NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
खाद्य मंत्रालय बैकफुट पर, ‘काम पर आइए, नहीं तो नौकरी से रिलीव हो जाइए’ नोटिस वापस लिया
जहां प्रधानमंत्री मोदी लगातार लॉकडाउन के चलते लोगों को नौकरी से न निकालने की अपील कर रहे हैं, वहीं सरकार के अंतर्गत आने वाले केंद्रीय खाद्य मंत्रालय द्वारा 13 अप्रैल को नोटिस जारी कर अधिकारियों और कर्मचारियों से 20 अप्रैल तक विभाग को सूचित करने को कहा गया कि वे काम करना चाहते हैं या नहीं, ताकि उन्हें रिलीव किया जा सके। हालांकि आलोचनाओं के बाद अब नोटिस को वापस ले लिया गया है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
15 Apr 2020
रामविलास पासवान

देश में कोरोना के चलते 25 मार्च से लॉकडाउन लागू है। सरकारी मंत्रालयों के साथ लगभग सभी पब्लिक-प्राइवेट ऑफिस भी बंद हैं। लेकिन 13 अप्रैल को भारत सरकार के उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा जारी एक नोटिस ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को परेशानी में डाल दिया। इस नोटिस में कहा गया कि जो अधिकारी-कर्मचारी विभाग में काम के लिए नहीं आएंगें, उन्हें विदा कर दिया जाएगा।

क्या है पूरा मामला?

एनडीटीवी में छपी खबर के मुताबिक केंद्र सरकार के उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय में बीते हफ्ते सभी अधिकारियों- कर्मचारियों को निर्देश दिया गया था कि सोमवार, 13 अप्रैल से काम पर आएं लेकिन जब ये लोग काम पर नहीं पहुंचे तो, इसके बाद मंत्रालय ने एक नोट जारी कर इन सभी लोगों को 20 अप्रैल तक सूचित करने को कहा कि वे विभाग के साथ अपनी सेवाएं जारी रखना चाहते हैं या नहीं, ताकि उन्हें ‘रिलीव’ किया जा सके।

इसके बाद सोशल मीडिया पर मामले ने तूल पकड़ लिया। लॉकडाउन के दौरान मंत्रालय द्वारा जारी इस नोटिस की खूब आलोचनाएं हुईं और आखिरकार केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान, जिनके अंतर्गत ये मंत्रालय आता है, उन्होंने ट्विटर पर सफाई दी साथ ही नौकरी से बर्खास्त करने वाले इस ऑफिस मेमोरेंडम को भी वापस लेने का निर्देश दिया।

केंद्रीय खाद्य मंत्री राम विलास पासवान ने ट्विटर पर लिखा, ‘मुझे उपभोक्ता मामलों के विभाग से इस नोटिस के बारे में पता चला है। इस मामले में विभाग के सचिव को निर्देश दिया गया है कि वो इस ऑफिस मेमोरेंडम को वापस लें और स्पष्टीकरण जारी करें। लॉकडाउन के दौरान कार्यालय एमएचए और डीओपीटी के आदेशों के अनुसार कार्य करते रहेंगे।’

capture 1.JPG

क्या कहना है विभागीय लोगों का?

इस मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले कई अधिकारियों-कर्मचारियों का कहना है कि वे भलिभांति इस बात को जानते हैं कि इस महामारी से लड़ने में, गरिबों तक राशन पहुंचाने में मंत्रालय का अहम योगदान है। इस बीमारी के संकट काल में उन्हें जरूरत से ज्यादा काम करने की आवश्यकता है, लेकिन साथ ही वे अपनी आने-जाने संबंधी समस्याओं को भी गंभीर मानते हैं। वो मंत्रालय से इस संकट की घड़ी में कुछ बुनियादी सुविधाओं की मांग कर रहे हैं।

एक विभागीय अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर न्यूज़क्लिक को बताया, “हमारे पास निजी गाड़ी नहीं है, बस और मेट्रो भी बंद हैं। हमें कोई आने-जाने का साधन नहीं मुहैया करवाया जा रहा, ऐसे में आखिर हम ऑफिस आएं भी तो कैसे?”

वे आगे नोटिस के बारे में बताते हुए कहते हैं, “ये मामला कई दिनों से अंदर-अंदर चल रहा था। पीएम के लॉकडाउन के ऐलान के बाद सभी सरकारी विभागों को चिट्ठी जारी कर बंद करने का आदेश हुआ। लेकिन अनिवार्य सेवा के तहत जब दफ्तर दोबारा खोलने की बात हुई तो बस कुछ लोगों को फोन पर सूचना दे दी गई। ऐसे में कई लोगों के बीच असमंजस भी था लेकिन ये नोटिस इस महामारी के दौरान बहुत ग़लत है, लोगों के अंदर अपनी नौकरी को लेकर डर पैदा करने वाला है।

एक अन्य महिला कर्मचारी समस्याओं के बारे में कहती हैं, “हमारा काम घर से नहीं हो सकता। सरकारी विभागों में फाइल सिस्टम है, आपको नोटिंग, ड्राफ्टिंग के बाद अप्रोव्ल लेना होता है। कई बार कई कामों को बार-बार करना होता है, ऐसे में सभी के पास सारी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। हम लोगों ने पहले भी बोला था कि हमें काम करने में दिक्कत नहीं है, लेकिन घर से निकलने से लेकर ऑफिस पहुंचने तक में बहुत दिक्कत है। कई लोग दूर-दराज इलाकों से आते हैं, आने-जाने के साधन बंद हैं, आपको दूसरों से सोशल डिस्टेंसिंग भी बनाकर रखनी है, कई स्टाफ के लोगों के पास मंत्रालय के कार्ड नहीं हैं, कर्फ्यू पास, मास्क आदि नहीं हैं। ऐसे में पहले आप सुविधाएं दें और फिर काम पर बुलाएं।”

