NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
मारियुपोल की जंग आख़िरी पड़ाव पर
शनिवार को दोनेतस्क प्रशासन के प्रमुख डेनिस पुशिलिन ने खुले तौर पर अज़ोवस्तल में छिपे हुए नव-नाज़ी उग्रवादियों के "ख़ात्मे" का आह्वान किया।
एम. के. भद्रकुमार
19 Apr 2022
mariupol
रूसी सेना का रणनीतिक शहर पीएफ़ मारियुपोल पर नियंत्रण

रूसी रक्षा मंत्रालय ने रविवार को मॉस्को के समय के मुताबिक़ दोपहर 1.00 बजे तक दुश्मनी ख़त्म करने को लेकर अज़ोवस्तल आयरन एंड स्टील वर्क्स में छुपे चरम राष्ट्रवादी नव-नाज़ी बटालियनों और विदेशी भाड़े के सैनिकों को आत्मसमर्पण की शर्तों की पेशकश की।मुमकिन है कि यह अपनी ही तरह का एक इशारा हो।

मॉस्को के बयान में कहा गया है कि अज़ोवस्तल में रेडियो इंटरसेप्शन के ज़रिये 24 घंटों में 367 मामलों के पता चलने से ऐसा लगता है कि लगभग भोजन और पानी के बिना आतंकवादी निराशाजनक स्थिति में हैं, और हथियार डालने और आत्मसमर्पण करने की इजाज़त मांग रहे हैं, लेकिन "कीव अधिकारियों ने उन्हें ऐसा करने से साफ़ तौर पर मना कर दिया है।"

शनिवार को दोनेत्स्क प्रशासन के प्रमुख डेनिस पुशिलिन ने खुले तौर पर अज़ोवस्तल में छिपे हुए नव-नाज़ी उग्रवादियों के "ख़ात्मे" का आह्वान किया था।

अज़ोवस्तल सोवियत-युग का वह विशाल प्लांट है, जो मारियुपोल शहर के भीतर बसा एक शहर है। सोवियत काल में निर्मित इस प्लांट के नीचे एक ऐसा भूमिगत शहर है, जिसमें शीत-युद्ध की वास्तविकतायें हैं। इनमें बमबारी, नाकेबंदी और यहां तक कि परमाणु हमले का सामना करने के लिए बनाये हुए ढांचे हैं। रूसियों का अनुमान है कि बख़्तरबंद वाहनों और हथियारों और गोला-बारूद के विशाल शस्त्रागार से लैस इस भूमिगत शहर में ज़्यादा से ज़्यादा 2,500 लोगों के रहने की क्षमता हो सकती है।

रूसी पक्ष मारियुपोल में चल रहे इस ऑपरेशन को ख़त्म करने की जल्दीबाज़ी में है। वहां की सेनाओं को तत्काल डोनबास मोर्चे पर फिर से तैनात किये जाने की ज़रूरत है। दूसरी ओर, कीव इस रूसी ऑपरेशन में देरी होने को लेकर आश्वस्त है। कीव को लगता है कि इससे उसे डोनबास में अपनी सेना को मज़बूत करने के लिए ज़्यादा समय मिल जायेगा।

राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने एक बार फिर कूटनीतिक रास्ते को लेकर बोलते हुए अपना रुख़ बदल लिया है। उनका हालिया रुख यही है कि यूक्रेन नाटो के सदस्य होने की कोशिश को छोड़ने के लिए तैयार है और रूस के साथ क्रीमिया की स्थिति पर भी चर्चा करने के लिए तैयार है, लेकिन ऐसा तब तक नहीं होगा, जब तक मास्को यूक्रेने के साथ दुश्मनी पर लगाम नहीं लगाता और अपने सैनिकों की वापसी नहीं करवा लेता!

यूक्रेनी सशस्त्र बलों ने पहले ही अपने 23,367 लोगों को खो दिया है, जबकि 1,464 लोगों ने शनिवार तक मारियुपोल में आत्मसमर्पण कर दिया और अन्य 2,500 लोग इस शहर के अज़ोवस्त्ल संयंत्र में अटके हुए हैं। जहां तक डोनबास का सवाल है, रूसी सेना संख्या, रसद, गोलाबारी और इस क्षेत्र में अपनी सर्वोच्चता को साबित कर चुकी है और उस मोर्चे पर हुई हार के चलते ज़ेलेंस्की के पास रूसी शर्तों पर बातचीत के ज़रिए समझौता करने के अलावा कोई चारा भी नहीं होगा। (अमेरिकी सैन्य विश्लेषक कर्नल (सेवानिवृत्त) डैनियल डेविस की ओर से अपेक्षाकृत संतुलित पूर्वानुमान पर नज़र डालने के लिए द बैटल फ़ॉर डोनबास विल बी अ टफ़ फ़ाइट फ़ॉर यूक्रेन पढ़ें।)

