NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
मज़दूर-किसान
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
आंदोलन : लॉकडाउन जनित मौतों पर शोक और सरकार को धिक्कार!
देश के प्रतिनिधि मज़दूर संगठन एक्टू, खेग्रामस और भाकपा माले इत्यादि के देशव्यापी आह्वान पर 9 मई को प्रवासी मज़दूरों की मौत तथा कंपनी–शासन लापरवाही से गैस रिसाव के शिकार लोगों के प्रति शोक प्रकट किया गया।
अनिल अंशुमन
10 May 2020
 आदिवासी

..... मरने वाले सब आदिवासी थे। मध्यप्रदेश के ऐसे जिलों के जहां आदिवासी कम हैं और जंगल उजाड़ दिये गए हैं। घर लौटने की जद्दोजहद में मौत आ गयी। इस तंत्र ने पहले उनके जंगल छीने, फिर शहरों में भूखा रखा और बीच में अकेला पाकर मार डाला ..... ऐसी कितनी ही बातें इन दिनों सोशल मीडिया में रेल से कटकर मारे गए प्रवासी मज़दूरों की व्यथा से कराह कर व्यक्त की जा रही हैं। झारखंड के आदिवासी समाज के मुखर हिस्से में तो इस दर्दनाक घटना को लेकर कुछ ज़्यादा ही शोक और क्षोभ है ।

सभी मृत आदिवासी मज़दूरों के नामों की सूची जारी करते हुए यह भी कहा जा रहा है –ये नाम याद रखिएगा, इन्हें भूलना मत। पटरी पर गिरी वो रोटियाँ भी याद रहें। बस हवाई दिलासे मत दीजिएगा इन परिवारों को, इनके लिए और इन जैसे हजारों के लिए। सवाल कीजिएगा अपनी सरकारों से! कर्नाटक में मज़दूरों की वापसी की ट्रेन कैंसल करने के फैसले पर सफाई दिये जाने पर। श्रमिक ट्रेनों में लाचार गरीब मज़दूरों से टिकट के लिए जबरन वसूले गए पैसों की सफाई पर। बड़े बड़े कारपोरेटों की लोन माफी की सफाई पर ...ये नाम याद रखिएगा।

adiwasi ganw 1.jpg

यह भी विडम्बना ही कही जाएगी है कि प्रवासी मज़दूरों के साथ उक्त घटनाएँ ऐतिहासिक मई दिवस के महीने में ही हो रहीं हैं। उससे भी बड़ी विडम्बना है लॉकडाउन जनित मज़दूरों की जानलेवा तबाही – दुर्दशा पर सरकार व इसके आला नेताओं की संवेदनहीनता। जिसके खिलाफ प्रायः हर दिन देश के किसी न किसी हिस्से में लोगों द्वारा विरोध प्रकट किए जाने का सिलसिला लगातार जारी है। फिर भी संविधान – लोकतन्त्र की शपथ लेकर जनहित के नाम पर सत्ता में काबिज सरकारों - नेताओं को इससे कोई फर्क नहीं दीख रहा है।

9 मई को देश के प्रतिनिधि मज़दूर संगठन एक्टू, खेग्रामस और भाकपा माले इत्यादि के देशव्यापी आह्वान पर लॉकडाउन जनित प्रवासी मज़दूरों की मौत तथा कंपनी–शासन लापरवाही से गैस रिसाव के शिकार व मारे लोगों के प्रति शोक प्रकट किया गया। साथ ही इन सभी दुखद घटनाओं पर संज्ञान नहीं लेने वाली संवेदनहीन सरकारों के खिलाफ काली पट्टी– प्ले कार्ड व काला झंडा लेकर धिक्कार दिवस मनाते हुए विरोध प्रकट किया गया। झारखंड के आदिवासी गांव के लोगों समेत सुदूर असम के चाय बगानों में काम कर रहे प्रवासी मज़दूरों से लेकर पंजाब–हरियाणा, ओड़ीशा, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश – तमिलनाडु व उत्तर प्रदेश–बिहार के कई गांवों–कस्बों के साथ देश की राजधानी दिल्ती तक में यह कार्यक्रम हुआ । शाम में लॉकडाउन में मारे गए सभी गरीबों व प्रवासी मज़दूरों तथा गैस रिसाव मृतकों की याद में मोमबत्तियाँ जलाईं गईं।

