NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
महाराष्ट्र: नोटबंदी और जीएसटी के कारण 500 से ज्यादा छोटी कंपनियां बंद होने के कगार पर 
पांच सौ से ज्यादा छोटे उद्यमियों ने पिंपरी स्थित कंपनी पंजीकरण कार्यालय में अपनी कंपनियों को बंद करने के लिए आवेदन दिए हैं। इनमें पुणे सहित पश्चिम महाराष्ट्र और कोकण के छोटे उद्यमी शामिल हैं।
शिरीष खरे
19 Dec 2020
छोटी कंपनियां बंद होने के कगार पर 
नोटबंदी और जीएसटी के कारण छोटे उद्यमियों की बढ़ीं मुसीबतें। प्रतीकात्मक तस्वीर। साभार: सोशल मीडिया

महाराष्ट्र में पांच सौ से ज्यादा छोटे उद्यमियों ने पिंपरी स्थित कंपनी पंजीकरण कार्यालय में अपनी-अपनी कंपनियों को बंद करने के लिए आवेदन दिए हैं। इनमें पुणे सहित पश्चिम महाराष्ट्र और कोकण के छोटे उद्यमी शामिल हैं।

इन कंपनियों को बंद करने के निर्णय के बारे में बात करते हुए कई छोटे उद्यमी इसके लिए केंद्र की आर्थिक नीतियों को जिम्मेदार मानते हैं। इन उद्यमियों का कहना है कि खास तौर से नोटबंदी और वस्तु व सेवा कर (जीएसटी) का उनकी औद्योगिक गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था। कुछ वर्षों से लगातार आर्थिक नुकसान उठाते रहने के कारण यह स्थिति आई है। इसलिए, अब आर्थिक मंदी के दौर में इन उद्यमियों के लिए उद्योग चलाना मुश्किल हो रहा है। इसके अलावा इनमें कई युवा भी शामिल हैं जो अपनी कंपनी का पंजीयन कराने के बाद काम ही शुरू नहीं कर सके हैं।

वहीं, कई कंपनियां पिछले दो वर्षों से निष्क्रिय बताई जा रही हैं। लिहाजा, सैकड़ों की संख्या में छोटे उद्यमियों ने अपनी-अपनी कंपनियों को बंद करने का मन बना लिया है और इसके लिए इन्होंने शासन के कंपनी पंजीकरण कार्यालय में आवेदन दिए हैं।

दरअसल, कंपनी पंजीकरण अधिनियम के तहत कंपनी पंजीकरण कार्यालय को किसी कंपनी के निष्क्रिय होने पर उसका पंजीयन रद्द करने का अधिकार है। अधिनियम के प्रावधान के मुताबिक कोई कंपनी यदि पंजीयन कराने के बाद एक साल के भीतर परिचालन नहीं करती है या किसी कंपनी की स्थिति निष्क्रिय दिखाई देती है तो ऐसी हालत में उसका पंजीयन रद्द हो सकता है। लिहाजा, कंपनी अधिनियम के इसी प्रावधान का पालन नहीं करने के इस श्रेणी में आने वाली पांच सौ से अधिक लघु स्तर की औद्योगिक कंपनियों ने अपने पंजीयन निरस्त कराने के लिए आवेदन दिए हैं।

बता दें कि पिंपरी स्थित कंपनी पंजीकरण कार्यालय में राज्य के पुणे, पिंपरी, चिंचवड, सतारा, सांगली, कोल्हापुर, सिंधुदुर्ग और रत्नागिरी जिले की कंपनियों का पंजीयन किया जाता है। साथ ही, इस क्षेत्र की सभी कंपनियों से संबंधित कामकाज इसी कार्यालय के अंतर्गत आते हैं।

इस कंपनी पंजीकरण कार्यालय द्वारा प्राप्त आवेदनों में से करीब 175 कंपनियों के पंजीकरण को विचाराधीन रखा गया है और इस बारे में कंपनियों के उद्यमियों को उनकी आपत्तियां जमा करने के लिए सूचित किया गया है। इसके लिए उद्यमियों को तीस दिनों का समय दिया गया है। इसके बाद उद्यमियों को संबंधित आपत्तियों पर सुनवाई के लिए कार्यालय बुलाया जाएगा। यह प्रक्रिया पूरी होते ही आगे के लिए आदेश जारी किए जाएंगे।

