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लखीमपुर खीरी में फिर दुष्कर्म के बाद हत्या, कितना सच है योगी सरकार का ‘न्यूनतम अपराध’ का दावा!
योगी सरकार भले ही तुलनात्मक आंकड़ों से अपराधियों के खिलाफ ‘ज़ीरो टॉलरेंस' का दावा कर रही हो, लेकिन महज़ 20 दिनों के भीतर खीरी में घटी ये तीसरी घटना प्रदेश में कानून व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
सोनिया यादव
04 Sep 2020
लखीमपुर खीरी में फिर दुष्कर्म के बाद हत्या

उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था एक बार फिर सुर्खियों में है। वजह लखीमपुर खीरी जिले में फिर एक मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या का मामला सामने आना है। खीरी में इससे पहले भी दो ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं। अब 20 दिनों के भीतर ये तीसरी वारदात है। योगी आदित्यनाथ सरकार भले ही राज्य में ‘न्यूनतम अपराध’ का दावा कर रही हो, लेकिन आए दिन अख़बारों के पन्ने प्रदेश में होने वाले अपराधों और उनकी जघन्यता की ख़बरों से पटे पड़े रहते हैं। विपक्षी नेताओं के हर दूसरे-तीसरे ट्वीट राज्य में कथित तौर पर बढ़ रहे अपराधों के संदर्भ में ही होते हैं।

क्या है पूरा मामला?

प्राप्त जानकारी के मुताबिक ये घटना लखीमपुर खीरी के सिंगाही इलाके के एक गांव की है। तीन साल की बच्ची बुधवार, 2 सितंबर को घर से लापता हुई थी और गुरुवार, 3 सितंबर को उसका शव गन्ने के खेत में क्षत-विक्षत हालत में मिला था। मीडिया में आई खबरों के मुताबिक मासूम के सिर पर चोट के निशान भी थे।

बच्ची के पिता ने अपनी शिकायत में गांव में रहने वाले लेखराम पर आरोप लगाया है। उनका आरोप है कि पुरानी दुश्मनी के चलते उनकी बेटी का अपहरण किया गया और उसकी हत्या कर दी गई।

इसे पढ़ें : सवाल दर सवाल : किस ओर जा रहा है उत्तर प्रदेश?

पुलिस का क्या कहना है?

एसपी सत्येंद्र कुमार सिंह ने मीडिया को बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बच्ची के साथ बलात्कार की पुष्टि हुई है। ऑटोप्सी में यौन उत्पीड़न की बात सामने आई है। इस मामले में आरोपी को पकड़ने के लिए पुलिस की चार टीम बनाई गई थीं। एनकाउंटर के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।

इससे पहले भी ज़िले हो चुकी हैं ऐसी वारदातें

मालूम हो कि 25 अगस्त को उत्तर प्रदेश का लखीमपुर खीरी जिला उस समय सुर्खियों में आया था जब घर से स्कॉलरशिप का फॉर्म भरने निकली 17 साल की लड़की की लाश गांव के बाहर एक सूखे तालाब के पास मिली थी। इस मामले में पहले पुलिस ने लड़की की धारदार हथियार से हत्या की बात कही थी, लेकिन बाद में आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बलात्कार की पुष्टि की बात भी सामने आई।

इससे पहले 16 अगस्त को एक 13 साल की दलित नाबालिग से गैंगरेप और हत्या की घटना सामने आई थी। इस वारदात में भी लड़की का शव गन्ने के एक खेत में मिला था।

बता दें कि महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों को लेकर एक मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने राज्य सरकार को नोटिस भी जारी किया था।

योगी सरकार के दावे

पिछले दिनों राज्य सरकार की ओर से जारी आँकड़ों की बात करें तो साल 2013 के मुक़ाबले साल 2020 में बलात्कार के मामलों में 25.94 फ़ीसदी और साल 2016 के मुकाबले 38.74 फ़ीसदी की कमी आई है।

दावे के मुताबिक़, अन्य प्रकार के अपराधों में भी काफ़ी कमी आई है। सरकार के मुताबिक, पॉक्सो एक्ट के मामलों में प्रभावी पैरवी की वजह से एक जनवरी 2019 से इस साल 30 जून तक 922 मुक़दमों में अभियुक्तों को सज़ा हुई है जिनमें से पांच को मृत्युदंड की सज़ा दी गई है।