दरअसल, ज़ेलेंस्की और उनके अमेरिकी आकाओं को उम्मीद है कि डोनबास की लड़ाई पूरी तरह खुली हुई है। हालांकि, मुद्दा यह है कि पूर्वी यूक्रेन में ज़्यादातर युद्ध खुले मैदान के क्षेत्रों में लड़ा जायेगा, रूसी सेना को डोनेत्स्क और लुहान्स्क ओब्लास्त में अपने मक़सदों को हासिल करने के लिए कई अहम आबादी वाले ठिकानों को भी दांव पर लगाना होगा, जिनमें सेवेरोडोनेत्स्क, रुबिज़ने, लिसिचन्स्क, स्लोवेन्स्क, और क्रामाटोरस्क और साथ ही कई छोटे-छोटे शहर हैं।

ज़द में आने वाले इलाक़ों के ख़िलाफ़ रूस का अब तक का प्रदर्शन तेज़ी से मिलने वाली कामयाबी के लिहाज़ से अच्छा नहीं रहा है। इसके अलावे, पश्चिम से मिले हथियारों ने यूक्रेन की सेनाओं को रूस के इन क्षेत्रों पर नियंत्रण करने से रोकने में काफ़ी मदद की है। यूक्रेनी पक्ष लड़ाई के ज्वार को रोकने के लिए इन्हीं कारकों पर भरोसा कर रहा है। इसके अलावा, ज़ाहिर है कि उनका मनोबल ऊंचा है। 

वैसे भी इस बार रूस के मन में इस बात को लेकर कोई भ्रम नहीं है कि एक शांति समझौता बहुत ही नज़दीक है। रूसियों के ख़ुद को फिर से आंखों में धूल झोंके जाने की संभावना इस लिहाज़ से नहीं दिख रही है, जब कि उन्होंने ज़ेलेंस्की की कही बातों पर ग़ौर किया है, उन्होंने इस्तांबुल में होने वाली वार्ता में शामिल होने की बात कही है, जहां एक समझौते पर हस्ताक्षर किये जाने की संभावना है। इसके आधार पर सद्भावना के एक ग़ैरमामूली भावनात्मक इशारे के लिहाज़ से उन्होंने कीव और अन्य उत्तरी क्षेत्रों से सैनिकों को वापस ले लिया। लेकिन, सिर्फ़ कीव में अपने वार्ताकारों को समझौते की शर्तों को लेकर पीछे हटने पर ग़ौर करने के लिए कहा।

इस अजीब रूसी व्यवहार से हो सकता है कि एक ग़लत धारणा बनी हो कि क्रेमलिन इस युद्ध से बाहर निकलने के दरवाज़े की तलाश में है। ज़ाहिर है, इस स्थिति ने पश्चिमी शक्तियों को यूक्रेन के लिए एक बड़े पैमाने पर फिर से हथियारबंद करने की परियोजना शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया है, जिसमें सैन्य टकराव के आगामी नये चरण में इस्तेमाल होने वाले भारी आक्रामक प्रणाली, उच्च स्तर और सटीक निशाने वाले गोला-बारूद, आधुनिक वायु रक्षा प्रणाली, अमेरिकी स्टिंगर मिसाइल आदि का हस्तांतरण शामिल है।  

यह एक खुला राज़ है कि नाटो देशों के सैन्य कर्मियों को "विदेशी स्वयंसेवकों" की आड़ में यूक्रेनी सेना के साथ तैनात किया जाता है। विदेशी लड़ाकों की अगुवाई अमेरिकी अधिकारी करते हैं और यूक्रेनी सशस्त्र बलों की पूरी कमान मुख्य रूप से अमेरिकियों के हाथों में ही केंद्रित है।

यक़ीनन, युद्धपोत मोस्कवा का डूबना इस धारणा को पुष्ट करने वाला एकदम सटीक घटना है। रूसी विश्लेषकों का अनुमान है कि रूसी ध्वजपोत मोस्कवा पर पिछले हफ़्ते दागी गयी मिसाइल के पीछे का दिमाग़ वास्तव में पेंटागन का था और वहीं से सबकुछ समायोजित भी किया जा रहा था। फ्लाइट ट्रैकिंग साइट- एडीएस-बी एक्सचेंज के मुताबिक़, पूर्वी रोमानिया में ज़ुरिलोव्का गांव के पास इलेक्ट्रॉनिक गियर वाले एक अमेरिकी नौसेना के विमान को ध्वस्त किये गये मोस्कवा (जो शायद मिसाइल हमलों का मार्गदर्शन करता था) जहाज के आसपास के इलाक़े में देखा गया था।

