NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
ग़रीबी के आंकड़ों में उत्तर भारतीय राज्यों का हाल बेहाल, केरल बना मॉडल प्रदेश
मल्टीडाइमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स के मुताबिक केरल के अलावा भारत का और कोई दूसरा राज्य नहीं है, जहां की बहुआयामी गरीबी 1% से कम हो। 
अजय कुमार
28 Nov 2021
poverty
Image courtesy : The Hindu

गरीबी को मापने के ढेर सारे पैमानों में एक स्वीकृत पैमाना यह भी है कि कुछ बुनियादी आधारों को लेकर लोगों की संभावित क्षमताएं मापी जाएं। इसी विचार पर मल्टी डाइमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स का पैमाना आधारित है। जहां पर स्वास्थ्य शिक्षा और जीवन स्तर से जुड़ी तीन कैटेगरी के अंतर्गत 12 सूचकांकों के आधार पर गरीबी को मापा जाता है।

ये 12 सूचकांक हैं: पोषण, बालकिशोर मृत्यु दर, प्रसव पूर्व देखभाल, स्कूली शिक्षा के वर्ष, स्कूल में उपस्थिति, रसोई गैस, स्वच्छता, पीने का पानी, बिजली, आवास, संपत्ति और बैंक खाते। इन सब आधारों को जोड़कर किसी व्यक्ति के बारे में यह घोषित किया जाता है कि वह गरीब है या गरीबी से बाहर है।

यानी मल्टीडाइमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स केवल पैसे को आधार बनाकर गरीबी को नहीं मापता बल्कि कुछ जरूरी बुनियादी आधारों को लेकर गरीबी को मापता है। भारत में नीति आयोग ने पहली बार विश्व स्वीकृत तरीकों को अपनाते हुए साल 2015-16 में प्रकाशित नेशनल फैमिली हैल्थ सर्वे के आधार पर मल्टी डाइमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स की रिपोर्ट प्रकाशित की है।

इस रिपोर्ट ने राष्ट्रवाद की बीमारी से ग्रसित भारतीय राष्ट्र के भीतर मौजूद लोगों का कच्चा चिट्ठा पेश कर दिया है। जिस उत्तर भारत की राजनीति भारत में मुख्यधारा की राजनीति की तौर पर भारत के दक्षिण, पश्चिम, पूर्व सभी इलाकों की राजनीति को अपने अंदर ढक लेती है, उस उत्तर भारत की हालत सबसे अधिक खराब है। 

मल्टी डाइमेंशनल सूचकांक के मुताबिक बिहार भारत का सबसे गरीब राज्य है। जिस बिहार के बारे में यह भ्रम फैलाया गया है कि वहां का बच्चा-बच्चा राजनीति करता है, उस बिहार में तकरीबन 51 फ़ीसदी लोग मल्टीडाइमेंशनल इंडेक्स के 12 आधारों के मुताबिक गरीब हैं। यानी बिहार की तकरीबन आधी आबादी कई तरह की मूलभूत वंचनाओं का शिकार है। 

दूसरे नंबर पर झारखंड है, जहां पर यह आंकड़ा तकरीबन 42 फ़ीसदी का है। तीसरे नंबर पर उत्तर प्रदेश का नंबर आता है, जहां के माननीय मुख्यमंत्री के बारे में कहा जाता है कि अगले मोदी योगी जी हैं, वहां के तकरीबन 37% लोग मल्टीडाइमेंशनल इंडेक्स के तहत मापी जाने वाली बहुआयामी गरीबी का  वंचनाओं का शिकार है। इसके बाद मध्य प्रदेश (32%) का नंबर आता है जो उत्तर भारत के हिसाब से तीसरा सबसे बड़ा राज्य और पूरे भारत का पांचवा सबसे बड़ा राज्य है। 

इस तरह से देखा जाए तो भारत के 35 केंद्र शासित और पूर्णकालिक राज्यों के बीच उत्तर भारत के 6 बड़े राज्य मल्टीडाइमेंशनल इंडेक्स के मुताबिक भारत के सबसे अधिक 10 गरीब राज्यों के भीतर हैं।

