NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कृषि
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
भ्रामक बयान के चलते मनरेगा के प्रति केंद्र की प्रतिबद्धता सवालों के घेरे में
ग्रामीण विकास मंत्रालय ने शनिवार को इस बात से इनकार कर दिया कि इस ग्रामीण रोज़गार योजना को किसी तरह से धन की कमी का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, इसे लेकर नागरिक समाज के लोगों की ओर से जो प्रतिक्रिया आयी, उसके मुताबिक़ यह इनकार "कई सवालों को अनुत्तरित छोड़ देती है।"

रौनक छाबड़ा
03 Nov 2021
mnrega
प्रतीकात्मक फ़ोटो

कार्यकर्ताओं ने चालू वित्त वर्ष में ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना के लिए उपलब्ध धन की कमी पर मीडिया रिपोर्टों पर केंद्र की ओर से आयी प्रतिक्रिया पर यह आरोप लगाते हुए सवाल उठाया है कि यह "भ्रामक" है और यह कई उठाये गये सवालों को "अनुत्तरित" ही छोड़ देता है।

पिछले हफ़्ते शनिवार को नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने कहा कि वह महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम क़ानून (MGNREGA) के उचित कार्यान्वयन को लेकर "प्रतिबद्ध" है और भरोसा दिया कि जब भी ज़रूरी हो, क़ानून के मुताबिक़ "मज़दूरी और सामग्रियों की ख़रीद के लिए भुगतान को लेकर धन जारी किया जेयागा।"

राज्य सरकारों के सहयोग से इस रोज़गार योजना के कार्यान्वयन की निगरानी करने वाले केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय (MoRD) की ओर से प्रेस को जारी यह बयान एक नागरिक समाज समूह की एक रिपोर्ट के जवाब में आया था। इस समूह ने संकेत दिया था कि आने वाले महीनों में इस योजना के तहत रोज़गार सृजन इसलिए ज़बरदस्त तौर पर प्रभावित होगा, क्योंकि इस वित्तीय वर्ष के लिए तक़रीबन सभी आवंटित निधि का पहले ही इस्तेमाल किया जा चुका है।

पीपुल्स एक्शन फ़ॉर एम्प्लॉयमेंट गारंटी (PAEG) की ओर से इस साल की अप्रैल-सितंबर अवधि के लिए तैयार की गयी "नरेगा नेशनल ट्रैकर" रिपोर्ट ने पाया गया कि वित्त वर्ष 2021-22 में मनरेगा के लिए आवंटित 73,000 करोड़ रुपये में से तक़रीबन 90% का इस्तेमाल किया जा चुका है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल सहित देश के कम से कम बीस राज्यों में शुद्ध शेष राशि नकारात्मक है, यानी कि कुल उपलब्ध धन में से कुल व्यय और चालू वर्ष में किये गये ख़र्चों के बाद भुगतान की देनदारी बची हुई है।

इसके अलावा, बेंगलुरु स्थित लिबटेक इंडिया ने इसी अवधि के दौरान 10 राज्यों में इस ग्रामीण रोज़गार योजना के तहत 18 लाख मज़दूरी ट्रांजेक्शन के एक अध्ययन में पाया कि केंद्र सरकार की ओर  से किये गये इस ट्रांजेक्शन का 71 फ़ीसदी अनिवार्य अवधि से ज़्यादा में किया गया।

इस एक्ट के मुताबिक़ यह योजना प्रति वर्ष प्रति परिवार को 100 दिनों तक का रोज़गार मुहैया कराती है।इसमें काम के मस्टर रोल के पूरा होने के 15 दिनों के भीतर श्रमिकों को मज़दूरी का भुगतान करना अनिवार्य है, ऐसा न करने पर इस योजना के तहत दर्ज किये गये श्रमिक अर्जित मज़दूरी के 0.05% प्रति दिन के विलंब मुआवज़े के हक़दार होते हैं।

