NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
पुणे में कोरोना के दो हजार से अधिक मरीज़ गायब!, प्रशासन ने ली पुलिस की मदद
पुणे शहर में पिछले सात दिनों के दौरान की गई पड़ताल में कोरोना संक्रमण से पीड़ित होने के बाद होम आइसोलेशन यानी घर पर उपचार लेने वाले 2,289 मरीज़ लापता पाए गए हैं। यह जानकारी पुणे नगर-निगम ने दी है।
शिरीष खरे
17 Aug 2020
पुणे

महाराष्ट्र में कोरोना रोगियों के गायब होने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। इसी कड़ी में अब पुणे नगर-निगम द्वारा जारी जानकारी चौंका रही है। इसके मुताबिक पुणे शहर में पिछले सात दिनों के दौरान की गई पड़ताल में कोरोना संक्रमण से पीड़ित होने के बाद होम आइसोलेशन यानी घर पर उपचार लेने वाले 2,289 मरीज़ लापता पाए गए हैं। यह जानकारी पुणे नगर-निगम ने दी है। साथ ही, उसने यह भी माना है कि उसके द्वारा इन रोगियों का पता नहीं लगाया जा पा रहा है। कोरोना के ये रोगी मोबाइल पहुंच से भी बाहर बताए जा रहे हैं। इसलिए, नगर-निगम प्रशासन इन्हें लेकर चिंतित है। यही वजह है कि पुणे नगर निगम इन मरीज़ों का पता लगाने के लिए अब पुलिस की मदद लेने की तैयारी कर रहा है।

पुणे नगर निगम ने इस सूचना की पुष्टि के पीछे की वजह को स्पष्ट करते हुए बताया कि उसके द्वारा पिछले दिनों कोरोना परीक्षण संग्रह केंद्र और निजी लैब प्रबंधन की ओर से दी जाने वाली रिपोर्ट में बड़ी चूक हुई हैं। नगर-निगम की मानें तो इस दौरान जिम्मेदार एजेंसियों ने उसे दो हजार से अधिक कोरोना रोगियों की गलत और अधूरी जानकारियां दी हैं।

हालांकि, कुछ निजी लैब प्रबंधन इस गैर-जिम्मेदारना घटना के बारे में सफाई देते हुए कह रहे हैं कि उनके द्वारा कोरोना रोगियों की संख्या से जुड़ी सभी जानकारियां उपलब्ध करा दी गई थीं और यदि तथ्य जुटाने में गड़बड़ियां हुई हैं तो इसके लिए रोगी या उनके परिजन जिम्मेदार हैं, क्योंकि उन्होंने रोगी या उनके परिजनों द्वारा बताई गई जानकारी के मुताबिक ही रिकार्ड तैयार किया है।

बता दें कि होम आइसोलेशन में कोरोना संक्रमित उन मरीज़ों को रखा जा रहा है जिनमें मेडिकल जांच के दौरान संक्रमण से संबंधित हल्के और बहुत हल्के लक्षण दिखाई दे रहे हैं। इसके लिए मेडिकल जांच एजेंसियों द्वारा ऐसे रोगियों की बुनियादी जानकारी लेने के उद्देश्य से विशेषकर उनके मोबाइल नंबर, घर का पता और अन्य बीमारियों से जुड़ी हुई अहम सूचनाएं दर्ज की जा रही हैं।

इसके तहत यदि कोई व्यक्ति कोरोना संक्रमित पाया जाता है तो मेडिकल जांच करने वाली एजेंसी की जिम्मेदारी होती है कि वह रोगी से जुड़ी सारी जानकारी नगर-निगम को दे। यह सारा रिकार्ड कोरोना संक्रमण की जांच के दौरान ही लिखा जाना चाहिए। इसके आधार पर ही घर में इलाज कराने वाले कोरोना रोगियों की निगरानी और उनके स्वास्थ्य से संबंधित अपडेट लिए जा सकते हैं।

दरअसल, होम आइसोलेशन वाले रोगियों के लिए जिला प्रशासनिक स्तर पर एक अलग प्रणाली तैयार की गई है। बता दें कि इसके तहत होम आइसोलेशन वाले रोगियों की संपर्क सूची नगर-निगम के पास होती है। इसी सूची के आधार पर होम आइसोलेशन में इलाज करा रहे रोगियों से संपर्क रखने की जिम्मेदारी भी नगर-निगम की ही होती है।

इसी के तहत जब नगर-निगम ने पिछले सप्ताह पंजीकृत रोगियों के रिकॉर्ड की खोजबीन की तो दो हजार से अधिक घर में इलाज कराने वाले कोरोना रोगी उसके संपर्क से बाहर पाए गए। यहां तक कि घर के दिए पते और मोबाइल के आधार पर खोजने के बावजूद नगर-निगम को दो हजार से अधिक कोरोना रोगियों का पता नहीं चला।