अगर मल्टीडाइमेंशनल इंडेक्स से जुड़े 12 सूचकांकों को आधार बनाकर कहा जाए तो बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ से जुड़ा मानव संसाधन भारत में सबसे अधिक वंचना का शिकार है। इन्हीं इलाकों में भारत की सबसे बड़ी आबादी उन मूलभूत सुविधाओं और जरूरतों से दूर है जिनके होने पर किसी की यह क्षमता बनती है कि वह गरीबी के चक्र को तोड़ पाए। 

दुख की बात तो यह है कि दिल्ली से संचालित होने वाली राष्ट्रीय मीडिया और राजनीति सबसे अधिक इन्हीं राज्यों और इलाकों का प्रतिनिधित्व करती है। लेकिन सबसे भयावह तस्वीर इन्हीं इलाकों की है। 

जिस वामपंथी विचारधारा की भारत की उत्तर भारत की राजनीति में बहुत ज्यादा पूछ नहीं है। उत्तर भारत का अभिजात्य वर्ग जिस विचारधारा को स्वीकारने से बहुत अधिक कातरता है। उसी विचारधारा से संचालित होने वाली भारत की एकमात्र सरकार केरल की मल्टीडाइमेंशनल इंडेक्स में भारत में सबसे अच्छी स्थिति है।

केरल में महज 0.71 आबादी मल्टी डाइमेंशनल इंडेक्स के मुताबिक बहुआयामी गरीबी का शिकार है। यह आंकड़ा भारत की सबसे कड़वी सच्चाई पर नब्ज दबा देता है कि उत्तर भारत की पूरी राजनीति उस विचारधारा से दूर हो गई है, जो जनमानस की भलाई से सबसे अधिक जुड़ी हुई है। चाहें जितना मर्जी उतना विश्लेषण कर लिया जाए लेकिन तथ्य यही है कि दुनिया के इतिहास की सबसे मजबूत विचारधारा और भारत की चुनावी राजनीति में सबसे कमजोर कहीं जाने वाली विचारधारा से संचालित सरकार ने जनकल्याण का सबसे दमदार काम किया है।

केरल के अलावा भारत का और कोई राज्य नहीं है जहां पर मल्टीडाइमेंशनल इंडेक्स के मुताबिक 1% से कम की बहुआयामी गरीबी हो। केरल के बाद मल्टीडाइमेंशनल इंडेक्स के मुताबिक सबसे अच्छी स्थिति गोवा (3.76 %), सिक्किम (3.82,%) तमिलनाडु (4.82%) की है। लेकिन इनमें से किसी भी राज्य ने 1% से कम की गरीबी का आंकड़ा नहीं पार किया है। सबकी गरीबी केरल से ज्यादा है। 

बिहार और मध्य प्रदेश में तकरीबन 51% और 45% लोग पोषण संबंधी वंचनाओं का शिकार हैं तो केरल में यह संख्या महज 15% लोगों की है। यानी बिहार की अगर आधी से अधिक आबादी ढंग का खाना नहीं खा पा रही है तो केरल में महज 100 में से 15 लोगों को इस दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। 

बिहार उत्तर प्रदेश में तकरीबन 45% और 35% महिलाओं को मातृत्व संबंधी बीमारियों और परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है तो केरल में यह संख्या महज 1.73 फ़ीसदी की है। 

बिहार और उत्तर प्रदेश में अगर 26% और 17% बच्चे अब भी 6 साल से ज्यादा समय स्कूलों में नहीं बिता पाते तो केरल में यह संख्या महज 1.78% की है। 

बिहार में अब भी 82% महिलाएं रसोई गैस पर खाना नहीं बना पा रही हैं। उत्तर प्रदेश की तकरीबन आधी महिलाएं रसोई गैस से दूर हैं। लेकिन यही संख्या केरल में महज 28% महिलाओं की है। 

साफ सफाई के मामले में बिहार की 43% आबादी वंचना का शिकार है। झारखंड की 75% आबादी और उत्तर प्रदेश की 31% आबादी साफ सफाई के मामले से जुड़ी बुनियादी सीमा को पार नहीं कर पा रही है। तो केरल में केवल 1.86 फ़ीसदी लोगों को साफ सफाई से जुड़ी जरूरी सुविधाओं की वंचना है। 

