NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अगर हिंदू अल्पसंख्यक हैं, मतलब मुस्लिमों को मिला अल्पसंख्यक दर्जा तुष्टिकरण की राजनीति नहीं
भाजपा कहती थी कि मुस्लिमों को अल्पसंख्यक कहना तुष्टिकरण की राजनीति है लेकिन केंद्र की भाजपा सरकार के सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे ने इस आरोप को खुद ख़ारिज कर दिया।  
अजय कुमार
01 Apr 2022
muslim
'प्रतीकात्मक फ़ोटो'

सुप्रीम कोर्ट में हिन्दुओं को अल्पसंख्यक का दर्जा दिलाने के लिए याचिका दायर की गयी। याचिका दायर करने वाले कोई नहीं बल्कि भारतीय जनता पार्टी के दिल्ली इकाई के नेता अश्वनी कुमार उपाध्याय हैं। इनकी याचिका में कहा गया है कि जहां हिंदुओं की संख्या कम है, वहां केंद्र सरकार द्वारा हिंदुओं को अल्पसंख्यक समुदायों के रूप में दर्ज किया जाना चाहिए। याचिका में यह भी कहा गया कि जिन छह धार्मिक समुदायों (ईसाई, सिख , मुस्लिम, जैन, पारसी, बौद्ध) को केंद्र ने अल्पसंख्यक का दर्जा दिया है, केवल उन्हीं को अल्पसंख्यक होने के नाते फायदे मिलते हैं।

लद्दाख, मिजोरम, मणिपुर, लक्षद्वीप, पंजाब, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, जम्मू कश्मीर, नागालैंड - भारत के इन दस राज्यों में हिन्दुओं की संख्या कम है। इन दस राज्यों में हिन्दुओं को अल्पसंख्यक का दर्जा देना चाहिए।  राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग  और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक आयोग जैसे संस्थानों पर भी इस याचिका में सवालिया निशान खड़े किये गए।  इनके बारे में याचिकाकर्ता ने कहा कि यह संस्थान केंद्र द्वारा समाज में 'फूट डालो और राज करने' की रणनीति के तहत बनाये गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने इस पर केंद्र सरकार से जवाब माँगा। केंद्र सरकार साफ तौर पर जवाब नहीं दे रही थी।सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीशों ने केंद्र सरकार पर तकरीबन 7500 रुपए का हर्जाना लगाया।  तब जाकर केंद्र सरकार ने इस याचिका के सवालों का जवाब दिया। अपनी ही पार्टी के नेता के याचिका पर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर करके कहा कि याचिका द्वारा केंद्र सरकार पर लगाए गए आरोप गलत हैं। याचिका में उठाये गए मांग को खारिज कर दिया।  

केंद्र सरकार ने कहा कि छह धार्मिक समुदायों को अल्पसंख्यक का दर्जा दिया है। राज्य और केंद्रशासित प्रदेश में अल्पसंख्यक का दर्जा देने का अधिकार राज्य और केंद्रशासित प्रदेश के पास है। अगर वह चाहें तो अल्पसंख्यक का दर्जा दे सकते हैं। राज्य सरकारें अपनी सीमा में हिंदुओं या किसी भी धार्मिक और भाषाई समुदाय को अल्पसंख्यक घोषित कर सकती हैं। महाराष्ट्र सरकार ने साल 2016 में यहूदियों को अल्पसंख्यक का दर्जा दिया था। कर्नाटक सरकार ने उर्दू, तेलुगु, तमिल, मलयालम, मराठी, तुलु, लमणी, हिंदी, कोंकणी और गुजराती भाषा बोलन वाले समुदायों को अपने राज्य में अल्पसंख्यक दर्जा दिया है।

अल्पसंख्यक होने के नाते केंद्र सरकार की जो योजनाएं अल्पसंख्यकों के लिए बनाई गयी हैं, वह हिन्दुओं के ख़िलाफ़ नहीं है। वह समानता के सिद्धांत के खिलाफ नहीं है। यह समावेशी समाज बनाने के मकसद बनाये गए हैं।  केवल धर्म और भाषा के आधार के पर अल्पसंख्यक होने के नाते सरकार योजनाओं का  लाभ नहीं लिया जा सकता है।  लाभ उन्हें ही मिलता है जो अल्पसंख्यक समाज के भीतर आर्थिक और सामाजिक तौर पर पिछड़ें होते हैं।  

