NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
मुर्मू ने जम्मू-कश्मीर के पहले उपराज्यपाल के तौर पर शपथ ली
पूर्व नौकरशाह राधा कृष्ण माथुर ने गुरुवार को केंद्र शासित क्षेत्र लद्दाख के पहले उपराज्यपाल के तौर पर शपथ ली।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
31 Oct 2019
murmu
Image courtesy: Hindi News

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर राज्य के विभाजन के बाद गिरीश चन्द्र मुर्मू ने गुरुवार को नए केंद्रशासित क्षेत्र के रूप में अस्तित्व में आए जम्मू-कश्मीर के पहले उपराज्यपाल के तौर पर शपथ ली।जम्मू कश्मीर में लगा राष्ट्रपति शासन बृहस्पतिवार को हटा लिया गया।  

जम्मू कश्मीर और लद्दाख दो नए केन्द्र शासित क्षेत्र के रूप में आज यानी बृहस्पतिवार से अस्तित्व में आ गए हैं। जम्मू-कश्मीर की मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल ने श्रीनगर स्थित राजभवन में आयोजित एक सादे समारोह में मुर्मू को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।

मुर्मू अगले महीने 60 वर्ष के हो जाएंगे। गुजरात कैडर के, 1985 बैच के आईएएस अधिकारी मुर्मू की नियुक्ति का वारंट मुख्य सचिव बी वी आर सुब्रह्मण्यम ने पढ़ा।

भाजपा नेता जुगल किशोर और राज्यसभा सदस्य तथा पीडीपी नेता नजीर लावे समेत 250 से अधिक गणमान्य अतिथि समारोह में उपस्थित थे। ओडिशा के मूल निवासी मुर्मू प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ गुजरात में काम कर चुके हैं। मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब मुर्मू उनके अतिरिक्त प्रधान सचिव थे।

मुर्मू ने लोक सेवा में एमबीए किया है और वह राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर भी हैं। जम्मू-कश्मीर के अंतिम राज्यपाल सत्यपाल मलिक को उनके शेष कार्यकाल के लिए गोवा का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। मलिक पिछले साल अगस्त में जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल बने थे।

उल्लेखनीय है कि भारत सरकार ने पांच अगस्त को जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को खत्म कर दिया और राज्य को दो केंद्र शासित क्षेत्रों- जम्मू कश्मीर एवं लद्दाख में विभाजित कर दिया था।

आरके माथुर ने लद्दाख के उपराज्यपाल के तौर पर शपथ ली

पूर्व नौकरशाह राधा कृष्ण माथुर ने गुरुवार को केंद्र शासित क्षेत्र लद्दाख के पहले उपराज्यपाल के तौर पर शपथ ली। जम्मू कश्मीर के विभाजन के बाद लद्दाख अलग केंद्र शासित क्षेत्र बना है। माथुर अगले महीने 66 वर्ष के हो जाएंगे।

जम्मू कश्मीर उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल ने लेह के तिसूरू में सिंधु संस्कृति ऑडिटोरियम में एक समारोह में माथुर को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस समारोह में लेह और करगिल पर्वतीय विकास परिषद के अधिकारी, सेना और अर्द्धसैनिक बल, धार्मिक नेता और आम लोग शामिल हुए।

शपथ ग्रहण के बाद लद्दाख पुलिस ने माथुर को गार्ड ऑफ ऑनर दिया।  उन्होंने कहा कि सीमांत क्षेत्रों में विकास की कई गतिविधियों की आवश्यकता है।

एक आधिकारिक प्रवक्ता ने राज्यपाल के हवाले से कहा, ‘क्षेत्र में कई सरकारी कार्यक्रम पहले से चल रहे हैं, नए शासन के तहत आम लोगों और पर्वतीय विकास परिषदों से विचार विमर्श के बाद लद्दाख के लिए नई प्राथमिकताएं तय की जाएंगी।’

