NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
ममता सरकार अब पुरोहितों को भी देगी भत्ता; क्या ये संवैधानिक मूल्यों की अवहेलना नहीं है!
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी बड़े महीन ढंग से सांप्रदायिक राजनीति का खेल खेल रही हैं। इसी सिलसिले में उनका ताजा कदम है, ब्राह्मण पुरोहितों को एक हज़ार रुपये का मासिक भत्ता देने की घोषणा। सरकार के मुताबिक, इस दुर्गापूजा से पहले भत्ता शुरू हो जायेगा।
सरोजिनी बिष्ट
16 Sep 2020
mamta
ममता बनर्जी। फाइल फोटो।

एक जमाने में भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार में मंत्री रह चुकीं ममता बनर्जी, इन दिनों पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री के रूप में भाजपा की सांप्रदायिकता के खिलाफ काफी हमलावर रहती हैं। बात-बात में भारतीय राज्य के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों और संविधान की दुहाई देती हैं। भाजपा से लड़ती-भिड़ती भी खूब नजर आती हैं। एक तरह से वह पूरे देश में भाजपा की हिंदुत्ववादी सांप्रदायिक राजनीति के खिलाफ लड़ाई की पोस्टरगर्ल बनी हुई हैं। लेकिन अगर थोड़ी तह में जाकर देखेंगे तो हकीकत इसके ठीक उलट नजर आयेगी। राज्य में 34 साल के वाम मोर्चा शासन के बाद, सत्ता संभालने के समय से ही ममता बनर्जी बड़े महीन ढंग से सांप्रदायिक राजनीति का खेल खेल रही हैं। इसी सिलसिले में उनका ताजा कदम है, ब्राह्मण पुरोहितों को एक हजार रुपये का मासिक भत्ता देने की घोषणा। सरकार के मुताबिक, इस दुर्गापूजा से पहले भत्ता शुरू हो जायेगा।

राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल काफी दिनों से जिले-जिले में मंदिरों व पुरोहितों की सूची तैयार कर रही थी। इसमें चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की टीम ‘आइपैक’ ने भी मदद की है। राजनीति के साथ धर्म का घाल-मेल ममता बनर्जी ने पहली बार मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने के साथ ही शुरू कर दिया था। मस्जिदों के इमाम और मुअज्जिनों के लिए मासिक भत्ते की शुरुआत करके। इसके बाद ऐसी ही मांग हिंदू संगठनों की ओर से उठनी ही थी, और उठी भी। आखिरकार, अब विधानसभा चुनाव से पहले ममता ने एक बार फिर संविधान के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों को ताक पर रखते हुए पुरोहितों के लिए मासिक भत्ते की घोषणा की है। जिन पुरोहितों के पास घर नहीं है, उनके लिए घर की व्यवस्था भी सरकारी आवास योजना के तहत की जायेगी। मुख्यमंत्री ने खुल्लमखुल्ला हिंदू-मुसलमान करने में कोई संकोच भी नहीं दिखाया। उन्होंने कहा, ‘इमाम और मुअज्जिन सामाजिक काम करते हैं। उन्हें भत्ता मिलता है। लेकिन हिंदुओं में ऐसा कुछ नहीं है। सनातन धर्म में ब्राह्मण पूजा कराते हैं, जिनमें से बहुतों की माली हालत बहुत खराब है। कोई अवसर व सुविधा उन्हें नहीं मिलती। उनलोगों ने मुझसे मदद की गुहार लगायी थी। फिलहाल भत्ते के लिए आठ हजार पुरोहितों की सूची मिली है। कोलाघाट में सनातन धर्म के तीर्थस्थान के लिए जमीन भी सरकार ने दे दी है।’

मुख्यमंत्री का उपरोक्त बयान न सिर्फ धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के खिलाफ है, बल्कि हिंदू धर्म की सबसे बड़ी बीमारी जातिवाद को बढ़ावा देनेवाला है। वह एक तरह से पूजा-पाठ कराने के लिए ब्राह्मणों के विशेषाधिकार को मान्यता दे रही हैं। कौन पुरोहित भत्ता पाने के योग्य है, सरकार ने यह काम अघोषित रूप से पश्चिम बंगाल सनातन ब्राह्मण ट्रस्ट के हाथों में सौंप दिया है। इससे साफ है कि अगर कोई दूसरी जाति का व्यक्ति पुरोहिती कर रहा है, तो उसे सरकारी योजना का लाभ शायद ही मिले।

