NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
मुंबई में प्रवासी मज़दूर सड़क पर आये, कहा- घर वापस जाना चाहते हैं
दूसरे दौर के लॉकडाउन की घोषणा के साथ हम देश की आर्थिक राजधानी मुंबई से दूसरा दुखदायी पलायन देखने को मजबूर हैं। मज़दूरों का साफ कहना है कि हम लॉकडाउन बढ़ाने की घोषणा से खुश नहीं हैं।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
14 Apr 2020
प्रवासी मज़दूर सड़क पर
Image courtesy: India Today

मुंबई : 24 मार्च को देशव्यापी लॉकडाउन की पहली घोषणा के बाद हमने-आपने देश की राजधानी दिल्ली समेत कई महानगरों से मज़दूरों का पहला ऐतिहासिक पलायन देखा था और आज दूसरे दौर के लॉकडाउन की घोषणा के साथ हम देश की आर्थिक राजधानी मुंबई से दूसरा दुखदायी पलायन देखने को मजबूर हैं। इस दौरान हमने ‘गुजरात मॉडल’ का भी हाल देखा जहां सूरत में मज़दूर बकाया भुगतान और घर भेजने की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए और अपनी बात सरकार तक पहुंचाने के लिए हल्की आगज़नी और तोड़फोड़ भी की। 
 
मज़दूरों का साफ कहना है कि अब इस तालाबंदी में वे परदेस में और नहीं रह सकते। उन्हें अपने गांव-घर भेजा जाए। उनका कहना है कि वे लॉकडाउन बढ़ने से खुश नहीं है और केंद्र या राज्य सरकार कोई भी उनकी मुश्किलें समझने को तैयार नहीं है।
 
आज सुबह राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में देशव्यापी लॉकडाउन को तीन मई तक बढ़ाने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषणा करने के कुछ ही घंटे बाद बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर मुंबई में सड़क पर आ गए और मांग की कि उन्हें उनके मूल स्थानों को जाने के लिए परिवहन की व्यवस्था की जाए। ये सभी प्रवासी मजदूर दिहाड़ी मजदूर हैं। 
 
मज़दूर बड़ी संख्या में ब्रांदा स्टेशन पर जमा हो गए, जिसके बाद पुलिस ने बामुश्किल उन्हें हटाया। इसके लिए उन्हें मज़दूरों पर लाठीचार्ज भी करना पड़ा।
 
कोविड-19 के प्रकोप के चलते पिछले महीने लॉकडाउन लागू होने के बाद से दिहाड़ी मजदूर बेरोज़गार हो गए हैं। इससे उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
 
हालाँकि अधिकारियों और गैर-सरकारी संगठनों ने उनके भोजन की व्यवस्था की है, लेकिन उनमें से अधिकतर पाबंदियों के चलते हो रही दिक्कतों के चलते अपने मूल स्थानों को वापस जाना चाहते हैं। 
 
पुलिस के एक अधिकारी के अनुसार करीब 1000 दिहाड़ी मजदूर अपराह्न करीब तीन बजे रेलवे स्टेशन के पास मुंबई उपनगरीय क्षेत्र बांद्रा (पश्चिम) बस डिपो पर एकत्रित हो गए और सड़क पर बैठ गए। 

दिहाड़ी मजदूर पास के पटेल नगरी इलाके में झुग्गी बस्तियों में किराए पर रहते हैं, वे परिवहन सुविधा की व्यवस्था की मांग कर रहे हैं ताकि वे अपने मूल नगरों और गांवों को वापस जा सकें। वे मूल रूप से पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों के रहने वाले हैं।

एक मजदूर ने अपना नाम बताये बिना कहा कि एनजीओ और स्थानीय निवासी प्रवासी मजदूरों को भोजन मुहैया करा रहे हैं लेकिन वे लॉकडाउन के दौरान अपने मूल राज्यों को वापस जाना चाहते हैं क्योंकि बंद से उनकी आजीविका बुरी तरह से प्रभावित हुई है।

उसने कहा, ‘‘अब, हम भोजन नहीं चाहते हैं, हम अपने मूल स्थान वापस जाना चाहते हैं, हम (लॉकडाउन बढ़ाने की) घोषणा से खुश नहीं हैं।’’
पश्चिम बंगाल के मालदा के रहने वाले असदुल्लाह शेख ने कहा, ‘‘हमने लॉकडाउन के पहले चरण में अपनी बचत पहले ही खर्च कर दी है।

अब हमारे पास खाने को कुछ नहीं है, हम केवल अपने मूल स्थान वापस जाना चाहते हैं, सरकार को हमारे लिए व्यवस्था करनी चाहिए।’’
एक अन्य मजदूर, अब्दुल कय्युन ने कहा, ‘‘मैं पिछले कई वर्षों से मुंबई में हूं, लेकिन ऐसी स्थिति कभी नहीं देखी। सरकार को हमें यहां से हमारे मूल स्थान पर भेजने के लिए ट्रेनें शुरू करनी चाहिए।’’

अधिकारी ने कहा कि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए विरोध स्थल पर भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है। अन्य पुलिस थानों से कर्मियों को बुलाया गया है।
 
इस स्थिति पर महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देखमुख ने कहा कि मुंबई में बांद्रा स्टेशन के पास एकत्र हुए प्रवासी मजदूरों/कामगारों ने संभवत: सोचा होगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यों की सीमाएं खोलने का आदेश दे दिया है। उन्होंने कहा कि बांद्रा स्टेशन पर हालात नियंत्रण में हैं, वहां एकत्र प्रवासी कामगारों के रहने-खाने की व्यवस्था राज्य करेगा 