मीडिया को जारी सूचनाओं में इस अभियान के माध्यम से लॉकडाउन में घर वापसी के लिए रेल पटरियों व सड़कों पर पैदल चलने के दौरान कुचल कर और भूख प्यास से मारे जा रहे प्रवासी मज़दूरों की मौतों को हत्या व जनसंहार करार दिया गया। लॉकडाउन से तंग तबाह होकर घरवापसी के लिए अपने छोटे छोटे बच्चों– बुजुर्गों व पूरे परिवार के साथ सड़कों पर पैदल चल रहे लाखों श्रमिक मज़दूरों की हो रही दुर्दशा व मौतों पर प्रधानमंत्री से पूछा गया कि – ऐसी हृदयविदारक स्थितियों में भी वे खामोश क्यों हैं ?

dhikkar 8.jpg

सभी मृतक प्रवासी मज़दूरों के परिजनों को अविलंब एक करोड़ रुपया मुआवज़ा देने तथा पीएम केयर फंड से सभी प्रवासी मज़दूरों व गरीबों की जल्द से जल्द सुरक्शित घर वापसी कराने की मांग फिर से दुहराई गयी। साथ ही यह भी सवाल किया गया कि विदेशों से वापस लाये जा रहे लोगों के लिए ‘वंदे भारत मिशन’ और प्रवासी मज़दूरों के लिए ‘डंडे भारत मिशन’ क्यों? विदेशों से घर वापसी करने वालों की लिस्ट जारी करने वाली सरकार क्यों नहीं बता रही है कि कितने प्रवासी मज़दूर घर वापसी के लिए रोज पैदल चल रहे हैं अथवा मर रहें हैं? कर्नाटक व गुजरात जैसे राज्यों में मुनाफाखोर मालिकों के लिए प्रवासी मज़दूरों को बंधुआ बनाने की साजिश का विरोध करते हुए सारे मज़दूरों की सकुशल घर वापसी तथा समुचित स्वस्थ्य परीक्षण इत्यादि की मांग की गयी ।

एक खबर ऐसी भी है जिसमें प्रदेश के गिरिडीह ज़िला स्थित बागोदर में माले विधायक के साथ महीनों से रात दिन प्रवासी मज़दूरों के लिए सक्रिय रहनेवाले वामपंथी कार्यकर्ता प्रो. हेमाल महतो के अनुसार - चंद दिनों पूर्व ही श्रमिक ट्रेन द्वारा मुंबई से वापस लौटे कुछेक प्रवासी युवा मज़दूर प्रशासन द्वारा निर्देशित क्वारंटाइन सेंटर में नहीं रह रहें हैं। स्थानीय ग्रामीणों के मना करने के बावजूद घूम घूमकर व जानबूझकर बच्चों व लोगों के हाथ छूकर कह रहें हैं कि कहाँ फैल रहा है कोरोना , आपलोग झूठ का मोदी सरकार को बदनाम करते हैं! इन सबों के बारे में यह भी बताया गया है कि चुनाव के समय ये सभी दल विशेष (वर्तमान में प्रदेश का विपक्षी दल) के कार्यकर्ता का काम करते हैं।

dhikkar 12.jpg

संभव है हेमलाल महतो जी की बातें साक्ष्य के अभाव में गलत साबित कर दी जाय। लेकिन प्रदेश कि सियासत और मीडिया में हर दिन दिख रहा है कि किस प्रकार से राज्य की सरकार को महामारी से निपटने में विफल साबित करने की कवायदें हो रहीं हैं। प्रदेश के वर्तमान विपक्षी दल और उसके नेता बिहार में अपनी सरकार के विपक्षी दलों व नेताओं को तो इस समय विरोध-राजनीति न करने की नसीहतें दे रहें हैं लेकिन झारखंड में जहां वे विपक्ष हैं, ज़मीन पर जनता के साथ उतना सक्रिय नहीं दिख रहें हैं जितना यहाँ की गैर भाजपा सरकार का विरोध करने में। जिनके इशारों से मीडिया का एक बड़ा हिस्सा यही साबित करने में लगा हुआ कि हेमंत सोरेन सरकार महामारी का समाधान नहीं निकालकर सिर्फ पैसों के अभाव का रोना रो रही है।

बातें तो अनंत हैं लेकिन फिलहाल यह बात तो सत्य दीख रही है कि , बक़ौल सोशल मीडिया –लॉकडाउन से तंग तबाह होकर सड़कों पर भूखे – प्यासे घर वापस लौट रहे परदेस गए मज़दूरों को ट्रकों और चमचमाती गाड़ियों को कुचलते हुए जाने की पूरी छूट है... मज़दूर पटरी पर चल रहे थे कुचले गए, सरकार बेपटरी इत्मीनान से चल रही है ...!