माथुर त्रिपुरा से 1977 बैच के आईएएस अधिकारी हैं।  उन्होंने कहा कि त्रिपुरा का मुख्य सचिव रहते हुए पिछड़े और सीमांत क्षेत्रों में काम करने का अनुभव और रक्षा सचिव के रूप में काम करने का अनुभव उनके काम आएगा।

उन्होंने आईआईटी से इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग में स्नातकोत्तर किया है। वह वर्ष 2015 में रक्षा सचिव के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। उसी वर्ष दिसंबर में उन्हें मुख्य सूचना आयुक्त बनाया गया। पिछले वर्ष 65 वर्ष की आयु होने के साथ ही नवंबर में उनका कार्यकाल भी पूरा हो गया।

शपथ ग्रहण से पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पिछले वर्ष दिसंबर माह से अविभाजित जम्मू कश्मीर में लगा राष्ट्रपति शासन हटा दिया था। लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेश के रूप में अस्तित्व में आने से एक दिन पहले बुधवार को केंद्र ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी उमंग नरूला को इस हिमालयी क्षेत्र के नव नियुक्त उप राज्यपाल का सलाहकार नियुक्त किया।

नरूला 1989 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। इसी के साथ ही, 1995 बैच के आईपीएस अधिकारी एस एस खंडारे को केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख का ‘पुलिस प्रमुख’ नियुक्त किया गया है। लगभग तीन लाख की आबादी वाले लद्दाख की सीमाएं पाकिस्तान और चीन से लगती हैं। इस लिहाज से यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है।

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ)

Jammu and Kashmir
BJP
Narendera Modi
PDP
Article 370
Girish Chandra Murmu
First Lieutenant Governor of Jammu and Kashmir

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

कश्मीर में हिंसा का नया दौर, शासकीय नीति की विफलता

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल


बाकी खबरें

  • punjab
    भाषा सिंह
    पंजाब चुनावः परदे के पीछे के खेल पर चर्चा
    19 Feb 2022
    पंजाब में जिस तरह से चुनावी लड़ाई फंसी है वह अपने-आप में कई ज़ाहिर और गुप्त समझौतों की आशंका को बलवती कर रही है। पंजाब विधानसभा चुनावों में इतने दांव चले जाएंगे, इसका अंदाजा—कॉरपोरेट मीडिया घरानों…
  • Biden and Boris
    जॉन पिलगर
    युद्ध के प्रचारक क्यों बनते रहे हैं पश्चिमी लोकतांत्रिक देश?
    19 Feb 2022
    हाल के हफ्तों और महीनों में युद्ध उन्माद का ज्वार जिस तरह से उठा है वह इसका सबसे ज्वलंत उदाहरण है
  • youth
    असद रिज़वी
    भाजपा से क्यों नाराज़ हैं छात्र-नौजवान? क्या चाहते हैं उत्तर प्रदेश के युवा
    19 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश के नौजवान संगठनों का कहना है कि भाजपा ने उनसे नौकरियों के वादे पर वोट लिया और सरकार बनने के बाद, उनको रोज़गार का सवाल करने पर लाठियों से मारा गया। 
  • Bahubali in UP politics
    विजय विनीत
    यूपी चुनाव: सियासी दलों के लिए क्यों ज़रूरी हो गए हैं बाहुबली और माफ़िया?
    19 Feb 2022
    चुनाव में माफ़िया और बाहुबलियों की अहमियत इसलिए ज्यादा होती है कि वो वोट देने और वोट न देने,  दोनों चीज़ों के लिए पैसा बंटवाते हैं। इनका सीधा सा फंडा होता है कि आप घर पर ही उनसे पैसे ले लीजिए और…
  • Lingering Colonial Legacies
    क्लेयर रॉथ
    साम्राज्यवादी विरासत अब भी मौजूद: त्वचा के अध्ययन का श्वेतवादी चरित्र बरकरार
    19 Feb 2022
    त्वचा रोग विज्ञान की किताबों में नस्लीय प्रतिनिधित्व की ऐतिहासिक कमी ना केवल श्वेत बहुल देशों में है, बल्कि यह पूरी दुनिया में मौजूद है
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License