NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
देशभर में लाखों आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने 'ललकार दिवस' मनाया
लगभग 3 लाख महिला कार्यकर्ता और सहायक लाल ड्रेस और लाल मास्क पहनकर सड़कों पर उतरीं। उनका कहना था कि इस माहमारी से लड़ने के लिए उन्हें अन्य सुविधा और लाभ तो क्या पिछले तीन महीनों के दौरान एक भी सुरक्षा किट या मास्क यहां तक की साबुन तक नहीं मिला है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
11 Jul 2020
ललकार दिवस

आज देश कोरोना जैसी गंभीर महामारी से जूझ रहा है। इस संघर्ष में डॉक्टर और नर्स के साथ ही सबसे आगे रहने वाली लाखों आशा और आंगनवाड़ी कर्मचारी फ्रंटलाइन योद्धा है। जिन्हें सरकार और प्रधानमंत्री कोरोना योद्धा कहते हैं। शुक्रवार को लाखों आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और हैल्पर्स ने पूरे देश में प्रदर्शन किया। इसमें लगभग 3 लाख कार्यकर्ताओ और हेल्पर्स ने भाग लिया। सभी, लाल ड्रेस और लाल मास्क पहनकर अपने लिए मूलभुत सुरक्षा की मांग को लेकर सड़कों पर निकलीं। इस विरोध प्रदर्शन का आह्वान ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ आंगनवाड़ी वर्कर्स एंड हेल्पर्स (AIFAWH) द्वारा किया गया था। इस कार्यक्रम को “ललकार दिवस" के तौर पर मनाया गया ।

अधिकारियों द्वारा आंदोलन न करने की चेतावनी के बावजूद, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायकों, जो महामारी के प्रसार को रोकने के लिए सुरक्षा उपायों पर जनता को शिक्षित करते हैं, बहुत अनुशासित तरीके से, शारीरिक दूरी के सभी मानदंडों को रखते हुए, परियोजना मुख्यालय में ललकार दिवस मनाया। उन्होंने स्थानीय अधिकारियों के माध्यम से प्रधानमंत्री और महिला बाल विकास मंत्री को ज्ञापन सौंपा।

2_9.jpg

AIFAWH ने बताया ये प्रदर्शन आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, पांडिचेरी, राजस्थान, तेलंगाना, त्रिपुरा, तमिलनाडु सहित लगभग 22 राज्यों में हुआ।

इसके साथ ही कर्नाटक में आंदोलन और तेज़ करने के लिए 13 जुलाई से तीन दिनों का विरोध प्रदर्शन शुरू करने का भी ऐलान किया गया। हालंकि कर्नाटक में कुछ महीनों पहले भी वेतन सहित कई मांगो को लेकर हज़ारों की संख्या में इन कार्यकर्ताओ ने प्रदर्शन किया था। जिसके बाद सरकार ने इन्हें इनकी मांगे पूरा करने का आश्वासन दिया था। परन्तु आजतक सरकार ने इनकी समस्याओ पर कोई ध्यान नहीं दिया इसी वजह से ये कर्मचारी पुनः सड़क पर उतर रहे हैं।

आपको बात दें कि कोरोना और इस लॉकडाउन में इन कार्यकर्ताओ की भूमिका सबसे अग्रणी है। पूरे देश में 26 लाख आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और हैल्पर्स, आशा कार्यकर्ता हैं,जो अन्य फ्रंटलाइन योद्धा की तरह इस माहमारी में सबसे आगे होकर लड़ रही हैं। कोरोना से पूर्व भी ये महिलाएं 8 से 10 घंटे काम करती थीं लेकिन इनको आजतक सरकार कर्मचारी नहीं मानती है। इसलिए इन्हें वेतन नहीं मिलता है बल्कि सरकार इन्हे प्रोत्साहन राशि के रूप में कुछ मानदेय देती है। जो अलग अलग राज्य में अलग है। इनकी काफी समय से मांग है कि सरकार इन्हें सरकारी कर्मचारी समझकर इन्हें पूरा वेतन दे। क्योंकि ये चुनाव से लेकर स्वस्थ्य के क्षेत्र में कई जरूरी काम करती हैं।