क़ानूनी मामलों के जानकार फैजान मुस्तफा ने कहा कि इस विवाद से यह बात तो साफ़ हो गई है कि मुस्लिमों को अल्पसंख्यक का दर्जा देना तुष्टिकरण की राजनीति नहीं है। भाजपा का यह आरोप कि मुस्लिमों को अल्पसंख्यक का दर्जा देना तुष्टिकरण की राजनीति है, इसे भाजपा सरकार ने केंद्र में हलफ़नामा दायर कर खारिज कर दिया। अल्पसंख्यक आयोग तुष्टिकरण की राजनीति की नुमाइंदगी करता है, इस आरोप को भी भाजपा के हलफनामा ने ख़ारिज कर दिया।  

जहाँ तक अल्पसंख्यक की परिभाषा क्या है? इसका सवाल है तो इसकी कोई निश्चित परिभाषा संविधान में नहीं दी गयी है। क़ानूनी मामलों के जानकार फैज़ान मुस्तफा लिखते हैं कि अगर मोटे तौर पर अल्पसंख्यक की परिभाषा समझे तो यह है कि जिन समुदायों के लोगों की संख्या कम होती है, वह अल्पसंख्यक होते हैं। लेकिन केवल संख्या के आधार पर भी किसी समुदाय को अल्पसंख्यक का तमगा नहीं दिया जा सकता है। रंगभेदी दक्षिण अफ्रीका में गोरे लोगों की आबादी कम थी। लेकिन फिर भी काले लोगों की बड़ी आबादी पर इनकी हुकूमत थी। मतलब केवल संख्या के आधार पर अल्पसंख्यक का दर्जा देना ठीक नहीं ।

इसके अलावा यह भी मुमकिन है कि कई तरह के समुदायों से मिलकर बन रहे एक समाज में संख्या के आधार पर किसी समुदाय को अल्पसंख्यक का दर्जा देना मुमकिन न हो। इसलिए केवल संख्या के आधार पर अल्पसंख्यक की परिभाषा तय करना उचित नहीं होगा। संख्या के अलावा दूसरा पैमाना यह होने चाहिए कि समाज और राजनीति के क्षेत्र में अमुक समुदाय मजबूत स्थिति में न हो। अमुक समुदाय की हैसियत कमजोर हो। अमुक समुदाय का नजरिया और मूल्य समाज के समाज के सार्वजनिक जगहों पर कम दिखता हो।  समाज की सामान्य मान्यताओं में अमुक समुदाय के नजरिये और मूल्यों की भागीदारी कम हो। इन दो पैमानों पर मुस्लिम समुदाय भारत में अल्पसंख्यक के तौर पर दिखता है।

भारत के संविधान में केवल धार्मिक और भाषाई आधार पर अल्पसंख्यक का उल्लेख किया गया है। अनच्छेद 29 और 30 में इसका जिक्र है। सामान्य तौर पर देखा जाए तो इन अनुच्छेदों में उल्लेख है कि भारत के किसी भी हिस्से में रह रहा कोई समुदाय जिसकी एक विशिष्ट भाषा, लिपि और संस्कृति है, वह इसे संरक्षित रखने का काम कर सकता है। किसी भी नागरिक को राज्य समर्थित और राज्य के आर्थिक मदद से चल रहे संस्थान में धर्म, नस्ल, जाति, भाषा या इनमे से किसी के आधार पर प्रवेश देने से नहीं रोका जा सकता है। धर्म या भाषा के आधार पर बने किसी भी अल्पसंख्यक समुदाय को शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने और प्रशासित करने का अधिकार होगा।  