इस बारे में पुणे नगर-निगम के सहायक स्वास्थ्य प्रमुख डॉक्टर संजीव वावरे बताते हैं, 'कोरोना संक्रमण के नियंत्रण के लिए हम घर पर इलाज करा रहे मरीज़ों के स्वास्थ्य को अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं। हम हर मरीज़ के घर तक पहुंच रहे हैं। हम उन लोगों की जांच कर रहे हैं। उन्हें स्वास्थ्य सुविधा दे रहे हैं। साथ ही, उनकी भी जांच कर रहे हैं जो मरीज़ के संपर्क में आए हैं और अपने परिवारों के साथ कहीं और भी संपर्क में हैं। जिन प्रकरणों में कोई रिकॉर्ड नहीं मिल रहा है, हम संबंधित लैब से संपर्क कर रहे हैं।'

लेकिन, नगर-निगम द्वारा कोशिश करने के बावजूद जब दो हजार से अधिक घर पर इलाज कराने वाले कोरोना मरीज़ों से संपर्क नहीं हुआ तो प्रशासन स्तर पर इसे एक बड़ी लापरवाही मानी गई। यही वजह है कि प्रशासन इस संबंध में अब पुलिस की मदद लेने की तैयारी कर रही है।

हालांकि, होम आइसोलेशन कोरोना मरीज़ों की निगरानी की जिम्मेदारी पुलिस को ही दी जा रही है। पुलिस घर पर इलाज कराने वाले इन मरीज़ों का मूवमेंट रोकने के लिए भी उन पर नजर रख रही है। इस तरह, पुलिस यह सुनिश्चित कर रही है कि होम आइसोलेशन वाले कोरोना मरीज़ अन्य लोगों के संपर्क में आए बिना पूरी तरह घर पर ही रहें। लेकिन, हजारों की संख्या में कोरोना मरीज़ों से संपर्क नहीं होने के कारण नगर-निगम के स्वास्थ्य विभाग की मुश्किलें बढ़ गई हैं। ऐसे मरीज़ों को अब पुलिस की क्राइम ब्रांच द्वारा ढूंढ़ा जाएगा। कारण यह है कि पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी क्राइम ब्रांच को इन रोगियों का पता लगाने के लिए निर्देशित किया है।

data.JPG

बता दें कि पुणे शहर देश में कोरोना का बड़ा हॉट स्पॉट बनकर उभरा है। यहां अब तक साढ़े पांच लाख से अधिक कोरोना टेस्ट किए जा चुके हैं। सक्रिय मरीज़ों के मामले में यह राज्य में नंबर एक पर आ चुका है। सक्रिय मरीज़ों की संख्या की बात की जाए तो पुणे अब मुंबई और आगे से बहुत आगे निकल चुका है। गंभीर बात यह है कि पुणे के नजदीक के ग्रामीण इलाकों में कोरोना का संक्रमण तेजी से फैल रहा है। वहीं, पुणे नगर-निगम प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक यहां सात हजार से अधिक मरीज़ निजी मेडिकल सुविधा हासिल कर रहे हैं। इसी तरह, अब तक दो हजार 289 मरीज़ गायब हो चुके हैं।

दूसरी तरफ, पुणे नगर-निगम की एक चिकित्सक डॉक्टर वैशाली जाधव इस बारे में बात करने पर कहती हैं, 'शहर के सभी कोरोना मरीज़ पंजीकृत किए गए हैं। उनमें से प्रत्येक के नाम सरकारी रिकार्ड में दर्ज किए गए हैं। हालांकि, हम उन रोगियों के मोबाइल नंबरों से संपर्क कर रहे हैं जिनके पास घर का पता रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हो सका है। इसलिए, हमें उम्मीद है कि हम 12 से 15 प्रतिशत मरीज़ों को ढूंढ़ लेंगे। इसके लिए हम लगातार कोशिश कर भी रहे हैं।'

जाहिर है कि नगर-निगम के दावों के मुताबिक इस श्रेणी के यदि अधिकतम पांच सौ तक भी कोरोना मरीज़ों का पता लगा भी लिया जाता है तब भी डेढ़ हजार से अधिक कोरोना मरीज़ होंगे जिनकी प्रशासनिक स्तर पर कोई निगरानी नहीं रहेगी। इसलिए, कोरोना संक्रमण के मामले में राज्य के अन्य सभी शहरों को पीछे छोड़कर नंबर एक पर चल रहें पुणे के लिए यह एक बड़ी चूक मानी जा रही है।