3_3.jpg

AIFAWH ने कहा कि आज भी ये कार्यकर्ता डोर-टू-डोर सप्लीमेंट्री ले जा रही हैं जिससे लाभार्थियों को पोषण मिले, कोरोना को लकेर जागरूकता का भी काम कर रहे है, रोगियों का सर्वेक्षण करना, उन्हें अस्पतालों में ले जाना, केंद्रों में रोगियों की निगरानी कर रही है। परन्तु सरकार इन श्रमिकों को सुरक्षा गियर नहीं दे रही है।

प्रदर्शन कर रही कार्यकर्ताओं का कहना था कि हम, आंगनवाड़ी वर्कर्स और हैल्पर्स, अन्य फ्रंटलाइन वर्कर्स के साथ, हाल के मानव इतिहास में सबसे बड़ी लड़ाई के बीच में हैं, हम कोरोना महामारी से लड़ रहे हैं। परन्तु हम, आशा कार्यकर्ताओं और सफाई कर्मचारियों सहित अन्य श्रमिकों के साथ, जिन्हें कभी उनके काम की मान्यता नहीं दी गई,  बहुत मामूली भुगतान किया जाता हैं। इनमें ज्यादातर महिलाएं हैं, जो विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत काम करती हैं -इ न सभी श्रमिकों ने सैकड़ों जीवन बचाने के लिए, महामारी को रोकने के लिए सर्वोत्तम संभव मानव रूपी किले का निर्माण किया है।

वो सवाल करते हुए कहती हैं देश के लिए किए जाने वाले इस अनौपचारिक कार्य को हम मुफ्त में करते हैं, बदले में हमें क्या मिल रहा है? हम दिन-रात जबरदस्त दबाव में काम कर रहे हैं, हम बहुत ही दबाव में काम कर रहे हैं, किसी भी वक्त संक्रमित होने का डर, हमारे साथ-साथ हमारे प्रिय जनों, घर में हमारे बच्चों और हमारे बुजुर्गों के भी संक्रमित होने के डर सदैव हावी रहता है। लोग सोचते हैं कि हम ‘‘कोरोना योद्धा’’ नहीं बल्कि ‘‘कोरोना कैरियर’’ हैं यानी कोरोना फैलाने वाले।

6_2.jpg

आगे उन्होंने जो बताया वो चौंकाने वाला था कि इस गंभीर माहमारी से लड़ने के लिए उन्हें पिछले तीन महीनों के दौरान एक भी सुरक्षा किट या मास्क या साबुन नहीं मिला है। साथ उन्हें स्थिति से निपटने के लिए कभी कोई उचित प्रशिक्षण नहीं दिया गया। हमें मास्क और सैनिटाइटर खरीदने के लिए अपनी जेब से पैसे खर्च करने पड़े। इसके साथ ही दर्जनों वर्कर्स की कोरोना से संक्रमित होकर मृत्यु हो गई, बहुत से वर्कर ड्यूटी के दौरान बेहोश हुए और उनकी मृत्यु हुई लेकिन मौत का कारण पता लगाने के लिए उनका कभी भी टेस्ट नहीं किया गया।

आप सोचिए मोदी सरकार मीडिया में जिन्हें लागर कोरोना योद्धा बात रही है उन्हें न वेतन दिया जाता है और न कोई सुरक्षा किट। इसके बिना ही उन्हें सीधे मौत के मुंह में धकेला जा रहा है।

कर्मचारियों के मुतबिक 50 लाख करोड़ रुपये के बीमा की घोषणा बहुत धूमधाम से की गई, लेकिन इसमें आंगनवाड़ी वर्कर्स का ज़िक्र तक नहीं है।

