NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
न्याय की चौखट पर स्त्री : दो मामले, दो सवाल, जिन्हें हल किया जाना ज़रूरी है
सुप्रीम कोर्ट की दो टिप्पणियों ने हर किसी को चौंका दिया है। पहला मामला नाबालिग से बलात्कार के आरोपी से यह पूछने का है कि ‘‘क्या वह लड़की से शादी करने को तैयार है।’’ और दूसरे मामले में कोर्ट ने सवाल किया कि क्या पति-पत्नी के रूप में एक साथ रहने वाले दंपति के बीच शारीरिक संबंध को बलात्कार कहा जा सकता है!
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
02 Mar 2021
sc

नयी दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के आरोपी एक लोक सेवक से पूछा कि ‘‘क्या वह लड़की से शादी करने को तैयार है।’’ शीर्ष अदालत को बताया गया कि आरोपी पहले से विवाहित है तो पीठ ने उसे नियमित जमानत के लिए संबंधित अदालत का रुख करने को कहा।

इसके अलावा एक दूसरे मामले में उच्चतम न्यायालय ने शादी का झांसा देकर एक महिला के साथ दुष्कर्म के आरोपी व्यक्ति को आठ हफ्ते के लिए गिरफ्तारी से छूट प्रदान कर दी। इसके साथ ही न्यायालय ने सवाल किया कि क्या पति-पत्नी के रूप में एक साथ रहने वाले दंपति के बीच शारीरिक संबंध को बलात्कार कहा जा सकता है।

इन दोनों मामलों में शीर्ष अदालत की टिप्पणियों ने इन मसलों को लेकर सालों से संघर्ष कर रहे महिला अधिकार कार्यकर्ताओं को सकते में डाल दिया। उनका कहना है कि जब शीर्ष अदालत इन मसलों को लेकर अभी तक स्पष्ट नहीं है तो फिर समाज में बदलाव की प्रक्रिया कितनी मुश्किल है।

समाचार एजेंसी भाषा द्वारा जारी ख़बर के अनुसार प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे के नेतृत्व वाली पीठ महाराष्ट्र राज्य बिजली उत्पादन कंपनी में कार्यरत एक तकनीकविद् द्वारा दाखिल एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। आरोपी ने मामले में अग्रिम जमानत रद्द करने के बंबई उच्च न्यायालय के पांच फरवरी के आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत का रुख किया था।

पीठ में न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामसुब्रमण्यन भी थे। सुनवाई शुरू होने पर पीठ ने आरोपी से पूछा, ‘‘क्या तुम उससे (लड़की से) शादी करना चाहते हो।’’

पीठ ने कहा, ‘‘अगर तुम शादी करने को इच्छुक हो तो हम इस पर विचार कर सकते हैं अन्यथा तुम्हें जेल जाना होगा।’’ साथ ही पीठ ने जोड़ा, ‘‘हम शादी के लिए दबाव नहीं डाल रहे।’’

पीठ द्वारा सवाल पूछे जाने पर याचिकाकर्ता की तरफ से पेश वकील ने कहा कि आरोपी पहले लड़की से शादी करना चाहता था लेकिन उसने मना कर दिया तो उसने किसी दूसरी लड़की से शादी कर ली।

वकील ने जब कहा कि आरोपी लोकसेवक है, इस पर पीठ ने कहा, ‘‘आपको (आरोपी को) लड़की को फुसलाने और दुष्कर्म करने से पहले यह सब विचार करना चाहिए था। आपको पता है कि आप एक सरकारी सेवक हैं।’’

वकील ने कहा कि मामले में अभी आरोप तय नहीं हुआ है।

पीठ ने कहा, ‘‘आप नियमित जमानत की अर्जी दे सकते हैं। हम गिरफ्तारी पर रोक लगाएंगे।’’