आपको बता दें कि महाराष्ट्र में कोरोना का प्रकोप सबसे ज़्यादा है। आज 14 अप्रैल शाम पांच बजे तक कोरोना के कुल 2,337 केस हो गए थे। इनमें से 160 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 229 लोग ठीक कर लिए गए हैं। इस तरह आज भी कुल सक्रिय मामलों की संख्या 1,948 है।

औरंगाबाद में बुजुर्ग की मौत

औरंगाबाद : महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में सोमवार को 68 वर्षीय एक व्यक्ति की कोरोना वायरस से मौत हो गई। जिले में कोविड-19 से यह दूसरी मौत है।

अधिकारियों ने बताया कि आठ अप्रैल को जब इस व्यक्ति को गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (जीएमसीएच) में भर्ती कराया गया था तब उसके लार के नमूनों की जांच रिपोर्ट में संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई थी।

जीएमसीएच के डीन डॉ कानन येलिकर ने कहा, “इलाज के दौरान 11 अप्रैल को उनके नमूने दोबारा जांच के लिए भेजे गए जिनमें संक्रमण की पुष्टि हुई। वह व्यक्ति जीवन रक्षक प्रणाली पर था। दोपहर करीब डेढ़ बजे उसने आखिरी सांस ली।”

डॉ. येलिकर ने बताया कि वह आदमी अपने ‍संक्रमित बेटे के संपर्क में आने के बाद कोविड-19 से प्रभावित हुआ था। उसका बेटा पुणे से वापस आने के बाद जांच में कोरोना वायरस से संक्रमित पाया गया था।

इससे पूर्व , अप्रैल के पहले सप्ताह में यहां 58 वर्षीय एक व्यक्ति की कोविड-19 से मौत हो गई थी।

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ)

Lockdown
Bandra station
Mumbai
mumbai police
migrants
Migrant workers
Narendra modi

Related Stories

दवाई की क़ीमतों में 5 से लेकर 5 हज़ार रुपये से ज़्यादा का इज़ाफ़ा

कोविड पर नियंत्रण के हालिया कदम कितने वैज्ञानिक हैं?

उत्तराखंड: मानसिक सेहत गंभीर मामला लेकिन इलाज के लिए जाएं कहां?

कोरोना अपडेट: देश के 14 राज्यों में ओमिक्रॉन फैला, अब तक 220 लोग संक्रमित

हर नागरिक को स्वच्छ हवा का अधिकार सुनिश्चित करे सरकार

ओमिक्रॉन से नहीं, पूंजी के लालच से है दुनिया को ख़तरा

बिहारः तीन लोगों को मौत के बाद कोविड की दूसरी ख़ुराक

अबकी बार, मोदी जी के लिए ताली-थाली बजा मेरे यार!

जन्मोत्सव, अन्नोत्सव और टीकोत्सव की आड़ में जनता से खिलवाड़!

डेंगू की चपेट में बनारस, इलाज के लिए नहीं मिल रहे बिस्तर


बाकी खबरें

  • sever
    रवि शंकर दुबे
    यूपी: सफ़ाईकर्मियों की मौत का ज़िम्मेदार कौन? पिछले तीन साल में 54 मौतें
    06 Apr 2022
    आधुनिकता के इस दौर में, सख़्त क़ानून के बावजूद आज भी सीवर सफ़ाई के लिए एक मज़दूर ही सीवर में उतरता है। कई बार इसका ख़ामियाज़ा उसे अपनी मौत से चुकाना पड़ता है।
  • सोनिया यादव
    इतनी औरतों की जान लेने वाला दहेज, नर्सिंग की किताब में फायदेमंद कैसे हो सकता है?
    06 Apr 2022
    हमारे देश में दहेज लेना या देना कानूनन अपराध है, बावजूद इसके दहेज के लिए हिंसा के मामले हमारे देश में कम नहीं हैं। लालच में अंधे लोग कई बार शोषण-उत्पीड़न से आगे बढ़कर लड़की की जान तक ले लेते हैं।
  • पटनाः डीजल-पेट्रोल से चलने वाले ऑटो पर प्रतिबंध के ख़िलाफ़ ऑटो चालकों की हड़ताल
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    पटनाः डीजल-पेट्रोल से चलने वाले ऑटो पर प्रतिबंध के ख़िलाफ़ ऑटो चालकों की हड़ताल
    06 Apr 2022
    डीजल और पेट्रोल से चलने वाले ऑटो पर प्रतिबंध के बाद ऑटो चालकों ने दो दिनों की हड़ताल शुरु कर दी है। वे बिहार सरकार से फिलहाल प्रतिबंध हटाने की मांग कर रहे हैं।
  • medicine
    ऋचा चिंतन
    दवा के दामों में वृद्धि लोगों को बुरी तरह आहत करेगी – दवा मूल्य निर्धारण एवं उत्पादन नीति को पुनर्निर्देशित करने की आवश्यता है
    06 Apr 2022
    आवश्यक दवाओं के अधिकतम मूल्य में 10.8% की वृद्धि आम लोगों पर प्रतिकूल असर डालेगी। कार्यकर्ताओं ने इन बढ़ी हुई कीमतों को वापस लेने और सार्वजनिक क्षेत्र के दवा उद्योग को सुदृढ़ बनाने और एक तर्कसंगत मूल्य…
  • wildfire
    स्टुअर्ट ब्राउन
    आईपीसीसी: 2030 तक दुनिया को उत्सर्जन को कम करना होगा
    06 Apr 2022
    संयुक्त राष्ट्र की नवीनतम जलवायु रिपोर्ट कहती है कि यदि​ ​हम​​ विनाशकारी ग्लोबल वार्मिंग को टालना चाहते हैं, तो हमें स्थायी रूप से कम कार्बन का उत्सर्जन करने वाले ऊर्जा-विकल्पों की तरफ तेजी से बढ़ना…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License