वहीं, पिछले दिनों पुणे के महापौर मुरलीधर मोहोल ने आरोप लगाया है कि बीते एक महीने में कोरोना संक्रमण के बाद हुईं चार सौ से अधिक मरीज़ों की मौतों का हिसाब प्रशासन के पास नहीं है। उनके मुताबिक इस तरह के प्रकरणों में निजी अस्पतालों को लेकर कोई पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है। मुरलीधर मोहोल ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से की है। उन्होंने मांग की है कि कोरोना मरीज़ों का समय पर पता लगाया जाना चाहिए, ताकि उनका समय पर उपचार हो सके और मौतों की संख्या को बढ़ने से रोका जाए। इस आरोप को लेकर पुणे जिला अधिकारी नवल किशोर राम ने निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है।

Maharashtra
Pune
Corona in Pune
Corona patients missing
maharastra Police
Pune district administration

Related Stories

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा

नासिक के अस्पताल में आंखों में आंसू लिए जवाब मांग रहे हैं परिजन, मामले में प्राथमिकी दर्ज

कोविड-19 : इंदौर में मरीज़ को बिस्तर नहीं मिलने पर परिजन आक्रोशित, अस्पताल में तोड़-फोड़

देश के कई राज्यों में ऑक्सीजन की कमी, केंद्र से तत्काल क़दम उठाने की मांग

कोंकण के मछुआरे: पिछली साल चक्रवात तो अबकि कोरोना और चीन से तनाव के चलते बुरा हाल 

ग्रामीण भारत में करोना-29: वर्धा के सेलू तालुका पर लॉकडाउन का प्रभाव

लॉकडाउन में यात्रा का अवैध नेटवर्क- अमीर, एंबुलेंस रिज़र्व कर रहे, गरीब ट्रकों में छिपकर बिहार लौट रहे  

ग्रामीण भारत में कोरोना-12 : कटाई ना कर पाने की वजह से लातूर के किसानों की फसलें सड़ रही हैं

क्‍या पंचायतों में धर्म और जाति में उलझ रही है कोरोना से जंग?

6 राज्यों के ‘भोजन योद्धाओं’ की कहानी :  जो दिन-रात भूख के मोर्चे पर डटे हैं


बाकी खबरें

  • Women Hold Up More Than Half the Sky
    ट्राईकोंटिनेंटल : सामाजिक शोध संस्थान
    महिलाएँ आधे से ज़्यादा आसमान की मालिक हैं
    19 Oct 2021
    हाल ही में जारी हुए श्रम बल सर्वेक्षण पर एक नज़र डालने से पता चलता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली 73.2% महिला श्रमिक कृषि क्षेत्र में काम करती हैं; वे किसान हैं, खेत मज़दूर हैं और कारीगर हैं।
  • Vinayak Damodar Savarkar
    डॉ. राजू पाण्डेय
    बहस: क्या स्वाधीनता संग्राम को गति देने के लिए सावरकर जेल से बाहर आना चाहते थे?
    19 Oct 2021
    बार-बार यह संकेत मिलता है कि क्षमादान हेतु लिखी गई याचिकाओं में जो कुछ सावरकर ने लिखा था वह शायद किसी रणनीति का हिस्सा नहीं था अपितु इन माफ़ीनामों में लिखी बातों पर उन्होंने लगभग अक्षरशः अमल भी किया।
  • Pulses
    शंभूनाथ शुक्ल
    ‘अच्छे दिन’ की तलाश में, थाली से लापता हुई ‘दाल’
    19 Oct 2021
    बारिश के चलते अचानक सब्ज़ियों के दाम बढ़ गए हैं। हर वर्ष जाड़ा शुरू होते ही सब्ज़ियों के दाम गिरने लगते थे किंतु इस वर्ष प्याज़ और टमाटर अस्सी रुपए पार कर गए हैं। खाने के तेल और दालें पहले से ही…
  • migrant worker
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कश्मीर में प्रवासी मज़दूरों की हत्या के ख़िलाफ़ 20 अक्टूबर को बिहार में विरोध प्रदर्शन
    19 Oct 2021
    "अनुच्छेद 370 को खत्म करने के बाद घाटी की स्थिति और खराब हुई है। इससे अविश्वास का माहौल कायम हुआ है, इसलिए इन हत्याओं की जिम्मेवारी सीधे केंद्र सरकार की बनती है।”
  • Non local laborers waiting for train inside railwaysation Nowgam
    अनीस ज़रगर
    कश्मीर में हुई हत्याओं की वजह से दहशत का माहौल, प्रवासी श्रमिक कर रहे हैं पलायन
    19 Oct 2021
    30 से अधिक हत्याओं की रिपोर्ट के चलते अक्टूबर का महीना सबसे ख़राब गुज़रा है, जिसमें 12 नागरिकों की हत्या शामिल हैं, जिनमें से कम से कम 11 को आतंकवादियों ने क़रीबी टारगेट के तौर पर मारा है। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License