सोमवार को प्रेस को जारी एक बयान में पीएईजी ने कहा कि केंद्र की ओर से शनिवार को दी गयी प्रतिक्रिया "कई सवालों को अनुत्तरित छोड़ देती है" और मांग के आधार पर योजना के तहत काम मुहैया कराये जाने का उसका वादा "खोखला दिखायी देता है।"

केंद्र ने शनिवार को दावा किया था कि चालू वित्त वर्ष के दौरान अब तक राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को 63,793 करोड़ रुपये जारी किये जा चुके हैं, जिनमें से 8,921 करोड़ रुपये वेतन देनदारी को पूरा करने के लिए हैं।

हालांकि,पीएईजी की ओर से सोमवार तक मनरेगा के वित्तीय विवरण के विश्लेषण से पता चलता है कि चालू वित्तीय वर्ष के लिए संचित व्यय 52,993 करोड़ रुपये है, जबकि इस समय इसकी लंबित देनदारी 9,075 करोड़ रुपये है। इसके अलावा, पिछले वित्तीय वर्ष से कुल लंबित देनदारियां 17,451 करोड़ रुपये हैं।

पीएईजी ने सोमवार को कहा था, “इससे 79,518 करोड़ रुपये तक की राशि बढ़ जाती है, जिसका मतलब है कि भारत सरकार इस सिलसिले में पहले से ही कम से कम 6,518 करोड़ रुपये के घाटे में चल रही है। इसके चलते (भी) पारिश्रमिक के भुगतान में देरी हो रही है।"

मज़दूर किसान शक्ति संगठन के संस्थापक सदस्य निखिल डे ने मंगलवार को न्यूज़क्लिक को बताया कि पीएईजी की यह रिपोर्ट इस बात पर रौशनी डालती है कि ग्रामीण रोज़गार कार्यक्रम के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध कराने की "तत्काल" ज़रूरत है। उन्होंने बताया कि उक्त योजना के लिए कुल बजट आवंटन, पिछले साल के संशोधित बजट से 34% कम था।

डे, जो पीएईजी के कार्यकारी समूह के सदस्य भी हैं, ने कहा, "मनरेगा, जो कि ग्रामीण श्रमिकों की जीवन रेखा है, क़ानून के मुताबिक़ कभी भी बजट से नहीं, बल्कि मांग से बाधित होता है।” उन्होंने कहा कि इसका मतलब है कि यह सुनिश्चित करना केंद्र सरकार की "वैधानिक ज़िम्मेदारी" है कि मनरेगा के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध हो और श्रमिकों को उनके काम और भुगतान,दोनों समय पर हो।

उनके मुताबिक़, ग्रामीण श्रमिकों के भीतर पहले से ही ज़बरदस्त संकट चल रहा था, जो कि पिछले साल से कोविड-19 महामारी के कारण और गहरा गया था। डे ने कहा, "मज़दूरी के भुगतान(मनरेगा के तहत) में हुई देरी के संकट का नतीजा ही है कि ग्रामीण श्रमिक पर क़र्ज़ बढ़ रहा है।"

इस बीच, केंद्र ने शनिवार को यह भी कहा कि इस ग्रामीण रोज़गार योजना के तहत मज़दूरी भुगतान को अलग-अलग जाति श्रेणियों में विभाजित करने वाली इस साल की शुरुआत में लिये गये उसके विवादास्पद फ़ैसले को आगे "सुव्यवस्थित" किया जा रहा है।

ग्रामीण विकास मंत्रालय (MoRD) ने इस साल 2 मार्च को सभी राज्य सरकारों को एक एडवाइजरी भेजी थी, जिसमें उन्हें रोजगार गारंटी कार्यक्रम के तहत वित्तीय वर्ष 2021-22 से अनुसूचित जाति (SCs), अनुसूचित जनजाति (STs) और अन्य के लिए मज़दूरी भुगतान को अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित करने के निर्देश दिये गये थे।

