोकसभा चुनाव के बाद पहली परीक्षा कहे जा रहे इन चुनावों में लगभग सभी एग्जिट पोल ने महाराष्ट्र में बीजेपी-शिवसेना गठबंधन और हरियाणा में बीजेपी की जीत का अनुमान लगाया है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
22 Oct 2019
elections
Image courtesy: Chauthi Duniya

नई दिल्ली: महाराष्ट्र और हरियाणा में विधानसभा चुनाव के दौरान मतदाताओं को लुभाने के लिये बांटे जाने वाली नकदी, शराब और अन्य वस्तुओं की जब्ती का स्तर तीन से पांच गुना तक बढ़ गया है।

निर्वाचन आयोग में महानिदेशक दिलीप शर्मा ने हरियाणा और महाराष्ट्र में सोमवार को मतदान संपन्न होने के बाद बताया कि हरियाणा में कुल 24.17 करोड़ रुपये कीमत की अवैध सामग्री जब्त की गयी है। इसी तरह महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में इस बार कुल 156.94 करोड़ रुपये की कीमत की नकदी, शराब और आभूषण आदि बरामद किये गये।

इस सबको ध्यान में रखते हुए आइए मंगलवार को मतगणना के आंकड़ों पर चर्चा करते हैं।

महाराष्ट्र में पिछले विधानसभा चुनाव की तुलना में लोग मतदान करने कम पहुंचे। सोमवार को महाराष्ट्र में 60.5 फीसदी लोगों ने वोट डाले जबकि पिछले विधानसभा चुनाव में यहां वोटिंग प्रतिशत 63.08 था। इसी तरह हरियाणा में 65.57 फीसदी वोट पड़े जबकि 2014 के विधानसभा चुनाव में यहां 76.13 फीसदी वोटिंग हुई थी।

इन दो आंकड़ों से साफ जाहिर होता है कि राजनीतिक दलों, निर्वाचन आयोग, सेलेब्रिटी लोगों के तमाम तरह के आह्वान और प्रत्याशियों द्वारा गैरकानूनी तरीके इस्तेमाल करने के बावजूद लोगों का उत्साह बहुत कम रहा। यही नहीं इन राज्यों में मतदाता लोकसभा चुनाव की तुलना में भी कम बाहर निकले। इसी साल हुए लोकसभा चुनाव में हरियाणा में 70.34 प्रतिशत और महाराष्ट्र में 61.02 प्रतिशत मतदान हुआ।

कम वोटिंग का फायदा!

आम तौर पर ऐसा माना जाता है कि कम वोटिंग का फायदा सत्तारूढ़ दल को होता है। जानकार कहते हैं कि जनता को जब सरकार बदलनी होती है तो वह ज्यादा संख्या में मतदान करने जाती है। हालांकि हमेशा ऐसा नहीं होता रहा है लेकिन ज्यादातर वक्त ऐसा हुआ है।

जैसे हरियाणा में पिछले विधानसभा चुनाव में चार प्रतिशत ज़्यादा टर्नआउट रहा तो हरियाणा में सरकार बदल गई। यहां कांग्रेस को हराकर बीजेपी सत्ता पर काबिज हो गई थी। हरियाणा में 2009 के विधानसभा चुनाव में वोटिंग प्रतिशत 72.3 था और 2014 में करीब चार प्रतिशत बढ़ गया।

इससे पहले 2005 के हरियाणा विधानसभा चुनाव में 71.9 फीसदी लोगों ने वोट किया था और सरकार बदल गई थी। कांग्रेस ने इंडियन नेशनल लोकदल को सत्ता से बाहर कर दिया था। इससे पहले के 2000 के विधानसभा चुनाव में 69 प्रतिशत मतदान हुआ है।

वैसे 2000 के बाद यह पहली बार है जब हरियाणा में इतना कम मतदान हुआ है। यानी सत्ताधारी बीजेपी को लेकर जनता के मन में उत्साह नहीं है तो दूसरी ओर कांग्रेस, इनेलो और जेजेपी समेत दूसरी विपक्षी दल भी जनता को लुभाने में फेल हो गए हैं।