शीर्ष अदालत ने आरोपी को चार सप्ताह के लिए गिरफ्तारी से राहत प्रदान की।

पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘‘याचिकाकर्ता की तरफ से पेश वकील ने चार हफ्ते के भीतर नियमित जमानत के लिए अर्जी दाखिल करने की अनुमति के साथ यह याचिका वापस ले ली है। अनुरोध स्वीकार किया जाता है। तब तक याचिकाकर्ता को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। इसके तहत विशेष अनुमति याचिका खारिज की जाती है।’’

निचली अदालत द्वारा दी गयी अग्रिम जमानत को रद्द किए जाने के बंबई उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ आरोपी की याचिका पर शीर्ष अदालत सुनवाई कर रही थी।

व्यक्ति पर यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) कानून के तहत दंडनीय आरोप भी लगाए गए हैं।

अपनी याचिका में आरोपी ने महाराष्ट्र सिविल सेवा (अनुशासन और अपील) नियमावली 1979 का संदर्भ दिया और कहा कि किसी सरकारी सेवक को 48 घंटे के लिए आपराधिक आरोपों पर पुलिस हिरासत में रखा जाता है तो उसे निलंबन में रखा जाएगा।

आरोप है कि व्यक्ति ने लड़की से कई बार दुष्कर्म किया और किसी को बताने पर उसे धमकी दी।

याचिका में कहा गया कि लड़की और उसकी मां जब शिकायत दर्ज कराने के लिए थाना पहुंची तो आरोपी की मां ने उसे ऐसा नहीं करने का अनुरोध किया और वह लड़की को अपनी पुत्रवधू बनाने के लिए तैयार हो गयी।

लड़की जब जून 2018 में 18 साल की हो गयी तो आरोपी की मां ने शादी कराने से इनकार कर दिया, जिसके बाद शिकायत दर्ज करायी गयी।

न्यायालय ने बलात्कार के आरोपी को आठ सप्ताह तक गिरफ़्तारी से छूट प्रदान की

दूसरी ख़बर के मुताबिक उच्चतम न्यायालय ने शादी का झांसा देकर एक महिला के साथ दुष्कर्म के आरोपी व्यक्ति को आठ हफ्ते के लिए गिरफ्तारी से छूट प्रदान कर दी। इसके साथ ही न्यायालय ने सवाल किया कि क्या पति-पत्नी के रूप में एक साथ रहने वाले दंपति के बीच शारीरिक संबंध को बलात्कार कहा जा सकता है।

प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामसुब्रमण्यम की पीठ ने कहा, ‘‘अगर कोई दंपति पति और पत्नी के रूप में एक साथ रह रहे हैं, तो पति क्रूर हो सकता है लेकिन क्या आप उनके शारीरिक संबंधों को बलात्कार कह सकते हैं?"

पीठ ने विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। इन याचिकाओं में एक याचिका आरोपी की भी है जिसमें इलाहाबाद उच्च न्यायालय के अप्रैल 2019 के आदेश को चुनौती दी गयी है। उच्च न्यायालय ने आरोपी के खिलाफ उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्धनगर जिले में दर्ज प्राथमिकी को खारिज करने से इनकार कर दिया था।

वीडियो-कॉन्फ्रेंस के जरिए हुयी सुनवाई के दौरान, शिकायतकर्ता महिला की ओर से पेश वकील ने कहा कि आरोपी ने धोखे से महिला से सहमति ली थी।

वकील ने दावा किया कि आरोपी 2014 में महिला को हिमाचल प्रदेश के मनाली में एक मंदिर में ले गया जहां उन्होंने "शादी की रस्में" निभाईं।

पीठ ने कहा, ‘‘“शादी का झूठा वादा करना गलत है। यहां तक कि किसी महिला को भी इस तरह का वादा नहीं करना चाहिए और फिर तोड़ देना चाहिए।’’