राज्य में विपक्षी दलों ने सरकार के इस फैसले की तीखी आलोचना की है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष, कांग्रेस के अब्दुल मन्नान ने कहा, ‘इसके बाद क्या ईसाई पादरियों या बौद्ध भिक्षुओं के लिए भत्ते का एलान होगा! सरकार का काम मंदिर-मस्जिद बनाना या इमाम-पुरोहित को भत्ता देना नहीं है। भाजपा जो सांप्रदायिक राजनीति कर रही है, तृणमूल भी उसी राह पर है।’

माकपा के विधायक दल के नेता सुजन चक्रवर्ती ने कहा, ‘पहले इमामों के लिए घोषणा हुई थी। अब चुनाव से पहले पुरोहितों को पैसा देकर उन्हें अपनी ओर करने की कोशिश की जा रही है। आर्थिक मदद को धर्म के साथ जोड़कर भाजपा की ही मदद की जा रही है।’

अदालत ने असंवैधानिक करार दिया था, पर नहीं मानीं ममता

अप्रैल 2012 में ममता बनर्जी ने इमामों के लिए 2500 रुपये और मुअज्जिन के लिए 1500 रुपये महीने भत्ता घोषित किया था। विरोधी मामले को अदालत ले गये। 2 सितंबर 2013 को कोलकाता हाइकोर्ट ने इसे धर्म के आधार पर भेदभावपूर्ण मानते हुए असंवैधानिक करार दे दिया। लेकिन सरकार ने इसका तोड़ निकाल लिया। भत्ता सरकारी खजाने की जगह वक्फ बोर्ड के जरिये दिया जाने लगा, और वक्फ बोर्ड को सैकड़ों करोड़ की सरकारी मदद दी जाने लगी।

इमाम को भत्ता मिला तो पुरोहितों के लिए उठी मांग

इमाम व मुअज्जिन के भत्ते की तर्ज पर पुरोहितों के लिए भी भत्ते की मांग उठनी शुरू हुई। बाद में पश्चिम बंगाल राज्य सनातन ब्राह्मण ट्रस्ट का गठन हुआ। राज्य में भाजपा को मजबूत होते देख तृणमूल कांग्रेस ने ब्राह्मणों की मांग को महत्व देना शुरू किया। ब्राह्मणों के कई संगठन एक छतरी के तले लाये गये और सरकार ने इनसे भत्ते के सवाल पर बातचीत शुरू की। अभी कुछ दिन पहले ही ट्रस्ट के महासचिव श्रीधर मिश्र मुख्यमंत्री से मिले थे। हाल ही में पूर्व मेदिनीपुर में ट्रस्ट के मंदिर व ऑफिस का शिलान्यास हुआ, जिसमें तृणमूल के वरिष्ठ नेता शामिल हुए। ट्रस्ट का दावा है कि राज्य में तीन लाख 32 हजार पुरोहित हैं। इस तरह अगर सरकार सबको भत्ता देने लगी तो राज्य का भट्ठा बैठना तय है।

दुर्गा पूजा कमेटियों पर भी सरकारी ख़ज़ाने से ख़र्च

भाजपा के मुस्लिम तुष्टीकरण के आरोपों की काट के रूप में बीते साल ममता सरकार ने सभी सार्वजनिक दुर्गा पूजा कमेटियों के लिए 25-25 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी। इससे पहले 2018 में भी 10-10 हजार रुपये दिये गये थे। महिलाओं द्वारा आयोजित दुर्गा पूजा के लिए पांच-पांच हजार रुपये की अतिरिक्त मदद दी गयी।

भाजपा के लिए जमीन तैयार होने में मिली मदद

इतिहास गवाह है कि तुष्टीकरण की राजनीति का फायदा देर-सवेर भाजपा को ही मिला है। चाहे वह मुस्लिम तुष्टीकरण हो या फिर हिंदू तुष्टीकरण। शाहबानो मामला, राम जन्मभूमि का ताला खुलवाना जैसे कदम इसके प्रमाण हैं। इमामों के भत्ते को भाजपा ने बंगाल में बड़ा मुद्दा बनाया। भाजपा इसे जनता के बीच ले जाने में सफल रही। पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान अमित शाह ने अपनी रैलियों में इस विषय को जोर-शोर से उठाया। राज्य में भाजपा के बढ़ते आधार को देखते हुए ममता सरकार ने मुस्लिम तुष्टीकरण के जवाब में हिंदू तुष्टीकरण की ओर बढ़ना शुरू किया।