Coronavirus
Lockdown
Migrant workers
migrants
Jharkhand
Central Government
Madhya Pradesh
aadiwasi
Tribal Laborers
Special Train
AICCTU
CPIML

Related Stories

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

कड़ी मेहनत से तेंदूपत्ता तोड़ने के बावजूद नहीं मिलता वाजिब दाम!  

विधानसभा घेरने की तैयारी में उत्तर प्रदेश की आशाएं, जानिये क्या हैं इनके मुद्दे? 

ज़रूरी है दलित आदिवासी मज़दूरों के हालात पर भी ग़ौर करना

आख़िर किसानों की जायज़ मांगों के आगे झुकी शिवराज सरकार

कर्नाटक: मलूर में दो-तरफा पलायन बन रही है मज़दूरों की बेबसी की वजह

सार्वजनिक संपदा को बचाने के लिए पूर्वांचल में दूसरे दिन भी सड़क पर उतरे श्रमिक और बैंक-बीमा कर्मचारी

झारखंड: केंद्र सरकार की मज़दूर-विरोधी नीतियों और निजीकरण के ख़िलाफ़ मज़दूर-कर्मचारी सड़कों पर उतरे!

दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल को मिला व्यापक जनसमर्थन, मज़दूरों के साथ किसान-छात्र-महिलाओं ने भी किया प्रदर्शन


बाकी खबरें

  • EVM
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव: इस बार किसकी सरकार?
    09 Mar 2022
    उत्तर प्रदेश में सात चरणों के मतदान संपन्न होने के बाद अब नतीजों का इंतज़ार है, देखना दिलचस्प होगा कि ईवीएम से क्या रिजल्ट निकलता है।
  • moderna
    ऋचा चिंतन
    पेटेंट्स, मुनाफे और हिस्सेदारी की लड़ाई – मोडेरना की महामारी की कहानी
    09 Mar 2022
    दक्षिण अफ्रीका में पेटेंट्स के लिए मोडेरना की अर्जी लगाने की पहल उसके इस प्रतिज्ञा का सम्मान करने के इरादे पर सवालिया निशान खड़े कर देती है कि महामारी के दौरान उसके द्वारा पेटेंट्स को लागू नहीं किया…
  • nirbhaya fund
    भारत डोगरा
    निर्भया फंड: प्राथमिकता में चूक या स्मृति में विचलन?
    09 Mar 2022
    महिलाओं की सुरक्षा के लिए संसाधनों की तत्काल आवश्यकता है, लेकिन धूमधाम से लॉंच किए गए निर्भया फंड का उपयोग कम ही किया गया है। क्या सरकार महिलाओं की फिक्र करना भूल गई या बस उनकी उपेक्षा कर दी?
  • डेविड हट
    यूक्रेन विवाद : आख़िर दक्षिणपूर्व एशिया की ख़ामोश प्रतिक्रिया की वजह क्या है?
    09 Mar 2022
    रूस की संयुक्त राष्ट्र में निंदा करने के अलावा, दक्षिणपूर्वी एशियाई देशों में से ज़्यादातर ने यूक्रेन पर रूस के हमले पर बहुत ही कमज़ोर और सतही प्रतिक्रिया दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा दूसरों…
  • evm
    विजय विनीत
    यूपी चुनाव: नतीजों के पहले EVM को लेकर बनारस में बवाल, लोगों को 'लोकतंत्र के अपहरण' का डर
    09 Mar 2022
    उत्तर प्रदेश में ईवीएम के रख-रखाव, प्रबंधन और चुनाव आयोग के अफसरों को लेकर कई गंभीर सवाल उठे हैं। उंगली गोदी मीडिया पर भी उठी है। बनारस में मोदी के रोड शो में जमकर भीड़ दिखाई गई, जबकि ज्यादा भीड़ सपा…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License