अल्पसंख्यक का दर्जा देने के लिए इकाई के तौर पर किसे लिया जाए? इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कई फैसले दिए है। उन फैसलों का सार यह है कि अल्पसंख्यक का दर्जा देने के लिए जिले को नहीं बल्कि राज्य को भी इकाई के तौर पर लिया जा सकता है। अगर राज्य चाहें तो जिन समुदायों की राज्य में आबादी 50 प्रतिशत से कम है, उन्हें अल्पसंख्यक का दर्जा दे सकता है। इस आधार पर देखा जाए तो जहाँ पर हिन्दुओं की आबादी कम है, वहां वह अल्पसंख्यक है या नहीं इसका फैसला राज्य आसानी से कर सकता है। इसके लिए कोर्ट जाने की जरूरत नहीं है। लेकिन अब देखते हैं सुप्रीम कोर्ट से इस पूरे मामले पर क्या फैसला लेती है?

इस पूरी बहस से इस विवाद पर तो विराम लगना ही चाहिए कि मुस्लिमों को अल्पसंख्यक कहना तुष्टिकरण की राजनीती नहीं है।  

Muslims
minorities
BJP
Supreme Court
Religion and Politics
RSS
Hindu
Hindutva

Related Stories

बदायूं : मुस्लिम युवक के टॉर्चर को लेकर यूपी पुलिस पर फिर उठे सवाल

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

ज्ञानवापी मस्जिद के ख़िलाफ़ दाख़िल सभी याचिकाएं एक दूसरे की कॉपी-पेस्ट!

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

डिजीपब पत्रकार और फ़ैक्ट चेकर ज़ुबैर के साथ आया, यूपी पुलिस की FIR की निंदा

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट


बाकी खबरें

  • protest against Yogi government
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    यूपीः योगी सरकार पर अभ्यर्थियों ने लगाया शिक्षक भर्ती में आरक्षण घोटाले का आरोप
    21 Jan 2022
    अभ्यर्थियों का दावा था कि 69 हज़ार शिक्षक भर्ती में ओबीसी वर्ग को 27% की जगह केवल 3.86% ही आरक्षण मिला वहीं एससी वर्ग को भी 21% की जगह मात्र 16.6% आरक्षण मिला।
  •  Amar Jawan Jyoti
    सोनिया यादव
    बुझ गई 50 साल से जल रही अमर जवान ज्योति, विपक्ष ने लगाया इतिहास से छेड़छाड़ का आरोप
    21 Jan 2022
    70 के दशक से इंडिया गेट पर जल रही अमर जवान ज्योति की लौ के विलय को लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने है। कांग्रेस सहित अन्य दलों ने भी इसे लेकर मोदी सरकार पर सीधा हमला बोला और इसे बीजेपी की एक साज़िश…
  • weekend curfew
    भाषा
    दिल्ली में जारी रहेगा वीकेंड कर्फ़्यू, आधी क्षमता पर खुल सकेंगे प्राइवेट दफ़्तर
    21 Jan 2022
    दिल्ली सरकार ने शुक्रवार को वीकेंड कर्फ़्यू हटाने का प्रस्ताव रखा था मगर एलजी ने कहा कि कोरोना की स्थिति सुधरने तक इसे लागू रखा जाए।
  • Ghaffar Khan
    राजमोहन गांधी
    सीमांत गांधी की पुण्यतिथि पर विशेष: सभी रूढ़िवादिता को तोड़ती उनकी दिलेरी की याद में 
    21 Jan 2022
    राजमोहन गांधी की लिखी किताब, 'गफ़्फ़ार ख़ान: नॉनवायलेंट बादशाह ऑफ़ द पख़्तून्स' का एक अंश।
  • Nitish kumar
    मीना तिवारी
    नीतीश कुमार का समाज सुधार अभियान: सवालों से मुंह चुराने की ओट
    21 Jan 2022
    राष्ट्रीय स्तर पर बाल विवाह की दर घट रही है लेकिन बिहार के 10 जिलों में बाल विवाह की दर में बढ़ोतरी हुई है। यही नहीं दहेज मृत्यु के मामले में बिहार देश में दूसरे नंबर पर है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License