सरकार के मुताबिक विभिन्न अपराध में शामिल अभियुक्तों के ख़िलाफ़ अन्य धाराओं के अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून यानी एनएसए के तहत भी कार्रवाई हुई है। लेकिन जिस तरह आपराधिक घटनाओं में तेज़ी दिख रही है, उसके आधार पर विपक्ष और जानकार दोनों ही आँकड़ों को तर्कसंगत नहीं मान रहे।

सीएम योगी के दावे की पोल खोलते एनसीआरबी के आँकड़े

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो यानी एनसीआरबी की इस साल जनवरी में आई सालाना रिपोर्ट कहती है कि महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध के मामले में उत्तर प्रदेश सबसे आगे है।

देश में महिलाओं के ख़िलाफ़ 2018 में कुल 378,277 मामले हुए और अकेले यूपी में 59,445 मामले दर्ज किए गए। यह आंकड़ा देश के कुल महिलाओं के साथ किए गए अपराध का लगभग 15.8% है।

इसके अलावा प्रदेश में कुल रेप के 43,22 केस हुए। यानी हर दिन 11 से 12 रेप केस दर्ज हुए। खास बात ये है कि ये उन अपराधों पर तैयार की गई रिपोर्ट है जो थानों में दर्ज होते हैं। इन रिपोर्ट से कई ऐसे केस रह जाते हैं जिनकी थाने में कभी शिकायत ही दर्ज नहीं हो सकी। एनसीआरबी देश के गृह मंत्रालय के अंतर्गत आता है।

महिलाओं की सुरक्षा को अपनी वरीयता बताने वाले सीएम योगी न्यूज़ चैनलों के इंटरव्यू देते समय सूबे में 'न्यूनतम अपराध' की बातें करते हैं और दूसरी ओर उन्हीं की सरकार विधानसभा में अलग आँकड़े पेश करती है।

बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, योगी सरकार ने समाजवादी पार्टी के एक विधायक नहीद हसन के सवाल के जवाब में बताया था कि 2016 के मुकाबले 2017 में हर एक सेगमेंट में महिलाओं के खिलाफ़ अपराध में बढ़त हुई है।

विधानसभा में एक सवाल के जवाब में संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि सरकार के गठन से लेकर 9 मई तक राज्य में कुल 729 हत्याएं, 803 बलात्कार, 60 डकैती, 799 लूट और 2682 अपहरण की घटनाएं हुई हैं।

सरकार और विपक्ष आमने-सामने

20 अगस्त को उत्तर प्रदेश के गृह विभाग ने पिछले नौ साल के तुलनात्मक आँकड़ों को पेश करते हुए दावा किया कि राज्य में अपराधों की संख्या में काफ़ी कमी आई है और इसकी वजह ये है कि सरकार ने अपराध और भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ 'ज़ीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाई है। हालांकि विपक्ष सरकार के इन दावों से इत्तेफाक नहीं रखता।

राज्य में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों को लेकर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी यूपी की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल को  पहले ही एक पत्र लिख चुकी हैं। पत्र के माध्यम से प्रियंका ने राज्यपाल से महिला होने के नाते महिलाओं के ख़िलाफ़ हो रहे अपराधों का संज्ञान लेने की अपील की थी।

इसके अलावा समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और बीएसपी प्रमुख मायावती भी राज्य सरकार को बढ़ती आपराधिक घटनाओं पर घेर चुकी हैं।

खीरी मामले में नेता- अभिनेताओं के ट्वीट

समाजवादी पार्टी ने लखीमपुर खीरी मामले में ट्वीट करते हुए लिखा, “BJP सरकार में बेटियों के लिए सबसे असुरक्षित प्रदेश बन चुके यूपी में बेटियों पर हो रहा निरंतर वार! अयोध्या में चलती बस में बेटी से गैंगरेप तो लखीमपुर में 3 साल की बच्ची से रेप के बाद हत्या, 20 दिन में तीसरी वारदात। दरिंदों को कठोरतम सजा दिला, बेटियों को न्याय दे सरकार।”

BJP सरकार में बेटियों के लिए सबसे असुरक्षित प्रदेश बन चुके यूपी में बेटियों पर हो रहा निरंतर वार!

