NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
उत्पीड़न
कृषि
मज़दूर-किसान
भारत
महाराष्ट्र में गन्ने की बम्पर फसल, बावजूद किसान ने कुप्रबंधन के चलते खुदकुशी की
मराठवाड़ा में जहां बड़े पैमाने पर गन्ने की पैदावार हुई है, वहां 23 लाख टन गन्ने की पेराई सरकार की कुव्यवस्था से अभी तक नहीं हुई है।
अमेय तिरोदकर
14 May 2022
sugaercane
खेत में खड़ी गन्ने की फसल

महाराष्ट्र के बीड जिले में एक गन्ना किसान ने बुधवार को खुदकुशी कर ली क्योंकि पेराई के लिए उसके गन्ने को मिल नहीं ले जाया जा सका। इस साल बंपर पैदावार की वजह से उसकी फसल खेत में ही खड़ी रह गई थी।

पुलिस ने बताया कि जियोराई तहसील के अंतर्गत हिंगनगांव गांव के रहने वाले नामदेव जाधव (35) ने पहले तो अपनी फसल में आग लगा दी और फिर अपने खेत में उगे एक नीम के पेड़ से रस्सी के सहारे लटक कर फांसी लगा ली। नामदेव अपने तीन एकड़ के खेत में गन्ने की खेती करते थे।

किसान की आत्महत्या एक चौंकाने वाला घटनाक्रम है क्योंकि महाराष्ट्र में गन्ना उत्पादकों को तुलनात्मक रूप से सम्पन्न माना जाता है। राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2021-22 हाल के वर्षों में गन्ने की पैदावार के लिहाज से सबसे अधिक उत्पादक वर्ष रहा है। 10 मई तक इस सीजन में कुल 1,290 लाख टन गन्ने की पेराई हो गई थी। हालांकि मराठवाड़ा क्षेत्र के बीड, जालाना और उस्मानाबाद जिलों में जहां बड़े पैमाने पर गन्ने की पैदावार हुई है,वहां 23 लाख टन की पेराई अभी तक बाकी है।

गन्ने की पेराई न होने की कई वजहें हैं। लेकिन इनमें सबसे बड़ी वजह सरकार का कुप्रबंधन है। अखिल भारतीय किसान सभा (एआईकेएस) ने राज्य सरकार से यह सुनिश्चित करने की अपील की थी जिससे कि खेतों में लगा सारा का सारा गन्ना चीनी मिलों तक पहुंच जाए। “हमने राज्य सरकार से सभी मिलों को पूरी क्षमता से काम शुरू करने का अनुरोध किया था ताकि एक भी किसान का गन्ना खेतों में न रह जाए, लेकिन सरकार यह सुनिश्चित करने में विफल रही,” एआईकेएस महाराष्ट्र के महासचिव अजीत नवले ने न्यूज़क्लिक को बताया।

मराठवाड़ा क्षेत्र के किसानों ने 15 वर्षों में लगातार सूखे की मार झेलने के बाद 2019-20 और 2020-21 में नकदी फसल के रूप में गन्ने का विकल्प चुना था। इसमें अच्छे मानसून ने भी उसका साथ दिया था, जिससे कि पिछले साल 5,90,000 हेक्टेयर गन्ने की खेती का क्षेत्र इस साल बढ़कर 6,77,000 हेक्टेयर हो गया था। अब मुख्य रूप से मराठवाड़ा के जिलों में ही गन्ना बचा रह गया है।

समस्या का एक अन्य कारण कई मिलों को जारी ‘रेड जोन नोटिस' भी है। पिछले सीजन में चीनी मिलें लालक्षेत्र में आने वाले किसानों के गन्ने का भुगतान सरकार द्वारा घोषित उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) करने में विफल रही थीं। हालांकि ये चीनी मिलें किसानों को एफआरपी का भुगतान करने के लिए कानूनी तौर पर बाध्य हैं। इस निर्णय ने पेराई सत्र को लेट कर दिया, जिसका अब खराब असर पड़ रहा है।

अभी दस दिन पहले ही केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने मराठवाड़ा के लातूर शहर में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में यह चेतावनी दी थी कि अगर यही स्थिति रही तो गन्ना किसान आत्महत्या कर लेंगे।

उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने किसानों से अपील की है कि वे इस तरह के कदम न उठाएं। इसके पहले, उन्होंने हाल ही कहा था,“राज्य सरकार किसानों के साथ मिलकर काम कर रही है। सभी गन्ने को पेराई के लिए चीनी मिलों को भेजा जाएगा। चीनी निगम सूक्ष्म स्तर पर चीजों का प्रबंधन कर रहा है।”

चूंकि राज्य में मानसून 21 मई के आसपास आने की उम्मीद है, इसलिए चीनी मिलों के पास गन्ने की पेराई के लिए कम समय रह गया है। बाकी बचे गन्ने की पेराई के लिए लगभग 15 मिलों को 10 जून तक काम करना होगा। अन्य मिलों के लिए शायद इस महीने के अंत तक पेराई का सीजन समाप्त हो जाएगा।

अंग्रेजी में मूल रूप से लिखे लेख को पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें

https://www.newsclick.in/Maharashtra-Sugarcane-Farmer-Commits-Suicide-Bumper-Crop-Mismanagement

Maharashtra
sugarcane farmers
Maharashtra Sugar mills
Beed

Related Stories

2023 विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र तेज़ हुए सांप्रदायिक हमले, लाउडस्पीकर विवाद पर दिल्ली सरकार ने किए हाथ खड़े

महाराष्ट्र: 6 महीने में 400 लोगों ने किया नाबालिग का कथित दुष्कर्म, प्रशासन पर उठे सवाल!

महाराष्ट्र: महिला सुरक्षा को लेकर कितनी चिंतित है सरकार?

पुणे रासायनिक संयंत्र अग्निकांड : कंपनी के मालिक के ख़िलाफ़ ग़ैर-इरादतन हत्या का मुक़दमा दर्ज

महाराष्ट्र: जलगांव के हॉस्टल में लड़कियों से अभद्रता हमारे सिस्टम पर कई सवाल खड़े करती है!


बाकी खबरें

  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    क्या कोविड के पुराने वेरिएंट से बने टीके अब भी कारगर हैं?
    22 Feb 2022
    आज हम डॉ. सत्यजीत के साथ कोविड -19 के मौजूदा हालात के बारे में बात करेंगे और यह समझेंगे की क्या कोविड के पुराने वेरिएंट से बने टीके अब भी कारगर हैं व उसके नए वेरिएंट्स पर प्रभावकारी है। इसके अलावा हम…
  • unemployment
    अजय कुमार
    बढ़ती बेरोजगारी पूछ रही है कि देश का बढ़ा हुआ कर्ज इस्तेमाल कहां हो रहा है?
    22 Feb 2022
    कहीं ऐसा तो नहीं कि भाजपा अपने लिए चुनावी चंदा इकट्ठा करने के लिए देश पर क़र्ज़ का बोझ डाल रही है?
  • abhisar sharma
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी चुनाव: भाजपा का कोई मुद्दा नहीं चल रहा!
    22 Feb 2022
    आज के एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा बात कर रहे हैं उत्तर प्रदेश में होने वाले चौथे चरण के मतदान की जहाँ उन्हें लगता है की भाजपा को नुकसान हो सकता है।
  • party
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    यूपी चुनाव पांचवा चरण:  दाग़ी और करोड़पति प्रत्याशियों पर ज्यादा विश्वास करती हैं राजनीतिक पार्टियां
    22 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश के चुनाव जारी हैं, ऐसे में ADR ने पांचवे चरण के लिए प्रत्याशियों की कुंडली खंगालकर लोगों के सामने रख दी। भाजपा से लेकर सपा तक सभी पार्टियों में दाग़ी और करोड़पति प्रत्याशियों की भीड़ है।
  • modi
    अनिल जैन
    खरी-खरी: मोदी बोलते वक्त भूल जाते हैं कि वे प्रधानमंत्री भी हैं!
    22 Feb 2022
    दरअसल प्रधानमंत्री के ये निम्न स्तरीय बयान एक तरह से उनकी बौखलाहट की झलक दिखा रहे हैं। उन्हें एहसास हो गया है कि पांचों राज्यों में जनता उनकी पार्टी को बुरी तरह नकार रही है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License