NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कोविड-19
स्वास्थ्य
अंतरराष्ट्रीय
महामारी में किशोरों का बिगड़ा मानसिक स्वास्थ्य; कैसे निपटेगी दुनिया!
पिछले सप्ताह यूनिसेफ ने अपनी एक महत्त्वपूर्ण रिपोर्ट सार्वजनिक की। रिपोर्ट में यह चेतावनी दी गई है कि कोविड-19 के कारण बड़ी संख्या में बच्चों और किशोरों की एक बड़ी आबादी का मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ गया है, जिसका प्रभाव आगामी कई वर्षों तक रहेगा।
शिरीष खरे
04 Jan 2022
mental health
'प्रतीकात्मक फ़ोटो'

यूनिसेफ के नए विश्लेषण से संकेत मिलता है कि बच्चों और किशोरों में मानसिक विकारों के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था को सालाना लगभग 390 मिलियन डॉलर का नुकसान होता है।

पिछले सप्ताह यूनिसेफ ने अपनी एक महत्त्वपूर्ण रिपोर्ट सार्वजनिक की। रिपोर्ट में यह चेतावनी दी गई है कि कोविड-19 के कारण बड़ी संख्या में बच्चों और किशोरों की एक बड़ी आबादी का मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ गया है, जिसका प्रभाव आगामी कई वर्षों तक रहेगा।

'दी स्टेट ऑफ द वर्ल्ड्स चिल्ड्रन 2021' यूनिसेफ द्वारा तैयार की गई हालिया रिपोर्ट है, जिसके मुताबिक कोविड-19 के पहले भी 21वीं सदी बच्चों और युवाओं के लिए मानसिक स्वास्थ्य की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण है। नवीनतम सर्वेक्षणों के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर 10-19 आयु वर्ग के किशोरों के बीच 7 में से 1 से अधिक किशोर मानसिक विकार के साथ जीने के लिए अभिशप्त हैं।

46,000 किशोर कर रहे आत्महत्या

हर साल इस आयु वर्ग के लगभग 46,000 किशोर आत्महत्या कर रहे हैं, जिनके पीछे मानसिक प्रताड़ना एक बड़ा कारक सामने आया है। वहीं, विश्लेषण में यह स्पष्ट हुआ है कि मानसिक स्वास्थ्य की स्थितियों की तुलना में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को हल करने में काफी कम बजट खर्च किया जा रहा है। रिपोर्ट में पाया गया है कि वैश्विक स्तर पर सरकारी स्वास्थ्य बजट का महज 2 प्रतिशत ही मानसिक स्वास्थ्य पर खर्च के लिए आवंटित होता है।

वहीं, इस बारे में यूनिसेफ के कार्यकारी निदेशक हेनरिटा फोर मानती हैं कि हम सभी खासकर बच्चों के लिए लॉकडाउन और महामारी से संबंधित 18 महीने की अवधि परेशानियों से भरी रही। इस दौरान बच्चों को अपने जीवन का अहम समय दोस्तों, कक्षाओं, खेलों से दूर बिताना पड़ा, जिससे उनका बचपन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

गौर करने वाली बात यह है कि कोविड-19 महामारी से पहले दुनिया भर के बहुत सारे बच्चे मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के बोझ तले दबे हुए थे, जबकि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकारों को पर्याप्त निवेश करना चाहिए था, जो उन्होंने नहीं किया। अब वैश्विक महामारी के कारण यह संकट पहले की अपेक्षा कई गुना गहराकर सतह पर आ रहा है, तो मानसिक स्वास्थ्य और भविष्य के जीवन के परिणामों के बीच संबंधों पर पर्याप्त महत्त्व देने की आवश्यकता जताई जा रही है।

कोविड-19 के दौरान क्या बोले किशोर?