5_5.jpg

AIFAWH महसचिव ए आर सिंधु ने बयान जारी करते हुए कहा कि इसके साथ ही बच्चों को दिए जाने वाले पोषण के बजट को भी कम कर दिया गया। स्थिति इतनी गंभीर है कि यूनिसेफ ने चेतावनी दी है कि इस साल हमारे देश में पांच साल से कम उम्र के अतिरिक्त तीन लाख बच्चों (हर साल मरने वाले लगभग नौ लाख बच्चों) की मौत कुपोषण के कारण होगी, अगर हम पर्याप्त भोजन और पोषण सुनिश्चित नहीं करते हैं। हमारे यहाँ अधिकांश लोग गरीब हैं। लेकिन सरकार के बहुप्रचारित 'पैकेज' में इस पर पूरी तरह से चुप्पी है।

उन्होंने कहा 'बिहार और यूपी जैसे कई राज्यों में राज्य सरकारें सूखे राशन की आपूर्ति को रोकने और नकदी हस्तांतरण के साथ इसे बदलने की कोशिश कर रही हैं। इसलिए, AIFAWH ने मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ अखिल भारतीय मांग दिवस को "ललकार दिवस" या 'चुनौती दिवस' के रूप में मनाया है। हमने सरकार के इन जनविरोधी नीतियों को एक चुनौती के रूप में लिया है और इसी के ख़िलाफ़ हमने सरकार को ललकार है कि हम ये जन विरोधी नीतियों को नहीं चलने देंगे और न ही हम लाखों बच्चो को मरने देंगे।

4_5.jpg

AIFAWH ने साफ किया की अगर उनकी मांगों को नहीं माना गया तो आने वाले दिनों में वो मोदी सरकार के खिलाफ अपना संघर्ष और तेज़ करेगी।

इनकी माँगें इस प्रकार हैं-

1. आईसीडीएस के लिए आर्थिक आवंटन को तत्काल दोगुना करो। लाभार्थियों को दिए जाने वाले पोषण आपूर्ति की मात्रा और गुणवत्ता बढ़ाओ।

2. आंगनवाड़ी वर्कर्स व हैल्पर्स को मजदूर के रूप में मान्यता दो, आंगनवाड़ी वर्कर्स को 30,000 और हैल्पर्स को 21000 रू प्रतिमाह न्यूनतम वेतन दो। मिनी आंगनवाड़ी वर्कर्स को समान वेतन दो। 45वीं और 46 वीं आईएलसी की सिफारिशों के अनुसार पेंशन, ईएसआई, पीएफ आदि प्रदान करो।

3. सभी आंगनवाड़ी वर्कर्स व हैल्पर्स के लिए सुरक्षात्मक उपकरण प्रदान करो, विशेषकर स्वास्थ्य क्षेत्र में। नियंत्रण क्षेत्रों और रेड जोन में लगे हुए वर्कर्स के लिए पीपीई किट दो। सभी फ्रंटलाइन श्रमिकों की बार-बार, निरंतर और फ्री कोविड -19 टेस्ट किए जाएं।

4. सभी फ्रंटलाइन श्रमिकों को 50 लाख रुपये का बीमा कवर दो जिसमें ड्यूटी पर होने वाली सभी मौतों को कवर किया जाए। पूरे परिवार के लिए कोविड -19 के उपचार का भी कवरेज दिया जाए।

5. पर्याप्त बजट आवंटन के साथ आईसीडीएस को स्थायी बनाओ। आईसीडीएस का किसी भी रूप में कोई निजीकरण नहीं किया जाए। आईसीडीएस में कोई नकद हस्तांतरण नहीं किया जाए। सभी मिनी केंद्रों को पूर्ण केंद्रों में बदलो।

6. कोविड -19 ड्यूटी में लगे सभी आंगनवाड़ी वर्कर्स व हैल्पर्स के लिए प्रति माह 25,000 रुपये का अतिरिक्त कोविड जोखिम भत्ता दिया जाए। सभी लंबित बकाया राशियों का तुरंत भुगतान किया जाए।

7. ड्यूटी पर रहते हुए संक्रमित हुए सभी लोगों के लिए न्यूनतम दस लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए।

