NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
क्या है मोल्नुपिरवीर? जिसे कोविड-19 के ख़िलाफ़ लड़ाई में माना जा रहा है ‘गेमचेंजर‘
दवा निर्माता मर्क एंड कंपनी ने COVID-19 के ख़िलाफ़ एक नई एंटीवायरल दवा 'मोल्नुपिरवीर' को लेकर एक अध्ययन के परिणाम को प्रकाशित किया है। इसके परिणाम बताते हैं कि ये दवा अस्पताल में भर्ती होने की संभावना को 50% तक कम कर देती है।
संदीपन तालुकदार
05 Oct 2021
Molnupiravir
Image Courtesy: AP

क्या है मोल्नुपिरवीर?

मोल्नुपिरवीर (Molnupiravir) COVID-19 के खिलाफ एक अनुसंधात्मक एंटीवायरल दवा है। जाहिर है, यह COVID-19 रोगियों के इलाज में अब तक का पहला मुंह के जरिए दिया जाने वाला एंटीवायरल है। इस दवा के तीसरे चरण के परीक्षण के परिणाम हाल ही में इसके निर्माता मर्क एंड कंपनी द्वारा घोषित किए गए हैं। ये परिणाम बताते हैं कि ये दवा मामूली लक्षणों वाले रोगियों में रोग की वृद्धि को कम करके अस्पताल में भर्ती होने की संभावना को 50% तक कम कर देती है। 

प्रेस को दिए एक बयान में, मर्क ने कहा कि ये कंपनी जल्द ही अमेरिकी नियामक एजेंसी एफडीए(फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन) से आपातकालीन उपयोग के अधिकार की मांग करेगी।

जर्मन ट्रायस आई पुजोल यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल के ओरिओल मित्जा ने साइंस मैगज़ीन को बताया, “एक शोधकर्ता के रूप में, मेरे लिए मर्क की घोषणा वर्ष 2021 के शीर्ष सबसे बड़े समाचारों में से एक है। मोल्नुपिरवीर निस्संदेह एक गेम-चेंजर है!”

ये भी पढ़ें: दिल्ली में कोविड के कारण 2029 बच्चों ने माता-पिता दोनों या किसी एक को खो दिया: सर्वेक्षण

दुनिया भर में व्यापक रूप से उपयोग किए जाने वाले अन्य दो एंटीवायरल विकल्प रेमडिसविर और मोनोक्लोनल एंटीबॉडी हैं। हालांकि, मोल्नुपिरवीर के विपरीत इन दोनों एंटीवायरल को अंतःशिरा के द्वारा लगाया जाता है।

क्लीनिकल ट्रायल कैसे किए गए?

ये नए परिणाम उन 775 मरीजों से आए हैं जो अस्पताल में भर्ती नहीं किए गए, जो लक्षणों की शुरुआत से 5 दिनों की अवधि के लिए इस अध्ययन में शामिल थें। अध्ययन के लिए शामिल किए गए रोगियों को 5 दिनों के लिए इस दवा का एक कोर्स मिला। दवा देने की इस अवधि को प्रयोगशाला अध्ययनों में SARS-CoV-2 वायरस के जीनोम को दोहराने की क्षमता को बाधित करने के लिए दिखाया गया था। SARS-CoV-2 वह कोरोनावायरस है जो COVID-19 का कारण बनता है।

कथित तौर पर, मर्क ने मूल रूप से 1550 रोगियों को शामिल करने की योजना बनाई थी जिसे एक स्वतंत्र डेटा निगरानी समिति द्वारा रोक दिया गया था क्योंकि यह स्पष्ट हो गया था कि यह दवा प्रभावी थी।

अमेरिकी मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, संघीय प्रशासन ने पहले ही मोल्नुपिरवीर की 1.7 मिलियन खुराक का एडवांस ऑर्डर दे दिया है जिसकी कीमत 700 डॉलर प्रति मरीज है। विशेषज्ञों के अनुसार, नई दवा की लागत, हालांकि मोनोक्लोनल एंटीबॉडी से कम है, एक जीवन रक्षक दवा के लिए स्वीकार्य नहीं है।

मोल्नुपिरवीर कैसे काम करता है?

एक एंटीवायरल ड्रग फंक्शन का प्राथमिक तरीका उस प्रक्रिया को रोकना है जिसके द्वारा कोई वायरस होस्ट बॉडी में प्रतिकृति बनाता है। प्रयोगशाला के अध्ययनों में, मोल्नुपिरवीर का संवर्धित कोशिकाओं पर परीक्षण किया गया और यह पाया गया कि दवा उन महत्वपूर्ण एंजाइमों को बदल देती है जो मानव कोशिकाओं के भीतर इसकी प्रतिकृति (गुणन) शुरू करने के लिए आवश्यक हैं।

कई अन्य एंटीवायरल दवाएं जो मोल्नुपिरवीर के समान कार्यों को करती हैं, उन्हें मौखिक गोलियों के रूप में देना मुश्किल था। इस प्रकार की मौखिक रूप से प्रयोग की जाने वाली दवाओं को उनकी क्रिया में कम प्रभावी पाया गया। मर्क एंड कंपनी ने एंटीवायरल दवाओं के मौखिक प्रयोग की बाधा को दूर करने का दावा किया है और जारी महामारी के बीच मोल्नुपिरवीर को गेम-चेंजर करार दिया है।