अयोध्या में चलती बस में बेटी से गैंगरेप तो लखीमपुर में 3 साल की बच्ची से रेप के बाद हत्या, 20 दिन में तीसरी वारदात।

दरिंदों को कठोरतम सजा दिला, बेटियों को न्याय दे सरकार। pic.twitter.com/u0fCzFbntQ

— Samajwadi Party (@samajwadiparty) September 4, 2020

चंद्रशेखर आजाद रावण ने अपने एक ट्वीट में राज्य सरकार को घेरते हुए लिखा, “उत्तर प्रदेश में अपराध इस तरह हावी है कि अब नन्ही नन्ही बच्चियां भी सुरक्षित नहीं। लखीमपुर खीरी में 03 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म करके हत्या कर दी गई। मन बहुत ही व्यथित है। आवाज उठाइए ताकि परिवार को लड़ने की हिम्मत मिले। महीने में जिले में यह तीसरा रेप कांड है।”

उत्तर प्रदेश में अपराध इस तरह हावी है कि अब नन्ही नन्ही बच्चियां भी सुरक्षित नहीं। लखीमपुर खीरी में 03 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म करके हत्या कर दी गई।

मन बहुत ही व्यथित है। आवाज उठाइए ताकि परिवार को लड़ने की हिम्मत मिले। महीने में जिले में यह तीसरा रेप कांड है।

— Chandra Shekhar Aazad (@BhimArmyChief) September 4, 2020

वहीं यूपी कांग्रेस के अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने भी इस मामले में ट्वीट किया।

?लखीमपुर में 3 वर्ष की बच्ची का बलात्कार कर हत्या।
?अयोध्या में दिल्ली निर्भया जैसा कांड - बस में हुआ बलात्कार
?रायबरेली में भाई - बहन की अपहरण के बाद हत्या।

भाजपा ने प्रदेश की कानून व्यवस्था को घनघोर जंगलराज में बदल दिया है।
सीएम को झूठ बोलते शर्म भी नहीं आती।

— UP Congress (@INCUttarPradesh) September 4, 2020

उन्होंने लिखा, “लखीमपुर खीरी में बच्चियों के साथ रेप-हत्या की घटनाएं रुक नहीं रहीं। कल एक और बच्ची की हत्या हो गई, कौशांबी में एक बच्ची की हत्या, रेप की आशंका। इतने घटनाओं के बाद भी तथाकथित 'सख़्त मुख्यमंत्री' ने जिले के आलाधिकारियों की जिम्मेदारी तय नहीं की। दम तोड़ती व्यवस्था,लाचार मुख्यमंत्री।”

यूपी के खीरी जिले में 3 साल की बच्ची की रेप के बाद हत्या की वारदात पर बॉलीवुड भी सन्न रह गया है। अभिनेत्री तापसी पन्नू और रितेश देशमुख ने इस घटना पर दुख जताते हुए जल्द से जल्द इंसाफ की मांग की है।

अभिनेत्री तापसी पन्नू ने इस संबंध में एनडीटीवी की खबर को शेयर करते हुए ट्वीट किया, “सबसे नीचे गिरने की प्रतियोगिता अभी जारी है।”

उधर, अभिनेता रितेश देशमुख ने भी इस घटना पर अफसोस जताते हुए ट्विटर पर लिखा, "मेरा सिर शर्म से झुक गया। यह हमारा कर्तव्य है कि ऐसा समाज बनाएं, जहां बच्चे सुरक्षित हों। इस जघन्य अपराध के मुजरिम को सजा मिलनी ही चाहिए। ये बर्बर लोग सजा के हकदार हैं।”

गौरतलब है कि इस साल फ़रवरी में विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव देते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि इस देश में रामराज्य ही चाहिए, समाजवाद नहीं चाहिए। हमारी सरकार रामराज्य की अवधारणा को ज़मीन पर उतारने को प्रतिबद्ध है। हालांकि जानकारों का कहना है कि इस वक्त राज्य की कानून व्यवस्था ‘भगवान भरोसे’ ही नज़र आती है। सरकार और उसके आंकड़े कुछ भी कहें, लेकिन प्रदेश में अपराध की स्थिति किसी से छुपी नहीं है।

इसे भी पढ़ें : यूपी: क्या ‘रामराज’ में कानून व्यवस्था ‘भगवान भरोसे’ है?

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