इस बारे में श्रमिक नेता अजीत अभ्यंकर बताते हैं कि नोटबंदी के कारण छोटे उद्यमियों के लिए हालात पहले ही मुश्किल हो गए थे लेकिन जीएसटी अधिनियम लागू होने के बाद स्थिति बदतर होती चली गई। इस तरह, केंद्र सरकार के फैसलों और उससे पैदा हुई आर्थिक मंदी ने न सिर्फ उद्यमियों को धक्का पहुंचाया बल्कि खास तौर से लघु उद्योगों के अनुकूल माहौल नहीं बनने दिया। जिन कंपनियों ने अपने पंजीकरण रद्द कराने के लिए आवेदन दिए हैं, उनमें से ज्यादातर के बारे में यह कहा जा रहा है कि वे आर्थिक मंदी के गर्त में चली गई हैं और उनमें पिछले दो वर्षों से कामकाज पूरी तरह से बंद हो चुका है।

अजीत अभ्यंकर बताते हैं कि यदि कंपनी की संपत्ति कम है और उसकी तुलना में देनदारियां अधिक हैं तो कंपनी को एक वित्तीय प्रक्रिया से गुजरना होता है, जिसे परिसमापन कहा जाता है। इसमें यह देखा जाता है कि क्या किसी उद्यमी द्वारा बैंकों को धोखा देने के लिए कंपनी को बंद करने की प्रक्रिया तो शुरू नहीं की गई है। लेकिन, तथ्य यह है कि पांच सौ से ज्यादा कंपनियां अपना पंजीकरण रद्द कराना चाहती हैं। यह संख्या अपने आप में इस बात की पुष्टि करती है कि आर्थिक मंदी की स्थिति कितनी गंभीर है और जिसे लेकर खुद छोटे उद्यमी नोटबंदी तथा जीएसटी को जिम्मेदार मान रहे हैं।

दूसरी तरफ, फोरम ऑफ स्मॉल स्केल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन, पिंपरी के अध्यक्ष अभय भोर कहते हैं कि नोटबंदी और वित्तीय कठिनाइयों के कारण यह नौबत आई। कई छोटे उद्यमियों ने अपनी कंपनी का पंजीकरण रद्द करने के लिए दिए आवेदन में यह बात कही है। इनमें वे बताते हैं कि नोटबंदी और जीएसटी ने किस तरह उनकी कंपनी को चलाए रखना मुश्किल कर दिया।

इसी तरह, फेडरेशन ऑफ एसोसिएशन ऑफ पिंपरी के कार्यकारी अध्यक्ष गोविंद पानसरे बताते हैं कि नोटबंदी के बाद जीएसटी छोटे उद्यमियों पर दोहरी मार साबित हुई। जो किसी तरह नोटबंदी से उभरे उन्हें जीएसटी ने दबोच लिया। हालांकि, कई उद्यमियों ने सालों तक इन आर्थिक दुष्चक्र से निकलने की कोशिश की। इसके बावजूद बहुत सारे उद्यमी टूट गए हैं। वहीं, दूसरे कई उद्यमियों को आज भी आर्थिक मंदी से उपजी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

भले ही केंद्र सरकार नोटबंदी और जीएसटी को अर्थव्यवस्था में गति देने के लिए सही बताती रही हो, लेकिन हकीकत में परिणाम केंद्र सरकार के दावे से उलट हासिल हुए हैं। वर्ष 2018 में आई भारतीय रिजर्व बैंक की रिपोर्ट को ही मानें तो नवंबर 2016 में की गई नोटबंदी के बाद से छोटे उद्योगों का लोन डिफॉल्ट दो गुना हो गया। वहीं, नोटबंदी के कारण उस दौरान महाराष्ट्र के कई प्रमुख शहरों के लघु और परंपरागत उद्योगों की कमर टूट गई थी। उदाहरण के लिए, तब भिंवडी का पावरलूम कारखाना अस्सी प्रतिशत तक प्रभावित हो गया था और उनमें काम करने वाले मजदूरों को बड़ी संख्या में उनके गांव लौटना पड़ा था। इसके बाद केंद्र सरकार द्वारा लगाई गई जीएसटी छोटे उद्यमियों के लिए बड़ी मुसीबत साबित हुई। यह भी एक प्रमुख वजह है कि महाराष्ट्र में बड़ी संख्या तक छोटी कंपनियां बंद होने की कगार तक पहुंच गई हैं। 