मर्क के अनुसंधान और विकास प्रमुख डीन एलआई ने एक बयान में कहा कि ये दवा SARS-CoV-2 के खिलाफ एक 'हथौड़ा' जैसा होगी, चाहे वे किसी भी वैरिएंट के हों।

हालांकि, कुछ विशेषज्ञ आगाह करते हैं कि यह अभी शुरुआती चरण है और दुनिया को किसी भी निर्णायक परिणाम की प्रतीक्षा करने की जरूरत है।

बोस्टन विश्वविद्यालय में सेंटर फॉर इमर्जिंग इंफेक्शियस डिजीज पॉलिसी एंड रिसर्च के निदेशक नाहिद भदेलिया ने साइंस पत्रिका को बताया, "मौखिक एंटीवायरल का "बहुत प्रभाव" हो सकता है, लेकिन ऐसा होने के लिए, तेजी से परीक्षण उपलब्ध होने चाहिए ताकि बीमारी के क्रम में जल्दी से इलाज शुरू किया जा सके। ये एंटीवायरल टीके की जगह नहीं ले सकते हैं क्योंकि यह हमेशा बेहतर होता है कि पहले संक्रमित ही न हों।"

अंग्रेजी में मूल रूप से प्रकाशित लेख को पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें

Explainer: Molnupiravir, The New Antiviral Against COVID-19

Molnupiravir
remdesivir
Monoclonal Antibodies
SARS-CoV-2
AntiViral Against COVID-19
New COVID-19 Drug

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना मामलों में 17 फ़ीसदी की वृद्धि

Molnupiravir की क्षमता पर हुई खोज में देरी क्यों?

कोविड-19 महामारी प्राकृतिक या षडयंत्र?

कोरोना के दौर में कालाबाजारी का धंधा

सीपीएम ने बंगाल के कोविड संकट के बीच जवाबदेही की मांग की, ट्रेड यूनियनों ने  उठाया पूर्ण टीकाकरण का मुद्दा

उच्च न्यायालय ने पूछा, भाजपा सांसद ने 'चुपके' से रेमडेसिविर कैसे खरीदी?

कोविड-19 : "ऐसा लगता है केंद्र चाहता है लोग मरते रहें"

कोविड-19: पहुँच से बाहर रेमडेसिवीर और महाराष्ट्र में होती दुर्गति

महाराष्ट्र रेमडेसिवीर मामला : भाजपा पर उठे गंभीर सवाल?

कोविड: मोदी सरकार के दो पर्याय—आपराधिक लापरवाही और बदइंतज़ामी


बाकी खबरें

  • अनिल अंशुमन
    झारखंड: केंद्र सरकार की मज़दूर-विरोधी नीतियों और निजीकरण के ख़िलाफ़ मज़दूर-कर्मचारी सड़कों पर उतरे!
    29 Mar 2022
    जगह-जगह हड़ताल के समर्थन में प्रतिवाद सभाएं कर आम जनता से हड़ताल के मुद्दों के पक्ष में खड़े होने की अपील की गयी। हर दिन हो रही मूल्यवृद्धि, बेलगाम महंगाई और बेरोज़गारी के खिलाफ भी काफी आक्रोश प्रदर्शित…
  • मुकुंद झा
    दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल को मिला व्यापक जनसमर्थन, मज़दूरों के साथ किसान-छात्र-महिलाओं ने भी किया प्रदर्शन
    29 Mar 2022
    केंद्रीय ट्रेड यूनियन ने इस दो दिवसीय हड़ताल को सफल बताया है। आज हड़ताल के दूसरे दिन 29 मार्च को देश भर में जहां औद्दोगिक क्षेत्रों में मज़दूरों की हड़ताल हुई, वहीं दिल्ली के सरकारी कर्मचारी और रेहड़ी-…
  • इंदिरा जयसिंह
    मैरिटल रेप को आपराधिक बनाना : एक अपवाद कब अपवाद नहीं रह जाता?
    29 Mar 2022
    न्यायिक राज-काज के एक अधिनियम में, कर्नाटक उच्च न्यायालय की व्याख्या है कि सेक्स में क्रूरता की स्थिति में छूट नहीं लागू होती है।
  • समीना खान
    सवाल: आख़िर लड़कियां ख़ुद को क्यों मानती हैं कमतर
    29 Mar 2022
    शोध पत्रिका 'साइंस एडवांस' के नवीनतम अंक में फ्रांसीसी विशेषज्ञों ने 72 देशों में औसतन 15 वर्ष की 500,000 से ज़्यादा लड़कियों के विस्तृत सर्वे के बाद ये नतीजे निकाले हैं। इस अध्ययन में पाया गया है कि…
  • प्रभात पटनायक
    पेट्रोल-डीज़ल की क़ीमतों में फिर होती बढ़ोतरी से परेशान मेहनतकश वर्ग
    29 Mar 2022
    नवंबर से स्थिर रहे पेट्रोल-डीज़ल के दाम महज़ 5 दिनों में 4 बार बढ़ाये जा चुके हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License