पिछले हफ़्ते लिबटेक इंडिया ने कहा,”यह क़दम असल में ग्रामीण योजना की "सार्वभौमिकता के बिल्कुल विपरीत" है और इसने गांवों में श्रमिकों के बीच ‘जाति-आधारित तनाव और धार्मिक तनाव’ को प्रेरित किया है और उन अधिकारियों के कार्यभार को भी बढ़ा दिया है, जो "कम से कम 3 बार" ग्राम ब्लॉक स्तर पर योजना के कार्यान्वयन की निगरानी करते हैं।

पीएईजी ने सोमवार को इस बात को फिर दोहराया कि मनरेगा के तहत मज़दूरी भुगतान का जाति-आधारित अलगाव "निरर्थक और क़ानूनी रूप से संदिग्ध है।" इसने इस बात की मांग करते हुए कहा कि इस क़दम को जल्द से जल्द रद्द किये जाने की ज़रूरत है।

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

https://www.newsclick.in/Misleading-Statement-Puts-Centre-Commitment-Towards-MGNREGA-Question

MNREGA
unemployment
rural development

Related Stories

मनरेगा मज़दूरों के मेहनताने पर आख़िर कौन डाल रहा है डाका?

मनरेगा रोकेगा पराली से होने वाला प्रदूषण?

मध्य प्रदेश: महामारी से श्रमिक नौकरी और मज़दूरी के नुकसान से गंभीर संकट में

खेतिहर मज़दूरों का दर्द; बोले- मनरेगा में काम नहीं, अगर किसानों के घर भी खाने के लाले पड़े तो कहां जाएंगे!

किसान को इज़्ज़त, युवा को रोज़गार दो !

किसान आंदोलन: यह किसानों और जवानों की साझा लड़ाई है


बाकी खबरें

  • leather industry
    न्यूज़क्लिक टीम
    बंद होने की कगार पर खड़ा ताज नगरी का चमड़ा उद्योग
    10 Feb 2022
    आगरा का मशहूर चमड़ा उद्योग और उससे जुड़े कारीगर परेशान है। इनका कहना है कि सरकार इनकी तरफ ध्यान नही दे रही जिसकी वजह से पॉलिसी दर पॉलिसी इन्हें नुकसान पे नुक्सान हो रहा है।
  • Lakhimpur case
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    लखीमपुर कांड: मुख्य आरोपी और केंद्रीय मंत्री के बेटे आशीष मिश्रा को मिली ज़मानत
    10 Feb 2022
    केंद्रीय मंत्री के बेटे की ओर से पेश वकील ने अदालत से कहा था कि उनका मुवक्किल निर्दोष है और उसके खिलाफ कोई सबूत नहीं है कि उसने किसानों को कुचलने के लिए घटना में शामिल वाहन के चालक को उकसाया था।
  • uttarakhand
    मुकुंद झा
    उत्तराखंड चुनाव : टिहरी बांध से प्रभावित गांव आज भी कर रहे हैं न्याय की प्रतीक्षा!
    10 Feb 2022
    उत्तराखंड के टिहरी ज़िले में बने टिहरी बांध के लिए ज़मीन देने वाले ग्रामीण आज भी बदले में ज़मीन मिलने की आस लगाए बैठे हैं लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।
  •  Bangladesh
    पीपल्स डिस्पैच
    बांग्लादेश: सड़कों पर उतरे विश्वविद्यालयों के छात्र, पुलिस कार्रवाई के ख़िलाफ़ उपजा रोष
    10 Feb 2022
    बांग्लादेश में शाहजलाल विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के छात्रों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई के बाद, देश के कई विश्वविद्यालयों में छात्र एकजुटता की लहर दौड़ गई है। इन प्रदर्शनकारी छात्रों ने…
  • Newsletter
    ट्राईकोंटिनेंटल : सामाजिक शोध संस्थान
    वैश्विक निरक्षरता के स्थिर संकट के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाएँ
    10 Feb 2022
    संयुक्त राष्ट्र ने नोट किया कि 'दुनिया भर में 150 करोड़ से अधिक छात्र और युवा कोविड-19 महामारी के कारण बंद स्कूल और विश्वविद्यालयों से प्रभावित हो रहे हैं या प्रभावित हुए हैं'; कम से कम 100 करोड़…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License