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील विभा दत्ता मखीजा ने कहा कि आरोपी और महिला दो साल तक ‘लिव-इन रिलेशन’ में थे और बाद में महिला ने शादी का झूठा वादा कर बलात्कार का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज करायी।

मखीजा ने कहा कि प्राथमिकी में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376 (बलात्कार) के तहत आरोप दर्ज किया गया है ताकि व्यक्ति को परेशान किया जा सके।

शिकायतकर्ता महिला की ओर से पेश वकील ने आरोप लगाया कि आरोपी ने उसके पति होने का नाटक किया था लेकिन बाद में उसने दूसरी महिला से शादी कर ली। उन्होंने दावा किया कि आरोपी ने महिला के साथ मारपीट की और उन्होंने इस संबंध में मेडिकल रिकॉर्ड का भी जिक्र दिया।

Minor girl case
Marriage
sexual harassment
sexual crimes
patriarchal society
Supreme Court

Related Stories

ज्ञानवापी मस्जिद के ख़िलाफ़ दाख़िल सभी याचिकाएं एक दूसरे की कॉपी-पेस्ट!

आर्य समाज द्वारा जारी विवाह प्रमाणपत्र क़ानूनी मान्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट

समलैंगिक साथ रहने के लिए 'आज़ाद’, केरल हाई कोर्ट का फैसला एक मिसाल

मायके और ससुराल दोनों घरों में महिलाओं को रहने का पूरा अधिकार

जब "आतंक" पर क्लीनचिट, तो उमर खालिद जेल में क्यों ?

विचार: सांप्रदायिकता से संघर्ष को स्थगित रखना घातक

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक आदेश : सेक्स वर्कर्स भी सम्मान की हकदार, सेक्स वर्क भी एक पेशा

तेलंगाना एनकाउंटर की गुत्थी तो सुलझ गई लेकिन अब दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?

मलियाना कांडः 72 मौतें, क्रूर व्यवस्था से न्याय की आस हारते 35 साल

क्या ज्ञानवापी के बाद ख़त्म हो जाएगा मंदिर-मस्जिद का विवाद?


बाकी खबरें

  • वसीम अकरम त्यागी
    ‘हेट स्पीच’ के मामले 6 गुना बढ़े, कब कसेगा क़ानून का शिकंजा?
    15 Apr 2022
    2014 में देश में हेट स्पीच के कुल 336 मामले दर्ज हुए थे, जबकि 2020 में 1,804 मामले दर्ज हुए हैं। कुल मिलाकर सात साल में हेट स्पीच के मामले छह गुना तक बढ़े हैं।
  • राज वाल्मीकि
    बाबा साहेब की राह पर चल देश को नफ़रती उन्माद से बचाने का संकल्प
    15 Apr 2022
    आंबेडकर जयंती पर संसद मार्ग पर लगे जनता मेले में लोग फ़ासीवादी ताक़तों और उनके नफ़रती उन्माद की चर्चा करते नज़र आए। वर्तमान व्यवस्था  पर लोग आक्रोशित नज़र आए और ये संकल्प ले रहे थे कि इस नफ़रती…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट : दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते कोरोना के मामले
    15 Apr 2022
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 949 नए मामले सामने आए हैं। इनमे से क़रीब 35 फ़ीसदी यानी 325 नए मामले दिल्ली से सामने आए हैं।
  • पुलकित कुमार शर्मा
    क्या देश में कोरोना के नए XE वैरिएंट से चौथी लहर का ख़तरा?
    15 Apr 2022
    दुनियाभर के कई देशों में कोरोना के नए XE वैरिएंट के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है।
  • एम. के. भद्रकुमार
    रूस के यूक्रेन ऑपरेशन की कोई समय सीमा नहीं है
    15 Apr 2022
    बुधवार को पुतिन द्वारा की गई टिप्पणी से पता चलता है कि रूस किसी भी क़ीमत पर जल्दबाज़ी में हासिल की जाने वाली जीत की तलाश में नहीं है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License