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जेलों में कोरोना के प्रसार के ख़तरे के बीच मोरक्को ने 5600 से ज़्यादा क़ैदियों को रिहा किया
संयुक्त राष्ट्र और कई अन्य समूहों ने दुनिया भर के देशों से जेलों के अंदर भीड़भाड़ को कम करने के लिए राजनीतिक और अनावश्यक कैदियों को रिहा करने को कहा है।
पीपल्स डिस्पैच
06 Apr 2020
 मोरक्को

मोरक्को के राजा ने कोरोनोवायरस संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए देश की भीड़भाड़ वाली जेलों में रह रहे क़ैदियों की संख्या को कम करने के लिए यहां के विभिन्न जेलों से 5654 कैदियों को रिहा करने का आदेश दिया है। ये घोषणा रविवार 5 अप्रैल को की गई है।

कैदियों को उम्र के अनुसार और जेल में बिताए गए वर्षों के आधार पर चयन किया गया। देश के न्याय मंत्रालय द्वारा जारी किए गए एक बयान के अनुसार कैदियों की ये रिहाई वैश्विक महामारी के समय "आपातकालीन स्वास्थ्य स्थिति और ज़रुरी एहतियात से जुड़ी विशेष परिस्थितियों" के कारण हुई। मिड्ल ईस्ट आई ने ये रिपोर्ट छापी है।

6 अप्रैल तक मोरक्को में Covid-19 से संक्रमण के 1000 से ज़्यादा मामले सामने आए हैं वहीं 70 लोगों की मौत हो गई है।

मोरक्को ने देश की जेलों में बंद कैदियों में इस वायरस के प्रसार से बचाने के लिए अतिरिक्त उपायों की भी घोषणा की है। इनमें आने जाने पर पाबंदी और एहतियाती उपायों की घोषणा की गई है।

कई मानवाधिकार समूहों और संगठनों ने राजा से सभी राजनीतिक क़ैदियों और बंदियों को रिहा करने की अपील की थी। बड़ी संख्या में राजनीतिक क़ैदी "हिराक" आंदोलन के हैं जो अभी भी जेल में हैं।

अल-हिराक अल-रिफ़ का शाब्दिक अर्थ है "रिफ़ का आंदोलन" । इसे मोरक्को के रिफ क्षेत्र में बर्बर नस्लीय पहचान (Berber ethnic identity) की सुरक्षा और अन्य राजनीतिक सुधारों के लिए अक्टूबर 2016 में शुरू किया गया था। यह जून 2017 तक चला। इस समय में अधिकारियों ने इसे रोकने के लिए दमनकारी कदम उठाए। सैकड़ों एक्टिविस्ट को गिरफ़्तार किया गया और उनमें से ज़्यादातर अभी भी जेलों में बंद हैं।

35 मिलियन से भी कम लोगों की संख्या वाले देश मोरक्को में 85000 से ज़्यादा कैदी हैं जिनमें विचाराधीन क़ैदी शामिल हैं। वर्ल्ड प्रिजन ब्रीफ के अनुसार, मोरक्को की अधिकांश जेलें 136 से ज़्यादा ऑफिशियल एवरेज ऑक्यूपेंसी रेट के साथ भीड़भाड़ वाली हैं।

ऑक्यूपेंसी रेट जेल की अधिकतम क्षमता के विरूद्ध वास्तविक क़ैदियों की संख्या को दर्शाता है। ये क्षमता लगभग 100 है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा पिछले महीने Covid-19 को वैश्विक महामारी घोषित करने के बाद यूएन ने भी राष्ट्रों को क़ैदियों को रिहा करने के लिए कहा है। भीड़भाड़ को देखते हुए संक्रमण के फैलने के समय क़ैदी सबसे असुरक्षित होते हैं। इस भीड़भाड़ के चलते अधिकांश जेलों के अंदर फिजिकल डिस्टेंसिंग असंभव हो जाता है, अनहाइजेनिक स्थिति बनी रहती है और पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी होती है। साथ ही, बड़ी संख्या में क़ैदी अन्य बीमारियों से पीड़ित हैं ऐसे में संक्रमित होने पर उनके स्वास्थ्य में सुधार मुश्किल हो जाता है।

साभार : पीपल्स डिस्पैच

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