बिहार में तकरीबन 63% और उत्तर प्रदेश में तकरीबन 67% लोगों के पास रहने के लिए ढंग का घर नहीं है। लेकिन केरल में ढंग का घर ना मिलने की वजह से परेशान होने वाले लोगों की संख्या महज 10 फ़ीसदी है।

यह सारे आंकड़े बताते हैं कि भारत में सांप्रदायिकता और पूंजी पतियों के साथ गठजोड़ की राजनीति ने उत्तर भारत के लोगों को बहुत पीछे धकेल दिया है। केरल अब भी भारत के पास ऐसे उदाहरण के तौर पर मौजूद है जिससे जुड़े मल्टी डाइमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स के आंकड़े बता रहे हैं कि अगर स्वतंत्रता, समानता और आजादी रची बसी और सनी हुई विचारधारा से राजनीति होगी तभी जनकल्याण मुमकिन है।

poverty
Poverty in India
NORTH INDIA
Bihar
Uttar pradesh
NITI Aayog
kerala model

Related Stories

बिहार: पांच लोगों की हत्या या आत्महत्या? क़र्ज़ में डूबा था परिवार

आजमगढ़ उप-चुनाव: भाजपा के निरहुआ के सामने होंगे धर्मेंद्र यादव

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

बिहार : जीएनएम छात्राएं हॉस्टल और पढ़ाई की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

बिहारः नदी के कटाव के डर से मानसून से पहले ही घर तोड़कर भागने लगे गांव के लोग

यूपी : आज़मगढ़ और रामपुर लोकसभा उपचुनाव में सपा की साख़ बचेगी या बीजेपी सेंध मारेगी?

श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही मस्जिद ईदगाह प्रकरण में दो अलग-अलग याचिकाएं दाखिल

ग्राउंड रिपोर्ट: चंदौली पुलिस की बर्बरता की शिकार निशा यादव की मौत का हिसाब मांग रहे जनवादी संगठन


बाकी खबरें

  • kisan
    न्यूज़क्लिक टीम
    किसानों ने देश को संघर्ष करना सिखाया - अशोक धवले
    25 Dec 2021
    किसान आंदोलन ने इस देश के मजदूरों और किसानों को नई हिम्मत दी है। ऑल इंडिया किसान सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक धवले ने न्यूज़क्लिक के साथ ख़ास बातचीत में कहा कि आंदोलन के कामयाब होने की बुनियादी शर्त…
  • yogi
    अजय कुमार
    योगी सरकार का काम सांप्रदायिकता का ज़हर फैलाना है या नौजवानों को बेरोज़गार रखना?
    25 Dec 2021
    उत्तर प्रदेश का चुनावी माहौल हिंदू-मुस्लिम धार पर बर्बाद करने की कोशिश की जा रही है। तो आइए इस नफ़रत के माहौल को काटते हुए उत्तर प्रदेश की बेरोज़गारी पर बात करते हैं।
  • manipur
    शशि शेखर
    मणिपुर : ड्रग्स का कनेक्शन, भाजपा और इलेक्शन
    25 Dec 2021
    मणिपुर में ड्रग कार्टेल और भाजपा नेताओं की उसमे संलिप्तता की कई खबरें आ चुकी हैं। टेररिस्ट संगठन से लिंक के आरोपी, थोनाजाम श्याम कुमार सिंह, 2017 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ते हैं। विधायकी की…
  • up
    सत्येन्द्र सार्थक
    यूपी चुनाव 2022: पूर्वांचल में इस बार नहीं हैं 2017 वाले हालात
    25 Dec 2021
    पूर्वांचल ख़ासकर गोरखपुर में सभी प्रमुख पार्टियां अपनी जीत का दावा कर रही हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में गोरखपुर ज़िले की 9 सीटों में से 8 पर भाजपा ने जीत हासिल की थी, लेकिन जानकारों का मानना है कि…
  • bhasha singh
    भाषा सिंह
    बात बोलेगी : दरअसल, वे गृह युद्ध में झोंकना चाहते हैं देश को
    24 Dec 2021
    हरिद्वार में 17 से 19 दिसंबर 2021 तक चली बैठक को धर्म संसद का नाम देने वाले वे सारे उन्मादी मारने-काटने की बात करने वाले, ख़ुद को स्वामी और साध्वी कहलाने वाले शख़्स दरअसल समाज को उग्र हिंदु राष्ट्र के…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License