इस घटना में जो निहित संदेश है,वह है- 'ब्रिंग एम’ ऑन(यानी आसान नहीं है)।' हालांकि, सैन्य लिहाज़ से 43 साल पुराने उस युद्धपोत का डूबना रूसी ऑपरेशन के लिए सबकुछ बदलकर रख देने वाली घटना नहीं हो सकती है। सब कुछ अब डोनबास की चढ़ाई पर टिका है - और,उन खेरसॉन और ओडेसा में संभावित रूप से आगे होने वाले रूसी ऑपरेशन पर निर्भर करता है, जिसके बिना नाटो काला सागर क्षेत्र में रूस के लिए एक बड़ा खतरा बना रहेगा। नाटो का झुकाव पहले से ही मोल्दोवा की तरफ़ है।

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

Battle for Mariupol is Ending

Mariupol
Russian Ministry of Defence
Moscow
NATO
Zelensky
Azovstal

Related Stories

बाइडेन ने यूक्रेन पर अपने नैरेटिव में किया बदलाव

पश्चिम बैन हटाए तो रूस वैश्विक खाद्य संकट कम करने में मदद करेगा: पुतिन

90 दिनों के युद्ध के बाद का क्या हैं यूक्रेन के हालात

यूक्रेन युद्ध से पैदा हुई खाद्य असुरक्षा से बढ़ रही वार्ता की ज़रूरत

खाड़ी में पुरानी रणनीतियों की ओर लौट रहा बाइडन प्रशासन

फ़िनलैंड-स्वीडन का नेटो भर्ती का सपना हुआ फेल, फ़िलिस्तीनी पत्रकार शीरीन की शहादत के मायने

यूक्रेन में संघर्ष के चलते यूरोप में राजनीतिक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव 

नाटो देशों ने यूक्रेन को और हथियारों की आपूर्ति के लिए कसी कमर

रूस ने पश्चिम के आर्थिक प्रतिबंधों का दिया करारा जवाब 

यूक्रेन में छिड़े युद्ध और रूस पर लगे प्रतिबंध का मूल्यांकन


बाकी खबरें

  • mayawati
    सुबोध वर्मा
    यूपी चुनाव: दलितों पर बढ़ते अत्याचार और आर्थिक संकट ने सामान्य दलित समीकरणों को फिर से बदल दिया है
    28 Feb 2022
    एसपी-आरएलडी-एसबीएसपी गठबंधन के प्रति बढ़ते दलितों के समर्थन के कारण भाजपा और बसपा दोनों के लिए समुदाय का समर्थन कम हो सकता है।
  • covid
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 8,013 नए मामले, 119 मरीज़ों की मौत
    28 Feb 2022
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 1 लाख 2 हज़ार 601 हो गयी है।
  • Itihas Ke Panne
    न्यूज़क्लिक टीम
    रॉयल इंडियन नेवल म्युटिनी: आज़ादी की आखिरी जंग
    28 Feb 2022
    19 फरवरी 1946 में हुई रॉयल इंडियन नेवल म्युटिनी को ज़्यादातर लोग भूल ही चुके हैं. 'इतिहास के पन्ने मेरी नज़र से' के इस अंग में इसी खास म्युटिनी को ले कर नीलांजन चर्चा करते हैं प्रमोद कपूर से.
  • bhasha singh
    न्यूज़क्लिक टीम
    मणिपुर में भाजपा AFSPA हटाने से मुकरी, धनबल-प्रचार पर भरोसा
    27 Feb 2022
    मणिपुर की राजधानी इंफाल में ग्राउंड रिपोर्ट करने पहुंचीं वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह। ज़मीनी मुद्दों पर संघर्षशील एक्टीविस्ट और मतदाताओं से बात करके जाना चुनावी समर में परदे के पीछे चल रहे सियासी खेल…
  • up elections
    न्यूज़क्लिक टीम
    उत्तर प्रदेश चुनाव: क्या हैं जनता के असली मुद्दे?
    27 Feb 2022
    न्यूज़क्लिक ने उत्तर प्रदेश बनारस विधानसभा में मीलों का सफ़र तय किया, यह जानने की कोशिश थी की आखिर जनता क्या चाहती है? क्या जनता इस बार भी धर्म को सबसे ऊपर रखते हुए अपना मुख्यमंत्री चुनेगी या…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License