NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
अपराध
भारत
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
भारत में 2020 तक चार करोड़ 58 लाख महिलाएं हुई लापता: यूएन रिपोर्ट
जनसंख्या पंजीकरण सांख्यिकी रिपोर्ट 2018 के अनुसार भारत में साल 2016-18 के बीच देश का लिंगानुपात 1000 लड़कों पर 899 लड़कियों का रहा है। भारत के नौ राज्य हरियाणा, उत्तराखंड, दिल्ली, गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब और बिहार में यह आंकड़ा 900 से कम रहा है।
सोनिया यादव
02 Jul 2020
चार करोड़ 58 लाख महिलाएं हुई लापता
'प्रतीकात्मक तस्वीर' साभार : पंजाब केसरी

“साल 2013 से 2017 के बीच भारत में हर साल क़रीब साढ़े चार लाख बच्चियां जन्म के समय ही लापता हो गईं।”

‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओं’ के तमाम दावों के बीच बच्चियों के लापता होने का ये खुलासा संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष द्वारा जारी एक रिपोर्ट मे हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक कुल लापता लड़कियों में से करीब दो तिहाई मामले जन्म के समय होने वाली मौत के हैं जबकि एक तिहाई मामले लैंगिक आधार पर भेदभाव के कारण लिंग निर्धारण से जुड़े हैं।

50 सालों में लापता होने वाली महिलाओं की संख्या दोगुने से अधिक

मंगलवार, 30 जून को संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष ने ‘स्टेट ऑफ वर्ल्ड पॉपुलेशन 2020’ रिपोर्ट जारी की। इस साल की रिपोर्ट का शीर्षक 'मेरी इच्छा के विरुद्ध: महिलाओं और लड़कियों को नुकसान पहुंचाने वाली और समानता को कमजोर करने वाली प्रथाओं को खत्म करना' रखा गया है। इस रिपोर्ट में बताया गया कि दुनिया भर में पिछले 50 साल में लापता हुईं 14 करोड़ 26 लाख महिलाओं में से चार करोड़ 58 लाख महिलाएं भारत की हैं।

रिपोर्ट के अनुसार पिछले 50 सालों में लापता होने वाली महिलाओं की संख्या दोगुने से अधिक हो गई है। जो साल 1970 में 6.1 करोड़ से बढ़कर 2020 तक 14.26 करोड़ हो गई है। इस वैश्विक आंकड़े में भारत में साल 2020 तक चार करोड़ 58 लाख और चीन में सात करोड़ 23 लाख महिलाएं लापता हुई हैं।

रिपोर्ट की मुख्य बातें

लैंगिक भेदभाव के कारण भारत और चीन में लापता होती है लड़कियां।

लैंगिक आधार पर भेदभाव की वजह से (जन्म से पूर्व) लिंग चयन के कारण दुनियाभर में हर साल लापता होने वाली अनुमानित 12 लाख से 15 लाख बच्चियों में से 90 से 95 प्रतिशत चीन और भारत की होती हैं।

इनमें चीन का हिस्सा 50 प्रतिशत और भारत का 40 प्रतिशत है। रिपोर्ट के अनुसार प्रतिवर्ष जन्म की संख्या के मामले में भी ये दोनों देश सबसे आगे है।

भारत के नौ राज्यों में तीन सालों तक 900 से कम रहा लिंगानुपात

रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत की साल 2018 की जनसंख्या पंजीकरण सांख्यिकी रिपोर्ट के अनुसार साल 2016-18 के बीच देश का लिंगानुपात 1000 लड़कों पर 899 लड़कियों का रहा है।

हैरान करने वाली बात यह है कि भारत के नौ राज्य हरियाणा, उत्तराखंड, दिल्ली, गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब और बिहार में यह आंकड़ा 900 से कम रहा है। हालांकि, इसके बाद सरकार ने जागरुकता अभियान चलाए हैं।

2055 में भारत की स्थिति हो सकती है गंभीर

भारत में 50 की उम्र तक एकल रहने वाले पुरुषों के अनुपात में साल 2050 के बाद 10 फीसदी तक वृद्धि का अनुमान जताया गया है। कुछ अध्ययनों में यह सुझाव दिया गया है कि भारत में संभावित दुल्हनों की तुलना में संभावित दूल्हों की संख्या बढ़ने संबंधी स्थिति 2055 में सबसे खराब होगी।

लोगों की सोच को बदलने पर जोर देने की सलाह

रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकारों ने लिंग चुनने के मूल कारण से निपटने के लिए कदम उठाए है। भारत और वियतनाम ने लोगों की सोच को बदलने के लिए मुहिम शुरू की हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि लड़कियों के बजाय लड़कों को प्राथमिकता देने के कारण कुछ देशों में महिलाओं और पुरुषों के अनुपात में बड़ा बदलाव आया है और इस जनसांख्यिकीय असंतुलन का विवाह प्रणालियों पर निश्चित ही असर पड़ेगा।