(शिरीष खरे स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

Maharastra
Small business
Small Companies
GST
demonitisation
demonitisation a failure
Company registration act

Related Stories

मोदी@8: भाजपा की 'कल्याण' और 'सेवा' की बात

कभी सिख गुरुओं के लिए औज़ार बनाने वाला सिकलीगर समाज आज अपराधियों का जीवन जीने को मजबूर है

कश्मीर: कम मांग और युवा पीढ़ी में कम रूचि के चलते लकड़ी पर नक्काशी के काम में गिरावट

‘जनता की भलाई’ के लिए पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के अंतर्गत क्यों नहीं लाते मोदीजी!

महाराष्ट्र: फडणवीस के खिलाफ याचिकाएं दाखिल करने वाले वकील के आवास पर ईडी का छापा

ख़बरों के आगे पीछे: यूक्रेन में फँसे छात्रों से लेकर, तमिलनाडु में हुए विपक्ष के जमावड़े तक..

यूपी चुनावों को लेकर चूड़ी बनाने वालों में क्यों नहीं है उत्साह!

जीएसटी दरों में बेतहाशा बढ़ोतरी के विरोध में दिल्ली के कपड़ा व्यापारियों ने की हड़ताल

कच्चे माल की कीमतों में भारी वृद्धि से एमएसएमई क्षेत्र प्रभावित, विरोध में उद्यमियों ने बंद किये शटर

गढ़चिरौलीः यह लहू किसका है


बाकी खबरें

  • rbi
    भाषा
    चालू वित्त वर्ष में खुदरा मुद्रास्फीति 5.3 प्रतिशत रहने का अनुमान: आरबीआई
    08 Dec 2021
    आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा की जानकारी देते हुए कहा कि मुद्रास्फीति के अगले वित्त वर्ष 2022-23 की पहली तिमाही में नरम पड़कर पांच प्रतिशत पर आने का अनुमान है।
  •  नगालैंड में मातम छाया, लोगों ने मारे गए आम नागरिकों की याद में शोक जताया
    भाषा
    नगालैंड में मातम छाया, लोगों ने मारे गए आम नागरिकों की याद में शोक जताया
    08 Dec 2021
    विभिन्न नगा संस्थाओं ने मृतकों के लिए पांच दिनों के शोक का आह्वान किया है, जो शुक्रवार को समाप्त होगा। नगा छात्र संघ ने मृतकों के लिए न्याय की अपनी मांगों को लेकर राज्यपाल आवास के समक्ष धरना देने की…
  • राज्यसभा में उठी अफ़्सपा वापस लिए जाने की मांग
    भाषा
    राज्यसभा में उठी अफ़्सपा वापस लिए जाने की मांग
    08 Dec 2021
    एनपीएफ का कहना है कि सशस्त्र बलों को विशेष अधिकार देश के और किसी भी हिस्से में नहीं मिले हैं। उन्होंने कहा कि लागू किए जाने के दौरान भी इस कानून का व्यापक विरोध किया गया था।
  • रवींद्रनाथ टैगोर साहित्य पुरस्कार 2021-22
    भाषा
    रवींद्रनाथ टैगोर साहित्य पुरस्कार 2021, 2022 के लिए एक साथ दिया जाएगा : आयोजक
    08 Dec 2021
    रवींद्रनाथ टैगोर साहित्य पुरस्कार वर्ष 2021 और 2022 के लिए एक साथ दिया जाएगा। आयोजक और प्रकाशक पीटर बुंडालो ने यह जानकारी दी।
  • Ethiopia
    पवन कुलकर्णी
    टीपीएलएफ़ के पिछले महीने की बढ़त को रोकते हुए उत्तरी इथियोपिया का गृह युद्ध संघीय सरकार के पक्ष में बदला
    08 Dec 2021
    पश्चिमी और पूर्वी मोर्चे पर अपनी जीत के बाद संघीय सरकार और अम्हारन मिलिशिया के संयुक्त बलों ने डेसी और कोम्बोल्चा जैसे रणनीतिक तौर पर अहम शहरों पर फिर से कब्ज़ा कर लिया है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License