इसी तरह महाराष्ट्र में 2014 में चार प्रतिशत वोट इजाफे से सत्ता में बदलाव हुआ था। 2009 में यहां 59.6 प्रतिशत मतदान हुआ था। हालांकि इसके पहले लगभग 10 साल तक वोट प्रतिशत में बदलाव के बावजूद सत्ता विपक्षी दलों के पास नहीं आई। मतलब हरियाणा जैसा साफ पैटर्न यहां नहीं दिखता है। लेकिन जानकारों का कहना है कि सत्ताधारी दल को इसका फायदा मिलता रहा है।

कैसा रहा मुकाबला?

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में मुख्य मुकाबला भाजपा की अगुवाई वाले महागठबंधन अथवा ‘महायुति’ एवं कांग्रेस राकांपा गठबंधन ‘महाअघाड़ी’ (मोर्चा) के बीच था। हालांकि कुछ अन्य छोटे दल भी मैदान में थे। जैसे राज ठाकरे की अगुवाई वाली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने 101 प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतारे और चुनाव में 1,400 निर्दलीय उम्मीदवार भी ताल ठोक रहे थे।

जहां बीजेपी ने तीन तलाक, सर्जिकल स्ट्राइक और अनुच्छेद 370 जैसे राष्ट्रीय मुद्दों पर चुनाव लड़ा तो दूसरी ओर कांग्रेस समेत पूरा विपक्ष टुकड़ों में बंटा रहा। कांग्रेस और एनसीपी जैसी पार्टियां पारिवारिक कलह और आंतरिक टूट का सामना करती नजर आईं।

स्थानीय मुद्दे इस चुनाव में गंभीरता से विपक्ष द्वारा नहीं उठाए गए। सिर्फ शरद पवार को छोड़कर विपक्ष का कोई भी नेता बीजेपी को गंभीर चुनौती देता नजर नहीं आया। स्थानीय मुद्दों की कमी का प्रभाव वोटिंग पर नजर आया। शायद जनता इसी कारण मतदान करने कम बाहर निकली। फिलहाल 2014 के विधानसभा चुनावों में, भाजपा ने 122 सीटें, शिवसेना ने 63, कांग्रेस ने 42 और राकांपा ने 41 सीटें जीतीं थी।

वहीं, हरियाणा में कांग्रेस, बीजेपी, जेजेपी, इनेलो समेत दूसरे राजनीतिक दलों से 105 महिलाओं सहित 1,169 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे थे। खट्टर के नेतृत्व में भाजपा ने 75 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है, जबकि कांग्रेस राज्य में वापसी करने की उम्मीद कर रही है। वर्तमान में राज्य विधानसभा में भाजपा के 48 सदस्य हैं।

यहां भी महाराष्ट्र की तरह बीजेपी ने स्थानीय मुद्दों पर राष्ट्रीय मुद्दों को तरजीह दी। अनुच्छेद 370 और तीन तलाक जैसे मुद्दों बीजेपी कार्यकर्ताओं द्वारा खूब चर्चा में लाए गए। वहीं, प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस आखिरी समय तक नेतृत्व के संकट से जूझता रहा।

चुनाव से लगभग महीने भर पहले कुमारी शैलजा और भूपेंद्र सिंह हुड्डा को पार्टी की कमान सौंपी गई। उसके बाद भी पार्टी का आंतरिक कलह दूर नहीं हो पाई। इसी तरह इनेलो भी पारिवारिक कलह की चपेट में रहा। चौटाला परिवार के युवा नेता दुष्यंत चौटाला ने जेजेपी नाम से अलग पार्टी बनाकर अपना चुनावी सफर तय किया। विपक्ष के इस बिखराव का फायदा बीजेपी को मिलता दिखा। चुनाव मैदान में वह बेहतर तैयारी और प्रबंधन के साथ दिखे। वहीं विपक्ष दिशाहीन नजर आया।

एग्जिट पोल

फिलहाल इन दोनों राज्यों में असल नतीजे तो 24 अक्टूबर को आएंगे लेकिन उससे पहले विभिन्न चैनलों के एग्जिट पोल में दोनों राज्यों में बीजेपी की वापसी की भविष्यवाणी की गई है।