गौरतलब है कि भारत में बेटों की चाहत में भ्रूण का लिंग पता लगाकर, गर्भपात कराने के चलन को रोकने के लिए 1994 में पीसीपीएनडीटी क़ानून लाया गया था। लेकिन सेंटर फॉर ग्लोबल हेल्थ रिसर्च के मुताबिक भारत में पिछले 30 सालों में कम से कम 40 लाख बच्चियों की भ्रूण हत्या की गई है। इस शोध में वर्ष 1991 से 2011 तक के जनगणना आंकड़ों को नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के आंकड़ों के साथ जोड़कर ये निष्कर्ष निकाले गए हैं।

आसान नहीं पीसीपीएनडीटी क़ानून लागू करना

राष्ट्रीय जनसंख्या स्थिरता कोष की पूर्व कार्यकारी निदेशक शैलजा चंद्रा ने अपने एक पूर्व बयान में कहा था कि भारत सरकार ने पीसीपीएनडीटी कानून पारित तो कई सालों पहले ही कर दिया लेकिन इसे लागू करना बेहद मुश्किल है।

चन्द्रा ने अनुसार कानून को लागू करने वाले ज़िला स्वास्थ्य अफसर के लिए लिंग जांच करने वाले डॉक्टर पर नकेल कसना आसान नहीं है क्योंकि डॉक्टरों के पास नवीनतम तकनीक उपल्ब्ध है। इस कानून के सही क्रियान्वयन के लिए राज्य स्तर पर मुख्यमंत्रियों को ये बीड़ा उठाना होगा और इसे प्राथमिकता देनी होगी, तभी अफसर हरकत में आएंगे और डॉक्टरों को पकड़ने के तरीके निकालेंगे।

महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर काम कर रही संस्था ‘समा’ से जुड़ी आस्था के मुताबिक़ पिछले दस सालों के आंकड़ों को देखें तो ये साफ है कि हमारे देश में किसी एक पैमाने के आधार पर लिंग परीक्षण नहीं होता बल्कि सभी तरह के परिवारों में गर्भ में लिंग चुनाव करना आम हो गया है। फिर चाहें शिक्षा की दर, संपत्ति, जाति या समुदाय कुछ भी क्यों न हो।

कम लिंगानुपात से महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ेंगे

इससे पहले भी ग़ैर-सरकारी संगठन महिला उत्थान अध्ययन केंद्र और सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च ने एक संयुक्त प्रकाशन में चेतावनी दी थी कि यदि महिलाओं की संख्या यूँ ही घटती रही तो 'महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसात्मक घटनाऐं बढ़ जाएंगी।

संगठनों के मुताबिक लड़कियों का विवाह के लिए अपहरण किया जाएगा, उनकी इज़्ज़त पर हमले होंगे, उन्हें ज़बरदस्ती एक से अधिक पुरूषों की पत्नी बनने पर मजबूर भी किया जा सकता है।

जनसंख्या नियंत्रण अभियान भी गर्भपात का कारण है!

महिला उत्थान के लिए काम करने वाली ग़ैर सरकारी संगठन प्रोटेक्शन फॉर वूमेन का ऋचा सिंह का कहना है कि जिस स्त्री की शिक्षा के लिए महिला आंदोलन चलाए गए, आज उसके शिक्षित होने के बाद भी आज महिलाओं की संख्या घट रही है।

ऋचा के अनुसार, लड़कियों की संख्या तेज़ी से घटने का एक ख़ास कारण यह भी माना जाता है कि भारत सरकार के जनसंख्या नियंत्रण अभियान में ख़ामियाँ रही हैं और इसमें ज़बरदस्ती का पहलू भी शामिल किया गया है। आंध्र प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे कुछ राज्यों में सरकार ने दो से अधिक बच्चे रखने वाले माता-पिता को कुछ अधिकारों से वंचित करने की नीति अपनाई गई है।

जैसे तीन बच्चों की माँ को सरकारी नौकरी नहीं मिल सकती, यदि वह सरकारी कर्मचारी है तो उसे प्रसव के लिए अवकाश नहीं दिया जाता। तीसरे बच्चे को मुफ़्त शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाऐं प्रदान नहीं की जातीं।

ऋचा के मानना है कि बेशक इस नीति से जनसंख्या नियंत्रण हो जाए लेकिन ये नीति उस माता-पिता को मजबूर कर देती है कि किसी भी तरीक़े से तीसरा बच्चा पैदा ना हो। यदि उनकी चाह दो बच्चों में से कम से कम एक लड़का है तो दूसरी बार लड़की के गर्भधारण पर अवश्य ही गर्भपात करा दिया जाता है

UN report
gender discrimination
feticide
crimes against women
sex ratio
India
China
violence against women
patriarchal society
beti bachao beti padhao

Related Stories

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

तेलंगाना एनकाउंटर की गुत्थी तो सुलझ गई लेकिन अब दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?

