NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
शिक्षा
भारत
राजनीति
मिड डे मील घोटाला: कई सवाल खड़े करती है 'पानी में दूध मिलाने की घटना'
एक जगह गंगा की सफाई के नाम पर दूध पानी की तरह बहाया जा रहा है और दूसरी जगह पर बच्चों को दूध देने के नाम पर पानी में दूध मिलाया जा रहा है। ऐसी घटनाएं हमसे बहुत सारे सवाल पूछती हैं।  
अजय कुमार
30 Nov 2019
mid day meal

उत्तर प्रदेश की दो घटनाएं है। पहली है सोनभद्र की और दूसरी है कानपुर की। एक नई, एक पुरानी। पहली घटना यूँ है कि एक ऐसा वीडियो वायरल हुआ जिसमें सोनभद्र के प्राथमिक स्कूल में मीड डे मील के लिए दूध देने के लिए स्कूल की रसोइया फूलवंती एक बाल्टी पानी में एक लीटर दूध मिलाकर गर्म कर रही हैं। दूसरी घटना जिसकी तस्वीरें इसी संदर्भ में वायरल हो रही है वो है पिछले साल कानपुर में संत समाज के की ओर से किए गए गंगा शद्धीकरण की, जिसमें 1100 लीटर दूध पानी में बहा दिया। बच्चों को दूध देने के नाम पर संत समाज के लोग भड़क उठे। एक संत ने यहां तक कह दिया कि गंगा मैया के किनारे चालीस लाख बच्चे पलते हैं, उन्हें दूध पिलाने से क्या होगा? वह अपना सारा दूध यूरिन और शौच के तौर पर बाहर निकाल देते हैं। हम लोग गंगा को साफ़ करने को स्वच्छ बना रहे हैं। बच्चों को दूध तो दिया जाते रहेगा लेकिन जरूरत इस बात की है कि गंगा को साफ करने के लिए दूध बहाया जाए।  

ये दोनों घटनाएं एक दूसरे की आलोचना करती हैं। हम गुस्से में कह सकते हैं देखिये एक जगह गंगा की सफाई के नाम पर दूध पानी की तरह बहाया जा रहा है और दूसरी जगह पर बच्चों को दूध देने के नाम पर पानी में दूध मिलाया जा रहा है (हां एक बाल्टी पानी में एक लीटर दूध मिलाने को दूध में पानी मिलाना तो नहीं कहा जा सकता) । हमारा यह गुस्सा जायज़ है। और यह आलोचना भी एक हद तक सही है। लेकिन जिस समाज में हम रह रहे हैं, उसे झकझोरने के लिए यह आलोचना कच्ची है। ऐसी घटनाएं हमसे बहुत सारे सवाल पूछती हैं।  

एक बाल्टी पानी में एक लीटर दूध मिलाकर गर्म करना तो पहली नजर में एक तरह की मिलावट की तरफ इशारा करता है। जब इसके साथ हम यह जोड़ देते हैं कि यह घटना मिड डे मील के लिए बच्चों को दिए जाने वाले दूध से जुड़ी थी तो बात थोड़ी और गहरी जाती है, हम समझ पाते हैं कि यह एक तरह की लूट है जो मिड डे मिल से की जा रही है। और जब इसके साथ यह जुड़ जाता है कि यह घटना प्राथमिक विद्यालय में घटी है तो हमारे समाज की बहुत सारी तहें उभर कर सामने आती है। जिनकी तरफ हम ध्यान नहीं देना चाहते।

सबसे उपेक्षित स्थिति है भारत के किसी भी इलाके में सरकारी प्राथमिक विद्यालयों की स्थिति बहुत बुरी है। यहां या किसी दूसरे मामलें में जब वीडियो सामने आते हैं और वायरल हो जाते हैं तब जाकर यह खबर का हिस्सा बनते हैं। तब हमारा जनमानस सोचता है कि इस देश का क्या होगा? और ज्यादा से ज्यादा हम यह सोचते हैं कि इससे जुड़ी अधिकारियों को सज़ा दे दी जाए। जिनकी इस पर निगरानी की जिम्मेदारी बनती है, उन्हें सज़ा दी जाए।  

लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त यह है कि सरकारी प्राथमिक स्कूल के प्रति जिस तरह आम जनता खासतौर पर मिडिल क्लास का रवैया है वह यह साफ़ करता है कि उसे सरकारी स्कूलों से कोई ज़्यादा सरोकार नहीं है।  उसने अब सरकारी स्कूलों का रास्ता छोड़कर निजी स्कूलों का रास्ता पकड़ लिया है। सरकार और सरकारी अफसर अपने बच्चों को इन स्कूलों में पढ़ने के लिए नहीं भेजते हैं। वे स्वीकारते है कि सरकारी स्कूल किसी काम के नहीं है। जब सरकारी स्कूलों के बारे में समाज का ऐसा रवैया हो और उस समय सरकारी स्कूलों की बुरी स्थिति केवल एक वीडियों के जरिये पता चले तो इसका मतलब कि उस समाज को प्रशासित करने वाले पूरे समाज को जागरूक करने की बजाय अँधेरे में ले जा रहे हैं।  