लोकसभा चुनाव के बाद पहली परीक्षा कहे जा रहे इन चुनावों में एनडीए गठबंधन अच्छे नंबरों से पास होता दिख रहा है। वहीं, कांग्रेस के लिए को दोनों राज्यों में नुकसान का अनुमान जताया गया है। सभी एग्जिट पोल में महाराष्ट्र में बीजेपी-शिवसेना गठबंधन की सरकार का अनुमान जताया गया है जबकि हरियाणा में मनोहर लाल खट्टर की सरकार 2014 के मुकाबले ज्यादा बड़े बहुमत से सरकार बनाते दिख रहे हैं।

फिलहाल एग्जिट पोल आने वाले चुनावी नतीजों का एक अनुमान होता है और बताता है कि मतदाताओं का रुझान किस पार्टी या गठबंधन की ओर जा सकता है। न्यूज़ चैनल तमाम सर्वे एजेसियों के साथ मिलकर ये कराते हैं।

हालांकि ये बहुत बार गलत साबित भी हुए हैं लेकिन फिर भी चुनाव के बाद एक रस्म के तौर पर इनकी परंपरा जारी है। 

Haryana Assembly Elections
Haryana Assembly polls
maharastra election
BJP
Congress
NCP
Congress-NCP
Shiv sena
inld

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • Nishads
    अब्दुल अलीम जाफ़री
    यूपी चुनाव: आजीविका के संकट के बीच, निषाद इस बार किस पार्टी पर भरोसा जताएंगे?
    07 Mar 2022
    निषाद समुदाय का कहना है कि उनके लोगों को अब मछली पकड़ने और रेत खनन के ठेके नहीं दिए जा रहे हैं, जिसके चलते उनकी पारंपरिक आजीविका के लिए एक बड़ा खतरा उत्पन्न हो गया है।
  • Nitish Kumar
    शशि शेखर
    मणिपुर के बहाने: आख़िर नीतीश कुमार की पॉलिटिक्स क्या है...
    07 Mar 2022
    यूपी के संभावित परिणाम और मणिपुर में गठबंधन तोड़ कर चुनावी मैदान में हुई लड़ाई को एक साथ मिला दे तो बहुत हद तक इस बात के संकेत मिलते है कि नीतीश कुमार एक बार फिर अपने निर्णय से लोगों को चौंका सकते हैं।
  • Sonbhadra District
    तारिक अनवर
    यूपी चुनाव: सोनभद्र के गांवों में घातक मलेरिया से 40 से ज़्यादा लोगों की मौत, मगर यहां के चुनाव में स्वास्थ्य सेवा कोई मुद्दा नहीं
    07 Mar 2022
    हाल ही में हुई इन मौतों और बेबसी की यह गाथा भी सरकार की अंतरात्मा को नहीं झकझोर पा रही है।
  • Russia Ukraine war
    एपी/भाषा
    रूस-यूक्रेन अपडेट: जेलेंस्की ने कहा रूस पर लगे प्रतिबंध पर्याप्त नहीं, पुतिन बोले रूस की मांगें पूरी होने तक मिलट्री ऑपरेशन जारी रहेगा
    07 Mar 2022
    एक तरफ रूस पर कड़े होते प्रतिबंधों के बीच नेटफ्लिक्स और अमेरिकन एक्सप्रेस ने रूस-बेलारूस में अपनी सेवाएं निलंबित कीं। दूसरी तरफ यूरोपीय संघ (ईयू) के नेता चार्ल्स मिशेल ने कहा कि यूक्रेन के हवाई…
  • International Women's Day
    नाइश हसन
    जंग और महिला दिवस : कुछ और कंफ़र्ट वुमेन सुनाएंगी अपनी दास्तान...
    07 Mar 2022
    जब भी जंग लड़ी जाती है हमेशा दो जंगें एक साथ लड़ी जाती है, एक किसी मुल्क की सरहद पर और दूसरी औरत की छाती पर। दोनो ही जंगें अपने गहरे निशान छोड़ जाती हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License