कुल मिलाकर, ममता सरकर अपनी एक गलती को दूसरी गलती से ढकने की कोशिश कर रही है। और इन सबके नतीजतन मजाक बन रहा है संविधान और उसके मूल्यों का।

(लेखिका स्वतंत्र पत्रकार हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)

West Bengal
Mamta Banerji
communal politics
Secularism
Priest
Priest's allowance

Related Stories

राज्यपाल की जगह ममता होंगी राज्य संचालित विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति, पश्चिम बंगाल कैबिनेट ने पारित किया प्रस्ताव

प. बंगाल : अब राज्यपाल नहीं मुख्यमंत्री होंगे विश्वविद्यालयों के कुलपति

ज्ञानवापी कांड एडीएम जबलपुर की याद क्यों दिलाता है

‘तेलंगाना की जनता बदलाव चाहती है’… हिंसा नहीं

पश्चिम बंगालः वेतन वृद्धि की मांग को लेकर चाय बागान के कर्मचारी-श्रमिक तीन दिन करेंगे हड़ताल

पीएम मोदी को नेहरू से इतनी दिक़्क़त क्यों है?

लखनऊः नफ़रत के ख़िलाफ़ प्रेम और सद्भावना का महिलाएं दे रहीं संदेश

लता के अंतिम संस्कार में शाहरुख़, शिवकुमार की अंत्येष्टि में ज़ाकिर की तस्वीरें, कुछ लोगों को क्यों चुभती हैं?

मछली पालन करने वालों के सामने पश्चिम बंगाल में आजीविका छिनने का डर - AIFFWF

‘जलवायु परिवर्तन’ के चलते दुनियाभर में बढ़ रही प्रचंड गर्मी, भारत में भी बढ़ेगा तापमान


बाकी खबरें

  •  Punjab security lapse
    न्यूज़क्लिक टीम
    पंजाब में पीएम की "सुरक्षा चूक" पर पूरी पड़ताल!
    06 Jan 2022
    बोल के लब आज़ाद हैं तेरे में आज अभिसार शर्मा चर्चा कर रहे प्रधानमंत्री के पंजाब दौरे की। साथ ही वे नज़र डाल रहे हैं कि किस तरह मीडिया द्वारा किसानों को टारगेट किया जा रहा है
  • fact check
    राज कुमार
    फ़ैक्ट चेक : संबित ने जर्जर स्कूलों को सपा सरकार का बताया, स्कूल योगी सरकार के निकले
    06 Jan 2022
    एक बार फिर बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने ट्विटर पर फ़ेक न्यूज़ के ज़रिये विपक्ष पर निशाना साधने की कोशिश की है।
  • jnu
    रवि कौशल
    जेएनयू हिंसा के दो साल : नाराज़ पीड़ितों को अब भी है न्याय का इंतज़ार 
    06 Jan 2022
    ऐसा लगता है कि दिल्ली पुलिस की जांच भटक चुकी है। अब तक दोषियों की पहचान तक नहीं की जा सकी है।
  • punjab security
    शंभूनाथ शुक्ल
    'सुरक्षा चूक' की आड़ में राजनीतिक स्टंट?
    06 Jan 2022
    प्रधानमंत्री को एयरपोर्ट में पंजाब के अधिकारियों को दिए बयान से बचना चाहिए था। और जो कुछ करना था, वह सीधे गृह मंत्रालय के आला अधिकारी करते तो भविष्य में ऐसी किसी भी चूक से प्रशासन सतर्क रहते। तथा…
  • election
    सौरभ शर्मा
    यूपी: युवाओं को रोजगार मुहैय्या कराने के राज्य सरकार के दावे जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाते हैं!
    06 Jan 2022
    लगभग 43 उम्मीदवारो को उत्तर प्रदेश में पिछले साल विभिन्न चिकित्सा विभागों द्वारा विभिन्न कोरोना लहरों के दौरान में रोजगार पर रखा गया था। बाद में इन्हें काम से मुक्त कर दिया गया। उन्होंने इस कदम के…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License