दरअसल, कोविड-19 महामारी ने दुनिया भर के लोगों को कई तरह से प्रभावित किया है। वहीं, यूनिसेफ द्वारा 21 देशों में किए गए अंतरराष्ट्रीय सर्वेक्षण के दौरान हर पांचवें बच्चे ने अपनी मानसिक हताशा जाहिर की है। 15-24 आयु वर्ग के 20 प्रतिशत किशोरों ने बताया कि वे अक्सर उदास महसूस करते हैं, काम करने में उनकी दिलचस्पी बहुत कम रहती है।

दरअसल, भारत और बांग्लादेश जैसे विकासशील देशों में इस समस्या के पीछे सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि यहां मानसिक स्वास्थ्य की जरूरतों पर सामान्यतः किसी का ध्यान नहीं जाता है, हम समय रहते अक्सर इस तरह के विकारों को पहचान नहीं पाते हैं, इस मामले में अमीर देश कहीं अधिक संवेदनशील हैं, जो किशोरों के जीवन को पूरी तरह प्रभावित करने वाले कारकों को लेकर कहीं अधिक जागरूक हैं।

भारतीय शिक्षा के तहत बाल मनोविज्ञान क्षेत्र में कार्यरत श्रीराम शर्मा बताते हैं कि हमारे यहां मानसिक स्वास्थ्य को लेकर हाल के वर्षों में नीतिगत स्तर पर काफी ध्यान आकर्षित किया जा रहा है। उदाहरण के लिए, एक राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य रणनीतिक योजना विकसित करने की जरूरत बताई जा रही है। लेकिन, ऐसी किसी भी योजना में यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि वह महज औपचारिक न होकर जमीन पर अच्छी तरह से संचालित होती रहे।

साथ ही, यह भी देखना होगा कि प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य की जरूरतों को लगातार संबोधित किया जा रहा है या नहीं, क्योंकि हर बच्चे और किशोर को मानसिक स्वास्थ्य देखभाल का अधिकार है, इस अधिकार के प्रति हमें जागृत होने की जरूरत है, इसलिए महामारी के बाद हमारा कर्तव्य है कि इस अधिकार को लेकर एक बड़े स्तर पर मुहिम चलाई जाए।

भारी न पड़ जाए महामारी का तीसरा वर्ष

कोविड-19 अपने तीसरे वर्ष में प्रवेश कर रहा है। इसे देखते हुए बच्चों और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य व कल्याण को लेकर चिंताएं जताई जा रही हैं। यूनिसेफ के नवीनतम सर्वेक्षण के अनुसार, वैश्विक स्तर पर 1.6 बिलियन से अधिक बच्चों को शिक्षा संबंधी नुकसान हुआ है। यही वजह है कि कोविड-19 से प्रभावित दिनचर्या, शिक्षा, मनोरंजन के साथ-साथ पारिवारिक आय और स्वास्थ्य की चिंता के कारण कई किशोर अपने भविष्य को लेकर भयभीत, क्रोधित तथा चिंतित महसूस कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, पिछले दिनों चीन में हुए एक ऑनलाइन सर्वेक्षण के दौरान लगभग एक तिहाई किशोर उत्तरदाताओं ने अपना डर या अपनी चिंता जाहिर की है।

ये चिंताएं आत्मकेंद्रित, द्विध्रुवी विकार, आचरण विकार, अवसाद, भोजन संबंधी विकार और बौद्धिक अक्षमताओं से जुड़ी हुई हैं, जो शिक्षा, जीवन के परिणामों और आमदनी की क्षमता को काफी नुकसान पहुंचा सकते हैं।

इन मानसिक विकारों के कारण किशोरों के जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों की गणना नहीं की जा सकती है। लेकिन, 'लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स' के एक नए विश्लेषण से यह संकेत मिलता है कि मानसिक विकारों के कारण कई किशोर विकलांगता या मौत के शिकार हो रहे हैं। कोविड-19 ने किशोरों के पालन-पोषण और स्कूली शिक्षा के अभाव, संबंधों में अलगाव, हिंसा के कारण उपजे भेदभाव, गरीबी और स्वास्थ्य समस्याओं को बढ़ा दिया है, जिनसे कई तरह मनोविकार फैल रहे हैं। वहीं, इसके चलते परोक्ष तौर पर अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।