यूपी : महिलाओं के ख़िलाफ़ बढ़ती हिंसा के विरोध में एकजुट हुए महिला संगठन

बिहार: आख़िर कब बंद होगा औरतों की अस्मिता की क़ीमत लगाने का सिलसिला?

बिहार: 8 साल की मासूम के साथ बलात्कार और हत्या, फिर उठे ‘सुशासन’ पर सवाल

मध्य प्रदेश : मर्दों के झुंड ने खुलेआम आदिवासी लड़कियों के साथ की बदतमीज़ी, क़ानून व्यवस्था पर फिर उठे सवाल

बिहार: मुज़फ़्फ़रपुर कांड से लेकर गायघाट शेल्टर होम तक दिखती सिस्टम की 'लापरवाही'

यूपी: बुलंदशहर मामले में फिर पुलिस पर उठे सवाल, मामला दबाने का लगा आरोप!

दिल्ली गैंगरेप: निर्भया कांड के 9 साल बाद भी नहीं बदली राजधानी में महिला सुरक्षा की तस्वीर

असम: बलात्कार आरोपी पद्म पुरस्कार विजेता की प्रतिष्ठा किसी के सम्मान से ऊपर नहीं


बाकी खबरें

  • दिल्ली : बिजली क्षेत्र के कर्मचारियों ने ‘पुलिस नृशंसता’ के खिलाफ 9 अगस्त को प्रदर्शन का आह्वान किया।
    रौनक छाबड़ा
    दिल्ली : बिजली क्षेत्र के कर्मचारियों ने ‘पुलिस नृशंसता’ के खिलाफ 9 अगस्त को प्रदर्शन का आह्वान किया
    07 Aug 2021
    ऊर्जाकर्मियों के चार दिन का ‘सत्याग्रह’ शुक्रवार को जंतर-मंतर पर समाप्त हो गया। कर्मियों ने आरोप लगाया कि उन्हें कार्यक्रम के मुताबिक अगले तीन दिन और प्रदर्शन करने की इजाजत नहीं दी जा रही है।
  • झारखण्ड: बिना परीक्षा फेल किये हज़ारों छात्र, सड़कों पर नाराज छात्रों का प्रदर्शन जारी
    अनिल अंशुमन
    झारखण्ड: बिना परीक्षा फेल किये हज़ारों छात्र, सड़कों पर नाराज छात्रों का प्रदर्शन जारी
    07 Aug 2021
    29 जुलाई को झारखण्ड अकादमिक काउंसिल (जैक) ने  इन्टरमीडियेट और उसके पहले इस वर्ष के मैट्रिक और इंटर के रिजल्ट घोषित किये। इसमें लगभग 34,243 छात्र-छात्राओं को इंटर में और 17,647 को मैट्रिक में फेल…
  • नीरज
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    नीरज ने भाला फेंक में स्वर्ण पदक जीतकर रचा इतिहास, पूरे देश ने दी बधाई
    07 Aug 2021
    हरियाणा के खांद्रा गोव के एक किसान के बेटे 23 वर्षीय नीरज ने अपने दूसरे प्रयास में 87.58 मीटर भाला फेंककर दुनिया को स्तब्ध कर दिया और भारतीयों को जश्न में डुबा दिया। एथलेटिक्स में पिछले 100 वर्षों से…
  • खेल रत्न से भारत रत्न तक 'खेल ही खेल' और अयोध्या मंदिर 2024 से पहले नहीं
    न्यूज़क्लिक टीम
    खेल रत्न से भारत रत्न तक 'खेल ही खेल' और अयोध्या मंदिर 2024 से पहले नहीं
    07 Aug 2021
    आप क्या समझते हैं, हमारी केंद्र सरकार का हाकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की तरफ यूँ ही ध्यान चला गया? बीते सात सालों में क्या ध्यानचंद को भारत-रत्न देने पर इस सरकार ने कभी विचार किया?
  • मैरिटल रेप पर केरल हाईकोर्ट का फ़ैसला महिलाओं के लिए एक उम्मीद की किरण है
    सोनिया यादव
    मैरिटल रेप पर केरल हाईकोर्ट का फ़ैसला महिलाओं के लिए एक उम्मीद की किरण है
    07 Aug 2021
    कोर्ट के मुताबिक मैरिटल रेप तब होता है, जब पति को लगता है कि वो अपनी पत्नी के शरीर का मालिक है। आधुनिक समाज में पति और पत्नी का दर्जा बराबरी का है। पति खुद को अपनी पत्नी से ऊंचा नहीं मान सकता है। फिर…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License