NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
मोहसिन शेख़ लिंचिंग मामला : पांच साल बाद भी परिवार को न्याय का इंतज़ार
न्याय और मुआवज़े के इंतज़ार में मोहसिन के पिता की साल 2018 में मौत हो गई। परिवार के ख़र्च का बोझ उठाने वाले मोहसिन के भाई मुबीन की नौकरी भी जा चुकी है। यह परिवार अब बुनियादी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए जूझ रहा है।
अमय तिरोदकर
12 Oct 2019
mohsin shaikh
Image courtesy: Google

मोहसिन शेख़ लिंचिंग मामला भारत में न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करने के प्रमुख उदाहरणों में से एक है। पहली नरेंद्र मोदी सरकार के सत्ता में आने के एक सप्ताह के भीतर ही पुणे में एक हिंदू दक्षिणपंथी भीड़ द्वारा उनकी कथित तौर पर हत्या कर दी गई थी। तब से उनका परिवार अपनी रोज़मर्रा की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहा है। हालांकि, उनके लिए न्याय दूर के सपने जैसा दिखाई देता है। बल्कि एक ऐसा माहौल बनाया जा रहा है जहां नफ़रत फैलाने वाले अपराधों की ऐसी संस्कृति को फैलाया जा रहा है।

मोहसिन पुणे में एक आईटी कंपनी के साथ काम कर रहे थे। उन्होंने विप्रो में नौकरी के लिए अपने दूसरे दौर के इंटरव्यू को पास कर लिया था। 2 जून 2014 को वह नमाज़ अदा करने के बाद लौट रहे थे, तभी हिंदू राष्ट्र सेना के कार्यकर्ताओं की भीड़ ने कथित तौर पर उन्हें पीट पीट कर मौत के घाट उतार दिया। इस घटना से पहले एक अफ़वाह फैली। इसमें कहा गया कि किसी ने शिवाजी और शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे की तस्वीर के साथ शरारत की है।

mohsin's brother.PNG

शेख़ की हत्या की ख़बर सुनने के बाद उनका परिवार सदमे में आ गया। शेख़ मूल रूप से सोलापुर का रहने वाले हैं। मोहसिन के दादा एक डाकिया थे और उन्होंने सोलापुर की डाक कॉलोनी में अपना घर बनाया था जहां 34 घरों में से केवल दो घर मुसलमानों के हैं। मोहसिन के छोटे भाई मुबीन ने कहा, "हमें कभी ऐसा नहीं लगा कि धर्म के आधार पर हमारे साथ भेदभाव किया जाएगा। बचपन से हमारे बहुत सारे हिंदू दोस्त हैं। हम हमेशा उनके घर जाते थे और वे हमसे मिलते थे। धर्म हमारे लिए पूरी तरह से व्यक्तिगत था।"

इस हत्या के बाद महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने शेख़ परिवार को न्याय दिलाने और वित्तीय सहायता देने का आश्वासन दिया। इसके अलावा उन्होंने सोलापुर शहर में मुबीन के लिए एक सरकारी नौकरी का भी आश्वासन दिया। लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ है।

मुबीन ने कहा, "हमें नौकरी की उम्मीद थी, भले ही वह थर्ड ग्रेड की हो। लेकिन लगभग एक साल गुज़रने के बाद महाराष्ट्र सरकार ने हमें लिखा कि ऐसे मामलों में परिवार के सदस्यों को नौकरी का कोई प्रावधान नहीं है।" उसके पिता को सरकार की ओर से 10 लाख रुपये मिले लेकिन यह भी लगभग दो साल और कई बार कहने के बाद मिले।

साल 2014 के अक्टूबर में महाराष्ट्र में सरकार बदल गई। बीजेपी शिवसेना के समर्थन से सत्ता में आई। राज्य के मशहूर सरकारी वकील उज्ज्वल निकम तब इस मामले को देख रहे थे। लेकिन उन्होंने ख़ुद को इस मामले से दूर कर लिया। इनका फ़ैसला शेख़ के परिवार के साथ-साथ उनके समर्थकों और सहानुभूति रखने वालों के लिए एक झटका जैसा था जो न्याय के लिए लड़ रहे थे। तब से, राज्य सरकार ने इस मामले में एक भी सरकारी वकील नहीं दिया है।

इस बीच पुलिस ने इस मामले में हिंदू राष्ट्र सेना के प्रमुख धनंजय देसाई और उसके 22 समर्थकों को गिरफ़्तार किया जो अब ज़मानत पर जेल से बाहर हैं।

शेख़ के परिवार को एक के बाद एक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मोहसिन के पिता सादिक़ अपने बेटे को न्याय दिलाने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे थे। उन्होंने मोहसिन की मौत से दो साल पहले अपनी फ़ोटोकॉपी की दुकान बंद कर दी थी। मोहसिन के साथ मुबीन पुणे में रह रहे थे और मार्केटिंग का काम कर रहे थे। इस घटना के बाद मुबीन को अपने परिवार की देखभाल के लिए सोलापुर लौटना पड़ा। इस मामले को लेकर लड़ाई के तनाव ने उनके पिता को बीमार कर दिया। सादिक़ शेख़ भी ब्लड प्रेशर के मरीज़ बन गए। न्याय पाने के लिए चार साल तक संघर्ष करने के बाद सादिक़ शेख़ की दिसंबर 2018 में दुखद मौत हो गई।

मुबीन ने ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में मार्केटिंग में अपनी पहली नौकरी शुरू की थी। सोलापुर लौटने के बाद उन्हें उसी सेक्टर में नौकरी मिली। लेकिन उद्योग में व्याप्त मौजूदा मंदी ने उनकी नौकरी छीन ली है। अपने परिवार के लिए ख़र्च उठाने वाले मुबीन पिछले चार महीनों से बेरोज़गार हैं।