किशोर मानसिक स्वास्थ्य में तत्काल निवेश

कोविड-19 महामारी से जुड़ी आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए किशोरों के प्रति प्रोत्साहन और देखभाल का दृष्टिकोण तैयार करने की जरूरत है। इसके अंतर्गत कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा किशोर मानसिक स्वास्थ्य में तत्काल निवेश की मांग भी की जा रही है। 

दूसरा, स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा क्षेत्रों में साक्ष्य-आधारित हस्तक्षेपों को एकीकृत करने वाले उन कार्यक्रमों को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है, जिनमें किशोरों के परिजनों को भी शामिल किया जा सके। इसी तरह, उस दृष्टिकोण को हतोत्साहित करने पर भी जोर दिया जा रहा है, जिसमें मानसिक बीमारी को कलंक की तरह देखा जाता है। इसके तहत मानसिक बीमारी के बारे में चुप्पी तोड़ने और मानसिक स्वास्थ्य पर बेहतर समझ बनाने जैसी बातों को गंभीरता से लिया जा रहा है।

दरअसल, मानसिक स्वास्थ्य शारीरिक स्वास्थ्य का ही एक हिस्सा है, जिसे अब तक अलग से देखा जाता रहा है, लेकिन वैश्विक महामारी के कारण अब अमीर देशों की तरह की गरीब देशों में भी इसे गंभीरतापूर्वक लिए जाने की पहल हो रही है। इस क्रम में एक अच्छी बात यह है कि अब भारत जैसे देशों में भी खास तौर से किशोरों को ध्यान में रखते हुए मानसिक स्वास्थ्य पर निवेश बढ़ाने की वकालत हो रही है।

(शिरीष खरे पुणे स्थित स्वतंत्र पत्रकार हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)

ये भी पढ़ें: कुपोषित बच्चों के समक्ष स्वास्थ्य और शिक्षा की चुनौतियां

COVID-19
Coronavirus
Pandemic Coronavirus
Mental health
Mental Health COVID
UNICEF

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा


बाकी खबरें

  • Red Volunteers
    संदीप चक्रवर्ती
    बंगाल ट्रेन दुर्घटना के पीड़ितों की मदद करने के लिए आगे आये ‘रेड वालंटियर्स’
    15 Jan 2022
    जलपाईगुड़ी जिला अस्पताल में दुर्घटना में घायल यात्रियों को यथासंभव मदद पहुंचाने के लिए आपातकालीन स्थिति में रक्तदान करने के लिए करीब चालीस रेड वालंटियर्स फौरन पहुंचे।  
  • yogi
    एम.ओबैद
    दलितों के ख़िलाफ़ हमले रोकने में नाकाम रही योगी सरकार
    15 Jan 2022
    पिछले साल जारी एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक देश भर में उत्तर प्रदेश में साल 2020 में दलितों के खिलाफ सबसे अधिक आपराधिक मामले दर्ज किए गए। यहां 12,714 मामले (25.2 प्रतिशत) दर्ज किए गए थे।
  • tubnisia
    काथरिन स्काएर, तारक गुईज़ानी
    ट्यूनीशिया: पहली डिजिटल राजनीतिक सुझाव प्रक्रिया पर लोगों में मत-विभाजन
    15 Jan 2022
    नए संविधान पर लोगों से डिजिटल तरीके से राजनीतिक सुझाव बुलवाए गए हैं। यह ट्यूनीशिया के राष्ट्रपति काएस सईद का राजनीतिक संकट से निकलने का रास्ता हो सकता है। लेकिन सईद की मंशा की तरह, इस ऑनलाइन सुझाव…
  • Turkey
    एम. के. भद्रकुमार
    क्या अमेरिका और यूरोप के करीब आ रहा है तुर्की?
    15 Jan 2022
    लेकिन, हक़ीक़त यह है कि पश्चिम तुर्की को तो स्वीकार कर सकता है, लेकिन क्या वे एर्दोगन को स्वीकार करेगा?
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,68,833 नए मामले, 402 मरीज़ों की मौत
    15 Jan 2022
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या बढ़कर 3.85 फ़ीसदी यानी 14 लाख 17 हज़ार 820 हो गयी है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License