8. आंगनवाड़ियों में ईसीसीई शिक्षा को मजबूत किया जाए।

9. सभी के लिए भोजन, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, आय, नौकरी और आश्रय सुनिश्चित करो।

10. काम के घंटो को बढ़ाकर 8 से 12 घंटे न किया जाए। श्रम कानूनों समाप्त नहीं किया जाए।

11. सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और सेवाओं का निजीकरण नही किया जाए।

12. कृषि व्यापार और ईसीए पर अध्यादेश तुरंत वापस लिया जाए।

Lalkar Divas
Anganwadi Workers
AIFAWH
CITU
Bihar
UttarPradesh
Coronavirus
ललकार दिवस

Related Stories

बिहार : जीएनएम छात्राएं हॉस्टल और पढ़ाई की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

झारखंड-बिहार : महंगाई के ख़िलाफ़ सभी वाम दलों ने शुरू किया अभियान

यूपी में  पुरानी पेंशन बहाली व अन्य मांगों को लेकर राज्य कर्मचारियों का प्रदर्शन

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

मुंडका अग्निकांड: सरकारी लापरवाही का आरोप लगाते हुए ट्रेड यूनियनों ने डिप्टी सीएम सिसोदिया के इस्तीफे की मांग उठाई

मनरेगा मज़दूरों के मेहनताने पर आख़िर कौन डाल रहा है डाका?

पटना : जीएनएम विरोध को लेकर दो नर्सों का तबादला, हॉस्टल ख़ाली करने के आदेश


बाकी खबरें

  • Inflation
    डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    तिरछी नज़र: सर जी, प्लीज़ यह महंगाई हमसे मत छीनिये
    07 Nov 2021
    सुनते हैं कि इस महंगाई की वजह से ही सरकार के सारे काम चल रहे हैं। एक तो इस मंहगाई से मिलने वाले पैसे से ही यह सब न दिखने वाला सारा विकास कार्य हो रहा है, और दूसरे इसी महंगाई की बदौलत ही यह सब न खाने…
  • facebook
    प्रबीर पुरकायस्थ
    मेटा: क्या यह सिर्फ फेसबुक की दागदार छवि बदलने का प्रयास है?
    07 Nov 2021
    फेसबुक की छवि को व्हिसिलब्लोअर फ्रांसिस हाउजेन और सोफी झांग के रहस्योद्घाटनों से काफी चोट लगी है। क्या यह उसकी अपने दागदार अतीत तथा वर्तमान से भी पीछा छुड़ाकर एक वैकल्पिक जगत में, फेसबुक द्वारा रचे…
  • world temperature rises
    अजय कुमार
    दुनिया के तापमान में 3 सेंटीग्रेड की बढ़ोतरी हो जाए तो क्या होगा?
    07 Nov 2021
    जिस तरह से दुनिया अपना विकास कर रही है, उस तरह से जलवायु सम्मेलन में घोषित किए जाने वाले लक्ष्य कभी हासिल नहीं हो पाएंगे। जलवायु विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया का तापमान साल 2030 के भीतर ही 1.5…
  • Tripura issue
    डॉ. राजू पाण्डेय
    त्रिपुरा: सांप्रदायिक हिंसा पर हमारा मौन घातक
    07 Nov 2021
    साम्प्रदायिक वैमनस्य का कोई इतिहास न होते हुए भी त्रिपुरा अक्टूबर माह के अंतिम सप्ताह में साम्प्रदायिक हिंसा की आग में झुलसता रहा।
  • hafte ki baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    भाजपा जीतने के लिए और कांग्रेस हारने के लिए कुछ भी कर सकती है!
    06 Nov 2021
    इस बार #HafteKiBaat के नये एपिसोड में चार खास खबरों की चर्चा और विश्लेषण. दिवाली के मौके पर पीएम मोदी के सैनिकों के बीच नौशेरा जाने का क्या मतलब है? पंजाब में कांग्रेस क्या सेल्फ़ गोल करेगी?
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License