क्या आपने कभी ऐसी खबर सुनी है कि किसी गाँव की पंचायत सरकारी स्कूलों और अस्पतालों पर बहस करे। आम जनता को जागरूक करे या इकट्ठा कर बात करे।ऐसी बहसों से हम नहीं टकराते। हमारे समाज के अनुभवी लोग और संस्थाएं हमें इन बहसों की तरफ नहीं ले जाती।

उनकी चिंताओं को बहुत ही निर्जीव भाषा में गढ़ दिया गया है। उन्हें विकास की पट्टी पढ़ाई जाती है लेकिन यह नहीं बताया जाता कि यह तब तक नहीं हो सकता जब तक उन्हें सही सवाल पूछने का हुनर न सिखाया जाए। उन्हें नहीं बताया जाता कि चमचाती हुई सड़कों और 24 घण्टे बिजली का सपना वाले लोग जब तब उनसे झूठ बोलेंगे तब तक अंधेरा रहेगा।

यह विकास इससे कभी नहीं आने वाला कि हमें मंदिर-मस्जिद और जातियों के नाम पर बांट दिया जाए। हमारी लामबंदी तब तक सफल नहीं सकती जब हम गंगा की सफाई के नाम पर 1100 लीटर दूध तो बहा देते हैं लेकिन 11 बार भी उन संस्थाओं से सवाल नहीं करते, जिन्हें गंगा सफाई की जिम्मेदारी सौंपी गयी है।

कहने का मतलब यह है कि हमारे समाज में वैसे सामाजिक संस्कार पल बढ़ रहे हैं जिनका सही तरह के सवाल पूछने से कोई लेना देना नहीं हो रहा है।  हमारे समाज का लोकतंत्र ऐसी बेकार की बातों से सड़ रहा है। लोगों में नागरिकता का एहसास पैदा नहीं किया जा रहा है। उन्हें नहीं बताया जा रहा है कि वह तभी ठीक ढंग से जी पायेंगे जब वह सरकार और प्रशासन से सही तरह के सवाल पूछेंगे। केवल एक दिन नहीं हर दिन पूछेंगे। तभी गंगा साफ़ हो पाएगी और स्कूलों के मिड डे मील में धाँधली नहीं होगी।  तभी दूध की जगह पानी और रोटी के साथ नमक नहीं मिलेगा।

Mid-day Meals
sonbhadra
Milk Roti-Salt
mirzapur
Primary Schools In Uttar Pradesh
Mid-Day Meal Scam

Related Stories

हिमाचल: मध्याह्न भोजन के लिए रसोइए की भर्ती में सांस्थानिक जातिवाद 

यूपी: रोज़गार के सरकारी दावों से इतर प्राथमिक शिक्षक भर्ती को लेकर अभ्यर्थियों का प्रदर्शन

मिर्जापुर: प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने उत्तर प्रदेश सरकार से रिपोर्ट मांगी

क्या ऐसे होगा स्वस्थ भारत का निर्माण ?


बाकी खबरें

  • rahul modi
    लाल बहादुर सिंह
    मोदी-संघ की "विकास और विरासत" की फासीवादी मुहिम का जवाब रैडिकल लोकतान्त्रिक विमर्श है, हिन्दू बनाम हिंदुत्व नहीं
    21 Dec 2021
    जनता के जीवन के वास्तविक सवालों को महत्वहीन बना देने और इससे काटकर पूरे सामाजिक-राजनीतिक विमर्श को हिन्दू पहचान, संस्कृति और विरासत के भावनात्मक, विभाजनकारी नैरेटिव पर केंद्रित कर देने की कोशिश हो…
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 5,326 नए मामले, ओमिक्रॉन के मामले बढ़कर 174 हुए
    21 Dec 2021
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.23 फ़ीसदी यानी 79 हज़ार 97 हो गयी हैं, लेकिन ओमिक्रॉन के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है | 
  • covid
    ज्योत्सना सिंह, आना व्रासर
    यात्रा प्रतिबंधों के कई चेहरे
    21 Dec 2021
    ओमिक्रॉन का पता चलने के बाद महामारी की जवाबी प्रतिक्रिया को लेकर ज़रूरी आपूर्ति की डिलीवरी को रोकते हुए और अविकसित देशों के प्रति अपने नस्लवादी पूर्वाग्रह दिखाते हुए कई अमीर देशों ने दक्षिणी अफ़्रीका…
  • Inequality
    भरत डोगरा
    भारत के पास असमानता से निपटने का समय अभी भी है, जानें कैसे?
    21 Dec 2021
    घोर पूंजीवाद के नेतृत्व में चलने वाली अर्थव्यवस्था और संयुक्त राज्य अमेरिका के मॉडल का अनुसरण करने वाला वर्तमान अत्यधिक असमान आर्थिक मार्ग सभी नागरिकों की ज़रूरतों को स्थायी रूप से पूरा नहीं कर सकता…
  • daily
    न्यूज़क्लिक प्रोडक्शन
    पलवल में मुस्लिम युवक की हत्या, लोकसभा में चुनाव सुधार बिल पास और अन्य ख़बरें
    20 Dec 2021
    न्यूज़क्लिक के डेली राउंडअप में आज हमारी नज़र रहेगी पलवल में मुस्लिम युवक की हत्या, चुनाव सुधार बिल लोकसभा में पास और अन्य ख़बरों पर।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License