दिप्रिंट की रिपोर्ट के मुताबिक सेक्रेटरी पवन कुमार अग्रवाल ने इस संबंध में कहा कि “नोटिस की भाषा की अस्पष्टता के कारण हम इसे वापस ले रहे हैं, नोट को गलत तरीके से छापा गया है। नोट जारी करने का उद्देश्य हॉटस्पॉट इलाकों में रह रहे उन अधिकारियों और स्टाफ की सूची बनाना था जो बीमारी के कारण आने में असमर्थ हैं ताकि उनकी जगह दूसरे अधिकारियों को काम दिया जा सके।”

इस मामले पर न्यूज़क्लिक ने मंत्रालय से इमेल के जरिए जानकारी मांगी है लेकिन कॉपी लिखे जाने तक कोई जवाब नहीं मिला है।

गौरतलब है कि कोरोना का कहर देश में जारी है, लॉकडाउन को 3 मई तक और बढ़ा दिया गया है। रोज़गार ठप्प है, लोगों की नौकरियां जा रही हैं लोकिन सरकार लगातार गरीबों के कल्याण और राहत के दावे कर रही है। ऐसे में जरूरी और आवश्यक सामान लोगों तक पहुंचाने में उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की बड़ी भूमिका है। लेकिन अगर यहां कार्यरत लोगों का कहना है कि उन्हें सहुलियत की बजाय धमकी दी जाए तो ये चिंताजनक है।

Coronavirus lockdown
RAM VILAS PASWAN
Department of Consumer Affairs
Indian government
Department of food and public distribution
novel coronavirus

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना मामलों में 17 फ़ीसदी की वृद्धि

WHO की कोविड-19 मृत्यु दर पर भारत की आपत्तियां, कितनी तार्किक हैं? 

ख़बरों के आगे-पीछे: भाजपा में नंबर दो की लड़ाई से लेकर दिल्ली के सरकारी बंगलों की राजनीति

सरकार ने मेडिकल कॉलेजों की बजाय मंदिरों को प्राथमिकता दी,  इसी का ख़ामियाज़ा यूक्रेन में भुगत रहे हैं छात्र : मेडिकल विशेषज्ञ

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 58,077 नए मामले, 657 मरीज़ों की मौत

विचार-विश्लेषण: विपक्ष शासित राज्यों में समानांतर सरकार चला रहे हैं राज्यपाल

तिरछी नज़र: प्रश्न पूछो, पर ज़रा ढंग से तो पूछो

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटे में 13,451 नए मामले, 585 मरीज़ों की मौत

प्राइवेटाइजेशन की नीति से भारत को फ़ायदा या नुक़सान? चीन ने कैसे पछाड़ा अमेरिका को!

इस साल और कठिन क्यों हो रही है उच्च शिक्षा की डगर?


बाकी खबरें

  • putin
    अब्दुल रहमान
    मिन्स्क समझौते और रूस-यूक्रेन संकट में उनकी भूमिका 
    24 Feb 2022
    अति-राष्ट्रवादियों और रूसोफोब्स के दबाव में, यूक्रेन में एक के बाद एक आने वाली सरकारें डोनबास क्षेत्र में रूसी बोलने वाली बड़ी आबादी की शिकायतों को दूर करने में विफल रही हैं। इसके साथ ही, वह इस…
  • russia ukrain
    अजय कुमार
    यूक्रेन की बर्बादी का कारण रूस नहीं अमेरिका है!
    24 Feb 2022
    तमाम आशंकाओं के बाद रूस ने यूक्रेन पर हमला करते हुए युद्ध की शुरुआत कर दी है। इस युद्ध के लिए कौन ज़िम्मेदार है? कौन से कारण इसके पीछे हैं? आइए इसे समझते हैं। 
  • up elections
    अब्दुल अलीम जाफ़री
    उत्तर प्रदेश चुनाव: ज़मीन का मालिकाना हक़ पाने के लिए जूझ रहे वनटांगिया मतदाता अब भी मुख्यधारा से कोसों दूर
    24 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश में चल रहे विधानसभा चुनाव के छठे चरण का मतदान इस इलाक़े में होना है। ज़मीन के मालिकाना हक़, बेरोज़गारी और महंगाई इस क्षेत्र के कुछ अहम चुनावी मुद्दे हैं।
  • ayodhya
    अरुण कुमार त्रिपाठी
    यूपी चुनाव: अयोध्यावादियों के विरुद्ध फिर खड़े हैं अयोध्यावासी
    24 Feb 2022
    अयोध्या में पांचवे दौर में 27 फरवरी को मतदान होना है। लंबे समय बाद यहां अयोध्यावादी और अयोध्यावासी का विभाजन साफ तौर पर दिख रहा है और धर्म केंद्रित विकास की जगह आजीविका केंद्रित विकास की मांग हो रही…
  • mali
    पवन कुलकर्णी
    माली से फ़्रांसीसी सैनिकों की वापसी साम्राज्यवाद के ख़िलाफ़ ऐतिहासिक जीत है
    24 Feb 2022
    माली से फ़्रांसीसी सैनिकों को हटाने की मांग करने वाले बड़े पैमाने के जन-आंदोलनों का उभार 2020 से जारी है। इन आंदोलनों की पृष्ठभूमि में, माली की संक्रमणकालीन सरकार ने फ़्रांस के खिलाफ़ लगातार विद्रोही…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License