मुबीन और मोहसिन की मां शमाना परवीन भी स्वस्थ नहीं हैं। उन्हें ब्लड प्रेशर की दिक़्क़त और डायबेटीज़ हो चुका है। मुबीन का कहना है, "हम उनके लिए दवाओं की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए परेशान रह रहे हैं।"

चूंकि ये मामला बेहद संवेदनशील है ऐसे में मुबीन महसूस करते हैं कि लोग इसके बारे में बात करने से बचना चाहते हैं। उनका कहना है, "जब मैं नौकरी के लिए इंटरव्यू के लिए जाता हूं तो लोग मुझसे कहते हैं कि इस मामले के बारे में बिल्कुल भी बात न करें। उनकी परेशानी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है।" उन्होंने यह भी कहा कि अब तक किसी ने भी उसे इस आधार पर नौकरी देने से मना नहीं किया था।

जब उनसे पूछा गया कि वह न्याय के बारे में क्या सोचते हैं तो मुबीन ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि एक दिन उनके परिवार को न्याय ज़रूर मिलेगा। उन्होंने कहा, "इसमें देरी हो रही है। अभी कोई सरकारी वकील नहीं है। राज्य सरकार को इस मामले में सरकारी वकील देना चाहिए और देखा जाए कि न्याय होता है।" मुबीन और इस मामले में समर्थक फ़ास्ट ट्रैक सुनवाई की मांग कर रहे हैं ताकि यह मामला लिंचिंग जैसे अपराधों के ख़िलाफ़ एक उदाहरण बन सके।"

न्याय के लिए मोहसिन शेख़ के परिवार की उम्मीदें इस देश के नागरिकों के लिए प्रेरणा का काम करती हैं। हालांकि, धर्म के नाम पर मॉब लिंचिंग की घटनाएं देश भर में लगातार जारी हैं। न्याय में देरी इन अपराधों को अंजाम देने वाले दोषियों की बढ़ावा दे रही है।

Mohsin Shaikh
mob lynchings in india
Murder of Mohsin Shaikh
Maharashtra Mob Lynching
Pune Mob Lynching
Mob Lynching under Modi Government
Modi government
Sadiq Shaikh
maharashtra government
Hindu Rashtra Sena
communal violence
Dhananjay Desai
BJP government

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

आख़िर फ़ायदे में चल रही कंपनियां भी क्यों बेचना चाहती है सरकार?

तिरछी नज़र: ये कहां आ गए हम! यूं ही सिर फिराते फिराते

'KG से लेकर PG तक फ़्री पढ़ाई' : विद्यार्थियों और शिक्षा से जुड़े कार्यकर्ताओं की सभा में उठी मांग

मोदी के आठ साल: सांप्रदायिक नफ़रत और हिंसा पर क्यों नहीं टूटती चुप्पी?

कोविड मौतों पर विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट पर मोदी सरकार का रवैया चिंताजनक

किसानों और सत्ता-प्रतिष्ठान के बीच जंग जारी है

ज्ञानवापी विवाद, मोदी सरकार के 8 साल और कांग्रेस का दामन छोड़ते नेता


बाकी खबरें

  • musahar
    तारिक़ अनवर
    यूपी चुनाव: पूर्वी क्षेत्र में विकल्पों की तलाश में दलित
    02 Mar 2022
    दलित आम तौर पर ऐसे मूक मतदाता माने जाते हैं, जो अपनी राजनीतिक प्राथमिकताओं का आसानी से इज़हार नहीं करते। हालांकि, इस चुनाव को नज़दीक से देखने पर इस बात के साफ़ संकेत मिल जाते हैं कि उनका झुकाव बसपा…
  • कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 7,554 नए मामले, 223 मरीज़ों की मौत
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 7,554 नए मामले, 223 मरीज़ों की मौत
    02 Mar 2022
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.20 फ़ीसदी यानी 85 हज़ार 680 हो गयी है।
  • एम. के. भद्रकुमार
    यूक्रेन युद्ध ने यूरोपियन यूनियन और अमेरिका को ईरान सौदे पर सोचने को मजबूर किया
    02 Mar 2022
    क्या नाटो (उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन) के विस्तार पर अमेरिका-रूस टकराव और यूक्रेन के आसपास बने हालात वियना में चल रही ईरान परमाणु वार्ता को पटरी से उतार देगी?
  • ukraine
    एपी/भाषा
    रूस-यूक्रेन युद्ध अपडेट: कीव के मुख्य टीवी टावर पर बमबारी; सोवियत संघ का हिस्सा रहे राष्ट्रों से दूर रहे पश्चिम, रूस की चेतावनी
    02 Mar 2022
    रूसी बलों ने मंगलवार को यूक्रेन के घनी आबादी वाले शहरी इलाकों पर हमले तेज करते हुए यूक्रेन के दूसरे सबसे बड़े शहर के मध्य स्थित एक मुख्य चौराहे और कीव के मुख्य टीवी टावर पर बमबारी की। वहीं भारत ने…
  • बिहार : सीटेट-बीटेट पास अभ्यर्थी सातवें चरण की बहाली को लेकर करेंगे आंदोलन
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहार : सीटेट-बीटेट पास अभ्यर्थी सातवें चरण की बहाली को लेकर करेंगे आंदोलन
    02 Mar 2022
    पालीगंज विधानसभा क्षेत्र से सीपीआई माले विधायक संदीप सौरभ ने कहा कि वह सीटेट और बीटेटट उत्तीर्ण सभी अभ्यर्तियों के लिए सातवें चरण की बहाली के लिए 2014-21 तक सभी रिक्तियों को जोड़कर मार्च महीने में…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License